UP Board class 9 Science 5. जीवन की मौलिक इकाई is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 9 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: कोशिका की खोज सन् 1665 में एक अंग्रेज वैज्ञानिक रॉबर्ट हुक ने की थी। उन्होंने कॉर्क (देखने में मधुकोश जैसी) की एक पतली काट को अपने द्वारा बनाए गए आदिम सूक्ष्मदर्शी से देखा। उन्होंने देखा कि कॉर्क में छोटे-छोटे कमरे जैसी संरचनाएँ हैं, जिन्हें उन्होंने 'सेल' (कोशिका) नाम दिया। यह शब्द लैटिन भाषा के 'सेलुला' शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ 'छोटा कमरा' होता है।
उत्तर: कोशिका को जीवन की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई इसलिए कहा जाता है क्योंकि:
1. संरचनात्मक इकाई: सभी सजीवों का शरीर एक या अनेक कोशिकाओं से मिलकर बना होता है। कोशिकाएँ ही मिलकर ऊतक, अंग और पूरे जीव का निर्माण करती हैं। इस प्रकार, वे जीव के शरीर की मूलभूत रचनात्मक इकाई हैं।
2. क्रियात्मक इकाई: जीवन के सभी आवश्यक कार्य जैसे श्वसन, पोषण, उत्सर्जन, वृद्धि और प्रजनन आदि कोशिका के भीतर ही होते हैं। प्रत्येक कोशिका स्वतंत्र रूप से अपने जीवन के लिए आवश्यक सभी क्रियाएँ कर सकती है। इसलिए, यह जीवन की मूल कार्यात्मक इकाई भी है।
उत्तर: CO₂ और पानी जैसे पदार्थ कोशिका झिल्ली (प्लाज्मा झिल्ली) से होकर दो प्रमुख प्रक्रियाओं द्वारा अंदर-बाहर आते-जाते हैं:
1. विसरण (Diffusion): गैसीय पदार्थ, जैसे CO₂ और O₂, विसरण द्वारा गति करते हैं। इसमें अणु उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र से निम्न सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर स्वतः गति करते हैं। उदाहरण के लिए, कोशिका के अंदर श्वसन क्रिया में CO₂ का उत्पादन होता है, जिससे कोशिका के अंदर CO₂ की सांद्रता बढ़ जाती है और बाहर कम होती है। इस सांद्रता अंतर के कारण CO₂ अणु कोशिका से बाहर निकल जाते हैं। इसी प्रकार, बाहर O₂ की अधिक सांद्रता होने पर O₂ अणु कोशिका के अंदर प्रवेश कर जाते हैं।
2. परासरण (Osmosis): जल के अणुओं का अर्धपारगम्य झिल्ली के आर-पार उच्च जल सांद्रता वाले क्षेत्र से निम्न जल सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर गति करना परासरण कहलाता है। यदि कोशिका के बाहर जल की सांद्रता अधिक है (जैसे शुद्ध जल में), तो जल परासरण द्वारा कोशिका के अंदर प्रवेश करेगा। इसके विपरीत, यदि बाहर का विलयन अधिक सांद्र है (जैसे नमकीन जल), तो जल कोशिका से बाहर निकल जाएगा।
उत्तर: प्लाज्मा झिल्ली को वर्णात्मक पारगम्य या अर्धपारगम्य झिल्ली इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह सभी पदार्थों को स्वतंत्र रूप से आने-जाने नहीं देती। यह एक चयनात्मक झिल्ली है जो केवल कुछ विशिष्ट पदार्थों जैसे जल, कुछ गैसों (O₂, CO₂) और छोटे अणुओं को ही आर-पार जाने देती है, जबकि बड़े अणुओं या आयनों की गति को नियंत्रित या रोकती है। यह चयनात्मकता कोशिका के अंदर एक स्थिर आंतरिक वातावरण बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
| प्रोकेरियोटी कोशिका | यूकेरियोटी कोशिका |
|---|---|
| 1. आकार प्राय: छोटा (1 - 10 μm) | 1. आकार प्राय: बड़ा (5 - 100 μm) |
| 2. केन्द्रकीय क्षैत्र : अस्पष्ट, केन्द्रक झिल्ली से घिरा नहीं रहता और इसे न्यूक्लियॉइड कहते हैं। | 2. केन्द्रकीय क्षैत्र : सुस्पष्ट जो चारों ओर से केन्द्रकीय झिल्ली से घिरा रहता है। |
| 3. क्रोमोसोम : एक | 3. क्रोमोसोम : एक से अधिक |
| 4. झिल्ली युक्त कोशिका अंगक : अनुपस्थित | 4. झिल्ली युक्त कोशिका अंगक : उपस्थित |
उत्तर: हाँ, दो ऐसे कोशिकांग हैं जिनमें अपना स्वयं का आनुवंशिक पदार्थ (DNA) होता है:
1. माइटोकॉन्ड्रिया (जंतु और पादप दोनों प्रकार की कोशिकाओं में पाया जाता है)।
2. प्लैस्टिड (केवल पादप कोशिकाओं में पाया जाता है, जैसे - हरित लवक या क्लोरोप्लास्ट)।
उत्तर: यदि किसी कोशिका का संगठन किसी भौतिक (जैसे अत्यधिक ताप या दाब) या रासायनिक (जैसे विषैले पदार्थ) प्रभाव के कारण नष्ट हो जाता है, तो कोशिका के सभी जीवन प्रक्रम रुक जाएँगे। कोशिका के अंगक काम करना बंद कर देंगे। झिल्ली की अखंडता टूट जाने से कोशिका का आंतरिक वातावरण बिगड़ जाएगा। इससे कोशिका की जीवन क्षमता समाप्त हो जाएगी और अंततः कोशिका मर जाएगी। चूंकि कोशिका जीवन की मूल इकाई है, इसके नष्ट होने से उस ऊतक, अंग और यहाँ तक कि पूरे जीव का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।
उत्तर: लाइसोसोम को 'आत्मघाती थैली' कहा जाता है क्योंकि इसमें शक्तिशाली पाचक एंजाइम भरे रहते हैं। जब कोशिका किसी कारणवश क्षतिग्रस्त, वृद्ध या मृत हो जाती है, तो लाइसोसोम की झिल्ली फट सकती है। इससे इन एंजाइमों का रिसाव होकर पूरी कोशिका के ही विभिन्न घटकों को पचाने लगता है। इस प्रकार, लाइसोसोम अपनी ही कोशिका को नष्ट कर देता है, इसीलिए इसे यह नाम दिया गया है। हालाँकि, यह प्रक्रिया कोशिकीय कचरे को साफ करने और नई कोशिकाओं के लिए जगह बनाने में भी उपयोगी होती है।
उत्तर: कोशिका के अंदर प्रोटीन का संश्लेषण राइबोसोम नामक कोशिकांग में होता है। राइबोसोम कोशिका द्रव्य में स्वतंत्र रूप से तथा अंतर्द्रव्यी जालिका (ER) की सतह पर चिपके हुए पाए जाते हैं। ये कोशिका की 'प्रोटीन फैक्ट्री' के रूप में कार्य करते हैं।
| पादप कोशिका | जंतु कोशिका |
|---|---|
| 1. इसमें कोशिका भित्ति होती है, जो सेल्युलोज की बनी होती है। | 1. इसमें कोशिका भित्ति नहीं होती। |
| 2. इसमें हरित लवक (क्लोरोप्लास्ट) उपस्थित होते हैं। | 2. इसमें हरित लवक अनुपस्थित होते हैं। |
| 3. इनमें प्रकाश संश्लेषण की क्रिया होती है। | 3. इनमें प्रकाश संश्लेषण नहीं होता। |
| 4. इनमें आकार में बड़ी और आयताकार रसधानी होती है। | 4. इनमें आकार में छोटी और अनेक रसधानियाँ होती हैं। |
| 5. इनमें प्लैस्टिड पाए जाते हैं। | 5. इनमें प्लैस्टिड नहीं पाए जाते। |
| प्रोकेरियोटी कोशिका | यूकैरियोटी कोशिका |
|---|---|
| 1. आकार में प्रायः छोटी (1-10 μm)। | 1. आकार में प्रायः बड़ी (5-100 μm)। |
| 2. विकसित केन्द्रक नहीं होता; केन्द्रक झिल्ली अनुपस्थित। आनुवंशिक पदार्थ कोशिकाद्रव्य में ही फैला रहता है (न्यूक्लियॉइड)। | 2. विकसित केन्द्रक होता है; केन्द्रक झिल्ली से घिरा रहता है। |
| 3. केवल एक गुणसूत्र (क्रोमोसोम) होता है। | 3. एक से अधिक गुणसूत्र होते हैं। |
| 4. झिल्ली-युक्त कोशिकांग जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जीकाय आदि अनुपस्थित होते हैं। | 4. झिल्ली-युक्त कोशिकांग जैसे माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जीकाय आदि उपस्थित होते हैं। |
| 5. उदाहरण: जीवाणु (बैक्टीरिया), नील-हरित शैवाल। | 5. उदाहरण: पौधे, जंतु, कवक, प्रोटोजोआ आदि की कोशिकाएँ। |
उत्तर: प्लाज्मा झिल्ली कोशिका की सुरक्षात्मक सीमा है। यदि यह फट या टूट जाती है, तो:
1. कोशिका का आंतरिक द्रव (कोशिकाद्रव्य) बाहर निकलने लगेगा और बाहरी वातावरण के पदार्थ अनियंत्रित रूप से अंदर आने लगेंगे।
2. कोशिका का आंतरिक रासायनिक संतुलन बिगड़ जाएगा।
3. कोशिका के विभिन्न अंगक एक-दूसरे से मिलकर काम नहीं कर पाएँगे।
4. कोशिका की जीवन प्रक्रियाएँ (जैसे श्वसन, पोषण) रुक जाएँगी।
5. अंततः कोशिका की मृत्यु हो जाएगी और लाइसोसोम जैसे अंगक उसे पचा देंगे।
उत्तर: गॉल्जी उपकरण कोशिका का एक महत्वपूर्ण कोशिकांग है जो मुख्य रूप से पदार्थों के संशोधन, संचय, पैकेजिंग और वितरण का कार्य करता है। यदि यह न हो तो:
1. अंतर्द्रव्यी जालिका (ER) में बने प्रोटीन और लिपिड का संशोधन एवं पैकेजिंग नहीं हो पाएगा।
2. कोशिका के विभिन्न भागों (जैसे झिल्ली, लाइसोसोम) के लिए बने पदार्थ सही जगह पर नहीं पहुँच पाएँगे।
3. कोशिका से बाहर स्रावित होने वाले पदार्थ (जैसे एंजाइम, हॉर्मोन) बन नहीं पाएँगे या स्रावित नहीं हो पाएँगे।
4. लाइसोसोम का निर्माण प्रभावित होगा।
5. कोशिका भित्ति के निर्माण में बाधा आएगी।
इस प्रकार, गॉल्जी उपकरण के अभाव में कोशिका का संगठन और कार्यप्रणाली पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाएगी, जिससे कोशिका जीवित नहीं रह पाएगी।
उत्तर: माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का 'बिजलीघर' कहा जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह कोशिकीय श्वसन की क्रिया का स्थल है। इस क्रिया में ग्लूकोज जैसे भोज्य पदार्थों का ऑक्सीकरण होता है और ऊर्जा मुक्त होती है। यह ऊर्जा ATP (एडीनोसिन ट्राइफॉस्फेट) नामक अणु के रूप में संचित हो जाती है। ATP कोशिका की सभी जैविक क्रियाओं (जैसे संचलन, संश्लेषण, परिवहन) के लिए तत्काल उपयोग की जाने वाली ऊर्जा का स्रोत है। चूंकि माइटोकॉन्ड्रिया ही कोशिका के लिए इस ऊर्जा का उत्पादन करता है, इसीलिए इसे बिजलीघर की संज्ञा दी गई है।
उत्तर: कोशिका झिल्ली (प्लाज्मा झिल्ली) लिपिड और प्रोटीन से मिलकर बनी होती है। इन घटकों का संश्लेषण निम्नलिखित स्थानों पर होता है:
1. लिपिड का संश्लेषण: चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका (Smooth Endoplasmic Reticulum - SER) में होता है।
2. प्रोटीन का संश्लेषण: दानेदार या खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका (Rough Endoplasmic Reticulum - RER) की सतह पर लगे राइबोसोम में होता है। संश्लेषण के बाद इन प्रोटीनों को गॉल्जी उपकरण में भेजा जाता है, जहाँ उन्हें संशोधित करके कोशिका झिल्ली में जोड़ने के लिए तैयार किया जाता है।
उत्तर: अमीबा एक एककोशिकीय जीव है। यह अपना भोजन एंडोसाइटोसिस नामक प्रक्रिया द्वारा प्राप्त करता है। इस प्रक्रिया में:
1. अमीबा भोजन के कण (जैसे बैक्टीरिया) के संपर्क में आता है।
2. वह अपनी लचीली प्लाज्मा झिल्ली को बाहर की ओर फैलाकर भोजन के कण को चारों ओर से घेर लेता है।
3. झिल्ली अंदर की ओर धंसकर एक थैली बना लेती है, जिसे 'भोजन रसधानी' कहते हैं।
4. यह थैली कोशिका द्रव्य में चली जाती है।
5. फिर लाइसोसोम इसमें पाचक एंजाइम मिलाते हैं और भोजन का पाचन हो जाता है।
इस विशिष्ट प्रकार के एंडोसाइटोसिस को, जिसमें ठोस कणों का अंतर्ग्रहण होता है, फैगोसाइटोसिस भी कहते हैं।
उत्तर: परासरण एक विशेष प्रकार का विसरण है। इसमें जल के अणु एक अर्धपारगम्य झिल्ली के आर-पार, जल की उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र से निम्न सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर गति करते हैं। अर्धपारगम्य झिल्ली वह है जो जल के अणुओं को तो गुजरने देती है, लेकिन विलेय (जैसे चीनी, नमक) के अणुओं को रोक देती है। यह प्रक्रिया पौधों और जंतुओं की कोशिकाओं में जल के परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उत्तर:
(i) B और C कपों में जल एकत्र होने का कारण: कप B में चीनी और कप C में नमक डाला गया था। ये पदार्थ घुलकर आलू के अंदर के खोखले भाग में एक सांद्र विलयन बना देते हैं। बाहर के बर्तन में साधारण जल (तनु विलयन) है। परासरण के नियमानुसार, जल अणु कम सांद्रता वाले क्षेत्र (बाहर का जल) से अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र (आलू के अंदर का चीनी/नमक विलयन) की ओर गति करते हैं। इसलिए जल आलू के अंदर प्रवेश करता है और वहाँ एकत्र हो जाता है।
(ii) D आलू (उबले आलू) का महत्व: उबालने से आलू की कोशिकाएँ मर जाती हैं और उनकी प्लाज्मा झिल्ली की अर्धपारगम्यता नष्ट हो जाती है। यह आलू प्रयोग में एक नियंत्रण के रूप में काम करता है। यह सिद्ध करता है कि परासरण केवल जीवित अर्धपारगम्य झिल्ली वाली कोशिकाओं में ही होता है, मृत कोशिकाओं में नहीं।
(iii) A और D में जल एकत्र न होने का कारण:
कप A: इसमें कुछ नहीं डाला गया था, इसलिए अंदर और बाहर दोनों जगह साधारण जल है। सांद्रता में कोई अंतर न होने के कारण परासरण नहीं होता और जल एकत्र नहीं होता।
कप D: यह उबला हुआ आलू है, जिसकी कोशिकाएँ मृत हैं और झिल्ली अर्धपारगम्य नहीं रही। भले ही अंदर चीनी का सांद्र विलयन है, परासरण नहीं हो पाता क्योंकि झिल्ली जल के अणुओं की गति को नियंत्रित नहीं कर सकती। इसलिए यहाँ भी जल एकत्र नहीं होता।
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