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30°C तथा 1 bar दाब पर वायु के 500 mL आयतन को 200 mL तक संपीड़ित करने के लिए कितने न्यूनतम दाब की आवश्यकता होगी?
हल:
दिया है: P1 = 1 bar, V1 = 500 mL, V2 = 200 mL, P2 = ?
ताप स्थिर (30°C) है, अतः बॉयल के नियम के अनुसार:
P1V1 = P2V2
1 × 500 = P2 × 200
P2 = 500 / 200 = 2.5 bar
उत्तर: अभीष्ट न्यूनतम दाब 2.5 bar होगा।
35°C ताप तथा 1.2 bar दाब पर 120 mL धारिता वाले पात्र में गैस की निश्चित मात्रा भरी है। यदि 35°C पर गैस को 180 mL धारिता वाले फ्लास्क में स्थानांतरित किया जाता है, तो गैस का दाब क्या होगा?
हल:
दिया है: P1 = 1.2 bar, V1 = 120 mL, V2 = 180 mL, P2 = ?
ताप स्थिर (35°C) है, अतः बॉयल के नियम के अनुसार:
P1V1 = P2V2
1.2 × 120 = P2 × 180
P2 = (1.2 × 120) / 180 = 144 / 180 = 0.8 bar
उत्तर: गैस का दाब 0.8 bar होगा।
अवस्था समीकरण का उपयोग करते हुए स्पष्ट कीजिए कि दिए गए ताप पर गैस का घनत्व गैस के दाब के समानुपाती होता है।
हल:
आदर्श गैस समीकरण से: PV = nRT
हम जानते हैं, मोलों की संख्या (n) = गैस का द्रव्यमान (w) / मोलर द्रव्यमान (M)
अतः, PV = (w/M) RT
इससे, P = (w / VM) RT
चूँकि घनत्व (d) = w/V, इसलिए P = (d / M) RT
या, d = (PM) / (RT)
दिए गए ताप (T) और गैस (स्थिर M) के लिए, d ∝ P
निष्कर्ष: अतः, स्थिर ताप पर किसी गैस का घनत्व उसके दाब के समानुपाती होता है।
0°C पर तथा 2 bar दाब पर किसी गैस के ऑक्साइड का घनत्व 5 bar दाब पर डाइनाइट्रोजन के घनत्व के समान है, तो ऑक्साइड का अणुभार क्या है?
हल:
हम जानते हैं: d = PM/RT
नाइट्रोजन (N2) के लिए: M = 28 g/mol, P = 5 bar, T = 273 K (0°C)
गैसीय ऑक्साइड के लिए: M = ? (माना x), P = 2 bar, T = 273 K
चूँकि दोनों का घनत्व समान है, इसलिए:
(5 × 28) / (R × 273) = (2 × x) / (R × 273)
R और 273 कट जाते हैं: 5 × 28 = 2 × x
x = (5 × 28) / 2 = 70 g/mol
उत्तर: ऑक्साइड का अणुभार 70 g/mol है।
27°C पर एक ग्राम आदर्श गैस A का दाब 2 bar है। जब समान ताप एवं दाब पर इसमें दो ग्राम आदर्श गैस B मिलाई जाती है, तो दाब 3 bar हो जाता है। इन गैसों के अणुभार में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
हल:
माना गैस A का मोलर द्रव्यमान = MA, गैस B का मोलर द्रव्यमान = MB
गैस A के 1g के लिए: मोल (nA) = 1/MA
गैस B के 2g के लिए: मोल (nB) = 2/MB
मिश्रण से पहले केवल A है: PAV = (1/MA)RT ...(1) (जहाँ PA = 2 bar)
मिश्रण के बाद: Pमिश्रणV = (1/MA + 2/MB)RT ...(2) (जहाँ Pमिश्रण = 3 bar)
समीकरण (2) को (1) से भाग देने पर:
3/2 = [1/MA + 2/MB] / [1/MA]
3/2 = 1 + (2MA/MB)
3/2 - 1 = 2MA/MB
1/2 = 2MA/MB
MB = 4MA
उत्तर: गैस B का अणुभार, गैस A के अणुभार का चार गुना है (MB = 4MA).
नाली साफ करने वाले ड्रेनेक्स में सूक्ष्म मात्रा में ऐलुमीनियम होता है। यह कास्टिक सोडा से क्रिया पर डाइहाइड्रोजन गैस देता है। यदि 1 bar तथा 20°C ताप पर 0.15 g ऐलुमीनियम अभिक्रिया करेगा, तो निर्गमित डाइहाइड्रोजन का आयतन क्या होगा?
हल:
अभिक्रिया: 2Al + 2NaOH + 2H2O → 2NaAlO2 + 3H2
2 × 27 = 54g Al देता है → 3 × 22.4 L H2 (STP पर)
0.15g Al देगा → (3 × 22.4 × 0.15) / 54 L = 0.1867 L H2 (STP पर)
अब, STP (P1=1 atm, T1=273 K, V1=0.1867 L) से दी गई परिस्थितियों (P2=1 bar ≈ 0.987 atm, T2=293 K) में लाने पर:
(P1V1)/T1 = (P2V2)/T2
(1 × 0.1867)/273 = (0.987 × V2)/293
V2 = (0.1867 × 293) / (273 × 0.987) ≈ 0.203 L = 203 mL
उत्तर: निर्गमित हाइड्रोजन का आयतन लगभग 203 mL होगा।
यदि 27°C पर 9 dm³ धारिता वाले फ्लास्क में 3.2 g मेथेन तथा 4.4 g कार्बन डाइऑक्साइड का मिश्रण हो, तो इसका दाब क्या होगा?
हल:
CH4 का मोलर द्रव्यमान = 16 g/mol, CO2 का मोलर द्रव्यमान = 44 g/mol
CH4 के मोल (n1) = 3.2/16 = 0.2 mol
CO2 के मोल (n2) = 4.4/44 = 0.1 mol
कुल मोल (n) = 0.2 + 0.1 = 0.3 mol
V = 9 dm³ = 9 × 10-3 m³, T = 300 K, R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹
आदर्श गैस समीकरण से: PV = nRT
P = (nRT) / V = (0.3 × 8.314 × 300) / (9 × 10-3) Pa
P = (748.26) / (0.009) Pa = 83140 Pa = 8.314 × 10⁴ Pa
उत्तर: मिश्रण का कुल दाब 8.314 × 10⁴ Pa होगा।
27°C ताप पर जब 1 L के फ्लास्क में 0.7 bar पर 2.0 L डाइऑक्सीजन तथा 0.8 bar पर 0.5 L डाइहाइड्रोजन को भरा जाता है, तो गैसीय मिश्रण का दाब क्या होगा?
हल:
डाल्टन के आंशिक दाब के नियम का प्रयोग करेंगे। पहले प्रत्येक गैस का 1L फ्लास्क में आंशिक दाब ज्ञात करते हैं।
हाइड्रोजन (H2) के लिए: P1=0.8 bar, V1=0.5L, V2=1L, P2=?
बॉयल के नियम से: P1V1 = P2V2
0.8 × 0.5 = P2 × 1 => PH2 = 0.4 bar
ऑक्सीजन (O2) के लिए: P1=0.7 bar, V1=2.0L, V2=1L, P2=?
0.7 × 2.0 = P2 × 1 => PO2 = 1.4 bar
मिश्रण का कुल दाब (डाल्टन का नियम): Pकुल = PH2 + PO2
Pकुल = 0.4 + 1.4 = 1.8 bar
उत्तर: गैसीय मिश्रण का दाब 1.8 bar होगा।
यदि 27°C ताप तथा 2 bar दाब पर एक गैस का घनत्व 5.46 g/dm³ है, तो STP पर इसका घनत्व क्या होगा?
हल:
हम जानते हैं: d = PM/RT. चूँकि गैस समान है, M स्थिर है।
अतः, d ∝ P/T
दशा 1: T1 = 300 K, P1 = 2 bar, d1 = 5.46 g/dm³
दशा 2 (STP): T2 = 273 K, P2 = 1 bar, d2 = ?
(d1 / d2) = (P1/P2) × (T2/T1)
5.46 / d2 = (2/1) × (273/300)
5.46 / d2 = 2 × 0.91 = 1.82
d2 = 5.46 / 1.82 = 3 g/dm³
उत्तर: STP पर गैस का घनत्व 3 g/dm³ होगा।
यदि 546°C तथा 0.1 bar दाब पर 34.05 mL फॉस्फोरस वाष्प का भार 0.0625 g है, तो फॉस्फोरस का मोलर द्रव्यमान क्या होगा?
हल:
आदर्श गैस समीकरण: PV = nRT = (w/M)RT
P = 0.1 bar, V = 0.03405 L, w = 0.0625 g, R = 0.0831 bar L K⁻¹ mol⁻¹, T = 819 K (546+273)
M = (wRT) / (PV)
M = (0.0625 × 0.0831 × 819) / (0.1 × 0.03405)
M = (4.254) / (0.003405) ≈ 125 g/mol
उत्तर: फॉस्फोरस का मोलर द्रव्यमान 125 g/mol है। यह फॉस्फोरस के P4 अणु (परमाणु भार 31) के अनुरूप है।
एक विद्यार्थी 27°C पर गोल पेंदे के फ्लास्क में अभिक्रिया-मिश्रण डालना भूल गया तथा उस फ्लास्क को ज्वाला पर रख दिया। कुछ समय पश्चात् उसे अपनी भूल का अहसास हुआ। उसने उत्तापमापी की सहायता से फ्लास्क का ताप 477°C पाया। आप बताइए कि वायु का कितना भाग फ्लास्क से बाहर निकला।
हल:
माना फ्लास्क का आयतन V है।
प्रारंभिक अवस्था: T1 = 300 K (27°C), आयतन = V, माना गैस की मात्रा n1
अंतिम अवस्था: T2 = 750 K (477°C), आयतन = V (फ्लास्क समान), माना गैस की मात्रा n2
दाब स्थिर मानते हुए (फ्लास्क खुला हो सकता है), चार्ल्स के नियम के सिद्धांत से:
V ∝ T (n स्थिर पर), लेकिन यहाँ n बदल रहा है। आयतन स्थिर है, अतः n ∝ 1/T (P स्थिर पर)।
n2/n1 = T1/T2 = 300/750 = 2/5
यानी अंत में फ्लास्क में गैस की मात्रा प्रारंभिक मात्रा का 2/5 भाग रह गई।
बाहर निकला भाग = 1 - (2/5) = 3/5
उत्तर: वायु का 3/5 भाग फ्लास्क से बाहर निकल गया।
3.32 bar पर 5 dm³ आयतन घेरने वाली 4.0 mol गैस के ताप की गणना कीजिए। (R = 0.083 bar dm³ K⁻¹ mol⁻¹)
हल:
PV = nRT
T = PV / (nR)
T = (3.32 bar × 5 dm³) / (4.0 mol × 0.083 bar dm³ K⁻¹ mol⁻¹)
T = 16.6 / 0.332 = 50 K
उत्तर: गैस का ताप 50 K है।
1.4 g डाइनाइट्रोजन गैस में उपस्थित कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
हल:
N2 का मोलर द्रव्यमान = 28 g/mol
1.4 g N2 में मोल = 1.4/28 = 0.05 mol
1 अणु N2 में इलेक्ट्रॉन = 7 + 7 = 14 इलेक्ट्रॉन
1 mol N2 में इलेक्ट्रॉन = 14 × 6.022 × 10²³
0.05 mol N2 में इलेक्ट्रॉन = 0.05 × 14 × 6.022 × 10²³
= 0.7 × 6.022 × 10²³ = 4.2154 × 10²³ इलेक्ट्रॉन
उत्तर: कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या लगभग 4.215 × 10²³ है।
यदि एक सेकण्ड में 10¹⁰ गेहूँ के दाने वितरित किए जाएँ, तो आवोगाद्रो संख्या के बराबर दाने वितरित करने में कितना समय लगेगा?
हल:
आवोगाद्रो संख्या NA = 6.022 × 10²³
1 सेकंड में वितरित दाने = 10¹⁰
कुल समय = (6.022 × 10²³) / (10¹⁰) सेकंड
= 6.022 × 10¹³ सेकंड
वर्षों में = (6.022 × 10¹³) / (365 × 24 × 60 × 60)
= (6.022 × 10¹³) / (3.1536 × 10⁷) ≈ 1.91 × 10⁶ वर्ष
उत्तर: लगभग 1.9 मिलियन वर्ष लगेंगे।
27°C ताप पर 1 dm³ आयतन वाले फ्लास्क में 8g डाइऑक्सीजन तथा 4g डाइहाइड्रोजन के मिश्रण का कुल दाब कितना होगा?
हल:
O2 के मोल = 8/32 = 0.25 mol
H2 के मोल = 4/2 = 2 mol
कुल मोल (n) = 2.25 mol
V = 1 dm³ = 1 L, T = 300 K, R = 0.083 bar L K⁻¹ mol⁻¹ (मान लेते हैं)
PV = nRT
P = (2.25 × 0.083 × 300) / 1 = 56.025 bar
उत्तर: मिश्रण का कुल दाब लगभग 56.03 bar होगा।
गुब्बारे के भार तथा विस्थापित वायु के भार के अन्तर को पेलोड कहते हैं। यदि 27°C पर 10 m त्रिज्या वाले गुब्बारे में 1.66 bar पर 100 kg हीलियम भरी जाए, तो पेलोड की गणना कीजिए। (वायु का घनत्व = 1.2 kg m⁻³, R = 0.083 bar dm³ K⁻¹ mol⁻¹)
हल:
चरण 1: गुब्बारे का आयतन
त्रिज्या r = 10 m
आयतन V = (4/3)πr³ = (4/3) × 3.14 × (10)³ ≈ 4186.67 m³
चरण 2: विस्थापित वायु का भार
वायु का भार = आयतन × घनत्व = 4186.67 × 1.2 ≈ 5024 kg
चरण 3: हीलियम का भार (गुब्बारे का कुल भार)
हीलियम का द्रव्यमान = 100 kg (दिया है)
हीलियम का मोलर द्रव्यमान = 4 g/mol = 0.004 kg/mol
हीलियम के मोल n = (100 kg) / (0.004 kg/mol) = 25000 mol
गुब्बारे का कुल भार = हीलियम का भार + गुब्बारे के खोल आदि का भार। चूँकि खोल का भार नहीं दिया है, हम मानते हैं कि 100 kg हीलियम का भार ही गुब्बारे का कुल भार है।
चरण 4: पेलोड
पेलोड = विस्थापित वायु का भार - गुब्बारे का कुल भार
पेलोड = 5024 kg - 100 kg = 4924 kg
उत्तर: पेलोड लगभग 4924 kg है।
31.1°C तथा 1 bar दाब पर 8.8 g CO₂ द्वारा घेरे गए आयतन की गणना कीजिए। (R = 0.083 bar L K⁻¹ mol⁻¹)
हल:
CO₂ का मोलर द्रव्यमान = 44 g/mol
मोल n = 8.8/44 = 0.2 mol
T = 304.1 K (31.1 + 273), P = 1 bar
PV = nRT
V = nRT / P = (0.2 × 0.083 × 304.1) / 1
V = (0.2 × 25.2403) ≈ 5.048 L
उत्तर: CO₂ द्वारा घेरा गया आयतन लगभग 5.05 L है।
समान दाब पर किसी गैस के 2.9 g द्रव्यमान का 95°C तथा 0.184 g डाइहाइड्रोजन का 17°C पर आयतन समान है। बताइए कि गैस का मोलर द्रव्यमान क्या होगा?
हल:
माना अज्ञात गैस का मोलर द्रव्यमान = M g/mol
दोनों स्थितियों में दाब (P) और आयतन (V) समान हैं।
अज्ञात गैस के लिए: PV = (2.9/M) × R × T₁ (जहाँ T₁ = 368 K)
हाइड्रोजन के लिए: PV = (0.184/2) × R × T₂ (जहाँ T₂ = 290 K)
चूँकि बायाँ पक्ष समान है, दायाँ पक्ष भी समान होगा:
(2.9/M) × R × 368 = (0.184/2) × R × 290
R कट जाता है: (2.9 × 368) / M = (0.092) × 290
1067.2 / M = 26.68
M = 1067.2 / 26.68 ≈ 40 g/mol
उत्तर: गैस का मोलर द्रव्यमान 40 g/mol है। (यह आर्गन गैस हो सकती है)।
एक 1 bar दाब का डाइहाइड्रोजन तथा डाइऑक्सीजन के मिश्रण में 20% डाइहाइड्रोजन (भार से) रखा जाता है, तो डाइहाइड्रोजन का आंशिक दाब क्या होगा?
हल:
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