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UP Board Class 12 Chemistry (15. बहुलक) solution PDF

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UP Board Class 12 Chemistry (15. बहुलक) solution

UP Board Class 12 Chemistry 15. बहुलक Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board रसायन विज्ञान-II: अध्याय 15 - बहुलक

यह अध्याय बहुलकों की मूल अवधारणाओं, वर्गीकरण, गुणों और उनके महत्वपूर्ण उदाहरणों को समझने में सहायता करेगा।

प्रश्न 1. बहुलक क्या होते हैं?

हल: 'बहुलक' (पॉलिमर) शब्द की उत्पत्ति दो ग्रीक शब्दों “पॉली” (अनेक) और “मर” (इकाई) से हुई है। बहुलक उच्च आणविक द्रव्यमान (10³ से 10⁷ तक) वाले विशाल अणु (बृहदाणु) होते हैं। ये बहुलीकरण नामक प्रक्रिया द्वारा, छोटी-छोटी इकाइयों (जिन्हें एकलक कहते हैं) के आपस में रासायनिक बंधों द्वारा जुड़ने से बनते हैं।

उदाहरण:
n CH₂ = CH₂ (एथीन, एकलक) → [– CH₂ – CH₂ –]n (पॉलिथीन, बहुलक)

प्रश्न 2. संरचना के आधार पर बहुलकों का वर्गीकरण कैसे किया जाता है?

हल: संरचना के आधार पर बहुलकों को तीन मुख्य वर्गों में बाँटा गया है:

  1. रैखिक बहुलक: इनकी श्रृंखला लम्बी और सीधी होती है। उदाहरण: उच्च घनत्व पॉलिथीन (HDPE), पॉलिविनाइल क्लोराइड (PVC)।
  2. शाखित श्रृंखला बहुलक: इनकी मुख्य श्रृंखला से पार्श्व शाखाएँ निकली होती हैं। उदाहरण: निम्न घनत्व पॉलिथीन (LDPE)।
  3. तिर्यकबंधित या जालक्रम बहुलक: इनमें बहुलक श्रृंखलाएँ आपस में तिर्यकबंधों द्वारा जुड़कर त्रि-आयामी जालक बनाती हैं। उदाहरण: बेकेलाइट, मेलामीन।

प्रश्न 3. निम्नलिखित बहुलकों को बनाने वाले एकलकों के नाम लिखिए:

हल:

बहुलकएकलक
(i) नायलॉन-6,6हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन [H₂N–(CH₂)₆–NH₂] तथा ऐडिपिक अम्ल [HOOC–(CH₂)₄–COOH]
(ii) नायलॉन-6कैप्रोलैक्टम
(iii) टेफ्लॉनटेट्राफ्लुओरोएथीन (CF₂ = CF₂)

प्रश्न 4. निम्न को योगात्मक और संघनन बहुलकों में वर्गीकृत कीजिए:

टेरिलीन, बेकेलाइट, पॉलिविनाइल क्लोराइड, पॉलिथीन।

हल:

  • योगात्मक बहुलक: पॉलिविनाइल क्लोराइड (PVC), पॉलिथीन।
  • संघनन बहुलक: टेरिलीन (डेक्रॉन), बेकेलाइट।

प्रश्न 5. ब्यूना-S तथा ब्यूना-N के मध्य अन्तर समझाइए।

हल: ब्यूना-S तथा ब्यूना-N दोनों संश्लेषित रबर (सहबहुलक) हैं, परन्तु इनके संघटक एकलक भिन्न हैं:

  • ब्यूना-S: यह ब्यूटा-1,3-डाईन (CH₂=CH–CH=CH₂) तथा स्टाइरीन (C₆H₅–CH=CH₂) के सहबहुलीकरण से बनता है।
  • ब्यूना-N: यह ब्यूटा-1,3-डाईन तथा ऐक्रिलोनाइट्राइल (CH₂=CH–CN) के सहबहुलीकरण से बनता है।

प्रश्न 6. निम्न बहुलकों को उनके अंतराण्विक बलों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए:

(i) नायलॉन-6,6, ब्यूना-S, पॉलिथीन
(ii) नायलॉन-6, निओप्रीन, पॉलिविनाइल क्लोराइड

हल: अंतराण्विक बलों का बढ़ता क्रम:

  1. (i) ब्यूना-S < पॉलिथीन < नायलॉन-6,6
  2. (ii) निओप्रीन < पॉलिविनाइल क्लोराइड < नायलॉन-6
कारण: नायलॉन में हाइड्रोजन बंधन के कारण अंतराण्विक बल सबसे प्रबल होते हैं।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1. बहुलक और एकलक पदों की व्याख्या कीजिए।

हल:

  • बहुलक: ये उच्च आणविक द्रव्यमान वाले विशाल अणु होते हैं, जो सैकड़ों-हजारों छोटी इकाइयों (एकलकों) के बहुलीकरण से बनते हैं। उदाहरण: पॉलिथीन, नायलॉन, रबर।
  • एकलक: ये सरल, कम आणविक द्रव्यमान वाले अणु होते हैं, जो आपस में जुड़कर बहुलक बनाते हैं। उदाहरण: एथीन पॉलिथीन का एकलक है।

प्रश्न 2. प्राकृतिक और संश्लेषित बहुलक क्या हैं? प्रत्येक के दो उदाहरण दीजिए।

हल:

  • प्राकृतिक बहुलक: ये प्रकृति में पादपों एवं जंतुओं में पाए जाते हैं। उदाहरण: सेलुलोज, प्रोटीन, प्राकृतिक रबर, रेशम।
  • संश्लेषित बहुलक: ये मानव द्वारा प्रयोगशाला या उद्योग में संश्लेषित किए जाते हैं। उदाहरण: पॉलिथीन, नायलॉन, पीवीसी, टेफ्लॉन।

प्रश्न 3. समबहुलक तथा सहबहुलक पदों में विभेद कर प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।

हल:

  • समबहुलक: वे बहुलक जो केवल एक ही प्रकार के एकलक से बने होते हैं। उदाहरण: पॉलिथीन (एथीन से), पॉलिप्रोपीलीन।
  • सहबहुलक: वे बहुलक जो दो या दो से अधिक भिन्न प्रकार के एकलकों से मिलकर बने होते हैं। उदाहरण: ब्यूना-S (ब्यूटाडाईन व स्टाइरीन से), नायलॉन-6,6।

प्रश्न 4. एकलक की प्रकार्यात्मकता को आप किस प्रकार समझाएंगे?

हल: एकलक की प्रकार्यात्मकता उसमें उपस्थित आबन्धी स्थितियों (बंध बनाने की क्षमता) की संख्या है। यह बहुलक श्रृंखला में एकलक के जुड़ने की संख्या निर्धारित करती है।

  • उदाहरण: एथीन (CH₂=CH₂) में एक द्विआबन्ध है, जो खुलकर दो नए बंध बना सकता है। अतः इसकी प्रकार्यात्मकता 2 है।
  • एथिलीन ग्लाइकॉल [HO–CH₂–CH₂–OH] में दो -OH समूह हैं, अतः इसकी प्रकार्यात्मकता भी 2 है।

प्रश्न 5. बहुलीकरण पद को परिभाषित कीजिए।

हल: बहुलीकरण वह रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें असंख्य एकलक अणु आपस में सहसंयोजक बंधों द्वारा जुड़कर उच्च आणविक द्रव्यमान वाला बृहदाणु (बहुलक) बनाते हैं।

n CH₂ = CH₂ → [– CH₂ – CH₂ –]n
(एथीन, एकलक)      (पॉलिथीन, बहुलक)

प्रश्न 6. [– NH – (CH₂)₆ – NH – CO – (CH₂)₄ – CO –]n एक समबहुलक है या सहबहुलक?

हल: यह एक सहबहुलक है, क्योंकि यह दो भिन्न प्रकार की पुनरावृत्त इकाइयों – एक ऐमाइन (हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन से) और दूसरी कार्बोक्सिलिक अम्ल (ऐडिपिक अम्ल से) – से मिलकर बना है। यह नायलॉन-6,6 की संरचना है।

प्रश्न 7. आण्विक बलों के आधार पर बहुलक किन संवर्गों में वर्गीकृत किए जाते हैं?

हल: आण्विक बलों के आधार पर बहुलकों को चार प्रमुख संवर्गों में वर्गीकृत किया जाता है:

  1. प्रत्यास्थ बहुलक (इलास्टोमर्स): इनमें प्रबल तिर्यकबंध होते हैं, जो खिंचाव के बाद मूल आकार में लौटने की क्षमता देते हैं। उदाहरण: प्राकृतिक व संश्लेषित रबर।
  2. तंतु (फाइबर): इनमें प्रबल अंतराण्विक बल (जैसे H-बंध) होते हैं, जो उच्च तन्य सामर्थ्य प्रदान करते हैं। उदाहरण: नायलॉन, पॉलिएस्टर।
  3. तापसुघट्य बहुलक (थर्मोप्लास्टिक): गर्म करने पर नर्म होकर बनने योग्य और ठंडा करने पर कठोर हो जाते हैं। इन्हें पुनर्चक्रित किया जा सकता है। उदाहरण: पॉलिथीन, पीवीसी।
  4. तापदृढ़ बहुलक (थर्मोसेटिंग): गर्म करने पर स्थायी रूप से कठोर हो जाते हैं और पुनः पिघलाए नहीं जा सकते। उदाहरण: बेकेलाइट, मेलामीन।

प्रश्न 8. संकलन तथा संघनन बहुलीकरण के मध्य आप किस प्रकार विभेद करेंगे?

हल:

संकलन (योगात्मक) बहुलीकरणसंघनन बहुलीकरण
एकलकों में द्वि- या त्रि-आबन्ध होते हैं। एकलकों में दो या अधिक सक्रिय प्रकार्यात्मक समूह (जैसे -OH, -COOH, -NH₂) होते हैं।
बहुलीकरण के दौरान किसी छोटे अणु (जैसे H₂O, NH₃) का उत्सर्जन नहीं होता। बहुलीकरण के दौरान छोटे अणु (जैसे H₂O, NH₃, HCl) का उत्सर्जन होता है।
यह श्रृंखला वृद्धि प्रक्रिया है। उदाहरण: पॉलिथीन, पीवीसी बनना। यह प्रायः पद वृद्धि प्रक्रिया है। उदाहरण: नायलॉन, टेरिलीन बनना।

प्रश्न 9. सहबहुलीकरण पद की व्याख्या कीजिए तथा दो उदाहरण दीजिए।

हल: सहबहुलीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक भिन्न प्रकार के एकलक एक साथ बहुलीकृत होकर एक सहबहुलक बनाते हैं। इससे प्राप्त बहुलक के गुण, संघटक एकलकों के अनुपात पर निर्भर करते हैं।

उदाहरण:

  1. ब्यूना-S: ब्यूटाडाईन + स्टाइरीन
  2. ब्यूना-N: ब्यूटाडाईन + ऐक्रिलोनाइट्राइल

प्रश्न 10. एथीन के बहुलीकरण के लिए मुक्त मूलक क्रियाविधि लिखिए।

हल: एथीन का मुक्त मूलक योगात्मक बहुलीकरण तीन पदों में होता है:

  1. श्रृंखला प्रारम्भ: बेंजॉइल परॉक्साइड जैसा प्रारम्भक गर्म करने पर विखंडित होकर मुक्त मूलक देता है, जो एथीन के द्विआबन्ध से जुड़कर एक नया सक्रिय मुक्त मूलक बनाता है।
  2. श्रृंखला संचरण: यह सक्रिय मुक्त मूलक लगातार एथीन अणुओं से जुड़ता चला जाता है, जिससे श्रृंखला लम्बी होती जाती है।
  3. श्रृंखला समापन: दो सक्रिय मुक्त मूलक आपस में जुड़कर या अन्य किसी विधि से अभिक्रिया करके निष्क्रिय हो जाते हैं और बहुलक श्रृंखला का निर्माण पूरा करते हैं।

प्रश्न 11. तापसुघट्य और तापदृढ़ बहुलकों को प्रत्येक के दो उदाहरण के साथ परिभाषित कीजिए।

हल:

  • तापसुघट्य बहुलक: ये रैखिक या किंचित शाखित बहुलक होते हैं, जिनके अणुओं के बीच दुर्बल वाण्डरवाल्स बल होते हैं। गर्म करने पर ये नर्म हो जाते हैं और ढाले जा सकते हैं, ठंडा करने पर कठोर हो जाते हैं। इन्हें बार-बार गर्म कर पुनर्चक्रित किया जा सकता है। उदाहरण: पॉलिथीन, पॉलिस्टाइरीन, पीवीसी।
  • तापदृढ़ बहुलक: ये त्रि-आयामी जालक्रम संरचना वाले बहुलक होते हैं। एक बार ढालने व गर्म करने के बाद ये स्थायी रूप से कठोर हो जाते हैं। पुनः गर्म करने पर ये नर्म नहीं होते, बल्कि जलने लगते हैं। उदाहरण: बेकेलाइट (फीनॉल-फॉर्मेल्डिहाइड), मेलामीन-फॉर्मेल्डिहाइड रेजिन।

प्रश्न 12. निम्न बहुलकों को प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त एकलक लिखिए:

(i) पॉलिविनाइल क्लोराइड (ii) टेफ्लॉन (iii) बेकेलाइट

हल:

  1. पीवीसी: विनाइल क्लोराइड (CH₂=CHCl)
  2. टेफ्लॉन: टेट्राफ्लुओरोएथीन (CF₂=CF₂)
  3. बेकेलाइट: फीनॉल (C₆H₅OH) तथा फॉर्मेल्डिहाइड (HCHO)

प्रश्न 13. मुक्त मूलक योगात्मक बहुलीकरण में प्रयुक्त एक सामान्य प्रारम्भक का नाम तथा संरचना लिखिए।

हल: एक सामान्य प्रारम्भक बेंजॉइल परॉक्साइड है। इसकी संरचना है:

C₆H₅ – C(O) – O – O – C(O) – C₆H₅
गर्म करने पर यह आसानी से विखंडित होकर फेनिल मुक्त मूलक (C₆H₅•) देता है, जो बहुलीकरण प्रक्रिया प्रारम्भ करता है।

प्रश्न 14. रबड़ अणुओं में द्विबंधों की उपस्थिति किस प्रकार उनकी संरचना और क्रियाशीलता को प्रभावित करती है?

हल: प्राकृतिक रबड़ सिस-1,4-पॉलीआइसोप्रीन है। इसकी श्रृंखला में प्रत्येक इकाई में एक द्विआबन्ध होता है।

  • संरचना पर प्रभाव: द्विआबन्ध का सिस अभिविन्यास बहुलक श्रृंखला को कुंडलित और लचीला बनाता है, जिससे श्रृंखलाएँ आसानी से फैल सकती हैं।
  • क्रियाशीलता पर प्रभाव: यह द्विआबन्ध रबड़ को वल्कनीकरण के लिए सक्रिय बनाता है। वल्कनीकरण में सल्फर आदि के साथ ये द्विआबन्ध अभिक्रिया करके श्रृंखलाओं के बीच तिर्यकबंध बनाते हैं, जिससे रबड़ की ताकत, प्रत्यास्थता और ताप प्रतिरोधकता बढ़ जाती है।

प्रश्न 15. रबड़ के वल्कनीकरण के मुख्य उद्देश्य की विवेचना कीजिए।

हल: वल्कनीकरण (सल्फर के साथ गर्म करना) के मुख्य उद्देश्य हैं:

  1. रबड़ की तन्य सामर्थ्य और प्रत्यास्थता में वृद्धि करना।
  2. इसे तापमान परिवर्तन के प्रति अधिक स्थिर बनाना (गर्मी में चिपचिपा व सर्दी में भंगुर नहीं होता)।
  3. रबड़ को रासायनिक अम्लों, अपघर्षण और वायु के आक्सीकरण के प्रति प्रतिरोधी बनाना।
  4. इसकी जीर्णनशीलता (Aging) को कम करना और जीवनकाल बढ़ाना।

प्रश्न 16. नायलॉन-6 और नायलॉन-6,6 में पुनरावृत्त एकलक इकाइयाँ क्या हैं?

हल:

  • नायलॉन-6: पुनरावृत्त इकाई [– NH – (CH₂)₅ – CO –] है, जो कैप्रोलैक्टम एकलक से व्युत्पन्न है।
  • नायलॉन-6,6: पुनरावृत्त इकाई [– NH – (CH₂)₆ – NH – CO – (CH₂)₄ – CO –] है, जो हेक्सामेथिलीन डाइऐमीन और ऐडिपिक अम्ल के संघनन से बनती है।

प्रश्न 17. निम्नलिखित बहुलकों के एकलकों का नाम और संरचना लिखिए:

(i) ब्यूना-S (ii) ब्यूना-N (iii) डेक्रॉन (iv) निओप्रीन

हल:

बहुलकएकलक
(i) ब्यूना-S1. ब्यूटा-1,3-डाईन: CH₂=CH–CH=CH₂
2. स्टाइरीन: C₆H₅–CH=CH₂
(ii) ब्यूना-N1. ब्यूटा-1,3-डाईन: CH₂=CH–CH=CH₂
2. ऐक्रिलोनाइट्राइल: CH₂=CH–CN
(iii) डेक्रॉन (टेरिलीन)1. एथिलीन ग्लाइकॉल: HO–CH₂–CH₂–OH
2. टेरीथैलिक अम्ल: p-HOOC–C₆H₄–

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