UP Board class 9 Science 12. ध्वनि is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 9 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने चारों ओर के माध्यम (जैसे वायु) के कणों को धक्का देती है। ये कण अपने पास के कणों को धक्का देते हैं और फिर अपनी मूल स्थिति में लौट आते हैं। इस प्रकार, विक्षोभ (ऊर्जा) एक कण से दूसरे कण में स्थानांतरित होता रहता है, हालाँकि कण स्वयं आगे नहीं बढ़ते। यह विक्षोभ तरंग के रूप में माध्यम से होकर यात्रा करता है और अंततः हमारे कानों तक पहुँचकर हमें ध्वनि सुनाई देती है।
उत्तर: जब विद्यालय की घंटी को बजाया जाता है (उस पर आघात किया जाता है), तो धातु से बनी घंटी तेजी से कंपन करने लगती है। यह कंपन आसपास की वायु के कणों में कंपन पैदा करता है। ये कंपन तरंगों के रूप में वायु में फैलते हैं और जब ये हमारे कानों तक पहुँचते हैं, तो हमें घंटी की ध्वनि सुनाई देती है।
उत्तर: ध्वनि तरंगों को यांत्रिक तरंगें इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनके संचरण के लिए किसी द्रव्यात्मक माध्यम (जैसे ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है। ध्वनि निर्वात में नहीं चल सकती। यह माध्यम के कणों के कंपन के कारण आगे बढ़ती है, इसीलिए इसे यांत्रिक तरंग कहते हैं।
उत्तर: नहीं, हम अपने मित्र की ध्वनि चंद्रमा पर नहीं सुन पाएँगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि चंद्रमा पर वायुमंडल नहीं है (यह लगभग निर्वात है)। चूँकि ध्वनि के संचरण के लिए एक माध्यम (जैसे वायु, पानी) की आवश्यकता होती है, और चंद्रमा पर कोई माध्यम नहीं है, इसलिए ध्वनि तरंगें एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं जा पाएँगी। अंतरिक्ष यात्री रेडियो तरंगों का उपयोग करके बातचीत करते हैं, जो निर्वात में भी चल सकती हैं।
उत्तर: ध्वनि की चाल माध्यम के घनत्व पर निर्भर करती है। ठोस पदार्थों में कण सबसे निकट होते हैं और उनमें अंतराण्विक बल सबसे प्रबल होते हैं, जिससे ऊर्जा का स्थानांतरण बहुत तेजी से होता है। दिए गए विकल्पों में, लोहा (एक ठोस) में ध्वनि की चाल सबसे अधिक होगी। उसके बाद जल (द्रव) में और सबसे कम वायु (गैस) में होगी।
उत्तर:
प्रतिध्वनि सुनने में लगा समय, t = 3 s
ध्वनि की चाल, v = 342 m/s
सूत्र: दूरी = चाल × समय
3 सेकंड में ध्वनि द्वारा तय की गई कुल दूरी = v × t = 342 × 3 = 1026 m
यह दूरी ध्वनि के स्रोत से परावर्तक सतह तक जाने और वापस आने की है।
अतः, स्रोत और परावर्तक सतह के बीच की दूरी = कुल दूरी / 2 = 1026 / 2 = 513 m
अतः स्रोत तथा परावर्तक सतह के बीच की दूरी 513 मीटर है।
उत्तर: कंसर्ट हॉल या सभागार की छतें वक्राकार (घुमावदार) इसलिए बनाई जाती हैं ताकि ध्वनि का परावर्तन नियंत्रित किया जा सके। यह वक्राकार डिज़ाइन ध्वनि तरंगों को हॉल के विभिन्न कोनों में फैलाकर प्रबलता बढ़ाता है और हर स्थान पर बैठे श्रोता तक ध्वनि को पहुँचाता है। साथ ही, यह अनावश्यक अनुरणन को कम करके ध्वनि की स्पष्टता बनाए रखने में भी मदद करता है।
उत्तर: एक स्वस्थ युवा मनुष्य के कानों के लिए श्रव्यता परास (सुनने की सीमा) 20 हर्ट्ज (Hz) से 20,000 हर्ट्ज (20 kHz) तक होती है। इस सीमा से कम या अधिक आवृत्ति की ध्वनियाँ हम सुन नहीं पाते।
उत्तर:
(क) अवश्रव्य ध्वनि: वे ध्वनियाँ जिनकी आवृत्ति 20 Hz से कम होती है, अवश्रव्य ध्वनि कहलाती हैं। इन्हें मनुष्य सुन नहीं सकता। (उदाहरण: भूकंप से पहले की तरंगें, हाथी द्वारा बनाई गई कम आवृत्ति की ध्वनि)।
(ख) पराध्वनि: वे ध्वनियाँ जिनकी आवृत्ति 20,000 Hz (20 kHz) से अधिक होती है, पराध्वनि कहलाती हैं। इन्हें भी मनुष्य सुन नहीं सकता। (उदाहरण: चमगादड़ द्वारा उत्सर्जित ध्वनि, सोनार द्वारा उपयोग की जाने वाली तरंगें)।
उत्तर:
प्रतिध्वनि लौटने में लगा समय, t = 1.02 s
खारे पानी में ध्वनि की चाल, v = 1531 m/s
सूत्र: दूरी = चाल × समय
1.02 सेकंड में ध्वनि द्वारा तय की गई कुल दूरी = v × t = 1531 × 1.02 = 1561.62 m
यह दूरी पनडुब्बी से चट्टान तक जाने और वापस आने की है।
अतः, पनडुब्बी और चट्टान के बीच की दूरी = कुल दूरी / 2 = 1561.62 / 2 = 780.81 m
अतः चट्टान पनडुब्बी से लगभग 780.81 मीटर की दूरी पर स्थित है।
उत्तर: (ग) ऊर्जा
व्याख्या: ध्वनि एक प्रकार की ऊर्जा है जो कंपनशील वस्तु द्वारा उत्पन्न होती है और तरंगों के रूप में एक माध्यम से यात्रा करती है। जब यह ऊर्जा हमारे कानों तक पहुँचती है, तो हमें सुनाई देती है।
उत्तर: हम निम्नलिखित क्रियाओं द्वारा ध्वनि उत्पन्न कर सकते हैं:
1. आघात करके: जैसे ढोल बजाना, थाली पर चम्मच से चोट करना।
2. रगड़ या घर्षण द्वारा: जैसे वायलिन की तार को गज से रगड़ना।
3. फूँक मारकर: जैसे बाँसुरी, शहनाई बजाना।
4. कंपन कराकर: जैसे मोबाइल फोन का वाइब्रेट होना।
सामान्य तौर पर, किसी भी क्रिया से यदि किसी वस्तु में कंपन पैदा होता है, तो वह ध्वनि उत्पन्न करती है।
उत्तर: ध्वनि के संचरण के लिए एक द्रव्यात्मक माध्यम की आवश्यकता होती है। यह तीन प्रकार के माध्यमों से होकर गुजर सकती है:
1. ठोस (जैसे लकड़ी, धातु की छड़)
2. द्रव (जैसे पानी)
3. गैस (जैसे वायु)
ध्वनि निर्वात में संचरित नहीं हो सकती।
उत्तर: जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने संपर्क में आने वाले माध्यम (जैसे वायु) के कणों को धक्का देती है, जिससे एक संपीडन (उच्च दाब का क्षेत्र) बनता है। जब वस्तु पीछे हटती है, तो एक विरलन (निम्न दाब का क्षेत्र) बनता है। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और संपीडन व विरलन की एक श्रृंखला तरंग के रूप में माध्यम में फैलती है। यह तरंग हमारे कानों तक पहुँचती है और कान की पर्दे (कर्ण पटह) को कंपित करती है, जिसे हमारा मस्तिष्क ध्वनि के रूप में अनुभव करता है।
उत्तर: जब कोई कंपन करने वाली वस्तु (जैसे लाउडस्पीकर का डायाफ्राम) आगे की ओर कंपन करती है, तो यह सामने की वायु के कणों को सघन कर देती है। इससे वायु के उस क्षेत्र में दाब बढ़ जाता है। दाब के इस बढ़े हुए क्षेत्र को ही संपीडन कहते हैं। संपीडन वह क्षेत्र है जहाँ माध्यम के कण पास-पास आ जाते हैं।
उत्तर: जब कोई कंपन करने वाली वस्तु पीछे की ओर कंपन करती है, तो यह सामने की वायु के कणों को दूर खींचती है। इससे वायु के उस क्षेत्र में दाब कम हो जाता है। दाब के इस घटे हुए क्षेत्र को ही विरलन कहते हैं। विरलन वह क्षेत्र है जहाँ माध्यम के कण दूर-दूर हो जाते हैं।
उत्तर: ध्वनि तरंगें एक प्रकार की यांत्रिक तरंगें हैं जो किसी माध्यम में कंपन द्वारा उत्पन्न विक्षोभ के कारण बनती हैं।
निर्माण: जब कोई वस्तु तेजी से आगे-पीछे कंपन करती है, तो वह अपने चारों ओर के माध्यम में लगातार संपीडन और विरलन पैदा करती रहती है। संपीडन और विरलन का यह एक निश्चित क्रम ही ध्वनि तरंग का निर्माण करता है, जो माध्यम में ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाता है।
उत्तर: ध्वनि तरंगों को यांत्रिक तरंगें इसलिए कहा जाता है क्योंकि:
1. इनके संचरण के लिए किसी द्रव्यात्मक माध्यम (ठोस, द्रव, गैस) की आवश्यकता होती है। ये निर्वात में नहीं चल सकतीं।
2. इनमें ऊर्जा का स्थानांतरण माध्यम के कणों के यांत्रिक कंपन (आगे-पीछे की गति) के द्वारा होता है।
उत्तर:
(क) तरंगदैर्ध्य: ध्वनि तरंग में दो क्रमागत संपीडनों या दो क्रमागत विरलनों के बीच की दूरी को तरंगदैर्ध्य कहते हैं। इसे ग्रीक अक्षर λ (लैम्डा) से दर्शाते हैं। इसका मात्रक मीटर (m) है।
(ख) आवृत्ति: एक सेकंड में किसी निश्चित बिंदु से गुजरने वाले संपीडनों या विरलनों की कुल संख्या को आवृत्ति कहते हैं। दूसरे शब्दों में, यह स्रोत के एक सेकंड में किए गए दोलनों की संख्या है। इसे f से दर्शाते हैं और इसका मात्रक हर्ट्ज (Hz) है।
(ग) आवर्त काल: एक पूर्ण दोलन (एक संपीडन और एक विरलन) को पूरा करने में लगा समय आवर्त काल कहलाता है। यह आवृत्ति का व्युत्क्रम होता है (T = 1/f)। इसका मात्रक सेकंड (s) है।
(घ) आयाम: माध्यम के कणों का अपनी मूल स्थिति (विराम अवस्था) से अधिकतम विस्थापन आयाम कहलाता है। यह ध्वनि की प्रबलता या तीव्रता से संबंधित है। आयाम जितना अधिक होगा, ध्वनि उतनी ही तेज होगी।
उत्तर:
| ध्वनि की तीव्रता | ध्वनि की प्रबलता |
|---|---|
| यह ध्वनि तरंग द्वारा प्रति सेकंड प्रति इकाई क्षेत्रफल में ले जाई जाने वाली ऊर्जा की मात्रा है। | यह ध्वनि के लिए कानों की संवेदनशीलता की माप है, यानी ध्वनि कितनी 'तेज' या 'हल्की' लगती है। |
| यह एक भौतिक राशि है जिसे मापा जा सकता है। | यह एक मनोवैज्ञानिक अनुभव है जो व्यक्ति और आवृत्ति पर निर्भर करता है। |
| इसका मात्रक वाट प्रति वर्ग मीटर (W/m²) है। | इसे डेसिबल (dB) नामक इकाई में व्यक्त किया जाता है। |
| यह मुख्य रूप से तरंग के आयाम पर निर्भर करती है। | यह तीव्रता के साथ-साथ ध्वनि की आवृत्ति और श्रोता के कान की संरचना पर भी निर्भर करती है। |
उत्तर: जब कोई वस्तु उस माध्यम में ध्वनि की चाल से अधिक चाल से गति करती है, तो उसकी चाल को पराध्वनिक चाल कहते हैं। उदाहरण के लिए, वायु में ध्वनि की चाल लगभग 343 m/s (सामान्य परिस्थितियों में) है। यदि कोई जेट विमान या गोली 343 m/s से अधिक चाल से उड़े, तो उसकी चाल पराध्वनिक होगी।
उत्तर: जब कोई वस्तु (जैसे सुपरसोन
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