UP Board Class 12 Chemistry 9. उपसहसंयोजक यौगिक is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 12 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
(i) टेट्राऐमीनडाइएक्वाकोबाल्ट (III) क्लोराइड
(ii) पोटैशियम टेट्रासायनोनिकैलेट (II)
(iii) ट्रिस(एथेन-1,2-डाइऐमीन) क्रोमियम (III) क्लोराइड
(iv) ऐमीनब्रोमिडोक्लोरोनाइट्रिटो-N-प्लैटिनेट (II)
(v) डाइक्लोरोबिस(एथेन-1,2-डाइऐमीन) प्लैटिनम (IV) नाइट्रेट
(vi) आयरन (III) हेक्सासायनिडोफेरेट (II)
(i) टेट्राऐमीनडाइएक्वाकोबाल्ट (III) क्लोराइड:
लिगेण्ड: NH3, H2O; धातु: Co; प्रतिआयन: Cl-
संकुल पर आवेश: [Co(NH3)4(H2O)2]x+
x + (4×0) + (2×0) = +3 ⇒ x = +3
अतः सूत्र: [Co(NH3)4(H2O)2]Cl3
(ii) पोटैशियम टेट्रासायनोनिकैलेट (II):
प्रतिआयन: K+; लिगेण्ड: CN-; धातु: Ni
संकुल पर आवेश: [Ni(CN)4]x-
(+2) + 4×(-1) = -x ⇒ -2 = -x ⇒ x = +2
अतः सूत्र: K2[Ni(CN)4]
(iii) ट्रिस(एथेन-1,2-डाइऐमीन) क्रोमियम (III) क्लोराइड:
सूत्र: [Cr(en)3]Cl3
(iv) ऐमीनब्रोमिडोक्लोरोनाइट्रिटो-N-प्लैटिनेट (II):
सूत्र: [Pt(NH3)BrCl(NO2)]-
(v) डाइक्लोरोबिस(एथेन-1,2-डाइऐमीन) प्लैटिनम (IV) नाइट्रेट:
सूत्र: [PtCl2(en)2](NO3)2
(vi) आयरन (III) हेक्सासायनिडोफेरेट (II):
सूत्र: Fe4[Fe(CN)6]3
(i) [Co(NH3)6]Cl3
(ii) [Co(NH3)5Cl]Cl2
(iii) K3[Fe(CN)6]
(iv) K3[Fe(C2O4)3]
(v) K2[PdCl4]
(vi) [Pt(NH3)2Cl(NH2CH3)]Cl
(i) [Co(NH3)6]Cl3:
Co की ऑक्सीकरण अवस्था: x + 6×0 + 3×(-1)=0 ⇒ x=+3
नाम: हेक्साऐमीनकोबाल्ट (III) क्लोराइड
(ii) [Co(NH3)5Cl]Cl2:
Co की ऑक्सीकरण अवस्था: x + 5×0 + 1×(-1) + 2×(-1)=0 ⇒ x=+3
नाम: पेन्टाऐमीनक्लोरिडोकोबाल्ट (III) क्लोराइड
(iii) K3[Fe(CN)6]:
Fe की ऑक्सीकरण अवस्था: 3×(+1) + x + 6×(-1)=0 ⇒ x=+3
नाम: पोटैशियम हेक्सासायनोफेरेट (III)
(iv) K3[Fe(C2O4)3]:
Fe की ऑक्सीकरण अवस्था: 3×(+1) + x + 3×(-2)=0 ⇒ x=+3
नाम: पोटैशियम ट्राइऑक्सैलेटोफेरेट (III)
(v) K2[PdCl4]:
Pd की ऑक्सीकरण अवस्था: 2×(+1) + x + 4×(-1)=0 ⇒ x=+2
नाम: पोटैशियम टेट्राक्लोरोडोपैलेडेट (II)
(vi) [Pt(NH3)2Cl(NH2CH3)]Cl:
Pt की ऑक्सीकरण अवस्था: x + 2×0 + 1×(-1) + 0 + 1×(-1)=0 ⇒ x=+2
नाम: डाइऐमीनक्लोरिडो(मेथिलऐमीन)प्लैटिनम (II) क्लोराइड
(i) [CoCl2(NH3)2(H2O)2]+
(ii) [Co(en)3]Cl3
(iii) [Co(NH3)5(NO2)](NO3)2
(iv) [Pt(NH3)(H2O)Cl2]
(i) [CoCl2(NH3)2(H2O)2]+: यह ज्यामितीय समावयवता (समपक्ष व विपक्ष) दर्शाता है। समपक्ष रूप ध्रुवण समावयवता (d- एवं l-रूप) भी दर्शाता है।
| समपक्ष (cis) | विपक्ष (trans) |
|---|---|
| लिगेण्ड समान पक्ष में | लिगेण्ड विपरीत पक्ष में |
(ii) [Co(en)3]Cl3: यह ध्रुवण समावयवता (d- एवं l-रूप) दर्शाता है।
(iii) [Co(NH3)5(NO2)](NO3)2: यह आयनन समावयवता तथा बंधनी समावयवता दर्शाता है।
(iv) [Pt(NH3)(H2O)Cl2]: वर्ग समतली ज्यामिति के कारण ज्यामितीय समावयव (समपक्ष व विपक्ष) संभव हैं।
| समपक्ष (cis) | विपक्ष (trans) |
|---|---|
| NH3 व H2O समान पक्ष में | NH3 व H2O विपरीत पक्ष में |
दोनों यौगिकों के जलीय विलयन अलग-अलग परखनलियों में बनाकर निम्न परीक्षण किए:
परीक्षण 1 (BaCl2 विलयन):
• [Co(NH3)5Cl]SO4 में BaCl2 मिलाने पर सफेद BaSO4 अवक्षेप बनता है (SO42- आयन की उपस्थिति)।
• [Co(NH3)5SO4]Cl में कोई अवक्षेप नहीं बनता (SO42- आयन अनुपस्थित)।
परीक्षण 2 (AgNO3 विलयन):
• [Co(NH3)5SO4]Cl में AgNO3 मिलाने पर सफेद AgCl अवक्षेप बनता है (Cl- आयन की उपस्थिति)।
• [Co(NH3)5Cl]SO4 में कोई अवक्षेप नहीं बनता (Cl- आयन अनुपस्थित)।
इन परीक्षणों से सिद्ध होता है कि दोनों यौगिक आयनन समावयव हैं।
[Ni(CN)4]2-: Ni2+ का विन्यास: 3d8। CN- प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड है, जो d-इलेक्ट्रॉनों का युग्मन करा देता है। दो रिक्त 3d-कक्षक dsp2 संकरण में भाग लेते हैं, जिससे वर्ग समतली संरचना बनती है। सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होने के कारण यह प्रतिचुम्बकीय है।
[NiCl4]2-: Cl- दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड है, अतः इलेक्ट्रॉन युग्मन नहीं होता। sp3 संकरण के कारण चतुष्फलकीय संरचना बनती है। इसमें दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होने के कारण यह अनुचुम्बकीय है।
[NiCl4]2-: Cl- दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड है। Ni2+ (3d8) के दो इलेक्ट्रॉन अयुग्मित रहते हैं, अतः यह अनुचुम्बकीय है।
[Ni(CO)4]: CO प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड है। यह Ni(0) के 3d-इलेक्ट्रॉनों का युग्मन करा देता है, जिससे सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं और संकुल प्रतिचुम्बकीय हो जाता है, हालाँकि संरचना चतुष्फलकीय (sp3 संकरित) ही रहती है।
[Fe(CN)6]3-: Fe3+ विन्यास: 3d5। CN- प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड है, जो इलेक्ट्रॉनों को युग्मित करके निम्न प्रचक्रण विन्यास (t2g5 eg0) देता है। इसमें केवल एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन रह जाता है, अतः यह दुर्बल अनुचुम्बकीय है।
[FeF6]3-: F- दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड है। इलेक्ट्रॉन युग्मन नहीं होता, अतः उच्च प्रचक्रण विन्यास (t2g3 eg2) बनता है, जिसमें पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। अतः यह प्रबल अनुचुम्बकीय है।
[Co(NH3)6]3+: Co3+ विन्यास: 3d6। NH3 प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड है, जो d-इलेक्ट्रॉनों का युग्मन करा देता है। दो रिक्त 3d-कक्षक d2sp3 संकरण में भाग लेते हैं, जो आंतरिक कक्षक (n-1)d कक्षकों का उपयोग करता है।
[Co(NH3)6]2+: Co2+ विन्यास: 3d7। यहाँ (n-1)d कक्षक पूर्णतः भरे होने के कारण संकरण में उपलब्ध नहीं हैं। अतः sp3d2 संकरण होता है, जो बाह्य कक्षक (nd) का उपयोग करता है।
Pt2+ का विन्यास: [Xe] 4f14 5d8। CN- प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड है, जो d-इलेक्ट्रॉनों का युग्मन करा देता है। dsp2 संकरण के कारण वर्ग समतली संरचना बनती है। सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होने के कारण अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या शून्य है।
[Mn(H2O)6]2+: Mn2+ विन्यास: 3d5। H2O दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड है, अतः Δo < P (युग्मन ऊर्जा)। इलेक्ट्रॉन उच्च प्रचक्रण विन्यास (t2g3 eg2) में रहते हैं, जिसमें पाँचों इलेक्ट्रॉन अयुग्मित होते हैं।
[Mn(CN)6]4-: CN- प्रबल क्षेत्र लिगेण्ड है, अतः Δo > P। इलेक्ट्रॉन निम्न प्रचक्रण विन्यास (t2g5 eg0) में व्यवस्थित होते हैं, जिसमें केवल एक इलेक्ट्रॉन अयुग्मित रह जाता है।
समग्र वियोजन स्थिरांक (Kd) स्थायित्व स्थिरांक (Ks) का व्युत्क्रम होता है।
Kd = 1 / Ks = 1 / (2.1 × 1013) ≈ 4.76 × 10-14
वर्नर के सिद्धान्त की मुख्य अभिधारणाएँ:
1. धातुएँ दो प्रकार की संयोजकताएँ दर्शाती हैं: प्राथमिक (आयननीय) और द्वितीयक (अन-आयननीय)।
2. प्राथमिक संयोजकताएँ ऋणात्मक आयनों द्वारा संतुष्ट होती हैं।
3. द्वितीयक संयोजकताएँ उदासीन अणुओं या ऋणात्मक आयनों द्वारा संतुष्ट होती हैं। यह उपसहसंयोजन संख्या के बराबर होती है।
4. द्वितीयक संयोजकता से जुड़े लिगेण्ड विशिष्ट दिक्स्थानी व्यवस्था (ज्यामिति) बनाते हैं।
उदाहरण: [Co(NH3)4Cl2]Cl में Co की प्राथमिक संयोजकता Cl- द्वारा तथा द्वितीयक संयोजकता NH3 व Cl- द्वारा संतुष्ट होती है।
FeSO4 + (NH4)2SO4 → FeSO4·(NH4)2SO4·6H2O (मोहर लवण)
यह एक द्विक लवण है, जो जल में वियोजित होकर Fe2+ आयन देता है। अतः Fe2+ का परीक्षण सकारात्मक होता है।
CuSO4 + 4NH3 → [Cu(NH3)4]SO4
यह एक संकुल यौगिक है। जल में यह [Cu(NH3)4]2+ आयन देता है, जिसमें Cu2+ आयन मुक्त नहीं होते। अतः Cu2+ का परीक्षण ऋणात्मक होता है।
(i) समन्वय सत्ता (Coordination Entity): केन्द्रीय धातु परमाणु/आयन एवं उससे जुड़े लिगेण्डों का समूह।
उदाहरण: [Co(NH3)6]3+, [Ni(CN)4]2-
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