UP Board Solutions for Class 10 Science
अध्याय 7: नियंत्रण एवं समन्वय
page : 132 1. प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच क्या अंतर है?
उत्तर: प्रतिवर्ती क्रिया और टहलने में निम्नलिखित मुख्य अंतर हैं:
प्रतिवर्ती क्रिया:
- यह एक अनैच्छिक, तीव्र और स्वचालित प्रतिक्रिया है।
- इसका नियंत्रण मेरुरज्जु (Spinal Cord) द्वारा होता है।
- इसमें सूचना का संचार बहुत तेज गति से होता है, जैसे गर्म वस्तु छूने पर तुरंत हाथ हट जाना।
- इसमें मस्तिष्क की सोच-समझ शामिल नहीं होती।
टहलना:
- यह एक ऐच्छिक, नियंत्रित और सोची-समझी क्रिया है।
- इसका नियंत्रण मस्तिष्क (Brain) द्वारा होता है।
- इसमें मस्तिष्क से पेशियों तक आदेश पहुँचने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है।
- यह सीखी हुई और जानबूझकर की जाने वाली गति है।
2. दो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन) के मध्य अंतर्ग्रथन ( सिनेप्स) में क्या होता है?
उत्तर: दो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन) के बीच के अंतर्ग्रथन या सिनेप्स में निम्न प्रक्रिया घटित होती है:
- सिनेप्स दो न्यूरॉन के बीच का एक अत्यंत सूक्ष्म खाली स्थान (संधि) होता है।
- जब पहले न्यूरॉन से विद्युत आवेग (Impulse) सिनेप्स तक पहुँचता है, तो वहाँ यह आवेग रासायनिक संकेत में बदल जाता है।
- पहले न्यूरॉन के सिरे से कुछ रासायनिक पदार्थ (न्यूरोट्रांसमीटर) स्रावित होते हैं जो इस सिनैप्टिक खाली स्थान को पार करते हैं।
- ये रसायन दूसरे न्यूरॉन की झिल्ली से जुड़ जाते हैं और उसमें पुनः एक नया विद्युत आवेग उत्पन्न कर देते हैं।
- इस प्रकार सूचना एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक पहुँचती रहती है।
3. मस्तिष्क का कौन सा भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है?
उत्तर: शरीर की स्थिति, संतुलन बनाए रखने तथा सुचारू पेशीय क्रियाओं के समन्वय का कार्य अनुमस्तिष्क (Cerebellum) द्वारा किया जाता है। यह पश्च मस्तिष्क (Hindbrain) का एक भाग है।
4. हम गंध का ज्ञान कैसे प्राप्त करते हैं?
उत्तर: हम गंध का ज्ञान निम्न प्रक्रिया से प्राप्त करते हैं:
- नाक में उपस्थित ग्राही कोशिकाएँ हवा में मौजूद गंध के रसायनों को पहचानती हैं।
- ये कोशिकाएँ तंत्रिका आवेग उत्पन्न करती हैं।
- यह आवेग तंत्रिकाओं के माध्यम से अग्रमस्तिष्क (Forebrain) के एक विशेष भाग तक पहुँचता है।
- अग्रमस्तिष्क में उपस्थित घ्राण पालि (Olfactory Lobe) इस आवेग का विश्लेषण करती है और हमें गंध का ज्ञान होता है।
5. प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की क्या भूमिका है?
उत्तर: प्रतिवर्ती क्रिया मुख्य रूप से मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित होती है, ताकि प्रतिक्रिया तत्काल और स्वचालित हो सके। हालाँकि, मस्तिष्क की इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है:
- मस्तिष्क को प्रतिवर्ती क्रिया के घटित होने की सूचना प्राप्त हो जाती है।
- मस्तिष्क इस सूचना को संसाधित करके स्मृति में संग्रहित कर लेता है, जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।
- उदाहरण के लिए, गर्म बर्तन छूने पर हाथ तुरंत हट जाता है (मेरुरज्जु की क्रिया), लेकिन इसके बाद हमें दर्द का एहसास होता है और हमें याद रहता है कि उस बर्तन को सावधानी से छूना है (मस्तिष्क की भूमिका)।
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1. पादप हॉर्मोन क्या हैं?
उत्तर: पादप हॉर्मोन वे रासायनिक पदार्थ हैं जो पौधों के विशिष्ट भागों (जैसे जड़ के शीर्ष, तने के शीर्ष, पत्तियों आदि) में बनते हैं और बहुत कम मात्रा में ही पौधे की विभिन्न क्रियाओं जैसे वृद्धि, विकास, पत्तियों का गिरना, फल पकना, प्रकाश की ओर मुड़ना आदि का नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं। इन्हें वृद्धि नियामक भी कहते हैं। उदाहरण: ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन।
2. छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति, प्रकाश की ओर प्ररोह की गति से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर:
प्रकाश की ओर प्ररोह (तने) की गति:
- यह एक अनुवर्तन (Tropism) गति है, विशेष रूप से धनात्मक प्रकाशानुवर्तन।
- यह गति प्रकाश उद्दीपक के कारण होती है और ऑक्सिन हॉर्मोन द्वारा नियंत्रित होती है।
- यह गति अपेक्षाकृत धीमी होती है और दिशात्मक है।
छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति:
- यह एक अनुवर्तन नहीं, बल्कि एक स्पर्शानुकंपी (Seismonastic) गति है।
- यह गति स्पर्श या झटके जैसे उद्दीपक के कारण होती है, प्रकाश के कारण नहीं।
- इसमें पत्तियों की कोशिकाओं में जल की मात्रा में परिवर्तन होता है, जिससे वे मुरझा कर बंद हो जाती हैं और फिर धीरे-धीरे खुलती हैं।
3. एक पादप हॉर्मोन का उदाहरण दीजिए जो वृद्धि को बढ़ाता है।
उत्तर: ऑक्सिन (Auxin) एक ऐसा पादप हॉर्मोन है जो कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाकर पौधे की वृद्धि को बढ़ाता है। यह तने के शीर्ष पर बनता है।
4. किसी सहारे के चारों ओर एक प्रतान की वृद्धि में ऑक्सिन किस प्रकार सहायक है?
उत्तर: जब एक प्रतान (लता) किसी सहारे के संपर्क में आता है, तो ऑक्सिन हॉर्मोन निम्न प्रकार से सहायक होता है:
- सहारे के स्पर्श से प्रतान के संपर्क वाले भाग में ऑक्सिन की सांद्रता कम हो जाती है।
- सहारे से दूर वाले भाग में ऑक्सिन की सांद्रता अधिक रह जाती है।
- ऑक्सिन की अधिकता वाले भाग की कोशिकाएँ अधिक तेजी से लंबी होने लगती हैं।
- इस असमान वृद्धि के कारण प्रतान सहारे की ओर मुड़कर लिपट जाता है। इस प्रक्रिया को स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism) कहते हैं।
5. जलानुवर्तन दर्शाने के लिए एक प्रयोग की अभिकल्पना कीजिए ?
उत्तर: जलानुवर्तन दर्शाने के लिए निम्न प्रयोग किया जा सकता है:
- एक आयताकार ट्रे या गमला लें और उसमें रेत या मिट्टी भरें।
- ट्रे के एक सिरे पर मिट्टी को नियमित रूप से गीला रखें और दूसरे सिरे को सूखा रहने दें।
- ट्रे के बीच में कुछ अंकुरित बीज (जैसे मटर या मूंग) बो दें।
- कुछ दिनों बाद अवलोकन करने पर पाएँगे कि पौधों की जड़ें नमी वाले क्षेत्र की ओर मुड़ गई हैं।
- इससे सिद्ध होता है कि जड़ों में धनात्मक जलानुवर्तन (Positive Hydrotropism) होता है, अर्थात वे जल की ओर वृद्धि करती हैं।
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1. जंतुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है?
उत्तर: जंतुओं में रासायनिक समन्वय हॉर्मोन (Hormones) नामक रासायनिक दूतों द्वारा होता है।
- शरीर की विशेष अंत:स्रावी ग्रंथियाँ (जैसे पीयूष ग्रंथि, थायरॉइड, अग्न्याशय आदि) हॉर्मोन स्रावित करती हैं।
- ये हॉर्मोन सीधे रक्त में मिल जाते हैं और रक्त प्रवाह के द्वारा शरीर के विभिन्न लक्ष्य अंगों तक पहुँचते हैं।
- ये हॉर्मोन विशिष्ट अंगों की कार्यप्रणाली को उत्तेजित, नियंत्रित या अवरुद्ध करके शरीर की दीर्घकालिक क्रियाओं जैसे वृद्धि, विकास, उपापचय और जनन का समन्वय करते हैं।
2. आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती है?
उत्तर: आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह निम्न कारण से दी जाती है:
- थायरॉइड ग्रंथि थायरॉक्सिन नामक हॉर्मोन बनाती है, जो शरीर में उपापचय दर (Metabolic Rate) को नियंत्रित करता है।
- थायरॉक्सिन हॉर्मोन के संश्लेषण के लिए आयोडीन एक आवश्यक तत्व है।
- यदि आहार में आयोडीन की कमी होती है, तो थायरॉइड ग्रंथि सामान्य रूप से थायरॉक्सिन नहीं बना पाती और अतिवृद्धि करने लगती है, जिससे घेंघा (Goitre) रोग हो जाता है।
- आयोडीन युक्त नमक के सेवन से इस कमी को दूर किया जा सकता है और थायरॉइड ग्रंथि के सामान्य कार्य को सुनिश्चित किया जा सकता है।
3. जब एड्रीनलीन रुधिर में स्रावित होती है तो हमारे शरीर में क्या अनुक्रिया होती है?
उत्तर: एड्रीनलीन हॉर्मोन को 'लड़ो या भागो' (Fight or Flight) हॉर्मोन कहा जाता है। जब यह रक्त में स्रावित होता है, तो शरीर में निम्नलिखित तीव्र अनुक्रियाएँ होती हैं:
- हृदय गति तेज हो जाती है, जिससे अधिक रक्त पेशियों तक पहुँचे।
- रक्तचाप बढ़ जाता है।
- श्वसन दर बढ़ जाती है, ताकि अधिक ऑक्सीजन मिल सके।
- पाचन तंत्र जैसे कम जरूरी कार्य धीमे हो जाते हैं।
- रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है, जिससे तत्काल ऊर्जा मिल सके।
- यह सब शरीर को किसी आपात स्थिति या तनाव का सामना करने के लिए तैयार करता है।
4. मधुमेह के कुछ रोगियों की चिकित्सा इंसुलिन का इंजेक्शन देकर क्यों की जाती है?
उत्तर: मधुमेह के रोगियों को इंसुलिन का इंजेक्शन निम्न कारण से दिया जाता है:
- इंसुलिन एक हॉर्मोन है जो अग्न्याशय (Pancreas) में बनता है। इसका मुख्य कार्य रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करना है।
- यह कोशिकाओं को रक्त से ग्लूकोज ग्रहण करने में सहायता करता है और अतिरिक्त ग्लूकोज को ग्लाइकोजन के रूप में यकृत में संग्रहित करवाता है।
- मधुमेह (Diabetes) रोग में अग्न्याशय पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या शरीर की कोशिकाएँ इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया नहीं कर पातीं।
- इससे रक्त में ग्लूकोज का स्तर बहुत अधिक (हाइपरग्लाइसीमिया) हो जाता है।
- इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए, रोगी को बाहरी इंसुलिन के इंजेक्शन दिए जाते हैं, जो रक्त शर्करा के स्तर को सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं।
अभ्यास के प्रश्न
1. निम्नलिखित में से कौन-सा पादप हॉर्मोन है? (क) इंसुलिन (ख) थायरॉक्सिन (ग) एस्ट्रोजन (घ) साइटोकाइनिन
उत्तर: (घ) साइटोकाइनिन।
स्पष्टीकरण: इंसुलिन और थायरॉक्सिन जंतु हॉर्मोन हैं। एस्ट्रोजन एक जंतु (मादा) सेक्स हॉर्मोन है। साइटोकाइनिन एक पादप हॉर्मोन है जो कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है।
2. दो तंत्रिका कोशिका के मध्य खाली स्थान को कहते हैं| (क) द्रुमिका (ख) सिनेप्स (ग) एक्सॉन (घ) आवेग
उत्तर: (ख) सिनेप्स।
3. मस्तिष्क उत्तरदायी है (क) सोचने के लिए (ख) हृदय स्पंदन के लिए (ग) शरीर का संतुलन बनाने के लिए (घ) उपरोक्त सभी
उत्तर: (घ) उपरोक्त सभी।
स्पष्टीकरण: सोचने का कार्य सेरेब्रम, हृदय स्पंदन का नियंत्रण मेडुला ऑब्लोंगेटा और शरीर का संतुलन बनाने का कार्य अनुमस्तिष्क द्वारा किया जाता है। ये सभी मस्तिष्क के भाग हैं।
4. हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है? ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जहाँ ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों। क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?
उत्तर:
- ग्राहियों का कार्य: ग्राही विशेष प्रकार की कोशिकाएँ या अंग हैं जो पर्यावरण से विभिन्न प्रकार की उद्दीपनाओं (Stimuli) जैसे प्रकाश, ध्वनि, गंध, स्वाद, स्पर्श, ताप आदि को ग्रहण करते हैं। ये इन उद्दीपनाओं को तंत्रिका आवेगों में बदल देते हैं, जो तंत्रिकाओं के माध्यम से मस्तिष्क या मेरुरज्जु तक पहुँचते हैं।
- ग्राहियों के ठीक से कार्य न करने पर समस्याएँ:
- संवेदनहीनता: व्यक्ति को पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों का पता नहीं चलेगा। जैसे गर्म चीज को छूने पर दर्द न महसूस होना, जिससे गंभीर जलन हो सकती है।
- समन्वय की कमी: शरीर उचित प्रतिक्रिया देने में असमर्थ होगा। जैसे, संतुलन बनाए रखने के लिए आँख और कान के ग्राही महत्वपूर्ण हैं, उनके खराब होने पर चलने-फिरने में दिक्कत होगी।
- जीवन की गुणवत्ता में कमी: स्वाद, गंध, दृष्टि, श्रवण जैसी इंद्रियों के ग्राही खराब होने पर व्यक्ति का जीवन दयनीय हो सकता है।
- दुर्घटना का खतरा: खतरे के संकेतों (जैसे तेज आवाज, तेज रोशनी) को न पहचान पाने के कारण दुर्घटना हो सकती है।
5. एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना बनाइए तथा इसके कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना:
एक न्यूरॉन मुख्यतः तीन भागों से बना होता है:
- द्रुमिका (Dendrite): ये शाखान्वित रचनाएँ हैं जो कोशिका काय से निकलती हैं। इनका कार्य अन्य न्यूरॉन से सूचना प्राप्त करना है।
- काय (Cell Body): इसमें कोशिका द्रव्य और केंद्रक होता है। यह प्राप्त सूचनाओं को संसाधित करता है।
- एक्सॉन (Axon): यह एक लंबा, पतला तंतु होता है जो कोशिका काय से निकलता है। इसके अंत में सिनेप्टिक कलिकाएँ (Synaptic Knobs) होती हैं। एक्सॉन का कार्य कोशिका काय से उत्पन्न विद्युत आवेग को अगली कोशिका तक पहुँचाना है।
कार्य: न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की क्रियात्मक इकाई है। इसका मुख्य कार्य
सूचना का संवहन करना है। यह ग्राही अंगों से मस्तिष्क/मेरुरज्जु तक (संवेदी न्यूरॉन) और मस्तिष्क/मेरुरज्जु से प्रभावी अंगों (पेशियाँ/ग्रंथियाँ) तक (प्रेरक न्यूरॉन) सूचना पहुँचाता है।
6. पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है?
उत्तर: पादप में प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) ऑक्सिन हॉर्मोन द्वारा नियंत्रित होता है।
- पौधे के तने का शीर्ष प्रकाश की दिशा का पता लगाता है।
- प्रकाश स्रोत की विपरीत दिशा में ऑक्सिन हॉर्मोन का संचय हो जाता है (अंधेरे वाले हिस्से में)।
- ऑक्सिन की अधिकता वाले अंधेरे भाग की कोशिकाएँ तेजी से लंबी होने लगती हैं।
- इस असमान वृद्धि के कारण तना प्रकाश स्रोत की ओर मुड़ जाता है। इसे धनात्मक प्रकाशानुवर्तन कहते हैं।
- जड़ों में इसका विपरीत प्रभाव होता है। ऑक्सिन की अधिकता जड़ों की वृद्धि को रोकती है, इसलिए जड़ें प्रकाश से दूर (अंधेरे की ओर) मुड़ती हैं। इसे ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन कहते हैं।
7. मेरुरज्जु आघात में किन संकेतों के आने में व्यवधान होगा?
उत्तर: मेरुरज्जु (Spinal Cord) में आघात (चोट) लगने पर निम्न संकेतों के आने-जाने में व्यवधान होगा:
- प्रतिवर्ती क्रियाओं (Reflex Actions) में बाधा उत्पन्न होगी। जैसे, घुटने की टक-टक, गर्म वस्तु छूने पर हाथ हटना आदि प्रतिक्रियाएँ नहीं होंगी या देर से होंगी।
- मेरुरज्जु, मस्तिष्क और शरीर के अन्य भागों के बीच द्विमार्गी संचार बाधित हो जाएगा