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UP Board class 11 Chemistry (11. P - ब्लॉक के तत्व) solution PDF

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UP Board class 11 Chemistry (11. P - ब्लॉक के तत्व) solution

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Chapter-11: p-ब्लॉक के तत्व (The p-Block Elements)

प्रश्न 11.1. (क) 8 से 11 तक तथा (ख) C से Pb तक की ऑक्सीकरण अवस्थाओं की भिन्नता के क्रम की व्याख्या कीजिए।

उत्तर-
(क) तत्त्व एवं उनकी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ:

तत्त्वऑक्सीकरण अवस्था
बोरॉन (B)+3
ऐलुमीनियम (Al)+3
गैलियम (Ga)+3, +1
इण्डियम (In)+3, +1
थैलियम (Tl)+1

उपर्युक्त तत्त्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns² np¹ है। वर्ग के नीचे की ओर जाते समय, s-कक्षक में उपस्थित इलेक्ट्रॉन बंधन में भाग नहीं लेते हैं, जो अक्रिय युग्म कहलाते हैं। यह प्रभाव अक्रिय युग्म प्रभाव कहलाता है; इसलिए वर्ग 13 में नीचे की ओर जाते समय ऑक्सीकरण अवस्था +1 प्रभावी होती है।

(ख) तत्त्व एवं उनकी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ:

तत्त्वऑक्सीकरण अवस्था
कार्बन (C)+4
सिलिकॉन (Si)+4
जर्मेनियम (Ge)+4, +2
टिन (Sn)+4, +2
लेड (Pb)+2, +4

यह भी अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण है। समूह में नीचे की ओर जाते समय ns² इलेक्ट्रॉन अक्रिय होते हैं, जो आबंध में भाग नहीं लेते हैं। अतः +2 ऑक्सीकरण अवस्था प्रभावी है।

प्रश्न 11.2. BCl₃ की तुलना में TlCl₃ के उच्च स्थायित्व को आप कैसे समझाएँगे?

उत्तर-
BCl₃ अधिक स्थाई है, क्योंकि अक्रिय युग्म प्रभाव BCl₃ में नहीं है। इस प्रभाव के कारण थैलियम धातु TlCl (Tl⁺) बनाने में अधिक सक्षम है न कि TlCl₃ बनाने में, क्योंकि इसकी ऑक्सीकरण अवस्था +1 अधिक प्रभावी है।

प्रश्न 11.3. बोरॉन ट्राइफ्लुओराइड (BF₃) लूईस अम्ल के समान व्यवहार क्यों प्रदर्शित करता है?

उत्तर-
BF₃ की संरचना में केन्द्रीय परमाणु B की अष्टक पूर्ण नहीं है। अतः यह एक इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक है। यह इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर सकता है, इसलिए यह एक लूइस अम्ल है।

BF₃ + :NH₃ → F₃B←NH₃

प्रश्न 11.4. BCl₃ तथा CCl₄ यौगिकों का उदाहरण देते हुए जल के प्रति इनके व्यवहार के औचित्य को समझाइए।

उत्तर-
BCl₃ जल-अपघटन करके बोरिक अम्ल एवं हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनाता है।

BCl₃ + 3H₂O → H₃BO₃ + 3HCl
HCl बनने के कारण BCl₃ फ्यूम के रूप में वायु में उड़ जाता है। दूसरी ओर CCl₄ का जल-अपघटन नहीं हो सकता है, क्योंकि कार्बन परमाणु में d-कक्षक उपस्थित नहीं है।

प्रश्न 11.5. क्या बोरिक अम्ल प्रोटॉनिक अम्ल है? समझाइए।

उत्तर-
यह एक प्रोटॉनिक अम्ल नहीं है, परन्तु एक लूइस अम्ल है, क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करता है।

B(OH)₃ + 2H₂O → [B(OH)₄]⁻ + H₃O⁺

प्रश्न 11.6. क्या होता है, जब बोरिक अम्ल को गर्म किया जाता है?

उत्तर-
बोरिक अम्ल गर्म करने पर जल का त्याग करता है और अन्त में बोरॉन ट्राइऑक्साइड (B₂O₃) में परिवर्तित हो जाता है।

H₃BO₃ → HBO₂ + H₂O
4HBO₂ → B₂O₃ + H₂O

प्रश्न 11.7. BH₃ तथा BH₄⁻ की आकृति की व्याख्या कीजिए। इन स्पीशीज में बोरॉन के संकरण को निर्दिष्ट कीजिए।

उत्तर-
BH₃: BH₃ अणु में B की संकरण स्थिति sp² है। यह त्रिकोणीय समतलीय आकृति का होता है।
BH₄⁻: BH₄⁻ आयन में, B sp³ संकरण अवस्था में है और यह आयन चतुष्फलकीय आकृति का होता है।

प्रश्न 11.8. ऐलुमीनियम के उभयधर्मी व्यवहार दर्शाने वाली अभिक्रियाएँ दीजिए।

उत्तर-
ऐलुमीनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) तथा हाइड्रॉक्साइड [Al(OH)₃] दोनों अम्लीय तथा क्षारकीय ऑक्साइड/हाइड्रॉक्साइड के साथ अभिक्रिया करते हैं।

Al₂O₃ + 6HCl → 2AlCl₃ + 3H₂O
Al₂O₃ + 2NaOH → 2NaAlO₂ + H₂O
Al(OH)₃ + 3HCl → AlCl₃ + 3H₂O
Al(OH)₃ + NaOH → Na[Al(OH)₄]

प्रश्न 11.9. इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक क्या होते हैं? क्या BCl₃ तथा SiCl₄ इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक हैं? समझाइए।

उत्तर-
इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक वे होते हैं जिनमें केन्द्रीय परमाणु का अष्टक पूर्ण नहीं होता है, अर्थात् उनके बाह्य कक्ष में 8 इलेक्ट्रॉन नहीं होते। अतः इन्हें अपना अष्टक पूर्ण करने के लिए इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
BCl₃ एक इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक है क्योंकि B के बाह्य कक्ष में केवल 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
SiCl₄ इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक नहीं है क्योंकि Si के बाह्य कक्ष में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं (अष्टक पूर्ण)।

प्रश्न 11.10. CO₃²⁻ तथा HCO₃⁻ की अनुनादी संरचनाएँ लिखिए।

उत्तर-
कार्बोनेट आयन (CO₃²⁻) की अनुनादी संरचनाएँ:

CO3^2- Resonance

बाइकार्बोनेट आयन (HCO₃⁻) की अनुनादी संरचनाएँ:
HCO3^- Resonance

प्रश्न 11.11. (क) COCl₂, (ख) हीरा तथा (ग) ग्रेफाइट में कार्बन की संकरण अवस्था क्या है?

उत्तर-
(क) COCl₂ (फॉस्जीन) में कार्बन sp² संकरण दर्शाता है।
(ख) हीरे में कार्बन sp³ संकरण प्रदर्शित करता है।
(ग) ग्रेफाइट में कार्बन sp² संकरण प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 11.12. संरचना के आधार पर हीरा तथा ग्रेफाइट के गुणों में निहित भिन्नता को समझाइए।

उत्तर-

गुणहीराग्रेफाइट
संकरणsp³sp²
संरचनात्रिआयामी, कठोर जालकद्विआयामी परतदार संरचना
विद्युत चालकताकुचालकचालक (मुक्त इलेक्ट्रॉन के कारण)
कठोरताअत्यंत कठोरमुलायम तथा चिकना
उपयोगअपघर्षक, आभूषणस्नेहक, पेंसिल, इलेक्ट्रोड

प्रश्न 11.13. निम्नलिखित कथनों को युक्तिसंगत कीजिए तथा रासायनिक समीकरण दीजिए :
(क) लेड (II) क्लोराइड (PbCl₂) से Cl₂ की क्रिया करके PbCl₄ देता है।
(ख) लेड (IV) क्लोराइड ऊष्मा के प्रति अत्यधिक अस्थायी है।
(ग) लेड एक आयोडाइड PbI₄ नहीं बनाता है।

उत्तर-
(क) लेड (II) क्लोराइड (PbCl₂), क्लोरीन (Cl₂) से सीधे अभिक्रिया नहीं करता है। PbCl₄ प्रबल ऑक्सीकारक है। गर्म करने पर PbCl₄ वियोजित होकर PbCl₂ एवं Cl₂ बनाता है।

PbCl₄ → PbCl₂ + Cl₂
(ख) PbCl₄ की तुलना में PbCl₂ ऊष्मा के प्रति अधिक स्थाई है।
(ग) PbI₄ नहीं बनता क्योंकि Pb⁴+ आयन I⁻ आयन को ऑक्सीकृत कर देता है तथा Pb⁴+ का आकार बड़ा होने के कारण I⁻ आयनों को धारण नहीं कर पाता।

प्रश्न 11.14. BH₃ में तथा BH₄⁻ में B-H बंध लम्बाई क्रमश: 130 pm तथा 143 pm होने के कारण बताइए।

उत्तर-
BH₃ अणु में बोरॉन sp² संकरण अवस्था में है और यह त्रिकोणीय समतलीय संरचना रखता है। sp² संकरण के कारण BH₃ अणु में B-H आबंध दूरी (130 pm) कम है। BH₄⁻ आयन में बोरॉन sp³ संकरण अवस्था दर्शाता है। अणु चतुष्फलकीय आकृति का होने के कारण तथा sp³ संकरण के कारण B-H आबंध लम्बाई (143 pm) अधिक है।

प्रश्न 11.15. B-Cl आबंध द्विध्रुव आघूर्ण रखता है, किन्तु BCl₃ अणु का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है, क्यों?

उत्तर-
BCl₃ अणु की sp² संकरण के कारण त्रिकोणीय समतलीय संरचना है। हालांकि अकेले B-Cl आबंध की द्विध्रुव प्रकृति है, परन्तु BCl₃ अणु का कुल द्विध्रुव आघूर्ण शून्य है, क्योंकि तीनों B-Cl आबंधों के द्विध्रुव आघूर्ण एक-दूसरे के प्रभाव को निरस्त कर देते हैं।

प्रश्न 11.16. निर्जलीय HF में ऐलुमीनियम ट्राइफ्लुओराइड अविलेय है, परन्तु NaF मिलाने पर घुल जाता है। गैसीय BF₃ को प्रवाहित करने पर परिणामी विलयन में से ऐलुमीनियम ट्राइफ्लुओराइड अवक्षेपित हो जाता है। इसका कारण बताइए।

उत्तर-
HF में AlF₃ अघुलनशील है; लेकिन NaF मिलाने पर यह Na₃[AlF₆] (क्रायोलाइट) बनाता है जो विलेय है।

AlF₃ + 3NaF → Na₃[AlF₆]
इस विलयन में BF₃ प्रवाहित करने पर, BF₃ अधिक प्रबल लूइस अम्ल होने के कारण [AlF₆]³⁻ से AlF₃ को विस्थापित कर देता है, जो अवक्षेप के रूप में बाहर आ जाता है।
Na₃[AlF₆] + BF₃ → AlF₃↓ + Na₃[BF₆]

प्रश्न 11.17. CO के विषैली होने का एक कारण बताइए।

उत्तर-
CO की अत्यंत विषैली प्रकृति हीमोग्लोबिन के साथ एक संकुल बनाने की इसकी योग्यता के कारण होती है, जो ऑक्सीजन-हीमोग्लोबिन संकुल से 300 गुना अधिक स्थायी होती है। यह लाल रक्त कणिकाओं में उपस्थित हीमोग्लोबिन को शरीर में ऑक्सीजन-प्रवाह से रोकती है। अंततः इसका परिणाम मृत्यु के रूप में होता है।

प्रश्न 11.18. CO₂ गैस अधिक मात्रा पर भूमंडलीय ताप वृद्धि के लिए उत्तरदायी कैसे है?

उत्तर-
CO₂ गैस विषैली नहीं है। वायुमंडल में सामान्यतः इसका 0.03% आयतन होता है। यह गैस प्रकाश-संश्लेषण में उपयोगी है। लेकिन जीवाश्म ईंधन के बढ़ते दहन तथा सीमेंट-निर्माण के लिए चूना पत्थर के विघटन के कारण वायुमंडल में CO₂ की मात्रा बढ़ती है। CO₂ एक ग्रीनहाउस गैस है जो पृथ्वी से परावर्तित अवरक्त विकिरण को अवशोषित करके वायुमंडल के ताप में वृद्धि करती है। इसे हरित गृह-प्रभाव कहते हैं। इसके अनेक दुष्परिणाम सामने आए हैं।

प्रश्न 11.19. डाइबोरेन तथा बोरिक अम्ल की संरचना समझाइए।

उत्तर-
डाइबोरेन (B₂H₆) की संरचना: इसमें सिरे वाले चार हाइड्रोजन परमाणु (टर्मिनल H) तथा दो बोरॉन परमाणु एक ही तल में होते हैं। इस तल के ऊपर तथा नीचे दो सेतु बंध हाइड्रोजन परमाणु होते हैं। सिरे वाले B-H बंध सामान्य द्विकेन्द्रीय-द्विइलेक्ट्रॉन बंध बनाते हैं, जबकि दो सेतुबंध (B-H-B) बंध भिन्न प्रकार के होते हैं, जिन्हें त्रिकेन्द्रीय द्विइलेक्ट्रॉन बंध कहते हैं।

बोरिक अम्ल (H₃BO₃) की संरचना: ऑर्थो-बोरिक अम्ल की परतीय संरचना होती है, जहाँ BO₃ की इकाइयाँ हाइड्रोजन बंध द्वारा जुड़ी रहती हैं, जिससे एक परतदार संरचना बनती है।

प्रश्न 11.20. क्या होता है, जब-
(क) बोरेक्स को अधिक गर्म किया जाता है।
(ख) बोरिक अम्ल को जल में मिलाया जाता है।
(ग) ऐलुमीनियम की NaOH से अभिक्रिया कराई जाती है।
(घ) BF₃ की क्रिया NH₃ से की जाती है।

उत्तर-
(क) बोरेक्स गर्म करने पर जल अणु त्यागता है और अधिक गर्म करने पर यह पारदर्शक द्रव (ग्लास) में बदल जाता है।

Na₂B₄O₇·10H₂O → Na₂B₄O₇ → 2NaBO₂ + B₂O₃
(ख) बोरिक अम्ल ठंडे जल में कम घुलनशील है, परन्तु गरम जल में यह घुलनशील है। यह एक दुर्बल मोनोप्रोटिक अम्ल है जो लूइस अम्ल की भांति व्यवहार करता है।
B(OH)₃ + 2H₂O → [B(OH)₄]⁻ + H₃O⁺
(ग) ऐलुमीनियम तनु NaOH से क्रिया करके H₂ गैस बनाता है।
2Al(s) + 2NaOH(aq) + 6H₂O(l) → 2Na⁺[Al(OH)₄]⁻(aq) + 3H₂(g)
(घ) BF₃ लूइस अम्ल होने के कारण NH₃ (लूइस क्षार) से अभिक्रिया करके एक जटिल यौगिक बनाता है।
BF₃ + :NH₃ → F₃B←NH₃

प्रश्न 11.21. निम्नलिखित अभिक्रियाओं को समझाइए :
(क) कॉपर की उपस्थिति में उच्च ताप पर सिलिकॉन को मेथिल क्लोराइड के साथ गर्म किया जाता है।
(ख) सिलिकॉन डाइऑक्साइड की क्रिया हाइड्रोजन फ्लुओराइड के साथ की जाती है।
(ग) ZnO को CO के साथ गर्म किया जाता है।
(घ) जलीय ऐलुमीना की क्रिया NaOH के साथ की जाती है।

उत्तर-
(क) यह रोश-मूलर विधि है जिसमें मेथिल क्लोरोसिलेन्स बनते हैं।

2CH₃Cl + Si (Cu/570K) → (CH₃)₂SiCl₂
(ख) SiO₂, HF के साथ क्रिया करके सिलिकॉन टेट्राफ्लोराइड (SiF₄) बनाता है।
SiO₂ + 4HF → SiF₄ + 2H₂O
(ग) ZnO, CO द्वारा अपचयित होकर Zn धातु देता है।
ZnO + CO → Zn + CO₂
(घ) जलीय ऐलुमीना (Al₂O₃·xH₂O) NaOH के साथ क्रिया करके सोडियम मेटा-ऐलुमिनेट बनाता है।
Al₂O₃·xH₂O + 2NaOH → 2NaAlO₂ + (x+1)H₂O

प्रश्न 11.22. कारण बताइए
(क) सान्द्र HNO₃ का परिवहन ऐलुमीनियम के पात्र द्वारा किया जा सकता है।
(ख) तनु NaOH तथा ऐलुमीनियम के टुकड़ों के मिश्रण का प्रयोग अपवाहिका खोलने के लिए किया जाता है।
(ग) ग्रैफाइट शुष्क स्नेहक के रूप में प्रयुक्त होता है।
(घ) हीरा का प्रयोग अपघर्षक के रूप में होता है।
(ङ) वायुयान बनाने में ऐलुमीनियम मिश्रधातु का उपयोग होता है।
(च) जल को एलुमीनियम पात्र में पूरी रात नहीं रखना चाहिए।
(छ) संचरण केबल बनाने में ऐलुमीनियम तार का प्रयोग होता है।

उत्तर-
(क) सान्द्र HNO₃, Al पर एक सुरक्षात्मक ऑक्साइड परत (Al₂O₃) बना देती है, जिससे यह और अधिक क्रिया नहीं करता।
(ख) Al तथा NaOH के बीच अभिक्रिया से H₂ गैस उत्पन्न होती है जो दाब बनाकर अपवाहिका को साफ करती है।

2Al + 2NaOH + 6H₂O → 2Na[Al(OH)₄] + 3H₂
(ग) ग्रेफाइट की परतदार संरचना के कारण यह चिकना होता है तथा उच्च ताप पर भी स्थिर रहता है।
(घ) हीरा अत्यंत कठोर होता है, इसलिए इसका उपयोग अपघर्षक के रूप में होता है।
(ङ) ऐलुमीनियम मिश्रधातु हल्की, मजबूत तथा संक्षारण-रोध

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2. परमाणु की संरचना
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13. हाइड्रोकार्बन
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