UP Board class 11 Chemistry 8. अपचयोपचय अभिक्रियाएँ is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
(क) NaH2PO4 (ख) NaHSO4 (ग) H4P2O7 (घ) K2MnO4 (ङ) CaO2 (च) NaBH4 (छ) H2S2O7 (ज) KAl(SO4)2.12H2O
उत्तर:
(क) NaH2PO4 में P की ऑक्सीकरण संख्या = +5
(ख) NaHSO4 में S की ऑक्सीकरण संख्या = +6
(ग) H4P2O7 में P की ऑक्सीकरण संख्या = +5
(घ) K2MnO4 में Mn की ऑक्सीकरण संख्या = +6
(ङ) CaO2 में O की ऑक्सीकरण संख्या = -1
(च) NaBH4 में B की ऑक्सीकरण संख्या = +3
(छ) H2S2O7 में S की ऑक्सीकरण संख्या = +6
(ज) KAl(SO4)2.12H2O में S की ऑक्सीकरण संख्या = +6
(क) KI3 (ख) H2S4O6 (ग) Fe3O4 (घ) CH3CH2OH (ङ) CH3COOH
उत्तर:
(क) KI3 में I की औसत ऑक्सीकरण संख्या = -1/3 (K+ और I3- आयन के रूप में)।
(ख) H2S4O6 में S की ऑक्सीकरण संख्या = +2.5 (दो S पर +5 और दो S पर 0)।
(ग) Fe3O4 में Fe की औसत ऑक्सीकरण संख्या = +8/3 (FeO.Fe2O3 के रूप में)।
(घ) CH3CH2OH में C की औसत ऑक्सीकरण संख्या = -2 (CH3 समूह में -3, CH2 समूह में -1)।
(ङ) CH3COOH में कार्बाइल C की ऑक्सीकरण संख्या = +3 और मिथाइल C की = -3।
(क) CuO(s) + H2(g) → Cu(s) + H2O(g)
(ख) Fe2O3(s) + 3CO(g) → 2Fe(s) + 3CO2(g)
(ग) 4BCl3(g) + 3LiAlH4(s) → 2B2H6(g) + 3LiCl(s) + 3AlCl3(s)
(घ) 2K(s) + F2(g) → 2K+F-(s)
(ङ) 4NH3(g) + 5O2(g) → 4NO(g) + 6H2O(g)
उत्तर:
सभी अभिक्रियाएँ अपचयोपचय (रेडॉक्स) अभिक्रियाएँ हैं क्योंकि इनमें ऑक्सीकरण संख्या में परिवर्तन होता है।
(क) Cu (+2 से 0) अपचयित, H (0 से +1) ऑक्सीकृत।
(ख) Fe (+3 से 0) अपचयित, C (+2 से +4) ऑक्सीकृत।
(ग) B (+3 से +3 in B2H6? वास्तव में H का ऑक्सीकरण संख्या परिवर्तन)।
(घ) K (0 से +1) ऑक्सीकृत, F (0 से -1) अपचयित।
(ङ) N (-3 से +2) ऑक्सीकृत, O (0 से -2) अपचयित।
उत्तर:
यह एक अपचयोपचय अभिक्रिया है।
F2 (ऑक्सीकरण संख्या 0) का एक परमाणु HF में (-1) अपचयित होता है और दूसरा HOF में (+1) ऑक्सीकृत होता है। जल (H2O) में ऑक्सीकरण संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता। यह फ्लोरीन का असमानुपातन (Disproportionation) है।
उत्तर:
H2SO5 (परॉक्सो मोनोसल्फ्यूरिक अम्ल): संरचना H-O-O-S(O)2-O-H। दो O परमाणु परॉक्साइड (-1) बंध में हैं। S की ऑक्सीकरण संख्या +6 है, परॉक्साइड O के कारण यह +8 प्रतीत होती है।
Cr2O72- (डाइक्रोमेट आयन): Cr की ऑक्सीकरण संख्या +6 है।
HNO3 (नाइट्रिक अम्ल): N की ऑक्सीकरण संख्या +5 है।
हेत्वाभास: H2SO5 में S की ऑक्सीकरण संख्या की गणना करते समय, यदि सभी O परमाणुओं को -2 मान लिया जाए तो S पर +8 आता है, जो असंभव है। यह हेत्वाभास परॉक्साइड बंध के कारण है, जहाँ O की ऑक्सीकरण संख्या -1 होती है।
(क) मरक्यूरी (I) क्लोराइड
(ख) निकल (II) सल्फेट
(ग) टिन (IV) ऑक्साइड
(घ) थैलियम (I) सल्फेट
(ङ) आयरन (III) सल्फेट
(च) क्रोमियम (III) ऑक्साइड
उत्तर:
(क) Hg2Cl2
(ख) NiSO4
(ग) SnO2
(घ) Tl2SO4
(ङ) Fe2(SO4)3
(च) Cr2O3
उत्तर:
| पदार्थ | सूत्र | ऑक्सीकरण संख्या (C) |
|---|---|---|
| मेथेन | CH4 | -4 |
| क्लोरोफॉर्म | CHCl3 | +2 |
| कार्बन डाइऑक्साइड | CO2 | +4 |
| पदार्थ | सूत्र | ऑक्सीकरण संख्या (N) |
|---|---|---|
| अमोनिया | NH3 | -3 |
| नाइट्रोजन | N2 | 0 |
| नाइट्रिक अम्ल | HNO3 | +5 |
उत्तर:
SO2 में S की ऑक्सीकरण संख्या +4 है, जो बढ़कर +6 (ऑक्सीकरण) या घटकर 0 (अपचयन) हो सकती है। H2O2 में O की ऑक्सीकरण संख्या -1 है, जो घटकर -2 (ऑक्सीकरण) या बढ़कर 0 (अपचयन) हो सकती है। इसलिए ये दोनों द्विकर्मी (Ambivalent) हैं।
O3 में O की ऑक्सीकरण संख्या 0 है, जो केवल घट सकती है (-2 बनने के लिए)। HNO3 में N की ऑक्सीकरण संख्या +5 है, जो अधिकतम है और केवल घट सकती है। इसलिए ये दोनों केवल ऑक्सीकारक हैं।
उत्तर:
(क) प्रकाश संश्लेषण की यह अभिक्रिया एक जटिल रेडॉक्स प्रक्रिया है। संशोधित समीकरण यह दर्शाता है कि उत्पादित O2 का स्रोत H2O के अणु हैं, न कि CO2। 12 H2O अणुओं में से 6 का ऑक्सीकरण होकर O2 बनता है और शेष 6 उत्पाद के रूप में बच जाते हैं।
(ख) संशोधित समीकरण यह स्पष्ट करता है कि O2 के दो अणु अलग-अलग स्रोतों से आते हैं: एक O3 के अपचयन से और दूसरा H2O2 के ऑक्सीकरण से। यह अभिक्रिया की प्रकृति को बेहतर दर्शाता है।
उत्तर:
OF2 (ऑक्सीजन डाइफ्लोराइड) में ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या +2 है। चूँकि ऑक्सीजन सामान्यतः ऋणात्मक ऑक्सीकरण अवस्था (-2) दर्शाती है, इसलिए +2 अवस्था में यह बहुत अस्थिर और प्रबल ऑक्सीकारक है। यह आसानी से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके स्थिर -2 अवस्था में आना चाहती है।
उत्तर:
1. फेरस क्लोराइड (FeCl2) और क्लोरीन (Cl2): Cl2 (ऑक्सीकारक) के आधिक्य में FeCl2 (Fe की अवस्था +2) पूर्णतः FeCl3 (Fe की अवस्था +3) में ऑक्सीकृत हो जाता है।
2. सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और हाइड्रोजन सल्फाइड (H2S): H2S (अपचायक) के आधिक्य में SO2 (S की अवस्था +4) का पूर्ण अपचयन होकर S (अवस्था 0) बनता है।
3. पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO4) और फेरस सल्फेट (FeSO4): अम्लीय माध्यम में FeSO4 (अपचायक) के आधिक्य में KMnO4 का Mn (+7) पूर्णतः Mn2+ (+2) में अपचयित हो जाता है।
(क) यद्यपि पोटैशियम परमैंगनेट तथा अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट--दोनों ही ऑक्सीकारक हैं। फिर भी टॉलुइन में बेंजोइक अम्ल बनाने के लिए हम एल्कोहॉलक पोटैशियम परमैंगनेट का प्रयोग ऑक्सीकारक के रूप में क्यों करते हैं?
(ख) क्लोराइडयुक्त अकार्बनिक यौगिक में सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल डालने पर हमें तीक्ष्ण गन्ध वाली HCl गैस प्राप्त होती है, परन्तु यदि मिश्रण में ब्रोमाइड उपस्थित हो, तो हमें ब्रोमीन की लाल वाष्प प्राप्त होती है, क्यों?
उत्तर:
(क) टॉलुइन एक अध्रुवीय कार्बनिक विलायक है। अम्लीय KMnO4 जलीय माध्यम में कार्य करता है और टॉलुइन में अच्छी तरह मिश्रित नहीं होता। एल्कोहॉलिक KMnO4 टॉलुइन में घुलनशील है, इसलिए यह बेहतर ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करके टॉलुइन को बेंजोइक अम्ल में ऑक्सीकृत कर देता है।
अभिक्रिया: C6H5CH3 + 2[O] (KMnO4 से) → C6H5COOH + H2O
(ख) सान्द्र H2SO4 क्लोराइड से HCl गैस मुक्त करता है, जो एक तीक्ष्ण गंध वाली गैस है।
NaCl + H2SO4 → NaHSO4 + HCl
लेकिन H2SO4 एक प्रबल ऑक्सीकारक भी है। यह ब्रोमाइड से निकलने वाली HBr गैस को ऑक्सीकृत करके Br2 की लाल-भूरी वाष्प में बदल देता है।
2NaBr + 2H2SO4 → Na2SO4 + SO2 + Br2 + 2H2O
(क) 3AgBr(s) + H3PO3(aq) + 3H2O(l) → 3Ag(s) + H3PO4(aq) + 3HBr(aq)
(ख) HCHO(l) + 2[Ag(NH3)2]+(aq) + 3OH-(aq) → 2Ag(s) + HCOO-(aq) + 4NH3(aq) + 2H2O(l)
(ग) HCHO(l) + 2Cu2+(aq) + 5OH-(aq) → Cu2O(s) + HCOO-(aq) + 3H2O(l)
(घ) N2H4(l) + 2H2O2(l) → N2(g) + 4H2O(l)
(ङ) Pb(s) + PbO2(s) + 2H2SO4(aq) → 2PbSO4(s) + 2H2O(l)
उत्तर:
| अभिक्रिया | ऑक्सीकृत | अपचयित | ऑक्सीकारक | अपचायक |
|---|---|---|---|---|
| (क) | H3PO3 (P +3 से +5) | AgBr (Ag +1 से 0) | AgBr | H3PO3 |
| (ख) | HCHO (C 0 से +2) | [Ag(NH3)2]+ (Ag +1 से 0) | [Ag(NH3)2]+ | HCHO |
| (ग) | HCHO (C 0 से +2) | Cu2+ (Cu +2 से +1) | Cu2+ | HCHO |
| (घ) | N2H4 (N -2 से 0) | H2O2 (O -1 से -2) | H2O2 | N2H4 |
| (ङ) | Pb (0 से +2) | PbO2 (Pb +4 से +2) | PbO2 | Pb |
उत्तर:
थायोसल्फेट आयन (S2O32-) एक मध्यम प्रबल अपचायक है। इसकी अभिक्रिया ऑक्सीकारक की प्रबलता पर निर्भर करती है।
आयोडीन (I2): एक कमजोर ऑक्सीकारक है। यह S2O32- को केवल टेट्राथियोनेट (S4O62-) में ऑक्सीकृत करता है, जहाँ S की औसत ऑक्सीकरण संख्या +2.5 हो जाती है।
ब्रोमीन (Br2): एक प्रबल ऑक्सीकारक है। यह S2O32- को पूर्णतः ऑक्सीकृत करके सल्फेट (SO42-) में बदल देता है, जहाँ S की ऑक्सीकरण संख्या +6 हो जाती है।
उत्तर:
फ्लोरीन श्रेष्ठ ऑक्सीकारक: फ्लोरीन का मानक अपचयन विभव (E° = +2.87 V) सबसे अधिक है। यह अन्य हैलाइड आयनों से हैलोजन मुक्त कर सकता है।
F2(g) + 2NaCl(aq) → 2NaF(aq) + Cl2(g)
F2(g) + 2NaBr(aq) → 2NaF(aq) + Br2(l)
हाइड्रोआयोडिक अम्ल श्रेष्ठ अपचायक: HI में H-I बंध सबसे दुर्बल
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