UP Board class 11 Chemistry 12. कार्बनिक रसायन - कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
निम्नलिखित यौगिकों में प्रत्येक कार्बन की संकरण अवस्था बताइए:
(i) CH2=C=O : sp2, sp
(ii) CH3CH=CH2 : sp3, sp2, sp2
(iii) (CH3)2CO : sp3, sp3, sp2
(iv) CH2=CHCN : sp2, sp2, sp
(v) C6H6 : sp2
निम्नलिखित अणुओं में σ तथा π आबंध दर्शाइए:
(i) C6H6: 6 C–C σ बंध, 6 C–H σ बंध, 3 C=C π बंध
(ii) C6H12: 6 C–C σ बंध, 12 C–H σ बंध
(iii) CH2Cl2: 2 C–H σ बंध, 2 C–Cl σ बंध
(iv) CH2=C=CH2: 2 C–H σ बंध, 1 C–C σ बंध, 2 C=C π बंध
(v) HCONHCH3: 3 C–H σ बंध, 1 C–N σ बंध, 1 C=O π बंध, 1 N–C σ बंध
निम्न यौगिकों के आबंध रेखा सूत्र लिखिए:
(i) आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल
निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए:
(क) प्रोपाइलबेंजीन
(ख) 3-मेथिलपेंटेन नाइट्राइट
(ग) 2,5-डाइमेथिलहेप्टेन
(घ) 3-ब्रोमो-3-क्लोरोहेप्टेन
(ङ) 3-क्लोरोप्रोपेन-1-ऑल
(च) 2,2-डाइक्लोरोऐथेनॉल
निम्नलिखित यौगिकों में से कौन-सा नाम IUPAC पद्धति के अनुसार सही है?
(क) 2,2-डाइमेथिलपेंटेन
(ख) 2,4,7-ट्राइमेथिलऑक्टेन
(ग) 2-क्लोरो-4-मेथिलपेंटेन
(घ) ब्यूट-3-आइन-1-ऑल
निम्नलिखित दो सजातीय श्रेणियों में से प्रत्येक के प्रथम पाँच सजातों के संरचना-सूत्र लिखिए:
(क) H–COOH (कार्बोक्सिलिक अम्ल श्रेणी)
HCOOH, CH3COOH, CH3CH2COOH, CH3CH2CH2COOH, CH3CH2CH2CH2COOH
(ख) CH3COCH3 (कीटोन श्रेणी)
CH3COCH3, CH3COCH2CH3, CH3COCH2CH2CH3, CH3COCH(CH3)2, CH3COCH2CH2CH2CH3
(ग) H–CH=CH2 (ऐल्कीन श्रेणी)
H2C=CH2, CH3CH=CH2, CH3CH2CH=CH2, CH3CH2CH2CH=CH2, CH3CH2CH2CH2CH=CH2
निम्नलिखित के संघनित और आबंध रेखा-सूत्र लिखिए तथा उनमें यदि कोई क्रियात्मक समूह हो, उसे पहचानिए:
(क) 2,2,4-ट्राइमेथिलपेंटेन
संघनित: (CH3)3CCH2CH(CH3)2 – कोई विशेष क्रियात्मक समूह नहीं (ऐल्केन)
(ख) 2-हाइड्रॉक्सी-1,2,3-प्रोपेनट्राइकाबोक्सिलिक अम्ल (साइट्रिक अम्ल)
संघनित: HOOC–CH2C(OH)(COOH)CH2COOH – क्रियात्मक समूह: –COOH (कार्बोक्सिलिक), –OH (हाइड्रॉक्सिल)
(ग) हेक्सेनडाइऐल
संघनित: OHC(CH2)4CHO – क्रियात्मक समूह: –CHO (ऐल्डिहाइड)
निम्नलिखित यौगिकों में क्रियात्मक समूह पहचानिए:
(क) –CHO (ऐल्डिहाइड), –OH (हाइड्रॉक्सिल), –OCH3 (मिथोक्सि)
(ख) –NH2 (एमीन), –COOCH3 (एस्टर)
(ग) –NO2 (नाइट्रो), C=C (ऐल्किन)
निम्नलिखित में कौन अधिक स्थायी है तथा क्यों?
O2NCH2CH2O– और CH3CH2O–
उत्तर: O2NCH2CH2O– की तुलना में CH3CH2O– अधिक स्थाई है। O2N– समूह –I प्रभाव के कारण ऋणात्मक आवेश को अस्थिर करता है, जबकि CH3– समूह +I प्रभाव के कारण ऋणात्मक आवेश को स्थिर करता है।
π-निकाय से आबंधित होने पर ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉनदाता की तरह व्यवहार प्रदर्शित क्यों करते हैं? समझाइए।
उत्तर: +I प्रभाव के कारण ऐल्किल समूह इलेक्ट्रॉन-दाता होते हैं। यह प्रभाव π-इलेक्ट्रॉनों को कार्बन परमाणु की ओर धकेलता है, जिससे π-आबंध पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है।
निम्नलिखित यौगिकों की अनुनाद-संरचना लिखिए तथा इलेक्ट्रॉनों का विस्थापन जुड़े तीरों की सहायता से दर्शाइए:
(क) C6H5–CHO
इलेक्ट्रॉनस्नेही तथा नाभिकस्नेही क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
इलेक्ट्रॉनस्नेही (Electrophile): ये इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने वाले अभिकर्मक होते हैं। ये धनावेशित या उदासीन हो सकते हैं।
उदाहरण: H+, NO2+, BF3, AlCl3
नाभिकस्नेही (Nucleophile): ये इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने वाले अभिकर्मक होते हैं। ये ऋणावेशित या उदासीन हो सकते हैं।
उदाहरण: OH–, CN–, NH3, H2O
निम्नलिखित समीकरणों में मोटे अक्षरों में लिखे अभिकर्मकों को नाभिकस्नेही तथा इलेक्ट्रॉनस्नेही में वर्गीकृत कीजिए:
(क) CH3COOH + HO– → CH3COO– + H2O – HO– (नाभिकस्नेही)
(ख) CH3COCH3 + –CN → (CH3)2C(CN)(OH)– – –CN (नाभिकस्नेही)
(ग) C6H6 + CH3CO+ → C6H5COCH3 – CH3CO+ (इलेक्ट्रॉनस्नेही)
निम्नलिखित अभिक्रियाओं को वर्गीकृत कीजिए:
(क) CH3CH2Br + HS– → CH3CH2SH + Br– – नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन
(ख) (CH3)2C=CH2 + HCl → (CH3)2CCl–CH3 – इलेक्ट्रॉनस्नेही योग
(ग) CH3CH2Br + HO– → CH2=CH2 + H2O + Br– – विलोपन
(घ) (CH3)3C–CH2OH + HBr → (CH3)2CBrCH2CH3 + H2O – प्रतिस्थापन एवं पुनर्विन्यास
निम्नलिखित युग्मों में सदृश-संरचनाओं के मध्य कैसा संबंध है? क्या ये संरचनाएँ संरचनात्मक या ज्यामितीय समावयव अथवा अनुनाद संरचनाएँ हैं?
(क) संरचनात्मक समावयव
(ख) ज्यामितीय समावयव
(ग) अनुनाद संरचनाएँ
निम्नलिखित आबंध विदलनों के लिए इलेक्ट्रॉन विस्थापन को मुड़े तीरों द्वारा दर्शाइए तथा प्रत्येक विदलन को समांश अथवा विषमांश में वर्गीकृत कीजिए। साथ ही निर्मित सक्रिय मध्यवर्ती उत्पादों में मुक्त-मूलक, कार्बधनायन तथा कार्बकणायन पहचानिए:
(क) CH3O–OCH3 → CH3O• + •OCH3 – समांश विदलन, मुक्त मूलक
(ख) (CH3)3C–Br → (CH3)3C+ + Br– – विषमांश विदलन, कार्बधनायन
निम्नलिखित कार्बोक्सिलिक अम्लों की अम्लता का सही क्रम कौन-सा इलेक्ट्रॉन-विस्थापन वर्णित करता है? प्रेरणिक तथा इलेक्ट्रोमेरी प्रभावों की व्याख्या कीजिए:
(क) Cl3CCOOH > Cl2CHCOOH > ClCH2COOH
(ख) CH3CH2COOH > (CH3)2CHCOOH > (CH3)3CCOOH
व्याख्या: प्रेरणिक प्रभाव (-I) बढ़ने से अम्लता बढ़ती है। Cl का -I प्रभाव अधिक होता है। ऐल्किल समूह का +I प्रभाव अम्लता घटाता है।
प्रत्येक का एक उदाहरण देते हुए निम्नलिखित प्रक्रमों के सिद्धांतों का संक्षिप्त विवरण दीजिए:
(क) क्रिस्टलन: अशुद्ध ठोस को उपयुक्त विलायक में घोलकर गर्म करते हैं, फिर ठंडा करके शुद्ध क्रिस्टल प्राप्त करते हैं। उदाहरण: चीनी का शोधन।
(ख) आसवन: विभिन्न क्वथनांक वाले द्रवों को उनके क्वथनांक के अंतर के आधार पर पृथक करते हैं। उदाहरण: जल और एथेनॉल का पृथक्करण।
(ग) क्रोमेटोग्रैफी: अधिशोषण या वितरण के सिद्धांत पर आधारित तकनीक जिससे मिश्रण के घटकों को पृथक किया जाता है। उदाहरण: पेपर क्रोमेटोग्रैफी द्वारा पादप वर्णकों का पृथक्करण।
ऐसे दो यौगिकों, जिनकी विलेयताएँ विलायक S में भिन्न है, को पृथक् करने की विधि की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: प्रभाजी क्रिस्टलन विधि का उपयोग किया जाता है। मिश्रण को विलायक S में घोलकर गर्म करते हैं, फिर धीरे-धीरे ठंडा करते हैं। कम विलेयशील यौगिक पहले क्रिस्टल के रूप में निकल आता है, जिसे छानकर अलग कर लेते हैं। शेष विलयन से दूसरे यौगिक को क्रिस्टलित किया जा सकता है।
आसवन, निम्न दाब पर आसवन तथा भाप आसवन में क्या अंतर है? विवेचना कीजिए।
साधारण आसवन: सामान्य दाब पर, क्वथनांकों में पर्याप्त अंतर वाले द्रवों के लिए।
निम्न दाब पर आसवन: उच्च क्वथनांक वाले या ताप-अपघटनी पदार्थों के लिए, दाब कम करके क्वथनांक घटाया जाता है।
भाप आसवन: जल-अवाष्पशील परंतु भाप-वाष्पशील पदार्थों के लिए, जो जल के साथ मिश्रित होकर कम ताप पर वाष्पित हो जाते हैं।
लैसें-परीक्षण का रसायन-सिद्धांत समझाइए।
उत्तर: कार्बनिक यौगिक को सोडियम धातु के साथ गर्म करके संगलित किया जाता है। इससे नाइट्रोजन, सल्फर, हैलोजन आदि तत्व सोडियम के साथ क्रिया करके आयनिक यौगिक (जैसे NaCN, Na2S, NaX) बनाते हैं। इन आयनों का सामान्य अकार्बनिक परीक्षणों द्वारा पता लगाया जाता है।
किसी कार्बनिक यौगिक में नाइट्रोजन के आकलन की (i) ड्यूमा विधि तथा (ii) कैल्डॉल विधि के सिद्धांत की रूप-रेखा प्रस्तुत कीजिए।
(i) ड्यूमा विधि: यौगिक को CuO के साथ CO2 वातावरण में गर्म करने पर नाइट्रोजन गैस मुक्त होती है, जिसका आयतन मापकर प्रतिशतता ज्ञात की जाती है।
(ii) कैल्डॉल विधि: यौगिक को सांद्र H2SO4 के साथ गर्म करके नाइट्रोजन को (NH4)2SO4 में बदला जाता है। फिर NaOH के साथ गर्म कर NH3 गैस मुक्त की जाती है, जिसे ज्ञात मात्रा के अम्ल में अवशोषित करके अनुमापन द्वारा प्रतिशतता ज्ञात की जाती है।
किसी यौगिक में हैलोजन, सल्फर तथा फॉस्फोरस के आकलन के सिद्धांत की विवेचना कीजिए।
हैलोजन (कैरिअस विधि): यौगिक को सधूम HNO3 व AgNO3 की उपस्थिति में गर्म करने पर हैलोजन, AgX के रूप में अवक्षेपित होता है।
सल्फर (कैरिअस विधि): यौगिक को सधूम HNO3 के साथ गर्म करने पर सल्फर, H2SO4 में ऑक्सीकृत होता है, जिसे BaCl2 से अवक्षेपित कर BaSO4 के रूप में तोला जाता है।
फॉस्फोरस: यौगिक को सधूम HNO3 के साथ गर्म करने पर फॉस्फोरस, H3PO4 में बदलता है, जिसे अमोनियम मॉलिब्डेट के साथ अवक्षेपित कर (NH4)3PO4.12MoO3 के रूप में तोला जाता है।
पेपर क्रोमेटोग्रैफी के सिद्धांत को समझाइए।
उत्तर: यह अधिशोषण वितरण पर आधारित तकनीक है। एक विशेष कागज (स्थिर प्रावस्था) पर मिश्रण का बिंदु लगाकर उसे उपयुक्त विलायक (गतिशील प्रावस्था) में खड़ा करते हैं। विलायक केशिकत्व द्वारा ऊपर चढ़ता है और मिश्रण के घटक अलग-अलग दूरी तय करते हैं, क्योंकि उनके अधिशोषण/वितरण गुणांक भिन्न होते हैं।
सोडियम संगलन निष्कर्ष में हैलोजन के परीक्षण के लिए सिल्वर नाइट्रेट मिलाने से पूर्व नाइट्रिक अम्ल क्यों मिलाया जाता है?
उत्तर: नाइट्रिक अम्ल मिलाने से संगलन निष्कर्ष में उपस्थित सायनाइड (CN–) और सल्फाइड (S2–) आयन HCN और H2S गैसों के रूप में निकल जाते हैं। यदि ऐसा न किया जाए, तो ये आयन AgNO3 के साथ क्रिया करके AgCN और Ag2S के अवक्षेप दे सकते हैं, जो हैलोजन के परीक्षण में बाधा डालते हैं।
नाइट्रोजन, सल्फर तथा फॉस्फोरस के परीक्षण के लिए सोडियम के साथ कार्बनिक यौगिक का संगलन क्यों किया जाता है?
उत्तर: कार्बनिक यौगिक में ये तत्व सहसंयोजक बंधों में बंधे होते हैं। सोडियम के साथ संगलन करने पर ये तत्व सोडियम के साथ क्रिया करके आय
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