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UP Board class 11 Chemistry (8. अपचयोपचय अभिक्रियाएँ) solution PDF

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UP Board class 11 Chemistry (8. अपचयोपचय अभिक्रियाएँ) solution

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अध्याय 8: अपचयोपचय अभिक्रियाएँ (Redox Reactions)

प्रश्न 8.1: निम्नलिखित स्पीशीज में प्रत्येक रेखांकित तत्त्व की ऑक्सीकरण संख्या का निर्धारण कीजिए---

(क) NaH2PO4 (ख) NaHSO4 (ग) H4P2O7 (घ) K2MnO4 (ङ) CaO2 (च) NaBH4 (छ) H2S2O7 (ज) KAl(SO4)2.12H2O

उत्तर:

(क) NaH2PO4 में P की ऑक्सीकरण संख्या = +5

(ख) NaHSO4 में S की ऑक्सीकरण संख्या = +6

(ग) H4P2O7 में P की ऑक्सीकरण संख्या = +5

(घ) K2MnO4 में Mn की ऑक्सीकरण संख्या = +6

(ङ) CaO2 में O की ऑक्सीकरण संख्या = -1

(च) NaBH4 में B की ऑक्सीकरण संख्या = +3

(छ) H2S2O7 में S की ऑक्सीकरण संख्या = +6

(ज) KAl(SO4)2.12H2O में S की ऑक्सीकरण संख्या = +6

प्रश्न 8.2: निम्न यौगिकों के रेखांकित तत्त्वों की ऑक्सीकरण संख्या क्या है तथा इन परिणामों को आप कैसे प्राप्त करते हैं?

(क) KI3 (ख) H2S4O6 (ग) Fe3O4 (घ) CH3CH2OH (ङ) CH3COOH

उत्तर:

(क) KI3 में I की औसत ऑक्सीकरण संख्या = -1/3 (K+ और I3- आयन के रूप में)।
(ख) H2S4O6 में S की ऑक्सीकरण संख्या = +2.5 (दो S पर +5 और दो S पर 0)।
(ग) Fe3O4 में Fe की औसत ऑक्सीकरण संख्या = +8/3 (FeO.Fe2O3 के रूप में)।
(घ) CH3CH2OH में C की औसत ऑक्सीकरण संख्या = -2 (CH3 समूह में -3, CH2 समूह में -1)।
(ङ) CH3COOH में कार्बाइल C की ऑक्सीकरण संख्या = +3 और मिथाइल C की = -3

प्रश्न 8.3: निम्नलिखित अभिक्रियाओं का अपचयोपचयन अभिक्रियाओं के रूप में औचित्य स्थापित करने का प्रयास करें--

(क) CuO(s) + H2(g) → Cu(s) + H2O(g)
(ख) Fe2O3(s) + 3CO(g) → 2Fe(s) + 3CO2(g)
(ग) 4BCl3(g) + 3LiAlH4(s) → 2B2H6(g) + 3LiCl(s) + 3AlCl3(s)
(घ) 2K(s) + F2(g) → 2K+F-(s)
(ङ) 4NH3(g) + 5O2(g) → 4NO(g) + 6H2O(g)

उत्तर:
सभी अभिक्रियाएँ अपचयोपचय (रेडॉक्स) अभिक्रियाएँ हैं क्योंकि इनमें ऑक्सीकरण संख्या में परिवर्तन होता है।
(क) Cu (+2 से 0) अपचयित, H (0 से +1) ऑक्सीकृत।
(ख) Fe (+3 से 0) अपचयित, C (+2 से +4) ऑक्सीकृत।
(ग) B (+3 से +3 in B2H6? वास्तव में H का ऑक्सीकरण संख्या परिवर्तन)।
(घ) K (0 से +1) ऑक्सीकृत, F (0 से -1) अपचयित।
(ङ) N (-3 से +2) ऑक्सीकृत, O (0 से -2) अपचयित।

प्रश्न 8.4: फ्लुओरीन बर्फ से अभिक्रिया करके यह परिवर्तन लाती है- H2O(s) + F2(g) → HF(g) + HOF(g) इस अभिक्रिया का अपचयोपचय औचित्य स्थापित कीजिए।

उत्तर:
यह एक अपचयोपचय अभिक्रिया है।
F2 (ऑक्सीकरण संख्या 0) का एक परमाणु HF में (-1) अपचयित होता है और दूसरा HOF में (+1) ऑक्सीकृत होता है। जल (H2O) में ऑक्सीकरण संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता। यह फ्लोरीन का असमानुपातन (Disproportionation) है।

प्रश्न 8.5: H2SO5, Cr2O72- तथा HNO3 में सल्फर, क्रोमियम तथा नाइट्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या की गणना कीजिए। साथ ही इन यौगिकों की संरचना बताइए तथा हेत्वाभास (Paradox) का स्पष्टीकरण दीजिए।

उत्तर:
H2SO5 (परॉक्सो मोनोसल्फ्यूरिक अम्ल): संरचना H-O-O-S(O)2-O-H। दो O परमाणु परॉक्साइड (-1) बंध में हैं। S की ऑक्सीकरण संख्या +6 है, परॉक्साइड O के कारण यह +8 प्रतीत होती है।
Cr2O72- (डाइक्रोमेट आयन): Cr की ऑक्सीकरण संख्या +6 है।
HNO3 (नाइट्रिक अम्ल): N की ऑक्सीकरण संख्या +5 है।
हेत्वाभास: H2SO5 में S की ऑक्सीकरण संख्या की गणना करते समय, यदि सभी O परमाणुओं को -2 मान लिया जाए तो S पर +8 आता है, जो असंभव है। यह हेत्वाभास परॉक्साइड बंध के कारण है, जहाँ O की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है।

प्रश्न 8.6: निम्नलिखित यौगिकों के सूत्र लिखिए--

(क) मरक्यूरी (I) क्लोराइड
(ख) निकल (II) सल्फेट
(ग) टिन (IV) ऑक्साइड
(घ) थैलियम (I) सल्फेट
(ङ) आयरन (III) सल्फेट
(च) क्रोमियम (III) ऑक्साइड

उत्तर:
(क) Hg2Cl2
(ख) NiSO4
(ग) SnO2
(घ) Tl2SO4
(ङ) Fe2(SO4)3
(च) Cr2O3

प्रश्न 8.7: उन पदार्थों की सूची तैयार कीजिए, जिनमें कार्बन -4 से +4 तक की तथा नाइट्रोजन -3 से +5 तक की ऑक्सीकरण अवस्था होती है।

उत्तर:

कार्बन यौगिक
पदार्थसूत्रऑक्सीकरण संख्या (C)
मेथेनCH4-4
क्लोरोफॉर्मCHCl3+2
कार्बन डाइऑक्साइडCO2+4

नाइट्रोजन यौगिक
पदार्थसूत्रऑक्सीकरण संख्या (N)
अमोनियाNH3-3
नाइट्रोजनN20
नाइट्रिक अम्लHNO3+5

प्रश्न 8.8: अपनी अभिक्रियाओं में सल्फर डाइऑक्साइड तथा हाइड्रोजन परॉक्साइड ऑक्सीकारक तथा अपचायक-दोनों ही रूपों में क्रिया करते हैं, जबकि ओजोन तथा नाइट्रिक अम्ल केवल ऑक्सीकारक के रूप में ही। क्यों?

उत्तर:
SO2 में S की ऑक्सीकरण संख्या +4 है, जो बढ़कर +6 (ऑक्सीकरण) या घटकर 0 (अपचयन) हो सकती है। H2O2 में O की ऑक्सीकरण संख्या -1 है, जो घटकर -2 (ऑक्सीकरण) या बढ़कर 0 (अपचयन) हो सकती है। इसलिए ये दोनों द्विकर्मी (Ambivalent) हैं।
O3 में O की ऑक्सीकरण संख्या 0 है, जो केवल घट सकती है (-2 बनने के लिए)। HNO3 में N की ऑक्सीकरण संख्या +5 है, जो अधिकतम है और केवल घट सकती है। इसलिए ये दोनों केवल ऑक्सीकारक हैं।

प्रश्न 8.9: इन अभिक्रियाओं को देखिए---
(क) 6CO2(g) + 6H2O(l) → C6H12O6(aq) + 6O2(g)
(ख) O3(g) + H2O2(l) → H2O(l) + 2O2(g)
बताइए कि इन्हें निम्नलिखित ढंग से लिखना ज्यादा उचित क्यों है?
(क) 6CO2(g) + 12H2O(l) → C6H12O6(aq) + 6H2O(l) + 6O2(g)
(ख) O3(g) + H2O2(l) → H2O(l) + O2(g) + O2(g)

उत्तर:
(क) प्रकाश संश्लेषण की यह अभिक्रिया एक जटिल रेडॉक्स प्रक्रिया है। संशोधित समीकरण यह दर्शाता है कि उत्पादित O2 का स्रोत H2O के अणु हैं, न कि CO2। 12 H2O अणुओं में से 6 का ऑक्सीकरण होकर O2 बनता है और शेष 6 उत्पाद के रूप में बच जाते हैं।
(ख) संशोधित समीकरण यह स्पष्ट करता है कि O2 के दो अणु अलग-अलग स्रोतों से आते हैं: एक O3 के अपचयन से और दूसरा H2O2 के ऑक्सीकरण से। यह अभिक्रिया की प्रकृति को बेहतर दर्शाता है।

प्रश्न 8.10: OF2 एक अस्थिर यौगिक है। यदि यह बन जाए, तो यह यौगिक एक अति शक्तिशाली ऑक्सीकारक की भाँति कार्य करता है, क्यों?

उत्तर:
OF2 (ऑक्सीजन डाइफ्लोराइड) में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या +2 है। चूँकि ऑक्सीजन सामान्यतः ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था (-2) दर्शाती है, इसलिए +2 अवस्था में यह बहुत अस्थिर और प्रबल ऑक्सीकारक है। यह आसानी से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके स्थिर -2 अवस्था में आना चाहती है।

प्रश्न 8.11: जब भी एक ऑक्सीकारक तथा अपचायक के बीच अभिक्रिया सम्पन्न की जाती है, तब अपचायक के आधिक्य में निम्नतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक तथा ऑक्सीकारक के आधिक्य में उच्चतर ऑक्सीकरण अवस्था का यौगिक बनता है। इस वक्तव्य का औचित्य तीन उदाहरण देकर दीजिए।

उत्तर:
1. फेरस क्लोराइड (FeCl2) और क्लोरीन (Cl2): Cl2 (ऑक्सीकारक) के आधिक्य में FeCl2 (Fe की अवस्था +2) पूर्णतः FeCl3 (Fe की अवस्था +3) में ऑक्सीकृत हो जाता है।
2. सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S): H2S (अपचायक) के आधिक्य में SO2 (S की अवस्था +4) का पूर्ण अपचयन होकर S (अवस्था 0) बनता है।
3. पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO4) और फेरस सल्फेट (FeSO4): अम्लीय माध्यम में FeSO4 (अपचायक) के आधिक्य में KMnO4 का Mn (+7) पूर्णतः Mn2+ (+2) में अपचयित हो जाता है।

प्रश्न 8.12: इन प्रेक्षणों की अनुकूलता को कैसे समझाएँगे?

(क) यद्यपि पोटैशियम परमैंगनेट तथा अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट--दोनों ही ऑक्सीकारक हैं। फिर भी टॉलुइन में बेंजोइक अम्ल बनाने के लिए हम एल्कोहॉलक पोटैशियम परमैंगनेट का प्रयोग ऑक्सीकारक के रूप में क्यों करते हैं?
(ख) क्लोराइडयुक्त अकार्बनिक यौगिक में सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल डालने पर हमें तीक्ष्ण गन्ध वाली HCl गैस प्राप्त होती है, परन्तु यदि मिश्रण में ब्रोमाइड उपस्थित हो, तो हमें ब्रोमीन की लाल वाष्प प्राप्त होती है, क्यों?

उत्तर:
(क) टॉलुइन एक अध्रुवीय कार्बनिक विलायक है। अम्लीय KMnO4 जलीय माध्यम में कार्य करता है और टॉलुइन में अच्छी तरह मिश्रित नहीं होता। एल्कोहॉलिक KMnO4 टॉलुइन में घुलनशील है, इसलिए यह बेहतर ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करके टॉलुइन को बेंजोइक अम्ल में ऑक्सीकृत कर देता है।
अभिक्रिया: C6H5CH3 + 2[O] (KMnO4 से) → C6H5COOH + H2O
(ख) सान्द्र H2SO4 क्लोराइड से HCl गैस मुक्त करता है, जो एक तीक्ष्ण गंध वाली गैस है।
NaCl + H2SO4 → NaHSO4 + HCl
लेकिन H2SO4 एक प्रबल ऑक्सीकारक भी है। यह ब्रोमाइड से निकलने वाली HBr गैस को ऑक्सीकृत करके Br2 की लाल-भूरी वाष्प में बदल देता है।
2NaBr + 2H2SO4 → Na2SO4 + SO2 + Br2 + 2H2O

प्रश्न 8.13: निम्नलिखित अभिक्रियाओं में ऑक्सीकृत, अपचयित, ऑक्सीकारक तथा अपचायक पदार्थ पहचानिए--

(क) 3AgBr(s) + H3PO3(aq) + 3H2O(l) → 3Ag(s) + H3PO4(aq) + 3HBr(aq)
(ख) HCHO(l) + 2[Ag(NH3)2]+(aq) + 3OH-(aq) → 2Ag(s) + HCOO-(aq) + 4NH3(aq) + 2H2O(l)
(ग) HCHO(l) + 2Cu2+(aq) + 5OH-(aq) → Cu2O(s) + HCOO-(aq) + 3H2O(l)
(घ) N2H4(l) + 2H2O2(l) → N2(g) + 4H2O(l)
(ङ) Pb(s) + PbO2(s) + 2H2SO4(aq) → 2PbSO4(s) + 2H2O(l)

उत्तर:

अभिक्रियाऑक्सीकृतअपचयितऑक्सीकारकअपचायक
(क)H3PO3 (P +3 से +5)AgBr (Ag +1 से 0)AgBrH3PO3
(ख)HCHO (C 0 से +2)[Ag(NH3)2]+ (Ag +1 से 0)[Ag(NH3)2]+HCHO
(ग)HCHO (C 0 से +2)Cu2+ (Cu +2 से +1)Cu2+HCHO
(घ)N2H4 (N -2 से 0)H2O2 (O -1 से -2)H2O2N2H4
(ङ)Pb (0 से +2)PbO2 (Pb +4 से +2)PbO2Pb

प्रश्न 8.14: निम्न अभिक्रियाओं में एक ही अपचायक थायोसल्फेट, आयोडीन तथा ब्रोमीन से अलग-अलग प्रकार से अभिक्रिया क्यों करता है?
2S2O32-(aq) + I2(s) → S4O62-(aq) + 2I-(aq)
S2O32-(aq) + 4Br2(l) + 5H2O(l) → 2SO42-(aq) + 8Br-(aq) + 10H+(aq)

उत्तर:
थायोसल्फेट आयन (S2O32-) एक मध्यम प्रबल अपचायक है। इसकी अभिक्रिया ऑक्सीकारक की प्रबलता पर निर्भर करती है।
आयोडीन (I2): एक कमजोर ऑक्सीकारक है। यह S2O32- को केवल टेट्राथियोनेट (S4O62-) में ऑक्सीकृत करता है, जहाँ S की औसत ऑक्सीकरण संख्या +2.5 हो जाती है।
ब्रोमीन (Br2): एक प्रबल ऑक्सीकारक है। यह S2O32- को पूर्णतः ऑक्सीकृत करके सल्फेट (SO42-) में बदल देता है, जहाँ S की ऑक्सीकरण संख्या +6 हो जाती है।

प्रश्न 8.15: अभिक्रिया देते हुए सिद्ध कीजिए कि हैलोजन में फ्लुओरीन श्रेष्ठ ऑक्सीकारक तथा हाइड्रोहेलिक यौगिकों में हाइड्रोआयोडीक अम्ल श्रेष्ठ अपचायक है।

उत्तर:
फ्लोरीन श्रेष्ठ ऑक्सीकारक: फ्लोरीन का मानक अपचयन विभव (E° = +2.87 V) सबसे अधिक है। यह अन्य हैलाइड आयनों से हैलोजन मुक्त कर सकता है।
F2(g) + 2NaCl(aq) → 2NaF(aq) + Cl2(g)
F2(g) + 2NaBr(aq) → 2NaF(aq) + Br2(l)
हाइड्रोआयोडिक अम्ल श्रेष्ठ अपचायक: HI में H-I बंध सबसे दुर्बल

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