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एक द्रव को सीलबन्द पात्र में निश्चित ताप पर इसके बाष्प के साथ साम्य में रखा जाता है। पात्र का आयतन अचानक बढ़ा दिया जाता है।
(क) वाष्प-दाब परिवर्तन का प्रारम्भिक परिणाम क्या होगा?
(ख) प्रारम्भ में वाष्पन एवं संघनन की दर कैसे बदलती है?
(ग) क्या होगा, जबकि साम्य पुनः अन्तिम रूप से स्थापित हो जाएगा, तब अन्तिम वाष्प दाब क्या होगा?
उत्तर:
(क) पात्र का आयतन बढ़ाने से द्रव के धरातल का वाष्प दाब कम होगा।
(ख) अचानक पात्र का आयतन बढ़ाने से प्रारम्भिक वाष्पन दर स्थिर रहेगी; क्योंकि पात्र का आयतन बढ़ता है, संघनन दर घटती है।
(ग) साम्यावस्था पर वाष्पन दर संघनन दर के बराबर होती है, प्रारम्भिक दाब में अन्तिम वाष्प दाब समान होगा।
निम्न साम्य के लिए Kc की गणना कीजिए, जबकि विभिन्न पदार्थ की सान्द्रताएँ [SO2] = 0.6 M, [O2] = 0.82 M तथा [SO3] = 1.90 M हैं।
2SO2 (g) + O2 (g) ⇌ 2SO3 (g)
हल:
2SO2 (g) + O2 (g) ⇌ 2SO3 (g)
Kc = [SO3]2 / ([SO2]2 [O2])
Kc = (1.90)2 / ((0.6)2 × 0.82)
Kc = 3.61 / (0.36 × 0.82) = 3.61 / 0.2952 ≈ 12.229
अतः Kc का मान ≈ 12.229 उत्तर
एक निश्चित ताप एवं कुल दाब 105 Pa पर आयोडीन वाष्प में आयतानुसार 40% आयोडीन परमाणु होते हैं। साम्य के लिए Kp की गणना कीजिए।
I2 (g) ⇌ 2I (g)
हल:
I2 (g) ⇌ 2I (g)
कुल दाब = 105 Pa
आयोडीन परमाणु (I) = 40% आयतन, I2 अणु = 60% आयतन
I का आंशिक दाब = (40/100) × 105 = 0.4 × 105 Pa
I2 का आंशिक दाब = (60/100) × 105 = 0.6 × 105 Pa
Kp = (PI)2 / PI2 = (0.4 × 105)2 / (0.6 × 105)
Kp = (0.16 × 1010) / (0.6 × 105) = 2.67 × 104 Pa
अतः Kp का मान = 2.67 × 104 उत्तर
निम्नलिखित में से प्रत्येक अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक (Kc) का व्यंजक लिखिए।
(i) 2NOCl (g) ⇌ 2NO (g) + Cl2 (g)
(ii) 2Cu(NO3)2 (s) ⇌ 2CuO (s) + 4NO2 (g) + O2 (g)
(iii) CH3COOC2H5 (aq) + H2O (l) ⇌ CH3COOH (aq) + C2H5OH (aq)
(iv) Fe3+ (aq) + 3OH– (aq) ⇌ Fe(OH)3 (s)
(v) I2 (s) + 5F2 (g) ⇌ 2IF5 (g)
उत्तर:
(i) Kc = [NO]2[Cl2] / [NOCl]2
(ii) Kc = [NO2]4[O2] (ठोसों को सम्मिलित नहीं किया जाता)
(iii) Kc = [CH3COOH][C2H5OH] / [CH3COOC2H5][H2O]
(iv) Kc = 1 / ([Fe3+][OH–]3)
(v) Kc = [IF5]2 / [F2]5 (ठोस I2 को सम्मिलित नहीं किया जाता)
Kp के मान से निम्नलिखित में से प्रत्येक साम्य के लिए Kc का मान ज्ञात कीजिए–
(i) 2NOCl (g) ⇌ 2NO (g) + Cl2 (g); Kp = 1.8 × 10–2, 500 K ताप पर
(ii) CaCO3 (s) ⇌ CaO (s) + CO2 (g); Kp = 167, 1073 K ताप पर
हल:
(i) 2NOCl (g) ⇌ 2NO (g) + Cl2 (g)
Δn = (2 + 1) – 2 = 1
Kp = Kc (RT)Δn
1.8 × 10–2 = Kc (0.0821 × 500)1
Kc = (1.8 × 10–2) / (0.0821 × 500) = (1.8 × 10–2) / 41.05 ≈ 4.38 × 10–4
अतः Kc का मान = 4.38 × 10–4 उत्तर
(ii) CaCO3 (s) ⇌ CaO (s) + CO2 (g)
Δn = 1 – 0 = 1
Kp = Kc (RT)Δn
167 = Kc (0.0821 × 1073)1
Kc = 167 / (0.0821 × 1073) = 167 / 88.09 ≈ 1.90
अतः Kc का मान = 1.90 उत्तर
अभिक्रिया NO (g) + O3 (g) ⇌ NO2 (g) + O2 (g) के लिए 1000 K ताप पर Kc = 6.3 × 1014 है। यदि अग्र एवं प्रतीप दोनों अभिक्रियाएँ प्राथमिक रूप से द्विअणुक हैं, तो प्रतीप अभिक्रिया के लिए Kc क्या है?
हल:
NO (g) + O3 (g) ⇌ NO2 (g) + O2 (g)
Kc (अग्र) = [NO2][O2] / [NO][O3] = 6.3 × 1014
प्रतीप अभिक्रिया: NO2 (g) + O2 (g) ⇌ NO (g) + O3 (g)
Kc (प्रतीप) = 1 / Kc (अग्र) = 1 / (6.3 × 1014) ≈ 1.59 × 10–15
अतः प्रतीप अभिक्रिया के लिए Kc = 1.59 × 10–15 उत्तर
साम्य स्थिरांक का व्यंजक लिखते समय समझाइए कि शुद्ध द्रवों एवं ठोसों को उपेक्षित क्यों किया जा सकता है?
उत्तर:
शुद्ध ठोस एवं द्रवों की सान्द्रता स्थिर होती है क्योंकि इनका घनत्व तथा आण्विक द्रव्यमान निश्चित होता है। साम्य स्थिरांक के व्यंजक में केवल गैसीय या विलेय पदार्थों की सान्द्रता या आंशिक दाब ही शामिल किए जाते हैं। शुद्ध ठोस/द्रवों का क्रियाधार (activity) 1 माना जाता है, इसलिए उन्हें व्यंजक में नहीं लिखा जाता।
N2 एवं O2 के मध्य निम्नलिखित अभिक्रिया होती है:
2N2 (g) + O2 (g) ⇌ 2N2O (g)
यदि एक 10 L के पात्र में 0.482 मोल N2 एवं 0.933 मोल O2 रखे जाएँ तथा एक ताप, जिस पर Kc = 2.0 × 10–37 हो, पर N2O बनने दिया जाए, तो साम्य मिश्रण का संघटन ज्ञात कीजिए।
हल:
2N2 (g) + O2 (g) ⇌ 2N2O (g)
प्रारम्भिक सान्द्रता: [N2] = 0.482/10 = 0.0482 M, [O2] = 0.933/10 = 0.0933 M, [N2O] = 0
माना साम्य पर N2O के 2x मोल बनते हैं, तब:
[N2] = 0.0482 – x, [O2] = 0.0933 – x/2, [N2O] = 2x
Kc = [N2O]2 / ([N2]2[O2]) = (2x)2 / ((0.0482 – x)2(0.0933 – x/2))
Kc = 2.0 × 10–37 (बहुत छोटा है, अतः x नगण्य)
लगभग: (4x2) / (0.04822 × 0.0933) = 2.0 × 10–37
4x2 = 2.0 × 10–37 × (2.32 × 10–3)
x2 ≈ 1.16 × 10–40 → x ≈ 1.08 × 10–20 M
अतः साम्य पर: [N2] ≈ 0.0482 M, [O2] ≈ 0.0933 M, [N2O] ≈ 2.16 × 10–20 M
उत्तर: [N2] = 0.0482 mol L–1, [O2] = 0.0933 mol L–1, [N2O] = 2.16 × 10–20 mol L–1
निम्नलिखित अभिक्रिया के अनुसार नाइट्रिक ऑक्साइड Br2 से अभिक्रिया कर नाइट्रोसिल ब्रोमाइड बनाती है–
2NO (g) + Br2 (g) ⇌ 2NOBr (g)
जब स्थिर ताप पर एक बन्द पात्र में 0.087 मोल NO एवं 0.0437 मोल Br2 मिश्रित किए जाते हैं, तब 0.0518 मोल NOBr प्राप्त होती है। NO एवं Br2 की साम्य मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल:
2NO (g) + Br2 (g) ⇌ 2NOBr (g)
प्रारम्भ: 0.087 mol 0.0437 mol 0
परिवर्तन: –0.0518 –0.0259 +0.0518
साम्य: 0.087 – 0.0518 = 0.0352 mol NO
0.0437 – 0.0259 = 0.0178 mol Br2
0.0518 mol NOBr
अतः साम्य पर NO = 0.0352 mol, Br2 = 0.0178 mol उत्तर
अभिक्रिया 2SO2 (g) + O2 (g) ⇌ 2SO3 (g) के लिए 450 K पर Kp = 2.0 × 1010 bar–1 है। इसी ताप पर Kc का मान ज्ञात कीजिए।
हल:
Δn = 2 – (2 + 1) = –1
Kp = Kc (RT)Δn
2.0 × 1010 = Kc (0.0831 × 450)–1
Kc = 2.0 × 1010 × (0.0831 × 450) = 2.0 × 1010 × 37.395 ≈ 7.48 × 1011 mol–1 L
अतः Kc = 7.48 × 1011 mol–1 L उत्तर
HI (g) का एक नमूना 0.2 atm दाब पर एक फ्लास्क में रखा जाता है। साम्य पर HI (g) का आंशिक दाब 0.04 atm पाया जाता है। यहाँ दिए गए साम्य के लिए Kp का मान क्या होगा?
2HI (g) ⇌ H2 (g) + I2 (g)
हल:
2HI (g) ⇌ H2 (g) + I2 (g)
प्रारम्भिक दाब: 0.2 atm 0 0
साम्य पर: PHI = 0.04 atm
माना H2 एवं I2 का आंशिक दाब प्रत्येक = x
कुल दाब = PHI + PH2 + PI2 = 0.04 + x + x = 0.2
2x = 0.16 → x = 0.08 atm
Kp = (PH2 × PI2) / (PHI)2 = (0.08 × 0.08) / (0.04)2 = 0.0064 / 0.0016 = 4
अतः Kp = 4 उत्तर
500 K ताप पर एक 20 L पात्र में N2 के 1.57 मोल, H2 के 1.92 मोल एवं NH3 के 8.13 मोल का मिश्रण लिया जाता है। अभिक्रिया N2 (g) + 3H2 (g) ⇌ 2NH3 (g) के लिए Kc का मान 1.7 × 102 है। क्या अभिक्रिया-मिश्रण साम्य में है? यदि नहीं, तो नेट अभिक्रिया की दिशा क्या होगी?
हल:
आयतन = 20 L
[N2] = 1.57/20 = 0.0785 M
[H2] = 1.92/20 = 0.096 M
[NH3] = 8.13/20 = 0.4065 M
अभिक्रिया भागफल Qc = [NH3]2 / ([N2][H2]3) = (0.4065)2 / (0.0785 × (0.096)3)
Qc ≈ 0.1652 / (0.0785 × 0.0008847) ≈ 0.1652 / 0.0000695 ≈ 2376
Kc = 1.7 × 102 = 170
चूँकि Qc (2376) > Kc (170), अतः साम्य नहीं है। अभिक्रिया प्रतीप दिशा में (NH3 के विघटन की ओर) अग्रसित होगी।
उत्तर: नहीं, अभिक्रिया प्रतीप दिशा में होगी।
एक गैस अभिक्रिया के लिए Kc = [NH3]4[O2]5 / [NO]4[H2O]6 है। इस व्यंजक के लिए सन्तुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
हल:
Kc व्यंजक में उत्पाद अणु NH3 (4) एवं O2 (5) तथा अभिकारक NO (4) एवं H2O (6) हैं।
सन्तुलित समीकरण:
4NO (g) + 6H2O (g) ⇌ 4NH3 (g) + 5O2 (g)
H2O का एक मोल एवं CO का एक मोल 725 K ताप पर 10 L के पात्र में लिए जाते हैं। साम्य पर 40% जल (भारात्मक) CO के साथ निम्नलिखित समीकरण के अनुसार अभिक्रिया करता है–
H2O (g) + CO (g) ⇌ H2 (g) + CO2 (g)
अभिक्रिया के लिए साम्य स्थिरांक की गणना कीजिए।
हल:
H2O (g) + CO (g) ⇌ H2 (g) + CO2 (g)
प्रारम्भिक मोल: 1 1 0 0
40% H2O अभिकृत होता है → अभिकृत H2O = 0.4 mol
साम्य पर: H2O = 1 – 0.4 = 0.6 mol, CO = 1 – 0.4 = 0.6 mol, H2 = 0.4 mol, CO2 = 0.4 mol
आयतन = 10 L
सान्द्रता: [H2O] = 0.06 M, [CO] = 0.06 M, [H2] = 0.04 M, [CO2] = 0.04 M
Kc = ([H2][CO2]) / ([H2O][CO]) = (0.04 × 0.04) / (0.06 × 0.06) = 0.0016 / 0.0036 ≈ 0.444
अतः Kc = 0.444 उत्तर
700 K ताप पर अभिक्रिया H2 (g) + I2 (g) ⇌ 2HI (g) के लिए साम्य स्थिरांक 54.8 है। यदि हमने शुरु में HI (g) लिया हो, 700 K ताप पर साम्य स्थापित हो तथा साम्य पर 0.5 M HI (g) उपस्थित हो, तो साम्य पर H2 (g) एवं I2 (g) की सान्द्रताएँ क्या होंगी?
हल:
H2 (g) + I2 (g) ⇌ 2HI (g)
Kc = [HI]2 / ([H2][I2]) = 54.8
साम्य पर [HI] = 0.5 M
माना [H2] = [I2] = x
तब 54.8 = (0.5)2 / (x × x) = 0.25 / x2
x2 = 0.25 / 54.8 ≈ 0.00456
x ≈ 0.0675 M
अतः [H2] = [I2] = 0.0675 M उत्तर
ICI जिसकी सान्द्रता प्रारम्भ में 0.78 M है, को यदि साम्य पर आने दिया जाए, तो प्रत्येक की साम्य पर सान्द्रताएँ क्या होंगी?
2ICI (g) ⇌ I2 (g) + Cl2 (g); Kc = 0.14
हल:
2ICI (g) ⇌ I2 (g) + Cl2 (g)
प्रारम्भ: 0.78 M 0 0
साम्य: 0.78 – 2x x x
Kc = [I2][Cl2] / [ICI]2 = (x × x) / (0.78 – 2x)2
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