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(a) 1/25
(b) 1/5
(c) 5
(d) 25
स्पष्टीकरण: माना तार का मूल प्रतिरोध R = 1 Ω है। इसे पाँच बराबर भागों में काटने पर प्रत्येक टुकड़े का प्रतिरोध R/5 = 1/5 Ω होगा। इन पाँचों 1/5 Ω प्रतिरोधों को पार्श्वक्रम (समांतर क्रम) में जोड़ा गया है। पार्श्वक्रम में तुल्य प्रतिरोध R' का मान होगा:
1/R' = (1/(R/5)) + (1/(R/5)) + (1/(R/5)) + (1/(R/5)) + (1/(R/5))
1/R' = 5/(R/5) = 25/R
इसलिए, R' = R/25
प्रश्नानुसार, R = 1 Ω और R' = 1 Ω' दिया है। R/R' का अनुपात ज्ञात करना है।
R/R' = R / (R/25) = 25
अतः R/R' = 25 होगा।
(a) I²R
(b) IR²
(c) VI
(d) V²/R
स्पष्टीकरण: विद्युत शक्ति (P) के सूत्र निम्नलिखित हैं:
(a) 100 W
(b) 75 W
(c) 50 W
(d) 25 W
स्पष्टीकरण: बल्ब का अनुमंतांक 220 V, 100 W है। इससे हम बल्ब के फिलामेंट का प्रतिरोध (R) ज्ञात कर सकते हैं।
सूत्र P = V²/R से,
R = V²/P = (220 × 220) / 100 = 48400/100 = 484 Ω
अब, जब इस बल्ब को 110 V पर चलाया जाता है, तब उपभुक्त शक्ति (P') होगी:
P' = V'²/R = (110 × 110) / 484 = 12100 / 484 = 25 W
इस प्रकार 110 V पर बल्ब की शक्ति घटकर 25 W रह जाती है।
(a) 1:2
(b) 2:1
(c) 1:4
(d) 4:1
स्पष्टीकरण: चूँकि दोनों तार एक ही पदार्थ, लंबाई और व्यास के हैं, इसलिए उनका प्रतिरोध समान होगा। माना प्रत्येक का प्रतिरोध R है।
श्रेणीक्रम में: तुल्य प्रतिरोध Rs = R + R = 2R
पार्श्वक्रम में: तुल्य प्रतिरोध Rp का मान: 1/Rp = 1/R + 1/R = 2/R, अतः Rp = R/2
माना परिपथ में स्रोत का विभवांतर V है और समय t है। जूल के नियमानुसार, उत्पन्न ऊष्मा H = V²t / R
श्रेणीक्रम में उत्पन्न ऊष्मा, Hs = V²t / (2R)
पार्श्वक्रम में उत्पन्न ऊष्मा, Hp = V²t / (R/2) = 2V²t / R
अनुपात Hs : Hp = [V²t/(2R)] : [2V²t/R] = (1/2) : 2 = 1 : 4
अतः श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम में उत्पन्न ऊष्माओं का अनुपात 1:4 होगा।
स्पष्टीकरण: वोल्टमीटर का प्रतिरोध बहुत अधिक (लगभग अनंत) होता है। इसे पार्श्वक्रम में जोड़ने पर यह परिपथ की मुख्य धारा में बहुत कम हस्तक्षेप करता है और दो बिंदुओं के बीच के वास्तविक विभवांतर का सही मापन कर पाता है। इसे कभी भी श्रेणीक्रम में नहीं जोड़ा जाता।
(i) आवश्यक तार की लंबाई:
दिया है: व्यास d = 0.5 mm = 0.5 × 10-3 m = 5 × 10-4 m
त्रिज्या r = d/2 = 2.5 × 10-4 m
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A = πr² = 3.14 × (2.5 × 10-4)² ≈ 1.9625 × 10-7 m²
प्रतिरोधकता ρ = 1.6 × 10-8 Ω m
अभीष्ट प्रतिरोध R = 10 Ω
प्रतिरोध का सूत्र R = ρl / A
इसलिए, आवश्यक लंबाई l = (R × A) / ρ
l = (10 × 1.9625 × 10-7) / (1.6 × 10-8)
l ≈ (1.9625 × 10-6) / (1.6 × 10-8) ≈ 122.66 m
(ii) दोगुने व्यास के तार के लिए प्रतिरोध में अंतर:
प्रतिरोध R, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल A के व्युत्क्रमानुपाती होता है। क्षेत्रफल A, व्यास d के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होता है (A ∝ d²)।
यदि नया व्यास d' = 2d है, तो नया क्षेत्रफल A' = (2)² A = 4A हो जाएगा।
चूँकि लंबाई समान रहती है, नया प्रतिरोध R' = ρl / A' = ρl / (4A) = R/4
R = 10 Ω था, अतः R' = 10/4 = 2.5 Ω
प्रतिरोध मूल प्रतिरोध का एक-चौथाई रह जाएगा।
| I (एम्पियर) | 0.5 | 1.0 | 2.0 | 3.0 | 4.0 |
|---|---|---|---|---|---|
| V (वोल्ट) | 1.6 | 3.4 | 6.7 | 10.2 | 13.2 |
ग्राफ: V-I ग्राफ खींचने पर एक सरल रेखा प्राप्त होती है जो मूल बिंदु से गुजरती है। यह ओम के नियम का पालन करती है।
प्रतिरोध ज्ञात करना: ग्राफ की प्रवणता (slope) प्रतिरोध (R) देती है। किन्हीं दो बिंदुओं को लेकर गणना करते हैं।
बिंदु (I=2.0 A, V=6.7 V) और (I=3.0 A, V=10.2 V) लेते हैं।
R = ΔV / ΔI = (10.2 - 6.7) / (3.0 - 2.0) = 3.5 / 1.0 = 3.5 Ω
अन्य बिंदुओं से भी लगभग यही मान प्राप्त होता है। अतः प्रतिरोधक का प्रतिरोध 3.5 Ω है।
दिया है: विभवांतर V = 12 V, विद्युत धारा I = 2.5 mA = 2.5 × 10-3 A
ओम के नियम के अनुसार, R = V / I
R = 12 / (2.5 × 10-3) = (12 × 1000) / 2.5 = 12000 / 2.5 = 4800 Ω या 4.8 kΩ
अतः प्रतिरोधक का प्रतिरोध 4.8 kΩ है।
श्रेणीक्रम में सभी प्रतिरोधकों से समान धारा प्रवाहित होती है। पहले परिपथ का कुल प्रतिरोध ज्ञात करते हैं।
कुल प्रतिरोध Rtotal = 0.2 + 0.3 + 0.4 + 0.5 + 12 = 13.4 Ω
बैटरी का विभवांतर V = 9 V
परिपथ में प्रवाहित कुल धारा I = V / Rtotal = 9 / 13.4 ≈ 0.672 A
चूँकि श्रेणीक्रम में धारा समान रहती है, अतः 12 Ω प्रतिरोधक से भी 0.672 A (लगभग) धारा प्रवाहित होगी।
दिया है: स्रोत का विभवांतर V = 220 V, परिपथ में अभीष्ट कुल धारा I = 5 A
ओम के नियम से, संयोजन का कुल तुल्य प्रतिरोध Req होगा:
Req = V / I = 220 / 5 = 44 Ω
माना 'n' एकसमान प्रतिरोधक, जिनमें से प्रत्येक का प्रतिरोध R = 176 Ω है, पार्श्वक्रम में जुड़े हैं।
पार्श्वक्रम में तुल्य प्रतिरोध का सूत्र: 1/Req = n × (1/R)
इसलिए, 1/44 = n × (1/176)
n = 176 / 44 = 4
अतः 4 प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़ना होगा।
(i) 9 Ω प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए:
दो प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में और फिर उनके संयोजन को तीसरे प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ते हैं।
पार्श्वक्रम संयोजन का प्रतिरोध: 1/Rp = 1/6 + 1/6 = 2/6 = 1/3, अतः Rp = 3 Ω
अब इस 3 Ω के संयोजन को शेष 6 Ω प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ने पर:
कुल प्रतिरोध R = Rp + 6 = 3 + 6 = 9 Ω
(ii) 4 Ω प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए:
दो प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में और फिर उनके संयोजन को तीसरे प्रतिरोधक के साथ पार्श्वक्रम में जोड़ते हैं।
श्रेणीक्रम संयोजन का प्रतिरोध: Rs = 6 + 6 = 12 Ω
अब इस 12 Ω के संयोजन को शेष 6 Ω प्रतिरोधक के साथ पार्श्वक्रम में जोड़ने पर:
1/R = 1/12 + 1/6 = 1/12 + 2/12 = 3/12 = 1/4
अतः कुल प्रतिरोध R = 4 Ω
प्रत्येक बल्ब का अनुमतांक: शक्ति P = 10 W, विभवांतर V = 220 V
प्रत्येक बल्ब द्वारा ली गई धारा I1 = P / V = 10 / 220 = 1/22 A
लाइन से ली जा सकने वाली अधिकतम धारा Imax = 5 A
चूँकि सभी बल्ब पार्श्वक्रम में जुड़े हैं, कुल धारा प्रत्येक बल्ब द्वारा ली गई धाराओं के योग के बराबर होगी।
माना 'n' बल्ब जोड़े जा सकते हैं।
तब, n × I1 ≤ Imax
n × (1/22) ≤ 5
n ≤ 5 × 22 = 110
अतः अधिकतम 110 बल्ब पार्श्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं।
दिया है: प्रत्येक कुंडली का प्रतिरोध R = 24 Ω, स्रोत का विभवांतर V = 220 V
(i) जब केवल एक कुंडली (पृथक-पृथक) प्रयोग की जाती है:
धारा I = V / R = 220 / 24 ≈ 9.17 A
(ii) जब दोनों कुंडलियाँ श्रेणीक्रम में जुड़ी हैं:
कुल प्रतिरोध Rs = R + R = 24 + 24 = 48 Ω
धारा Is = V / Rs = 220 / 48 ≈ 4.58 A
(iii) जब दोनों कुंडलियाँ पार्श्वक्रम में जुड़ी हैं:
तुल्य प्रतिरोध: 1/Rp = 1/24 + 1/24 = 2/24 = 1/12, अतः Rp = 12 Ω
धारा Ip = V / Rp = 220 / 12 ≈ 18.33 A
परिपथ (i): 1 Ω और 2 Ω श्रेणीक्रम में, बैटरी V = 6 V
कुल प्रतिरोध Rtotal = 1 + 2 = 3 Ω
परिपथ में कुल धारा I = V / Rtotal = 6 / 3 = 2 A
2 Ω प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर V2Ω = I × 2 = 2 × 2 = 4 V
2 Ω प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्ति P1 = I² × R = (2)² × 2 = 4 × 2 = 8 W
अथवा P1 = V2Ω² / R = (4)² / 2 = 16/2 = 8 W
परिपथ (ii): 12 Ω और 2 Ω पार्श्वक्रम में, बैटरी V = 4 V
पार्श्वक्रम में प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर बैटरी के विभवांतर (4 V) के बराबर होगा।
2 Ω प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर = 4 V
2 Ω प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्ति P2 = V² / R = (4)² / 2 = 16 / 2 = 8 W
तुलना: दोनों परिपथों में 2 Ω प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्ति समान है, अर्थात P1 : P2 = 1 : 1 या 8 W : 8 W
लैम्प पार्श्वक्रम में हैं, अतः प्रत्येक के सिरों पर विभवांतर 220 V होगा।
पहला लैम्प (100 W):
धारा I1 = शक्ति / वोल्टता = 100 / 220 = 5/11 A
दूसरा लैम्प (60 W):
धारा I2 = 60 / 220 = 3/11 A
पार्श्वक्रम में कुल धारा, व्यष्टिगत धाराओं के योग के बराबर होती है।
मेंस से ली गई कुल धारा I = I1 + I2 = (5/11) + (3/11) = 8/11 A ≈ 0.73 A
विद्युत ऊर्जा की खपत (उपभुक्त ऊर्जा) = शक्ति (W) × समय (घंटे में)
टी.वी. सेट के लिए:
शक्ति P1 = 250 W, समय t1 = 1 घंटा
उपभुक्त ऊर्जा E1 = P1 × t1 = 250 W × 1 h = 250 Wh (वाट-घंटा)
विद्युत हीटर के लिए:
शक्ति P2 = 1200 W, समय t2 = 10 मिनट = 10/60 घंटा = 1/6 घंटा
उपभुक्त ऊर्जा E2 = 1200 W × (1/6) h = 200 Wh
तुलना: 250 Wh > 200 Wh
अतः 250 W का टी.वी. सेट एक घंटे में अधिक विद्युत ऊर्जा उपभुक्त करता है।
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