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UP Board Class 10 Science (9. आनुवंशिकता एवं जैव विकास) solution PDF

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UP Board Class 10 Science (9. आनुवंशिकता एवं जैव विकास) solution

UP Board Class 10 Science 9. आनुवंशिकता एवं जैव विकास Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 10 Science (विज्ञान)

अध्याय 9. अनुवांशिकता एवं जैव विकास

Page : 157

1. यदि एक “लक्षण - & ' अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि के 10 प्रतिशत सदस्यों में पाया जाता है तथा “लक्षण - 8 ? उसी समष्टि में 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता है, तो कौन सा लक्षण पहले उत्पन्न हुआ होगा?

उत्तर : लक्षण '8' पहले उत्पन्न हुआ होगा। इसका कारण यह है कि अलैंगिक प्रजनन में संतति जनक के लगभग समान होती है और विभिन्नताएँ बहुत कम आती हैं। किसी समष्टि में जो लक्षण अधिक प्रतिशत (यहाँ 60%) में पाया जाता है, वह पुराना और स्थापित लक्षण होता है। जो लक्षण कम प्रतिशत (यहाँ 10%) में पाया जाता है, वह बाद में उत्पन्न हुआ नया परिवर्तन (विभिन्नता) होता है।

2. विभिन्नताओं उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज का अस्तित्व किस प्रकार बढ जाता है?

उत्तर : पर्यावरण में लगातार परिवर्तन होते रहते हैं। यदि किसी जीव समष्टि में सभी सदस्य एक जैसे हों, तो पर्यावरणीय बदलाव (जैसे जलवायु परिवर्तन, नई बीमारी) पूरी समष्टि को नष्ट कर सकता है। विभिन्नताएँ समष्टि में कुछ सदस्यों को ऐसे विशेष लक्षण देती हैं जो नए वातावरण के अनुकूल हो सकते हैं। ये अनुकूलित सदस्य जीवित रहकर प्रजनन करते हैं और अपने लक्षण आगे बढ़ाते हैं, इस प्रकार पूरी स्पीशीज का अस्तित्व बना रहता है। लैंगिक जनन विभिन्नताएँ उत्पन्न करने का एक प्रमुख तरीका है।

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1. मेंडल के प्रयोगों द्वारा कैसे पता चला कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं?

उत्तर : मेंडल ने लंबे (लगभग 6-7 फुट) और बौने (लगभग 1 फुट) मटर के पौधों के बीच संकरण कराया। पहली पीढ़ी (F1) के सभी पौधे लंबे हुए। बौनेपन का लक्षण F1 पीढ़ी में दिखाई नहीं दिया। जब F1 पीढ़ी के लंबे पौधों का स्वपरागण कराया गया, तो दूसरी पीढ़ी (F2) में लंबे और बौने दोनों प्रकार के पौधे प्राप्त हुए। इससे स्पष्ट हुआ कि F1 पीढ़ी में बौनापन लुप्त नहीं हुआ था, बल्कि दब गया था। इस प्रकार, लंबापन प्रभावी लक्षण और बौनापन अप्रभावी लक्षण है।

2. मेंडल के प्रयोगों से कैसे पता चला कि विभिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं?

उत्तर : मेंडल ने दो लक्षणों - बीज के आकार (गोल vs झुर्रीदार) और पौधे की ऊँचाई (लंबा vs बौना) - का एक साथ अध्ययन किया। उन्होंने गोल बीज वाले लंबे पौधे (RRYY) का झुर्रीदार बीज वाले बौने पौधे (rryy) से संकरण कराया। F1 पीढ़ी में सभी पौधे गोल बीज वाले और लंबे थे (RrYy)। जब F1 पौधों का स्वपरागण कराया गया, तो F2 पीढ़ी में चार प्रकार के संयोग मिले: गोल-लंबे, गोल-बौने, झुर्रीदार-लंबे और झुर्रीदार-बौने। इससे पता चला कि बीज का आकार और पौधे की ऊँचाई के जीन एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं, यही स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम है।

3. एक 4 ।.रुध्रि वर्ग” वाला पुरुष एक स्त्री जिसका रुश्नि वर्ग '0' है, से विवाह करता है। उनकी पुत्री का रुधिर वर्ग - '0' है। क्या यह सूचना पर्याप्त है यदि आपसे कहा जाए कि कौन सा विकल्प लक्षण-रुध्रि वर्ग- '७' अथवा '0' प्रभावी लक्षण हैं? अपने उत्तर का स्पष्टीकरण दीजिए।

उत्तर : नहीं, यह सूचना यह निर्णय लेने के लिए पर्याप्त नहीं है। रुधिर वर्ग 'O' हमेशा अप्रभावी (ii) जीनोटाइप से ही व्यक्त होता है। पिता का रुधिर वर्ग 'A' हो सकता है (जीनोटाइप IAIA या IAi)। माता का रुधिर वर्ग 'O' (ii) है। यदि पिता का जीनोटाइप IAi हो, तो उनकी पुत्री का रुधिर वर्ग 'O' (ii) हो सकता है। इस स्थिति में 'A' प्रभावी और 'O' अप्रभावी है। लेकिन केवल एक संतान के आधार पर यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि पिता का जीनोटाइप क्या है। अधिक संतानों के आँकड़े या अन्य परिवारिक सूचना के बिना प्रभाविता का निर्धारण ठीक से नहीं किया जा सकता।

4. मानव में बच्चे का लिंग निर्धारण कैसे होता है?

उत्तर : मानव में बच्चे का लिंग पिता द्वारा प्राप्त गुणसूत्र से निर्धारित होता है। मानव में 23 जोड़े गुणसूत्र होते हैं, जिनमें से एक जोड़ा लिंग गुणसूत्र (X और Y) का होता है।

  • मादा (स्त्री) में लिंग गुणसूत्रों का जोड़ा XX होता है।
  • नर (पुरुष) में लिंग गुणसूत्रों का जोड़ा XY होता है।
अंडाणु (माँ से) में हमेशा एक X गुणसूत्र होता है। शुक्राणु (पिता से) या तो X गुणसूत्र लेकर आता है या Y गुणसूत्र लेकर आता है।
  • यदि X वाला शुक्राणु अंडे को निषेचित करता है (X + X), तो संतान लड़की (XX) होगी।
  • यदि Y वाला शुक्राणु अंडे को निषेचित करता है (X + Y), तो संतान लड़का (XY) होगी।
इस प्रकार, बच्चे का लिंग निर्धारण पिता के शुक्राणु पर निर्भर करता है।

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1. वे कौन से विभिन्न तरीके हैं जिनके द्वारा एक विशेष लक्षण वाले व्यष्टि जीवों की संख्या समष्टि में बढ़ सकती है।

उत्तर : किसी विशेष लक्षण वाले जीवों की संख्या निम्नलिखित तरीकों से बढ़ सकती है:

  1. प्राकृतिक वरण (Natural Selection): यदि कोई लक्षण पर्यावरण में जीवित रहने और प्रजनन के लिए फायदेमंद है, तो उस लक्षण वाले जीव अधिक संख्या में जीवित रहेंगे और प्रजनन करेंगे। इससे अगली पीढ़ी में उस लक्षण की आवृत्ति बढ़ जाएगी। (जैसे- हिरणों में तेज दौड़ने का लक्षण)।
  2. आनुवंशिक विचलन (Genetic Drift): छोटी समष्टि में अचानक कोई घटना (बाढ़, महामारी) होने से कुछ जीवों के मर जाने पर, बचे हुए जीवों के लक्षण ही आगे बढ़ते हैं, भले ही वह लक्षण फायदेमंद हो या न हो। इससे उस लक्षण की संख्या बढ़ सकती है।
  3. यौन चयन (Sexual Selection): कभी-कभी कोई लक्षण (जैसे मोर की सुंदर पूँछ) सीधे जीवित रहने में मदद नहीं करता, लेकिन संभोग के लिए साथी आकर्षित करने में मदद करता है। ऐसे लक्षण वाले जीवों को अधिक प्रजनन का अवसर मिलता है और उनकी संख्या बढ़ सकती है।

2. एक एकल जीव द्वारा उपार्जित लक्षण सामान्यतः अगली पीढ़ी में वंशानुगत नहीं होते। क्यों?

उत्तर : उपार्जित लक्षण (जैसे पेशीय शरीर, घायल होने के निशान, त्वचा का रंग सांवला होना) जीव के जीवनकाल में पर्यावरण के प्रभाव या उपयोग/अनुपयोग से उत्पन्न होते हैं। ये लक्षण जीव के दैहिक कोशिकाओं में होते हैं, न कि जनन कोशिकाओं (शुक्राणु या अंडाणु) के DNA में। चूंकि वंशागति के लिए जनन कोशिकाओं का DNA ही अगली पीढ़ी में स्थानांतरित होता है, इसलिए दैहिक कोशिकाओं में हुए परिवर्तन आनुवंशिक रूप से नहीं passed on होते।

3. बाघों की संख्या में कमी आनुवंशिकता के दृष्टिकोण से चिंता का विषय क्‍यों है।

उत्तर : आनुवंशिक दृष्टि से बाघों की घटती संख्या चिंताजनक है क्योंकि:

  1. आनुवंशिक विविधता में कमी: जब किसी स्पीशीज की संख्या बहुत कम हो जाती है, तो उनके जीन पूल में आनुवंशिक विविधता कम हो जाती है। सभी बचे हुए बाघ आपस में संबंधित हो सकते हैं।
  2. अनुकूलन क्षमता का ह्रास: कम आनुवंशिक विविधता का मतलब है कि नए रोगों, परजीवियों या पर्यावरणीय बदलावों का सामना करने की क्षमता कम हो जाती है। पूरी समष्टि एक ही बीमारी से नष्ट हो सकती है।
  3. अंतःप्रजनन की समस्या: कम संख्या में निकट संबंधियों के बीच प्रजनन (अंतःप्रजनन) से हानिकारक अप्रभावी लक्षण (जैसे प्रतिरक्षा दोष, प्रजनन क्षमता में कमी) व्यक्त होने की संभावना बढ़ जाती है, जो स्पीशीज के अस्तित्व के लिए और भी खतरनाक है।

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1. वे कौन से कारक हैं जो नयी स्पीशीश के उद्धव में सहायक हैं?

उत्तर : नई स्पीशीज के उद्भव (जाति उद्भव) में सहायक कारक निम्नलिखित हैं:

  1. आनुवंशिक विचलन (Genetic Drift): छोटी समष्टि में आनुवंशिक बदलावों के कारण नए लक्षण स्थापित हो सकते हैं।
  2. प्राकृतिक वरण (Natural Selection): पर्यावरण के दबाव के कारण कुछ लक्षणों का चयन होता है, जिससे धीरे-धीरे नई स्पीशीज बन सकती है।
  3. भौगोलिक पृथक्करण (Geographical Isolation): नदी, पहाड़, समुद्र जैसी बाधाओं के कारण एक ही समष्टि के दो समूह अलग हो जाते हैं। अलग-अलग वातावरण में रहने और अनुकूलन से वे इतने भिन्न हो जाते हैं कि आपस में प्रजनन नहीं कर पाते, इस प्रकार नई स्पीशीज बन जाती है।
  4. प्रजनन पृथक्करण (Reproductive Isolation): भले ही भौगोलिक रूप से अलग न हों, लेकिन जीवों में व्यवहार, प्रजनन काल या जननांगों में अंतर आने से वे आपस में प्रजनन नहीं कर पाते, जिससे नई स्पीशीज बनती है।

2. क्या भौगोलिक पृथक्करण स्वपरागित स्पीशीश के पौधें के जाति - वद्रूभव का प्रमुख कारण हो सकता है? क्‍यों या क्‍यों नहीं?

उत्तर : नहीं, भौगोलिक पृथक्करण स्वपरागित पौधों में जाति उद्भव का प्रमुख कारण नहीं हो सकता। इसका कारण यह है कि स्वपरागित पौधों में आनुवंशिक विविधता बहुत कम उत्पन्न होती है क्योंकि उनमें पर-परागण नहीं होता। वे लगभग अपने जनक के समान ही होते हैं। भौगोलिक पृथक्करण तभी प्रभावी होता है जब अलग-अलग समूहों में पर्याप्त आनुवंशिक विभिन्नताएँ हों, जो स्वपरागण में बहुत कम होती हैं। स्वपरागित पौधों में नई स्पीशीज का उद्भव मुख्यतः DNA प्रतिकृति के दौरान हुए उत्परिवर्तन के कारण हो सकता है।

3. क्या भौगोलिक पृथक्करण अलैंगिक जनन वाले जीवों के जाति उद्गभव का प्रमुख कारक हो सकता है? क्‍यों अथवा क्‍यों नहीं?

उत्तर : हाँ, भौगोलिक पृथक्करण अलैंगिक जनन वाले जीवों में जाति उद्भव का एक प्रमुख कारक हो सकता है। अलैंगिक जनन में भी DNA प्रतिकृति के समय उत्परिवर्तन होते हैं, जो नए लक्षण देते हैं। जब ऐसे जीवों की समष्टि भौगोलिक रूप से अलग हो जाती है, तो प्रत्येक अलग-थलग समूह अलग-अलग पर्यावरणीय दबावों का सामना करता है। प्राकृतिक वरण इन अलग-अलग समूहों में अलग-अलग उत्परिवर्तनों का चयन करता है। लंबे समय तक अलग-अलग विकास के कारण, ये समूह इतने भिन्न हो सकते हैं कि वे अलग स्पीशीज बन जाते हैं, भले ही वे फिर से मिल भी जाएँ।

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1. उन अभिलक्षणों का एक उदाहरण दीजिए जिनका उपयोग हम दो स्पीशीज़ के विकासीय संबंध निर्धारण के लिए करते हैं?

उत्तर : हम समजात अंगों (Homologous Organs) का उपयोग दो स्पीशीज़ के विकासीय संबंध जानने के लिए करते हैं। उदाहरण: मनुष्य का हाथ, बिल्ली का अग्रपाद, चमगादड़ के पंख का ढाँचा और व्हेल के अग्रपंख की आधारभूत संरचना में समानता है - सभी में एक ही प्रकार की हड्डियाँ (प्रगंडिका, अंतःप्रकोष्ठिका, कार्पल्स, मेटाकार्पल्स और फैलेंजेस) पाई जाती हैं। यह दर्शाता है कि ये सभी जीव एक सामान्य पूर्वज से विकसित हुए हैं, भले ही इन अंगों का कार्य (पकड़ना, दौड़ना, उड़ना, तैरना) अलग-अलग है।

2. क्या एक तितली और चमगादड़ के पंखों को समजात अंग कहा जा सकता है? क्‍यों अथवा क्‍यों नहीं?

उत्तर : नहीं, तितली और चमगादड़ के पंखों को समजात अंग नहीं कहा जा सकता। ये समरूप अंग (Analogous Organs) हैं।

  • समजात अंग की आधारभूत संरचना और उद्गम समान होता है, भले ही कार्य अलग हों।
  • समरूप अंग का कार्य समान (यहाँ उड़ना) होता है, लेकिन आधारभूत संरचना और उद्गम बिल्कुल अलग होता है।
तितली का पंख काइटिन की पतली झिल्ली से बना होता है और यह वक्ष से जुड़ा होता है। चमगादड़ के पंख की त्वचा फैली हुई होती है और यह लम्बी उंगलियों वाले अग्रपाद से बना होता है। चूंकि संरचना और उद्गम भिन्न हैं, इसलिए ये समजात नहीं हैं।

3. जीवाश्म क्या हैं? वे जैव-विकास प्रक्रम के विषय में क्‍या दर्शाते हैं?

उत्तर : जीवाश्म प्राचीन काल में रहने वाले जीवों के मृत शरीर, उनके अवशेष (हड्डियाँ, दाँत) या चट्टानों पर बनी उनकी छाप (प्रतिरूप) हैं, जो लाखों-करोड़ों वर्षों से संरक्षित हैं।

जीवाश्म जैव-विकास के बारे में निम्नलिखित जानकारी देते हैं:

  1. विकास के क्रम को दर्शाते हैं: विभिन्न भू-सतहों से प्राप्त जीवाश्मों की आयु निर्धारित करके हम जान सकते हैं कि कौन-सा जीव पहले आया और कौन-सा बाद में। (जैसे- सरीसृपों के जीवाश्म उभयचरों के बाद मिलते हैं)।
  2. विलुप्त जीवों के बारे में बताते हैं: डायनासोर, वूली मैमथ जैसे जीवाश्म हमें उन जीवों के बारे में बताते हैं जो अब पृथ्वी पर नहीं हैं।
  3. बीच के रूपों को दर्शाते हैं: कुछ जीवाश्म (जैसे आर्कियोप्टेरिक्स, जो सरीसृप और पक्षी के बीच का रूप है) दर्शाते हैं कि एक वर्ग का जीव दूसरे वर्ग के जीव में कैसे विकसित हुआ।

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1. क्या कारण है कि आकृति, आकार, रंग-रूप में इतने भिन्न दिखाई पड़ने वाले मानव एक ही स्पीशीज के सदस्य हैं?

उत्तर : सभी मानव (होमो सेपियन्स) एक ही स्पीशीज के सदस्य हैं क्योंकि:

  1. प्रजनन क्षमता: दुनिया के किसी भी कोने के स्त्री और पुरुष के बीच संतान उत्पन्न हो सकती है और वह संतान भी उर्वर (Fertile) होगी। यह एक ही स्पीशीज होने की मुख्य पहचान है।
  2. सामान्य पूर्वज: जीवाश्म और DNA अध्ययन से पता चलता है कि आधुनिक मानव का उद्भव अफ्रीका में हुआ और फिर वे विश्व के विभिन्न भागों में फैले।
  3. विभिन्नताएँ सतही हैं: त्वचा का रंग, नाक-नक्श, कद आदि में अंतर विभिन्न भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में लंबे समय तक रहने के कारण हुए अनुकूलन के परिणाम हैं। इन सबके बावजूद, सभी मनुष्यों की आधारभूत शारीरिक संरचना, अंग प्रणाली और आनुवंशिक कोड (DNA) मूल रूप से समान है।

2. विकास के आधार पर क्‍या आप बता सकते हैं कि जीवाणु, मकड़ी, मछली तथा चिम्पैंजी में किसका शारीरिक अभिकल्प उत्तम है? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।

उत्तर : विकास के आधार पर यह कहना कि किसका शारीरिक अभिकल्प "उत्तम" है, सही नहीं होगा। प्रकृति में प्रत्येक जीव का अभिकल्प उसके पर्यावरण और जीवन शैली के लिए उपयुक्त और अनुकूलित होता है।

  • जीवाणु सरलतम है लेकिन अत्यधिक विषम परिस्थितियों में भी जीवित रह सकता है।
  • मकड़ी का अभिकल्प जाला बुनने और शिकार करने के लिए उत्तम है।
  • मछली का धारारेखीय शरीर जल में तैरने के लिए आदर्श है।
  • चिम्पैंजी (और मानव) का अभिकल्प सबसे जटिल है, जिसमें विकसित मस्तिष्क, विपरीत अंगूठे वाले हाथ आदि हैं जो जटिल व्यवहार और समस्या समाधान में सक्षम बनाते हैं।
हाँ, यदि "उत्तम" से तात्पर्य जटिलता और विशेषीकरण से है, तो चिम्पैंजी का शारीरिक अभिकल्प अन्य दिए गए उदाहरणों की तुलना में अधिक जटिल और विकसित है।

अभ्यास प्रश्न

01. मेंडल के एक प्रयोग में लंबे मटर के पौधे जिनके बैंगनी पुष्प थे, का संकरण बौने पौधें जिनके सफेद पुष्प थे, से कराया गया। इनकी संतति के स

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Other Chapters of Class 10 Science
1. रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
2. अम्ल क्षारक एवं लवण
3. धातु एवं अधातु
4. कार्बन एवं उसके यौगिक
5. तत्वों का आवर्त वर्गीकरण
6. जैव प्रक्रम
7. नियंत्रण एवं समन्वय
8. जीव जनन कैसे करते हैं
9. आनुवंशिकता एवं जैव विकास
10. प्रकाश परावर्तन तथा अपवर्तन
11. मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार
12. विद्युत
13. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
14. ऊर्जा के स्रोत
15. हमारा पर्यावरण
16. प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन
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