UP Board class 11 Chemistry 11. P - ब्लॉक के तत्व is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 11 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर-
(क) तत्त्व एवं उनकी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ:
| तत्त्व | ऑक्सीकरण अवस्था |
|---|---|
| बोरॉन (B) | +3 |
| ऐलुमीनियम (Al) | +3 |
| गैलियम (Ga) | +3, +1 |
| इण्डियम (In) | +3, +1 |
| थैलियम (Tl) | +1 |
उपर्युक्त तत्त्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns² np¹ है। वर्ग के नीचे की ओर जाते समय, s-कक्षक में उपस्थित इलेक्ट्रॉन बंधन में भाग नहीं लेते हैं, जो अक्रिय युग्म कहलाते हैं। यह प्रभाव अक्रिय युग्म प्रभाव कहलाता है; इसलिए वर्ग 13 में नीचे की ओर जाते समय ऑक्सीकरण अवस्था +1 प्रभावी होती है।
(ख) तत्त्व एवं उनकी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ:
| तत्त्व | ऑक्सीकरण अवस्था |
|---|---|
| कार्बन (C) | +4 |
| सिलिकॉन (Si) | +4 |
| जर्मेनियम (Ge) | +4, +2 |
| टिन (Sn) | +4, +2 |
| लेड (Pb) | +2, +4 |
यह भी अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण है। समूह में नीचे की ओर जाते समय ns² इलेक्ट्रॉन अक्रिय होते हैं, जो आबंध में भाग नहीं लेते हैं। अतः +2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रभावी है।
उत्तर-
BCl₃ अधिक स्थाई है, क्योंकि अक्रिय युग्म प्रभाव BCl₃ में नहीं है। इस प्रभाव के कारण थैलियम धातु TlCl (Tl⁺) बनाने में अधिक सक्षम है न कि TlCl₃ बनाने में, क्योंकि इसकी ऑक्सीकरण अवस्था +1 अधिक प्रभावी है।
उत्तर-
BF₃ की संरचना में केन्द्रीय परमाणु B की अष्टक पूर्ण नहीं है। अतः यह एक इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक है। यह इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर सकता है, इसलिए यह एक लूइस अम्ल है।
उत्तर-
BCl₃ जल-अपघटन करके बोरिक अम्ल एवं हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनाता है।
उत्तर-
यह एक प्रोटॉनिक अम्ल नहीं है, परन्तु एक लूइस अम्ल है, क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करता है।
उत्तर-
बोरिक अम्ल गर्म करने पर जल का त्याग करता है और अन्त में बोरॉन ट्राइऑक्साइड (B₂O₃) में परिवर्तित हो जाता है।
उत्तर-
BH₃: BH₃ अणु में B की संकरण स्थिति sp² है। यह त्रिकोणीय समतलीय आकृति का होता है।
BH₄⁻: BH₄⁻ आयन में, B sp³ संकरण अवस्था में है और यह आयन चतुष्फलकीय आकृति का होता है।
उत्तर-
ऐलुमीनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) तथा हाइड्रॉक्साइड [Al(OH)₃] दोनों अम्लीय तथा क्षारकीय ऑक्साइड/हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया करते हैं।
उत्तर-
इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक वे होते हैं जिनमें केन्द्रीय परमाणु का अष्टक पूर्ण नहीं होता है, अर्थात् उनके बाह्य कक्ष में 8 इलेक्ट्रॉन नहीं होते। अतः इन्हें अपना अष्टक पूर्ण करने के लिए इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
BCl₃ एक इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक है क्योंकि B के बाह्य कक्ष में केवल 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
SiCl₄ इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक नहीं है क्योंकि Si के बाह्य कक्ष में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं (अष्टक पूर्ण)।
उत्तर-
कार्बोनेट आयन (CO₃²⁻) की अनुनादी संरचनाएँ:
उत्तर-
(क) COCl₂ (फॉस्जीन) में कार्बन sp² संकरण दर्शाता है।
(ख) हीरे में कार्बन sp³ संकरण प्रदर्शित करता है।
(ग) ग्रेफाइट में कार्बन sp² संकरण प्रदर्शित करता है।
उत्तर-
| गुण | हीरा | ग्रेफाइट |
|---|---|---|
| संकरण | sp³ | sp² |
| संरचना | त्रिआयामी, कठोर जालक | द्विआयामी परतदार संरचना |
| विद्युत चालकता | कुचालक | चालक (मुक्त इलेक्ट्रॉन के कारण) |
| कठोरता | अत्यंत कठोर | मुलायम तथा चिकना |
| उपयोग | अपघर्षक, आभूषण | स्नेहक, पेंसिल, इलेक्ट्रोड |
उत्तर-
(क) लेड (II) क्लोराइड (PbCl₂), क्लोरीन (Cl₂) से सीधे अभिक्रिया नहीं करता है। PbCl₄ प्रबल ऑक्सीकारक है। गर्म करने पर PbCl₄ वियोजित होकर PbCl₂ एवं Cl₂ बनाता है।
उत्तर-
BH₃ अणु में बोरॉन sp² संकरण अवस्था में है और यह त्रिकोणीय समतलीय संरचना रखता है। sp² संकरण के कारण BH₃ अणु में B-H आबंध दूरी (130 pm) कम है। BH₄⁻ आयन में बोरॉन sp³ संकरण अवस्था दर्शाता है। अणु चतुष्फलकीय आकृति का होने के कारण तथा sp³ संकरण के कारण B-H आबंध लम्बाई (143 pm) अधिक है।
उत्तर-
BCl₃ अणु की sp² संकरण के कारण त्रिकोणीय समतलीय संरचना है। हालांकि अकेले B-Cl आबंध की द्विध्रुव प्रकृति है, परन्तु BCl₃ अणु का कुल द्विध्रुव आघूर्ण शून्य है, क्योंकि तीनों B-Cl आबंधों के द्विध्रुव आघूर्ण एक-दूसरे के प्रभाव को निरस्त कर देते हैं।
उत्तर-
HF में AlF₃ अघुलनशील है; लेकिन NaF मिलाने पर यह Na₃[AlF₆] (क्रायोलाइट) बनाता है जो विलेय है।
उत्तर-
CO की अत्यंत विषैली प्रकृति हीमोग्लोबिन के साथ एक संकुल बनाने की इसकी योग्यता के कारण होती है, जो ऑक्सीजन-हीमोग्लोबिन संकुल से 300 गुना अधिक स्थायी होती है। यह लाल रक्त कणिकाओं में उपस्थित हीमोग्लोबिन को शरीर में ऑक्सीजन-प्रवाह से रोकती है। अंततः इसका परिणाम मृत्यु के रूप में होता है।
उत्तर-
CO₂ गैस विषैली नहीं है। वायुमंडल में सामान्यतः इसका 0.03% आयतन होता है। यह गैस प्रकाश-संश्लेषण में उपयोगी है। लेकिन जीवाश्म ईंधन के बढ़ते दहन तथा सीमेंट-निर्माण के लिए चूना पत्थर के विघटन के कारण वायुमंडल में CO₂ की मात्रा बढ़ती है। CO₂ एक ग्रीनहाउस गैस है जो पृथ्वी से परावर्तित अवरक्त विकिरण को अवशोषित करके वायुमंडल के ताप में वृद्धि करती है। इसे हरित गृह-प्रभाव कहते हैं। इसके अनेक दुष्परिणाम सामने आए हैं।
उत्तर-
डाइबोरेन (B₂H₆) की संरचना: इसमें सिरे वाले चार हाइड्रोजन परमाणु (टर्मिनल H) तथा दो बोरॉन परमाणु एक ही तल में होते हैं। इस तल के ऊपर तथा नीचे दो सेतु बंध हाइड्रोजन परमाणु होते हैं। सिरे वाले B-H बंध सामान्य द्विकेन्द्रीय-द्विइलेक्ट्रॉन बंध बनाते हैं, जबकि दो सेतुबंध (B-H-B) बंध भिन्न प्रकार के होते हैं, जिन्हें त्रिकेन्द्रीय द्विइलेक्ट्रॉन बंध कहते हैं।
बोरिक अम्ल (H₃BO₃) की संरचना: ऑर्थो-बोरिक अम्ल की परतीय संरचना होती है, जहाँ BO₃ की इकाइयाँ हाइड्रोजन बंध द्वारा जुड़ी रहती हैं, जिससे एक परतदार संरचना बनती है।
उत्तर-
(क) बोरेक्स गर्म करने पर जल अणु त्यागता है और अधिक गर्म करने पर यह पारदर्शक द्रव (ग्लास) में बदल जाता है।
उत्तर-
(क) यह रोश-मूलर विधि है जिसमें मेथिल क्लोरोसिलेन्स बनते हैं।
उत्तर-
(क) सान्द्र HNO₃, Al पर एक सुरक्षात्मक ऑक्साइड परत (Al₂O₃) बना देती है, जिससे यह और अधिक क्रिया नहीं करता।
(ख) Al तथा NaOH के बीच अभिक्रिया से H₂ गैस उत्पन्न होती है जो दाब बनाकर अपवाहिका को साफ करती है।
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