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UP Board class 11 Chemistry (3. तत्वों का वर्गीकरण तथा गुणधर्मो में आवर्तिता) solution PDF

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UP Board class 11 Chemistry (3. तत्वों का वर्गीकरण तथा गुणधर्मो में आवर्तिता) solution

UP Board class 11 Chemistry 3. तत्वों का वर्गीकरण तथा गुणधर्मो में आवर्तिता Hindi Medium Solutions - PDF

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Chapter 3: तत्वों का वर्गीकरण तथा गुणधर्मों में आवर्तिता

(Classification of Elements and Periodicity in Properties)

UP Board पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 3.1. आवर्त सारणी में व्यवस्था का भौतिक आधार क्या है?

उत्तर: आवर्त सारणी में तत्वों को उनके इलेक्ट्रॉन विन्यास के अनुसार व्यवस्थित किया गया है।

प्रश्न 3.2. मेंडलीव ने किस महत्त्वपूर्ण गुणधर्म को अपनी आवर्त सारणी में तत्वों के वर्गीकरण का आधार बनाया? क्या वे उस पर दृढ़ रह पाए?

उत्तर: मेंडलीव ने तत्वों का परमाणु भार के आधार पर वर्गीकरण किया। उन्होंने तत्वों को क्षैतिज पंक्तियों और ऊर्ध्वाधर स्तंभों में रखा, जिससे समान गुणधर्म वाले तत्व एक ही समूह में आ गए। हालाँकि, कुछ अपवादों के कारण वे इस आधार पर पूरी तरह दृढ़ नहीं रह पाए।

प्रश्न 3.3. मेंडलीव के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में मौलिक अंतर क्या है?

उत्तर: मेंडलीव के अनुसार, तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु भारों के आवर्ती फलन होते हैं। आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार, तत्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुणधर्म उनके परमाणु क्रमांकों (परमाणु संख्या) के आवर्ती फलन होते हैं।

प्रश्न 3.4. क्वांटम संख्याओं के आधार पर यह सिद्ध कीजिए कि आवर्त सारणी के छठवें आवर्त में 32 तत्व होने चाहिए।

उत्तर: छठे आवर्त (n=6) के लिए, संभावित उपकोश हैं: s, p, d, और f। इनमें इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या इस प्रकार है:

  • s-उपकोश: 1 कक्षक × 2 इलेक्ट्रॉन = 2 इलेक्ट्रॉन
  • p-उपकोश: 3 कक्षक × 2 इलेक्ट्रॉन = 6 इलेक्ट्रॉन
  • d-उपकोश: 5 कक्षक × 2 इलेक्ट्रॉन = 10 इलेक्ट्रॉन
  • f-उपकोश: 7 कक्षक × 2 इलेक्ट्रॉन = 14 इलेक्ट्रॉन
कुल इलेक्ट्रॉन = 2 + 6 + 10 + 14 = 32. चूंकि प्रत्येक तत्व में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ती है, इसलिए छठे आवर्त में 32 तत्व होते हैं।

प्रश्न 3.5. आवर्त और वर्ग के पदों में यह बताइए कि Z=14 कहाँ स्थित होगा?

उत्तर: परमाणु क्रमांक 14 वाला तत्व सिलिकॉन (Si) है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p² है। यह तीसरे आवर्त और वर्ग 14 (कार्बन समूह) में स्थित है।

प्रश्न 3.6. उस तत्व का परमाणु क्रमांक लिखिए, जो आवर्त सारणी में तीसरे आवर्त और 17वें वर्ग में स्थित होता है?

उत्तर: तीसरे आवर्त और 17वें वर्ग (हैलोजन समूह) में स्थित तत्व क्लोरीन (Cl) है। इसका परमाणु क्रमांक 17 है तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁵ है।

प्रश्न 3.7. कौन से तत्व का नाम निम्नलिखित द्वारा दिया गया है?
(i) लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा
(ii) सी बोर्ग समूह द्वारा

उत्तर:
(i) बर्केलियम (Bk), परमाणु क्रमांक 97.
(ii) सीबोर्गियम (Sg), परमाणु क्रमांक 106.

प्रश्न 3.8. एक ही वर्ग में उपस्थित तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म समान क्यों होते हैं?

उत्तर: एक ही वर्ग के सभी तत्वों का बाह्यतम कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है। चूंकि रासायनिक गुणधर्म मुख्यतः बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या और व्यवस्था पर निर्भर करते हैं, इसलिए एक वर्ग के तत्वों के गुणधर्मों में समानता पाई जाती है।

प्रश्न 3.9. परमाणु त्रिज्या और आयनिक त्रिज्या से आप क्या समझते हैं?

उत्तर:
परमाणु त्रिज्या: किसी परमाणु के नाभिक से बाह्यतम कोश की औसत दूरी को परमाणु त्रिज्या कहते हैं। अधातुओं के लिए यह सहसंयोजक त्रिज्या (आबंध लंबाई का आधा) और धातुओं के लिए धात्विक त्रिज्या (दो आसन्न परमाणुओं के नाभिकों के बीच की दूरी का आधा) होती है।
आयनिक त्रिज्या: किसी आयन के नाभिक से उसके बाह्यतम इलेक्ट्रॉन के बीच की दूरी को आयनिक त्रिज्या कहते हैं।

प्रश्न 3.10. आवर्त सारणी में परमाणु त्रिज्या किस प्रकार परिवर्तित होती है? इस परिवर्तन की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?

उत्तर:
आवर्त में (बाएं से दाएं): परमाणु त्रिज्या घटती है। कारण: एक ही आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ता है, जिससे नाभिकीय आवेश (प्रोटॉनों की संख्या) बढ़ता है। इससे बाह्य इलेक्ट्रॉनों पर आकर्षण बल बढ़ जाता है और परमाणु सिकुड़ जाता है।
वर्ग में (ऊपर से नीचे): परमाणु त्रिज्या बढ़ती है। कारण: ऊपर से नीचे जाने पर इलेक्ट्रॉन कोशों की संख्या बढ़ती है। नाभिक और बाह्य इलेक्ट्रॉनों के बीच की दूरी बढ़ जाती है तथा आवरण प्रभाव भी बढ़ता है, जिससे आकर्षण बल कम हो जाता है और परमाणु का आकार बढ़ जाता है।

प्रश्न 3.11. समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज से आप क्या समझते हैं? एक ऐसी स्पीशीज का नाम लिखिए, जो निम्नलिखित परमाणुओं या आयनों के साथ समइलेक्ट्रॉनिक होगी-
(i) F⁻ (ii) Ar (iii) Mg²⁺ (iv) Rb⁺

उत्तर: समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज वे परमाणु या आयन होते हैं जिनमें इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या समान होती है, भले ही उनका परमाणु क्रमांक भिन्न हो।
(i) F⁻ (10 इलेक्ट्रॉन) के साथ समइलेक्ट्रॉनिक: Ne, Na⁺, O²⁻
(ii) Ar (18 इलेक्ट्रॉन) के साथ समइलेक्ट्रॉनिक: Cl⁻, K⁺, Ca²⁺
(iii) Mg²⁺ (10 इलेक्ट्रॉन) के साथ समइलेक्ट्रॉनिक: Ne, Na⁺, F⁻
(iv) Rb⁺ (36 इलेक्ट्रॉन) के साथ समइलेक्ट्रॉनिक: Kr, Br⁻

प्रश्न 3.12. निम्नलिखित स्पीशीज पर विचार कीजिए-
N³⁻, O²⁻, F⁻, Na⁺, Mg²⁺ और Al³⁺
(क) इनमें क्या समानता है?
(ख) इन्हें आयनिक त्रिज्या के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

उत्तर:
(क) ये सभी समइलेक्ट्रॉनिक स्पीशीज हैं क्योंकि प्रत्येक में 10 इलेक्ट्रॉन हैं (Ne गैस के समान विन्यास)।
(ख) आयनिक त्रिज्या का बढ़ता क्रम: सभी में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान है, परन्तु नाभिकीय आवेश (प्रोटॉनों की संख्या) बढ़ने से आकर्षण बल बढ़ता है और आयन सिकुड़ जाता है। अतः बढ़ती त्रिज्या का क्रम है:
Al³⁺ < Mg²⁺ < Na⁺ < F⁻ < O²⁻ < N³⁻

प्रश्न 3.13. धनायन अपने जनक परमाणुओं से छोटे क्यों होते हैं और ऋणायनों की त्रिज्या उनके जनक परमाणुओं की त्रिज्या से अधिक क्यों होती है? व्याख्या कीजिए।

उत्तर:
धनायन छोटे होते हैं: धनायन बनने पर परमाणु एक या अधिक इलेक्ट्रॉन खो देता है। इससे प्रभावी नाभिकीय आवेश (शुद्ध आकर्षण) बढ़ जाता है क्योंकि प्रोटॉनों की संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या से अधिक हो जाती है। नाभिक शेष इलेक्ट्रॉनों को अधिक शक्ति से खींचता है, जिससे आयन का आकार सिकुड़ जाता है।
ऋणायन बड़े होते हैं: ऋणायन बनने पर परमाणु में अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन आ जाता है। इससे इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण बढ़ जाता है और प्रभावी नाभिकीय आवेश कम हो जाता है। इलेक्ट्रॉन बादल फैल जाता है, जिससे आयन का आकार बढ़ जाता है।

प्रश्न 3.14. आयनन एन्थैल्पी और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी को परिभाषित करने में विलगित गैसीय परमाणु तथा आद्य अवस्था पदों की सार्थकता क्या है?

उत्तर: इन पदों का उपयोग मानक स्थितियों को परिभाषित करने के लिए किया जाता है ताकि विभिन्न तत्वों के लिए प्राप्त मानों की तुलना की जा सके।

  • विलगित गैसीय परमाणु: इसका अर्थ है कि परमाणु किसी भी बाह्य बल (जैसे अन्य परमाणुओं के साथ आबंध) से मुक्त है।
  • आद्य अवस्था: इसका अर्थ है कि परमाणु अपनी निम्नतम ऊर्जा अवस्था में है।
इस प्रकार, आयनन एन्थैल्पी एक विलगित गैसीय परमाणु (आद्य अवस्था में) से सबसे ढीले बंधे इलेक्ट्रॉन को हटाने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा है। इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी एक विलगित गैसीय परमाणु (आद्य अवस्था में) में एक इलेक्ट्रॉन जोड़ने पर होने वाला ऊर्जा परिवर्तन है।

प्रश्न 3.15. हाइड्रोजन परमाणु में आद्य अवस्था में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा -2.18 × 10⁻¹⁸ J है। परमाण्विक हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी kJ mol⁻¹ के पदों में परिकलित कीजिए।

उत्तर:
एक परमाणु के लिए आयनन ऊर्जा = +2.18 × 10⁻¹⁸ J (ऋणात्मक चिह्न हटा देते हैं क्योंकि ऊर्जा दी जाती है)।
1 मोल हाइड्रोजन परमाणुओं के लिए आयनन एन्थैल्पी:
= (2.18 × 10⁻¹⁸ J/परमाणु) × (6.022 × 10²³ परमाणु/mol)
= 1.312 × 10⁶ J/mol
= 1312 kJ/mol (क्योंकि 1 kJ = 1000 J)

प्रश्न 3.16. द्वितीय आवर्त के तत्वों में वास्तविक आयनन एन्थैल्पी का क्रम इस प्रकार है-
Li < B < Be < C < O < N < F < Ne
व्याख्या कीजिए कि-
(i) Be की ΔiH, B से अधिक क्यों है?
(ii) O की ΔiH, N से कम क्यों है?

उत्तर:
(i) Be (बेरिलियम) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² है। यह पूर्ण भरे हुए 2s-उपकोश वाला स्थायी विन्यास है। B (बोरॉन) का विन्यास 1s² 2s² 2p¹ है। Be से एक इलेक्ट्रॉन (स्थायी 2s² से) निकालना B से एक इलेक्ट्रॉन (अपेक्षाकृत अस्थिर 2p¹ से) निकालने की तुलना में अधिक ऊर्जा लेता है। इसलिए Be की प्रथम आयनन एन्थैल्पी B से अधिक है।
(ii) N (नाइट्रोजन) का विन्यास 1s² 2s² 2p³ है। यह अर्ध-भरे हुए p-उपकोश (2p³) का स्थायी विन्यास है। O (ऑक्सीजन) का विन्यास 1s² 2s² 2p⁴ है। O में एक p-कक्षक में इलेक्ट्रॉन युग्म बन जाता है, जिससे इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण बढ़ जाता है। इस प्रतिकर्षण के कारण O से एक इलेक्ट्रॉन निकालना N की तुलना में अपेक्षाकृत आसान हो जाता है। इसलिए O की प्रथम आयनन एन्थैल्पी N से कम है।

प्रश्न 3.17. आप इस तथ्य की व्याख्या किस प्रकार करेंगे कि सोडियम की प्रथम आयनन एन्थैल्पी मैग्नीशियम की आयनन एन्थैल्पी से कम है, किन्तु इसकी द्वितीय आयनन एन्थैल्पी मैग्नीशियम की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी से अधिक है?

उत्तर:
प्रथम आयनन एन्थैल्पी: Na (1s² 2s² 2p⁶ 3s¹) से एक इलेक्ट्रॉन (3s¹) निकालना Mg (1s² 2s² 2p⁶ 3s²) से एक इलेक्ट्रॉन (3s² में से एक) निकालने की तुलना में आसान है, क्योंकि Mg का नाभिकीय आवेश (Z=12) Na (Z=11) से अधिक है और उसका 3s-उपकोश पूर्ण भरा है। अतः Na की प्रथम आयनन एन्थैल्पी Mg से कम है।
द्वितीय आयनन एन्थैल्पी: Na⁺ (1s² 2s² 2p⁶) का विन्यास नियॉन जैसी उत्कृष्ट गैस का स्थायी विन्यास है। इससे दूसरा इलेक्ट्रॉन निकालना बहुत कठिन (अधिक ऊर्जा लेने वाला) है। दूसरी ओर, Mg⁺ (1s² 2s² 2p⁶ 3s¹) का विन्यास Na के समान है, जिससे दूसरा इलेक्ट्रॉन (3s¹) निकालना अपेक्षाकृत आसान है। इसलिए Na की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी Mg की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी से अधिक है।

प्रश्न 3.18. मुख्य समूह तत्वों में आयनन एन्थैल्पी के किसी समूह में नीचे की ओर कम होने के कारक कौन-से हैं?

उत्तर: किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी घटती है। इसके प्रमुख कारण हैं:

  1. परमाणु आकार में वृद्धि: नए कोशों के जुड़ने से नाभिक और बाह्य इलेक्ट्रॉन के बीच की दूरी बढ़ जाती है, जिससे आकर्षण बल कम हो जाता है।
  2. आवरण प्रभाव (Shielding Effect) में वृद्धि: आंतरिक कोशों के इलेक्ट्रॉन, बाह्य इलेक्ट्रॉन पर नाभिक के आकर्षण बल को कम कर देते हैं। नीचे जाने पर आंतरिक कोश बढ़ते हैं, जिससे यह प्रभाव बढ़ जाता है और बाह्य इलेक्ट्रॉन ढीले बंधे रहते हैं।
इन दोनों कारकों का प्रभाव नाभिकीय आवेश में वृद्धि के प्रभाव से अधिक होता है, जिसके परिणामस्वरूप आयनन एन्थैल्पी घटती है।

प्रश्न 3.19. वर्ग 13 के तत्वों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मान (kJ mol⁻¹ में) इस प्रकार हैं-
B: 801, Al: 577, Ga: 579, In: 558, Tl: 589
सामान्य प्रवृत्ति से इस विचलन की व्याख्या आप किस प्रकार करेंगे?

उत्तर: सामान्यतः वर्ग में नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी घटनी चाहिए। यहाँ B से Al तक तो घट रही है, लेकिन Al (577) की तुलना में Ga (579) की आयनन एन्थैल्पी थोड़ी अधिक है और Tl (589) की In (558) से अधिक है। यह विचलन d- तथा f- इलेक्ट्रॉनों के दुर्बल परिरक्षण प्रभाव (Poor Shielding Effect) के कारण है। Ga और In, d-ब्लॉक तत्वों के बाद आते हैं, और Tl, f-ब्लॉक (लैन्थेनाइड) तत्वों के बाद आता है। d और f इलेक्ट्रॉन नाभिकीय आवेश को प्रभावी ढंग से परिरक्षित नहीं कर पाते। इसलिए, Ga और Tl के बाह्य इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी नाभिकीय आवेश अपेक्षा से अधिक होता है, जिससे उन्हें निकालना कठिन (अधिक ऊर्जा लेने वाला) हो जाता है।

प्रश्न 3.20. तत्वों के निम्नलिखित युग्मों में किस तत्व की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक ऋणात्मक होगी?
(i) O या F (ii) F या Cl

उत्तर: अधिक ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का अर्थ है इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति अधिक है। (i) F (फ्लोरीन) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी O (ऑक्सीजन) से अधिक ऋणात्मक होगी। F का परमाणु आकार छोटा है और उच्च नाभिकीय आवेश के कारण यह इलेक्ट्रॉन को दृढ़ता से आकर्षित करता है। (ii) Cl (क्लोरीन) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी F से कम ऋणात्मक (या कम ऋणात्मक) होती है। हालाँकि F सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व है, लेकिन इसके छोटे आकार के कारण नए इलेक्ट्रॉन के प्रवेश पर अधिक प्रतिकर्षण होता है, जबकि Cl का आकार बड़ा होने से यह प्रतिकर्षण कम होता है। इसलिए, गैसीय अवस्था में Cl की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी F से अधिक ऋणात्मक होती है।

प्रश्न 3.21. आप क्या सोचते हैं कि O की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी प्रथम इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी के समान धनात्मक, अधिक ऋणात्मक या कम ऋणात्मक होगी? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।

उत्तर: O की द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी धनात्मक होगी। कारण: O (ऑक्सीजन) का विन्यास 1s² 2s² 2p⁴ है। पहला इलेक्ट्रॉन जोड़ने पर O⁻ आयन बनता है (O + e⁻ → O⁻)। यह प्रक्रिया ऊर्जा मुक्त करती है (ऋणात्मक एन्थैल्पी)। लेकिन, O⁻ आयन पर पहले से ही एक ऋणात्मक आवेश है। दूसरा इलेक्ट्रॉन (O⁻ + e⁻ → O²⁻) जोड़ने पर दो ऋणावेशित कणों के बीच प्रबल विकर्षण बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। इसके लिए ऊर्जा की आपूर्ति करनी पड़ती है, अर्थात यह प्रक्रिया ऊर्जा अवशोषित करती है। इसलिए द्वितीय इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान धनात्मक होता है।

प्रश्न 3.22. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी और विद्युत ऋणात्मकता में मूल अन्तर क्या है?

उत्तर:

  • इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी एक मात्रात्मक एवं प्रायोगिक राशि है। यह एक विलगित गैसीय परमाणु द्वारा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर होने वाला ऊर्जा परिवर्तन है।
  • विद्युत ऋणात्मकता एक गुणात्मक एवं सापेक्ष माप है। यह एक रासायनिक आबंध में सहभागी परमाणु द्वारा साझा इलेक्ट

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