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UP Board Class 10 Science (10. प्रकाश परावर्तन तथा अपवर्तन) solution PDF

UP Board Class 10 Science 10. प्रकाश परावर्तन तथा अपवर्तन is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 10 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.

UP Board Class 10 Science (10. प्रकाश परावर्तन तथा अपवर्तन) solution

UP Board Class 10 Science 10. प्रकाश परावर्तन तथा अपवर्तन Hindi Medium Solutions - PDF

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10. प्रकाश-परावर्तन एवं अपवर्तन

पाठ-गत प्रश्नोत्तर पृष्ठ संख्या 185 (01. अवतल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए।

उत्तर: अवतल दर्पण का मुख्य फोकस वह विशेष बिंदु होता है जो मुख्य अक्ष पर स्थित होता है। जब मुख्य अक्ष के समानांतर चलने वाली प्रकाश किरणें दर्पण की सतह से परावर्तित होती हैं, तो वे सभी इसी बिंदु पर मिलती हैं या इससे आती हुई प्रतीत होती हैं। यह बिंदु दर्पण के ध्रुव (P) और वक्रता केंद्र (C) के बीच में स्थित होता है। इसे 'F' से प्रदर्शित किया जाता है।

(02. एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20 ०॥ है। इसकी फोकस दूरी क्‍या होगी?

उत्तर: किसी भी गोलीय दर्पण के लिए, फोकस दूरी (f) और वक्रता त्रिज्या (R) में एक सरल संबंध होता है: फोकस दूरी, वक्रता त्रिज्या की आधी होती है।

सूत्र: f = R / 2

यहाँ, वक्रता त्रिज्या (R) = 20 cm
फोकस दूरी (f) = 20 / 2 = 10 cm

अतः दिए गए गोलीय दर्पण की फोकस दूरी 10 cm होगी।

(03. उस दर्पण का नाम बताइए जो बिंब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिंब बना सके।

उत्तर: अवतल दर्पण बिंब का सीधा तथा आवर्धित (बड़ा) प्रतिबिंब बना सकता है। यह तब होता है जब बिंब को दर्पण के ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच में रखा जाता है। इस स्थिति में बना प्रतिबिंब दर्पण के पीछे, आभासी, सीधा और बिंब से बड़ा बनता है।

(04. हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्‍यों देते हैं?

उत्तर: वाहनों में पीछे का दृश्य देखने के लिए उत्तल दर्पण को प्राथमिकता निम्नलिखित कारणों से दी जाती है:

  1. सदैव सीधा प्रतिबिंब: उत्तल दर्पण हमेशा सीधा प्रतिबिंब बनाता है, भले ही वह छोटा हो। इससे ड्राइवर को पीछे की वस्तुओं को सही अभिविन्यास में देखने में आसानी होती है।
  2. विस्तृत दृष्टि क्षेत्र: उत्तल दर्पण बाहर की ओर उभरा हुआ होता है, जिसके कारण इसका दृष्टि क्षेत्र बहुत अधिक होता है। ड्राइवर अपने पीछे के बहुत बड़े क्षेत्र (जैसे अन्य वाहन, सड़क के किनारे, आदि) को एक ही नजर में देख सकता है, जो सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इन्हीं गुणों के कारण समतल दर्पण की तुलना में उत्तल दर्पण वाहनों के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं।


पृष्ठ संखया 188 (01. उस उत्तल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी वक्रता-त्रिज्या 32 ८॥ है।

उत्तर: उत्तल दर्पण के लिए भी फोकस दूरी (f) और वक्रता त्रिज्या (R) का वही संबंध होता है। हालाँकि, उत्तल दर्पण की फोकस दूरी को धनात्मक माना जाता है क्योंकि इसका फोकस दर्पण के पीछे होता है।

सूत्र: f = R / 2

यहाँ, वक्रता त्रिज्या (R) = 32 cm
फोकस दूरी (f) = 32 / 2 = 16 cm

अतः उस उत्तल दर्पण की फोकस दूरी 16 cm होगी।

02. कोई अवतल दर्पण आपने सामने 10 ८॥ दूरी पर रखे किसी बिंब का तीन गुणा आवर्धित (बड़ा) वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है। प्रतिबिंब दर्पण से कितनी दूरी पर है।

उत्तर: दिया गया है:

  • बिंब की दूरी (u) = -10 cm (चिह्न परिपाटी के अनुसार ऋणात्मक)
  • आवर्धन (m) = -3 (चूँकि प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा है, इसलिए आवर्धन ऋणात्मक होगा)
आवर्धन का सूत्र है: m = -v / u

मान रखने पर:
-3 = -v / (-10)
-3 = v / 10
v = -3 × 10
v = -30 cm

ऋणात्मक चिह्न बताता है कि प्रतिबिंब दर्पण के सामने (वास्तविक प्रतिबिंब की तरफ) बना है। अतः प्रतिबिंब दर्पण से 30 cm की दूरी पर स्थित है।


पृष्ठ संखया 194 (01. वायु में गमन करती प्रकाश की एक किरण जल में तिरछी प्रवेश करती है। क्या प्रकाश किरण अभिलंब की ओर झुकेगी अथवा अभिलंब से दूर हटेगी ? बताइए क्यों?

उत्तर: प्रकाश किरण अभिलंब की ओर झुकेगी

कारण: जब प्रकाश किरण विरल माध्यम (जैसे वायु) से सघन माध्यम (जैसे जल) में तिरछी प्रवेश करती है, तो वह अपने पथ से विचलित होकर अभिलंब की ओर मुड़ जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सघन माध्यम में प्रकाश की चाल कम हो जाती है।

(१2. प्रकाश वायु से 1.50 अपवर्तनांक की काँच की प्लेट में प्रवेश करता है। काँच में प्रकाश की चाल कितनी है? निर्वात में प्रकाश की चाल 3 » 10* ॥॥/5 है।

उत्तर: दिया गया है:

  • काँच का अपवर्तनांक (ng) = 1.50
  • निर्वात/वायु में प्रकाश की चाल (c) = 3 × 108 m/s
किसी माध्यम का अपवर्तनांक, निर्वात में प्रकाश की चाल और उस माध्यम में प्रकाश की चाल के अनुपात के बराबर होता है।

सूत्र: n = c / v

यहाँ, v काँच में प्रकाश की चाल है।
1.50 = (3 × 108) / v
v = (3 × 108) / 1.50
v = 2 × 108 m/s

अतः काँच में प्रकाश की चाल 2 × 108 मीटर/सेकंड होगी।

(03. सारणी 10.3 से अधिकतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को ज्ञात कीजिए। न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को भी ज्ञात कीजिए।

उत्तर: सारणी 10.3 के आधार पर:

  • अधिकतम प्रकाशिक घनत्व वाला माध्यम: हीरा है, क्योंकि इसका अपवर्तनांक सबसे अधिक (लगभग 2.42) है। अधिक अपवर्तनांक का अर्थ है अधिक प्रकाशिक घनत्व।
  • न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व वाला माध्यम: वायु है, क्योंकि इसका अपवर्तनांक सबसे कम (लगभग 1.0003) है।

4. आपको किरोसिन, तारपीन का तेल तथा जल दिए गए हैं। इनमें से किसमें प्रकाश सबसे अधिक तीव्र गति से चलता है? सारणी 10.3 में दिए गए आँकड़ों का उपयोग कीजिए।

उत्तर: सारणी 10.3 से इन माध्यमों के अपवर्तनांक इस प्रकार हैं:

  • किरोसिन का अपवर्तनांक ≈ 1.44
  • तारपीन के तेल का अपवर्तनांक ≈ 1.47
  • जल का अपवर्तनांक ≈ 1.33
हम जानते हैं कि किसी माध्यम में प्रकाश की चाल, उसके अपवर्तनांक के व्युत्क्रमानुपाती होती है। अर्थात, जितना कम अपवर्तनांक, उतनी अधिक चाल

दिए गए तीनों में जल का अपवर्तनांक (1.33) सबसे कम है। इसलिए, जल में प्रकाश की चाल सबसे अधिक तीव्र (सबसे अधिक) होगी।

(05. हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन का क्या अभिप्राय है?

उत्तर: "हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है" इस कथन का अभिप्राय है:

  1. हीरा एक अत्यधिक सघन प्रकाशिक माध्यम है।
  2. निर्वात में प्रकाश की चाल, हीरे में प्रकाश की चाल से 2.42 गुना अधिक है। अर्थात, हीरे में प्रकाश की चाल बहुत कम होती है।
  3. यह उच्च अपवर्तनांक हीरे को चमकदार बनाता है, क्योंकि प्रकाश इसमें से गुजरते समय अधिक मुड़ता है और पूर्ण आंतरिक परावर्तन की अधिक संभावना बनती है, जिससे वह जगमगाता दिखाई देता है।


पृष्ठ संख्या 203 (01. किसी लेंस की 1 डाइऑप्टर क्षमता को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: लेंस की क्षमता उसकी प्रकाश किरणों को अभिसरित (एकत्रित) या अपसरित (फैलाने) की क्षमता का माप है। इसे डाइऑप्टर (D) में मापा जाता है।

1 डाइऑप्टर उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर होती है।

सूत्र के रूप में: क्षमता (P) = 1 / फोकस दूरी (मीटर में)। इसलिए, यदि f = 1 m, तो P = 1/1 = 1 D.

(02. कोई उत्तल लेंस किसी सुई का वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिंब उस लेंस से 50 ०॥ दूर बनाता है। यह सुई, उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखी है, यदि इसका प्रतिबिंब उसी साइज का बन रहा है जिस साइज का बिंब है। लेंस की क्षमता भी ज्ञात कीजिए।

उत्तर: दिया गया है:

  • प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा है, तथा बिंब के आकार के बराबर है।
  • प्रतिबिंब की दूरी (v) = +50 cm (वास्तविक प्रतिबिंब के लिए धनात्मक)
  • आवर्धन (m) = -1 (चूँकि प्रतिबिंब उल्टा और समान आकार का है)
चरण 1: बिंब की दूरी (u) ज्ञात करना
आवर्धन सूत्र: m = v/u
-1 = 50 / u
u = -50 cm
अतः सुई (बिंब) को लेंस के सामने 50 cm की दूरी पर रखा गया है।

चरण 2: फोकस दूरी (f) ज्ञात करना
लेंस सूत्र: 1/f = 1/v - 1/u
1/f = 1/50 - 1/(-50)
1/f = 1/50 + 1/50 = 2/50 = 1/25
f = +25 cm = 0.25 m

चरण 3: लेंस की क्षमता (P) ज्ञात करना
P = 1/f (मीटर में) = 1 / 0.25 = +4 D

अतः सुई लेंस से 50 cm दूर है और लेंस की क्षमता +4 डाइऑप्टर है।

(3. 2 ॥ फोकस दूरी वाले किसी अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।

उत्तर: अवतल (अपसारी) लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक मानी जाती है।

दिया है: फोकस दूरी (f) = -2 m

क्षमता (P) = 1 / f (मीटर में)
P = 1 / (-2)
P = -0.5 D

अतः अवतल लेंस की क्षमता -0.5 डाइऑप्टर है। ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि लेंस अपसारी है।

अभ्यास

(01. निम्न में से कौन-सा पदार्थ लेंस बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता?
(a) जल (9) काँच (०) प्लास्टिक (0) मिट्टी

उत्तर: (d) मिट्टी

कारण: लेंस बनाने के लिए ऐसा पारदर्शी पदार्थ चाहिए जिसे आसानी से पॉलिश करके चिकनी, वक्रित सतह दी जा सके और जो प्रकाश को अच्छे से पार करने दे। जल, काँच और प्लास्टिक पारदर्शी होते हैं और इनसे लेंस बनाए जा सकते हैं। मिट्टी अपारदर्शी होती है और इसे लेंस के रूप में आवश्यक आकार व पारदर्शिता दे पाना संभव नहीं है।

(१2. किसी बिंब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब आभासी, सीधा तथा बिंब से बड़ा पाया गया। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए?
(४) मुख्य फोकस तथा वक्रता केंद्र' के बीच
(9) वक्रता केंद्र पर
(०) वक्रता केंद्र से परे
(0) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच

उत्तर: (d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच

अवतल दर्पण में आभासी, सीधा और आवर्धित प्रतिबिंब केवल तभी बनता है जब बिंब को दर्पण के ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच में रखा जाता है।

(3. किसी बिंब का वास्तविक तथा समान साइज का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए बिंब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखें?
(9) लेंस के मुख्य फोकस पर
(७) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
(०) अनंत पर
(9) लेंस के प्रकाशिक केंद्र तथा मुख्य फोकस के बीच

उत्तर: (b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर

जब बिंब को उत्तल लेंस के सामने फोकस दूरी की दोगुनी दूरी (अर्थात 2F पर) रखा जाता है, तो प्रतिबिंब लेंस के दूसरी ओर 2F पर बनता है। यह प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा और बिंब के आकार के बराबर होता है।

(१4. किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ -15 ८४ हैं। दर्पण तथा लेंस संभवतः हैं-
(9) दोनों अवतल
(9) दोनों उत्तल
(०) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल
(9) दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल

उत्तर: (a) दोनों अवतल

स्पष्टीकरण:

  • दर्पण के लिए: अवतल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक मानी जाती है। उत्तल दर्पण की फोकस दूरी धनात्मक होती है।
  • लेंस के लिए: अवतल (अपसारी) लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है। उत्तल (अभिसारी) लेंस की फोकस दूरी धनात्मक होती है।
चूँकि दोनों की फोकस दूरी -15 cm (ऋणात्मक) दी गई है, इसलिए दर्पण अवतल होगा और लेंस भी अवतल (अपसारी) होगा।

(5. किसी दर्पण से आप चाहे कितनी ही दूरी पर खड़े हों, आपका प्रतिबिंब सदैव सीधा प्रतीत होता है। संभवतः दर्पण है-
(a) केवल समतल
(9) केवल अवतल
(०) केवल उत्तल
(9) या तो समतल अथवा उत्तल

उत्तर: (d) या तो समतल अथवा उत्तल

कारण:

  • समतल दर्पण हमेशा सीधा, आभासी और समान आकार का प्रतिबिंब बनाता है, चाहे बिंब कितनी भी दूरी पर हो।
  • उत्तल दर्पण भी हमेशा सीधा, आभासी और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, चाहे बिंब कितनी भी दूरी पर हो।
  • अवतल दर्पण केवल तभी सीधा प्रतिबिंब बनाता है जब बिंब फोकस और ध्रुव के बीच हो। अन्य स्थितियों में यह उल्टा प्रतिबिंब बनाता है।
प्रश्न के अनुसार "चाहे कितनी ही दूरी पर", इसलिए अवतल दर्पण संभव नहीं है। केवल समतल या उत्तल दर्पण ही इस शर्त को पूरा करते हैं।

(06. किसी शब्दकोष (91०000797)) में पाए गए छोटे अक्षरों को पढ़ते समय आप निम्न में से कौन-सा लेंस पसंद करेंगे?
(a) 50 ०॥ फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(9) 50 ०7 फोकस दूरी का एक अवतल लेंस
(०) 5 ०० फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(9) 5 ०7 फोकस दूरी का एक अवतल लेंस

उत्तर: (c) 5 ०॥ फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस

कारण: छोटे अक्षरों को पढ़ने के लिए हमें एक आवर्धक लेंस (मैग्निफाइंग ग्लास) की आवश्यकता होती है जो बिंब का सीधा, आभासी और बड़ा प्रतिबिंब बना सके। यह कार्य केवल उत्तल लेंस कर सकता है जब बिंब को उसके फोकस और प्रकाशिक केंद्र के बीच रखा जाए। जितनी कम फोकस दूरी होगी, आवर्धन उतना ही अधिक होगा। इसलिए, 5 cm फोकस दूरी के उत्तल लेंस से 50 cm फोकस दूरी के उत्तल लेंस की तुलना में अधिक आवर्धन प्राप्त होगा, जिससे छोटे अक्षर आसानी से पढ़े जा सकेंगे। अवतल लेंस तो छोटा प्रतिबिंब बनाता है, इसलिए वह उपयोगी नहीं है।

07. 15 थ॥ फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण का उपयोग करके हम किसी बिंब का सीधा प्रतिबिंब बनाना चाहते हैं। बिंब का दर्पण से दूरी का परिसर (12०) क्या होना चाहिए? प्रतिबिंब की प्रकृति कैसी है? प्रतिबिंब बिंब से बड़ा है अथवा छोटा? इस स्थिति में प्रतिबिंब बनने का एक किरण आरेख बनाइए।

उत्तर:

  • बिंब की दूरी का परिसर: अवतल दर्पण द्वारा सीधा प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए बिंब को दर्पण के ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच रखना होगा। चूँकि फोकस दूरी 15 cm है, इसलिए बिंब की दूरी 0 cm से 15 cm के बीच (0 < u < 15 cm) होनी चाहिए।
  • प्रतिबिंब की प्रकृति: आभासी, सीधा तथा दर्पण के पीछे बनेगा।
  • प्रतिबिंब का आकार: इस स्थिति में प्रतिबिंब हमेशा बिंब से बड़ा (आवर्धित) बनता है।
किरण आरेख:
(कल्पना कीजिए: एक अवतल दर्पण है जिसका ध्रुव P और फोकस F है। एक बिंब AB, P और F के बीच रखा है।)
1. बिंब के शीर्ष A से मुख्य अक्ष के समानांतर एक किरण खींचिए जो दर्पण से परावर्तित होकर फोकस F से होकर जाती हुई प्रतीत हो।
2. बिं

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