UP Board Class 10 Science 4. कार्बन एवं उसके यौगिक is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 10 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के अणु में एक कार्बन परमाणु दो ऑक्सीजन परमाणुओं के साथ दोहरे आबंध (C=O) से जुड़ा होता है। कार्बन के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु के बाहरी कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना में, कार्बन और प्रत्येक ऑक्सीजन के बीच दो इलेक्ट्रॉन युग्म (एक दोहरा आबंध) साझा किए जाते हैं। इस प्रकार, कार्बन का अष्टक पूरा हो जाता है (8 इलेक्ट्रॉन) और प्रत्येक ऑक्सीजन का भी अष्टक पूरा हो जाता है (8 इलेक्ट्रॉन)। संरचना O::C::O के समान दिखाई देती है, जहाँ दोहरे आबंध को चार बिंदुओं या दो रेखाओं द्वारा दर्शाया जाता है।
उत्तर: सल्फर (S₈) का अणु एक अँगूठी (रिंग) के आकार का होता है, जिसमें आठ सल्फर परमाणु एक-दूसरे से एकल सहसंयोजक आबंध द्वारा जुड़े होते हैं। प्रत्येक सल्फर परमाणु के बाहरी कोश में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं। अष्टक पूरा करने (8 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने) के लिए, प्रत्येक सल्फर परमाणु अपने पड़ोसी दो सल्फर परमाणुओं के साथ एक-एक इलेक्ट्रॉन युग्म साझा करता है, जिससे दो एकल आबंध बनते हैं। इस प्रकार, प्रत्येक सल्फर परमाणु अपने दोनों पड़ोसी परमाणुओं के साथ सहसंयोजक आबंध बनाता है, जिससे एक बंद अष्टकोणीय वलय (Ring) संरचना बनती है। इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना में, प्रत्येक S परमाणु अपने दो पड़ोसी S परमाणुओं के साथ दो इलेक्ट्रॉन युग्म (दो बिंदु या एक रेखा) साझा करता दिखाई देगा।
उत्तर: पेन्टेन (C₅H₁₂) के तीन संरचनात्मक समावयव (structural isomers) होते हैं। समावयव वे यौगिक होते हैं जिनका आणविक सूत्र समान होता है लेकिन परमाणुओं की व्यवस्था (संरचना) भिन्न होती है। पेन्टेन के तीन समावयव हैं:
1. n-पेन्टेन (सामान्य पेन्टेन): इसमें पाँच कार्बन परमाणु एक सीधी श्रृंखला में जुड़े होते हैं।
2. आइसोपेन्टेन (2-मेथिलब्यूटेन): इसमें चार कार्बन की मुख्य श्रृंखला होती है और दूसरे कार्बन पर एक मेथिल (CH₃-) समूह जुड़ा होता है।
3. नियोपेन्टेन (2,2-डाइमेथिलप्रोपेन): इसमें तीन कार्बन की मुख्य श्रृंखला होती है और मध्य के कार्बन पर दो मेथिल समूह जुड़े होते हैं।
उत्तर: कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या के लिए जिम्मेदार कार्बन के दो मुख्य गुणधर्म हैं:
(i) कार्बन की चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन परमाणु की संयोजकता 4 है। इसका अर्थ है कि यह अपने बाहरी कोश के चार इलेक्ट्रॉनों का उपयोग करके चार अन्य परमाणुओं (कार्बन सहित) के साथ चार सहसंयोजक आबंध बना सकता है। ये आबंध एकल, द्वि या त्रि आबंध भी हो सकते हैं।
(ii) शृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणु की स्वयं के साथ मजबूत सहसंयोजक आबंध बनाकर लंबी श्रृंखलाएँ, शाखाएँ या वलय बनाने की अद्वितीय क्षमता को शृंखलन कहते हैं। यह गुण कार्बन को विभिन्न आकारों और आकारों के असंख्य यौगिक बनाने में सक्षम बनाता है।
उत्तर 3: साइक्लोपेन्टेन एक चक्रीय हाइड्रोकार्बन है। इसका आणविक सूत्र C₅H₁₀ है। इसकी संरचना में पाँच कार्बन परमाणु एक पंचकोणीय वलय (ring) बनाते हैं, जहाँ प्रत्येक कार्बन दो हाइड्रोजन परमाणुओं से भी जुड़ा होता है। इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना में, प्रत्येक कार्बन अपने दो पड़ोसी कार्बनों के साथ एकल आबंध (दो इलेक्ट्रॉन साझा) बनाता है और प्रत्येक हाइड्रोजन के साथ भी एकल आबंध बनाता है।
उत्तर 4:
(a) एथेनॉइक अम्ल (CH₃COOH): इसमें एक मेथिल समूह (CH₃-) एक कार्बोक्सिल समूह (-COOH) से जुड़ा होता है। संरचना: CH₃-C(=O)OH, जहाँ C=O एक द्वि आबंध है और -OH एकल आबंध है।
(b) ब्रोमोपेन्टेन (C₅H₁₁Br): यह पेन्टेन श्रृंखला में एक हाइड्रोजन परमाणु के स्थान पर ब्रोमीन परमाणु के प्रतिस्थापन से बनता है। इसके विभिन्न समावयव हो सकते हैं, जैसे 1-ब्रोमोपेन्टेन (ब्रोमीन अंतिम कार्बन पर) या 2-ब्रोमोपेन्टेन (ब्रोमीन दूसरे कार्बन पर)।
(c) ब्यूटेनोन (CH₃COC₂H₅): यह एक कीटोन है। इसकी संरचना में चार कार्बन होते हैं, जिसमें दूसरे कार्बन पर एक ऑक्सीजन द्वि आबंध (C=O) के साथ जुड़ी होती है। इसका सूत्र CH₃-CO-CH₂-CH₃ है।
(d) हेक्सेनैल (C₅H₁₁CHO): यह एक एल्डिहाइड है। इसमें पाँच कार्बन की एक श्रृंखला होती है जिसके एक सिरे पर -CHO (एल्डिहाइड) समूह जुड़ा होता है। संरचना: CH₃-CH₂-CH₂-CH₂-CH₂-CHO.
क्या ब्रोमोपेन्टेन के संरचनात्मक समावयव संभव हैं? हाँ, ब्रोमोपेन्टेन (C₅H₁₁Br) के संरचनात्मक समावयव संभव हैं। ब्रोमीन परमाणु पेन्टेन श्रृंखला के विभिन्न कार्बन परमाणुओं पर जुड़ सकता है, जिससे विभिन्न स्थिति समावयव (position isomers) बनते हैं, जैसे 1-ब्रोमोपेन्टेन, 2-ब्रोमोपेन्टेन, 3-ब्रोमोपेन्टेन। इसके अलावा, शाखित श्रृंखला वाले समावयव भी हो सकते हैं।
(a) प्रश्न में संरचना नहीं दी गई है। सामान्यतः, IUPAC नामकरण में सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन करते हैं, प्रतिस्थापकों की स्थिति बताते हैं और मूल नाम (एल्केन, एल्कीन, एल्काइन या प्रकार्यात्मक समूह के आधार पर) लिखते हैं।
(b) प्रश्न में संरचना नहीं दी गई है।
(c) प्रश्न में संरचना नहीं दी गई है।
उत्तर: एथनॉल (C₂H₅OH) को क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO₄) या क्षारीय पोटैशियम डाइक्रोमेट (K₂Cr₂O₇) जैसे ऑक्सीकारकों की उपस्थिति में ऑक्सीकृत किया जाता है तो वह एथेनॉइक अम्ल (CH₃COOH) में बदल जाता है। इसे ऑक्सीकरण अभिक्रिया इसलिए कहते हैं क्योंकि:
1. इस अभिक्रिया में ऑक्सीजन की वृद्धि होती है। एथनॉल (C₂H₆O) की तुलना में एथेनॉइक अम्ल (C₂H₄O₂) में ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या अधिक है।
2. इस अभिक्रिया में हाइड्रोजन की कमी भी होती है। एथनॉल (C₂H₆O) की तुलना में एथेनॉइक अम्ल (C₂H₄O₂) में हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या कम है।
ऑक्सीजन की वृद्धि या हाइड्रोजन की कमी, दोनों ही ऑक्सीकरण की पहचान हैं। इसलिए यह परिवर्तन एक ऑक्सीकरण अभिक्रिया है।
उत्तर: वेल्डिंग के लिए बहुत उच्च तापमान (लगभग 3000°C) की आवश्यकता होती है जो एथाइन (C₂H₂) के पूर्ण दहन से प्राप्त होता है। वायु में केवल लगभग 21% ऑक्सीजन होती है, शेष नाइट्रोजन आदि गैसें होती हैं। यदि एथाइन को वायु में जलाया जाए, तो:
1. अपूर्ण दहन: पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने के कारण एथाइन का अपूर्ण दहन होगा, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और कार्बन कण (काजल) उत्पन्न होंगे। इससे तापमान कम होगा और प्रदूषण भी होगा।
2. अनियंत्रित ज्वाला: वायु के साथ मिश्रण से ज्वाला का तापमान और तीव्रता नियंत्रित करना मुश्किल होता है।
इसके विपरीत, शुद्ध ऑक्सीजन के साथ एथाइन के मिश्रण (ऑक्सी-एसिटिलीन गैस) में जलाने पर पूर्ण दहन होता है, जो एक साफ और अत्यधिक गर्म नीली ज्वाला उत्पन्न करता है। यह ज्वाला वेल्डिंग और धातु काटने के लिए आदर्श होती है।
उत्तर: एल्कोहॉल (जैसे एथनॉल) और कार्बोक्सिलिक अम्ल (जैसे एथेनॉइक अम्ल) में निम्नलिखित सरल प्रयोगों द्वारा अंतर किया जा सकता है:
1. सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃) या सोडियम कार्बोनेट (Na₂CO₃) की क्रिया:
उत्तर: ऑक्सीकारक (Oxidizing Agents) वे पदार्थ हैं जो किसी अन्य पदार्थ को ऑक्सीजन देकर उसका ऑक्सीकरण कर देते हैं, और इस प्रक्रिया में स्वयं का अपचयन (Reduction) हो जाता है। दूसरे शब्दों में, ऑक्सीकारक स्वयं इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं। इनका उपयोग रासायनिक अभिक्रियाओं में ऑक्सीकरण करने के लिए किया जाता है।
उदाहरण: ऑक्सीजन (O₂), ओजोन (O₃), पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO₄), पोटैशियम डाइक्रोमेट (K₂Cr₂O₇), क्लोरीन (Cl₂), हाइड्रोजन पेरोक्साइड (H₂O₂) आदि।
उत्तर: नहीं, केवल डिटरजेंट (अपमार्जक) का उपयोग करके हम यह नहीं बता सकते कि जल कठोर है या नहीं। ऐसा इसलिए है क्योंकि डिटरजेंट कठोर जल और मृदु जल दोनों में ही आसानी से झाग (फोम) बनाते हैं। डिटरजेंट के अणुओं के आयनिक सिरे कठोर जल में उपस्थित कैल्शियम (Ca²⁺) और मैग्नीशियम (Mg²⁺) आयनों के साथ अघुलनशील लवण नहीं बनाते, इसलिए वे झाग बनाने की क्षमता नहीं खोते। जल की कठोरता का पता लगाने के लिए साबुन के विलयन का उपयोग किया जाता है, क्योंकि साबुन कठोर जल में झाग नहीं बनाता और एक सफेद अवक्षेप बनाता है।
उत्तर: कपड़े को रगड़ने या पीटने की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से होती है:
1. मिसेल को हटाने के लिए: साबुन या डिटरजेंट कपड़े से चिपके तैलीय या गंदे कणों को मिसेल (गुच्छे) में बंद कर देता है। ये मिसेल कपड़े की सतह से शारीरिक बल (रगड़/पीटना) द्वारा ही अलग होते हैं।
2. गहरे धब्बों को निकालने के लिए: रगड़ने से यांत्रिक ऊर्जा मिलती है जो सफाई कारकों को धब्बों में गहराई तक प्रवेश करने और उन्हें तोड़ने में मदद करती है।
3. जल के प्रवाह को बढ़ाने के लिए: रगड़ने से कपड़े के रेशों के बीच से गंदा पानी निकल जाता है और साफ पानी अंदर प्रवेश करता है, जिससे सफाई प्रभावी होती है।
संक्षेप में, रगड़ना वह यांत्रिक क्रिया है जो साबुन/डिटरजेंट की रासायनिक क्रिया को पूरा करते हुए गंदगी के मिसेल को कपड़े से अलग करने में सहायता करती है।
उत्तर: (b) 7 सहसंयोजक आबंध हैं।
व्याख्या: एथेन (C₂H₆) के अणु में दो कार्बन परमाणु एक-दूसरे से एकल सहसंयोजक आबंध (C-C) द्वारा जुड़े होते हैं। प्रत्येक कार्बन परमाणु तीन हाइड्रोजन परमाणुओं से एकल सहसंयोजक आबंध (C-H) द्वारा जुड़ा होता है। इस प्रकार कुल आबंध = 1 (C-C) + 6 (C-H) = 7 सहसंयोजक आबंध।
उत्तर: (c) कीटोन।
व्याख्या: ब्यूटेनोन (Butanone) का सूत्र CH₃COCH₂CH₃ है। इसमें कार्बोनिल समूह (C=O) दो कार्बन परमाणुओं (एक एल्काइल समूह और दूसरा एल्काइल समूह) के बीच स्थित होता है। जब कार्बोनिल समूह किसी कार्बन श्रृंखला के अंत में न होकर बीच में होता है, तो वह यौगिक कीटोन कहलाता है।
उत्तर: (c) ईंधन आदर (अपूर्ण रूप से जल रहा) है।
व्याख्या: जब ईंधन (जैसे एलपीजी, केरोसिन) को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने पर जलाया जाता है, तो उसका अपूर्ण दहन होता है। अपूर्ण दहन के कारण कार्बन के सूक्ष्म कण (कार्बन ब्लैक या काजल) उत्पन्न होते हैं। ये कार्बन कण बर्तन की तली पर जम जाते हैं और उसे काला कर देते हैं। यदि ईंधन पूरी तरह जल रहा होता, तो केवल CO₂ और जल बनते और बर्तन काला नहीं होता।
उत्तर: मेथेन (CH₄) के उदाहरण से सहसंयोजक आबंध की प्रकृति को समझा जा सकता है। कार्बन परमाणु (परमाणु क्रमांक 6) के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन हैं और हाइड्रोजन परमाणु (परमाणु क्रमांक 1) के बाहरी कोश में 1 इलेक्ट्रॉन है। दोनों ही अपना अष्टक या द्विक पूरा करना चाहते हैं।
कार्बन का अष्टक पूरा करने के लिए 4 अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता है, जबकि प्रत्येक हाइड्रोजन को 1 अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है। इसलिए, एक कार्बन परमाणु चार हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ चार इलेक्ट्रॉन युग्म साझा करता है। प्रत्येक साझा किया गया इलेक्ट्रॉन युग्म एक सहसंयोजक आबंध बनाता है। इस प्रकार, CH₄ में कार्बन और प्रत्येक हाइड्रोजन के बीच एक सहसंयोजक आबंध होता है। यह आबंध इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी पर आधारित है, न कि इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण पर।
उत्तर:
(a) एथेनॉइक अम्ल (CH₃COOH):
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