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UP Board Class 12 Chemistry (3. वैधुत रसायन) solution PDF

UP Board Class 12 Chemistry 3. वैधुत रसायन is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.

UP Board Class 12 Chemistry (3. वैधुत रसायन) solution

UP Board Class 12 Chemistry 3. वैधुत रसायन Hindi Medium Solutions - PDF

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अध्याय 3: वैधुत रसायन (Electrochemistry)

प्रश्न 1. निकाय Mg²⁺/Mg का मानक इलेक्ट्रोड विभव आप किस प्रकार ज्ञात करेंगे?

हल: Mg²⁺/Mg का मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) ज्ञात करने के लिए एक वैद्युत रासायनिक सेल का निर्माण किया जाता है। इसमें एक Mg इलेक्ट्रोड को 1 M MgSO₄ विलयन में डुबोया जाता है, जो एक अर्द्धसेल (ऑक्सीकरण अर्द्धसेल) बनाता है। दूसरा अर्द्धसेल मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) होता है, जो अपचयन अर्द्धसेल का कार्य करता है। सेल को निम्न प्रकार प्रदर्शित किया जा सकता है:

Mg(s) | Mg²⁺(1 M) || H⁺(1 M) | H₂(1 atm), Pt(s)

सेल परिपथ में वोल्टमीटर लगाकर विद्युत वाहक बल (emf) मापा जाता है। वोल्टमीटर की सुई Mg इलेक्ट्रोड की ओर घूमती है, जिससे धारा की दिशा का पता चलता है। मापे गए emf (E°सेल) से Mg²⁺/Mg का मानक इलेक्ट्रोड विभव ज्ञात किया जाता है:

सेल = E°कैथोड – E°ऐनोड = E°H⁺/H₂ – E°Mg²⁺/Mg
चूँकि E°H⁺/H₂ = 0 V,
सेल = 0 – E°Mg²⁺/Mg
अतः Mg²⁺/Mg = – E°सेल

प्रश्न 2. क्या आप एक जिंक के पात्र में कॉपर सल्फेट का विलयन रख सकते हैं?

हल: नहीं, जिंक के पात्र में कॉपर सल्फेट का विलयन नहीं रख सकते हैं। क्योंकि जिंक का मानक इलेक्ट्रोड विभव (E° = –0.76 V) कॉपर के मानक इलेक्ट्रोड विभव (E° = +0.34 V) से कम (अधिक ऋणात्मक) होता है। इसका अर्थ है कि जिंक कॉपर की तुलना में प्रबल अपचायक है। अतः जिंक, कॉपर सल्फेट विलयन से कॉपर को विस्थापित कर देगा और निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रिया होगी:

Zn(s) + Cu²⁺(aq) → Zn²⁺(aq) + Cu(s)

इससे जिंक के पात्र का संक्षारण होगा और विलयन का संघटन बदल जाएगा।

प्रश्न 3. मानक इलेक्ट्रोड विभव की तालिका का निरीक्षण कर तीन ऐसे पदार्थ बताइए जो अनुकूल परिस्थितियों में फेरस आयनों (Fe²⁺) को ऑक्सीकृत कर सकते हैं।

हल: फेरस आयन (Fe²⁺) का ऑक्सीकरण फेरिक आयन (Fe³⁺) में होता है:
Fe²⁺(aq) → Fe³⁺(aq) + e⁻; E° = –0.77 V
केवल वे ही पदार्थ Fe²⁺ को ऑक्सीकृत कर सकते हैं जिनका मानक अपचयन विभव (E°) 0.77 V से अधिक (धनात्मक) हो, अर्थात् वे Fe²⁺ से प्रबल ऑक्सीकारक हों। ऐसे तीन पदार्थ हैं:
1. क्लोरीन गैस (Cl₂), 2. ब्रोमीन गैस (Br₂), 3. आयोडीन गैस (I₂)

प्रश्न 4. pH = 10 के विलयन के सम्पर्क वाले हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के विभव का परिकलन कीजिए।

हल: हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड के लिए अर्द्ध-अभिक्रिया है:
2H⁺(aq) + 2e⁻ → H₂(g)
नेर्नस्ट समीकरण के अनुसार:
E = E° – (0.0591/n) log [1/(H⁺)²]
यहाँ, E° = 0 V, n = 2, और pH = 10, अतः [H⁺] = 10⁻¹⁰ M
मान रखने पर:
E = 0 – (0.0591/2) log [1/(10⁻¹⁰)²]
= –0.02955 log (10²⁰)
= –0.02955 × 20
E = –0.591 V
अतः, pH = 10 वाले विलयन के लिए हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का विभव –0.591 V होगा।

प्रश्न 5. एक सेल के emf का परिकलन कीजिए, जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है। दिया गया है, E°सेल = 1.05 V
Ni(s) + 2Ag⁺(0.002 M) → Ni²⁺(0.160 M) + 2Ag(s)

हल: दी गई सेल अभिक्रिया के लिए नेर्नस्ट समीकरण लागू करते हैं:
Eसेल = E°सेल – (0.0591/n) log ([Ni²⁺]/[Ag⁺]²)
यहाँ, n = 2 (स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या), E°सेल = 1.05 V, [Ni²⁺] = 0.160 M, [Ag⁺] = 0.002 M
मान रखने पर:
Eसेल = 1.05 – (0.0591/2) log (0.160 / (0.002)²)
= 1.05 – 0.02955 log (0.160 / 4 × 10⁻⁶)
= 1.05 – 0.02955 log (4 × 10⁴)
= 1.05 – 0.02955 × (log 4 + 4 log 10)
= 1.05 – 0.02955 × (0.6021 + 4)
= 1.05 – 0.02955 × 4.6021
= 1.05 – 0.136
Eसेल = 0.914 V (लगभग 0.91 V)

प्रश्न 6. एक सेल जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है,
2Fe³⁺(aq) + 2I⁻(aq) → 2Fe²⁺(aq) + I₂(s)
का 298 K ताप पर E°सेल = 0.236 V है। सेल अभिक्रिया की मानक गिब्ज ऊर्जा (ΔG°) एवं साम्य स्थिरांक (K) का परिकलन कीजिए।

हल: दी गई अभिक्रिया में स्थानांतरित इलेक्ट्रॉनों की संख्या (n) = 2.
(i) मानक गिब्ज ऊर्जा (ΔG°) का परिकलन:
ΔG° = –nFE°सेल
= – (2 mol) × (96500 C mol⁻¹) × (0.236 V)
= – 45548 J
ΔG° = –45.55 kJ
(ii) साम्य स्थिरांक (K) का परिकलन:
ΔG° = –2.303 RT log K
log K = –ΔG° / (2.303 RT)
= –(–45548 J) / (2.303 × 8.314 J K⁻¹ mol⁻¹ × 298 K)
= 45548 / 5705.85
log K = 7.983
अतः, K = Antilog (7.983) = 9.616 × 10⁷

प्रश्न 7. किसी विलयन की चालकता तनुता के साथ क्यों घटती है?

हल: विलयन की चालकता विलयन के एकांक आयतन में उपस्थित आयनों की संख्या पर निर्भर करती है। जब विलयन को तनु किया जाता है, तो विलेय की सान्द्रता कम हो जाती है, जिसके कारण प्रति इकाई आयतन में आयनों की संख्या घट जाती है। चूँकि आयन ही विद्युत के वाहक होते हैं, इसलिए आयनों की संख्या घटने से विलयन की चालकता भी घट जाती है।

प्रश्न 8. जल की Λ°m (अनंत तनुता पर मोलर चालकता) ज्ञात करने का एक तरीका बताइए।

हल: जल एक दुर्बल वैद्युत-अपघट्य है। कोलरॉउश नियम के अनुसार, अनंत तनुता पर जल की मोलर चालकता (Λ°m(H₂O)) की गणना प्रबल वैद्युत-अपघट्यों की Λ°m के संयोजन से की जा सकती है। उदाहरण के लिए:
Λ°m(H₂O) = Λ°m(NaOH) + Λ°m(HCl) – Λ°m(NaCl)
यहाँ NaOH, HCl और NaCl प्रबल वैद्युत-अपघट्य हैं जिनकी अनंत तनुता पर मोलर चालकता ज्ञात है। इनके मानों से जल की Λ°m प्राप्त की जा सकती है।

प्रश्न 9. 0.025 M मेथेनॉइक अम्ल (HCOOH) की मोलर चालकता 46.1 S cm² mol⁻¹ है। इसकी वियोजन मात्रा (α) एवं वियोजन स्थिरांक (Ka) का परिकलन कीजिए। दिया गया है:
λ°(H⁺) = 349.6 S cm² mol⁻¹ और λ°(HCOO⁻) = 54.6 S cm² mol⁻¹

हल:
चरण I: वियोजन मात्रा (α) की गणना
अनंत तनुता पर मेथेनॉइक अम्ल की मोलर चालकता:
Λ°m(HCOOH) = λ°(H⁺) + λ°(HCOO⁻) = 349.6 + 54.6 = 404.2 S cm² mol⁻¹
दी गई मोलर चालकता, Λm = 46.1 S cm² mol⁻¹
वियोजन मात्रा, α = Λm / Λ°m = 46.1 / 404.2 = 0.1140
चरण II: वियोजन स्थिरांक (Ka) की गणना
HCOOH(aq) ⇌ H⁺(aq) + HCOO⁻(aq)
प्रारंभिक सान्द्रता: C    0   0
साम्य पर सान्द्रता: C(1–α) Cα  Cα
Ka = [H⁺][HCOO⁻] / [HCOOH] = (Cα)(Cα) / C(1–α) = Cα² / (1–α)
यहाँ, C = 0.025 mol L⁻¹, α = 0.1140
Ka = (0.025 × (0.1140)²) / (1 – 0.1140) = (0.025 × 0.0130) / 0.886
= (3.25 × 10⁻⁴) / 0.886 = 3.667 × 10⁻⁴
Ka ≈ 3.67 × 10⁻⁴ mol L⁻¹

प्रश्न 10. यदि एक धात्विक तार में 0.5 ऐम्पियर की धारा 2 घंटों के लिए प्रवाहित होती है तो तार में से कितने इलेक्ट्रॉन प्रवाहित होंगे?

हल: प्रवाहित आवेश (Q) = धारा (I) × समय (t)
Q = 0.5 A × (2 × 60 × 60 s) = 0.5 × 7200 = 3600 C
1 मोल इलेक्ट्रॉनों पर आवेश (1 फैराडे) = 96500 C
1 मोल इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 6.022 × 10²³ (आवोगाद्रो संख्या)
अतः, 3600 C आवेश द्वारा प्रवाहित इलेक्ट्रॉनों की संख्या:
= (6.022 × 10²³ × 3600) / 96500
= (2.16792 × 10²⁷) / 9.65 × 10⁴
= 2.246 × 10²²
≈ 2.25 × 10²² इलेक्ट्रॉन

प्रश्न 11. उन धातुओं की एक सूची बनाइए जिनका वैद्युतअपघटनी निष्कर्षण होता है।

हल: अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ, जिनका मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) अत्यधिक ऋणात्मक होता है, प्रबल अपचायक होती हैं। इन्हें सामान्य रासायनिक अपचायकों द्वारा उनके अयस्कों से प्राप्त नहीं किया जा सकता। अतः इन धातुओं का निष्कर्षण वैद्युतअपघटनी विधि द्वारा किया जाता है। ऐसी कुछ धातुएँ हैं:
सोडियम (Na), पोटैशियम (K), कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg), एल्युमीनियम (Al)

प्रश्न 12. निम्नलिखित अभिक्रिया में Cr₂O₇²⁻ आयनों के एक मोल के अपचयन के लिए कूलॉम में विद्युत की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
Cr₂O₇²⁻ + 14H⁺ + 6e⁻ → 2Cr³⁺ + 7H₂O

हल: दी गई अभिक्रिया से स्पष्ट है कि 1 मोल Cr₂O₇²⁻ आयनों के अपचयन के लिए 6 मोल इलेक्ट्रॉनों (6 फैराडे विद्युत) की आवश्यकता होती है।
1 फैराडे (F) = 96500 C
अतः आवश्यक विद्युत की मात्रा = 6 × 96500 C = 5,79,000 C = 5.79 × 10⁵ C

प्रश्न 13. चार्जिंग के दौरान प्रयुक्त पदार्थों का विशेष उल्लेख करते हुए लेड संचायक सेल की चार्जिंग क्रियाविधि का वर्णन रासायनिक अभिक्रियाओं की सहायता से कीजिए।

हल: लेड संचायक सेल की चार्जिंग के दौरान, सेल को एक बाह्य विद्युत स्रोत से जोड़ा जाता है। इस अवस्था में सेल एक वैद्युतअपघटनी सेल (इलेक्ट्रोलाइटिक सेल) की तरह कार्य करता है और डिस्चार्ज होने के दौरान हुई अभिक्रियाएँ विपरीत दिशा में होती हैं।
ऐनोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड) पर: PbSO₄(s) का अपचयन होकर स्पंजी लेड (Pb) बनता है।
PbSO₄(s) + 2e⁻ → Pb(s) + SO₄²⁻(aq)
कैथोड (ऋणात्मक इलेक्ट्रोड) पर: PbSO₄(s) का ऑक्सीकरण होकर लेड डाइऑक्साइड (PbO₂) बनता है।
PbSO₄(s) + 2H₂O(l) → PbO₂(s) + SO₄²⁻(aq) + 4H⁺(aq) + 2e⁻
समग्र अभिक्रिया:
2PbSO₄(s) + 2H₂O(l) → Pb(s) + PbO₂(s) + 2H₂SO₄(aq)
इस प्रकार चार्जिंग के दौरान सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) की सान्द्रता बढ़ जाती है और सेल पुनः उपयोग के लिए तैयार हो जाता है।

प्रश्न 14. हाइड्रोजन को छोड़कर ईंधन सेलों में प्रयुक्त किए जा सकने वाले दो अन्य पदार्थ सुझाइए।

हल: ईंधन सेलों में ईंधन के रूप में प्रयुक्त होने वाले दो पदार्थ हैं:
1. मेथेन (CH₄)
2. मेथेनॉल (CH₃OH)

प्रश्न 15. समझाइए कि कैसे लोहे पर जंग लगने का कारण एक वैद्युतरासायनिक सेल बनना माना जाता है?

हल: लोहे पर जंग लगना एक वैद्युतरासायनिक प्रक्रिया है जिसमें लोहे की सतह पर अनियमित सूक्ष्म वैद्युतरासायनिक सेल बन जाते हैं। यह निम्न चरणों में होता है:
1. वायु की नमी और CO₂ के कारण लोहे की सतह पर जल की एक पतली परत बन जाती है जो अम्लीय होती है (H₂CO₃ बनने के कारण)।
2. लोहे के कुछ भाग (ऐनोड) पर ऑक्सीकरण होता है: Fe(s) → Fe²⁺(aq) + 2e⁻ (E° = –0.44 V)
3. मुक्त इलेक्ट्रॉन लोहे के दूसरे भाग (कैथोड) की ओर जाते हैं, जहाँ जल और घुली हुई ऑक्सीजन इनका अपचयन करती है: O₂(g) + 4H⁺(aq) + 4e⁻ → 2H₂O(l) (E° = 1.23 V)
4. सम्पूर्ण सेल अभिक्रिया: 2Fe(s) + O₂(g) + 4H⁺(aq) → 2Fe²⁺(aq) + 2H₂O(l) (E°सेल = 1.67 V)
5. बने हुए Fe²⁺ आयन वायुमंडलीय ऑक्सीजन द्वारा ऑक्सीकृत होकर Fe³⁺ आयन बनाते हैं, जो जल के साथ संयुक्त होकर जलीय फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃.xH₂O) अर्थात जंग बनाते हैं।
इस प्रकार, लोहे की सतह पर ऐनोडिक और कैथोडिक क्षेत्र बनने से एक वैद्युतरासायनिक सेल स्थापित हो जाता है, जो जंग लगने की प्रक्रिया को संचालित करता है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1. निम्नलिखित धातुओं को उस क्रम में व्यवस्थित कीजिए जिसमें वे एक-दूसरे को उनके लवणों के विलयनों में से प्रतिस्थापित करती हैं।
Al, Cu, Fe, Mg और Zn

हल: धातुओं की प्रतिस्थापन श्रृंखला के अनुसार क्रम:
Mg > Al > Zn > Fe > Cu
इसका अर्थ है कि प्रत्येक धातु अपने से दाईं ओर स्थित धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर सकती है। उदाहरण के लिए, Mg, Al, Zn, Fe और Cu सभी को विस्थापित कर सकता है।

प्रश्न 2. नीचे दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों के आधार पर धातुओं को उनकी बढ़ती हुई अपचायक क्षमता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
K⁺/K = –2.93 V, Ag⁺/Ag = +0.80 V, Hg²⁺/Hg = +0.79 V,
Mg²⁺/Mg = –2.37 V, Cr³⁺/Cr = –0.74 V

हल: अपचायक क्षमता मानक इलेक्ट्रोड विभव (E°) के मान के व्युत्क्रमानुपाती होती है। जितना अधिक ऋणात्मक E° होगा, धातु की अपचायक क्षमता उतनी ही अधिक होगी। अतः बढ़ती अपचायक क्षमता का क्रम है:
Ag < Hg < Cr < Mg < K
(संगत E° मान: +0.80 V > +0.79 V > –0.74 V > –2.37 V > –2.93 V)

प्रश्न 3. उस गैल्वेनी सेल को दर्शाइए जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है-
Zn(s) + 2Ag⁺(aq) → Zn²⁺(aq) + 2Ag(s)
अभिक्रिया के आधार पर निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(i) कौन-सा इलेक्ट्रोड ऋणात्मक आवेशित है?
(ii) सेल में विद्युत-धारा के वाहक कौन-से हैं?
(iii) प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रिया क्या है?

हल: दी गई अभिक्रिया के लिए गैल्वेनी सेल:
Zn(s) | Zn²⁺(aq) || Ag⁺(aq) | Ag(s)
(i) जिंक इलेक्ट्रोड (ऐनोड) ऋणात्मक आवेशित है, क्योंकि यहाँ ऑक्सीकरण होता है और इलेक्ट्रॉन मुक्त होते हैं।
(ii) सेल में विद्युत धारा के वाहक इलेक्ट्रॉन (बाह्य परिपथ में) और आयन (आंतरिक विलयन में) हैं।
(iii) ऐनोड (Zn इलेक्ट्रोड) पर: Zn(s) → Zn²⁺(aq) + 2e⁻ (ऑक्सीकरण)
कैथोड (Ag इलेक्ट्रोड) पर: Ag⁺(aq) + e⁻ → Ag(s) (अपचयन)

प्रश्न 4. निम्नलिखित अभिक्रियाओं वाले गैल्वेनी सेल के मानक सेल-विभव (E°सेल) परिकलित कीजिए। उपरोक्त अभिक्रियाओं के लिए ΔrG° एवं साम्य स्थिरांकों (K) की भी गणना कीजिए।
(i) 2Cr(s) + 3Cd²⁺(aq) → 2Cr³⁺(aq) + 3Cd(s)
(ii) Fe²⁺(aq) + Ag⁺(aq) → Fe³⁺(aq) + Ag(s)
दिया गया है: E°Cr³⁺/Cr = –0.74 V, E°Cd²⁺/Cd = –0.40 V, E°Fe³⁺/Fe²⁺ = 0.77 V, E°Ag⁺/Ag = 0.80 V

हल:
(i) 2Cr(s) + 3Cd²⁺(aq) → 2Cr³⁺(aq) + 3Cd(s)
सेल = E°कैथोड – E°ऐनोड = E°Cd²⁺/Cd – E°Cr³⁺/Cr = (–0.40) – (–0.74) = +0.34 V
n = 6 (कुल स्थानांतरित इलेक्ट्रॉन)
ΔrG° = –nFE°सेल = –6 × 96500 × 0.34 = –196860 J = –196.86 kJ
ΔrG° = –2.303 RT log K
log K = –ΔrG° / (2.303 RT) =

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Other Chapters of Class 12 Chemistry
1. ठोस अवस्था
2. विलयन
3. वैधुत रसायन
4. रासायनिक बलगतिकी
5. रसायन
6. तत्वों के निष्कर्षण के सिद्धांत एवं प्रक्रम
7. P - ब्लाक के तत्व
8. d & f ब्लाक के तत्व
9. उपसहसंयोजक यौगिक
10. हैलोएल्केन्स तथा हैलोएरीन्स
11. ऐल्कोहॉल फिनॉल एवं ईथर
12. ऐल्डिहाइड कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल
13. ऐमीन
14. जैव अणु
15. बहुलक
16. दैनिक जीवन में रसायन
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