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UP Board class 9 Science (13. हम बीमार क्यों होते हैं) solution PDF

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UP Board class 9 Science (13. हम बीमार क्यों होते हैं) solution

UP Board class 9 Science 13. हम बीमार क्यों होते हैं Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 9 Science (विज्ञान)

अध्याय 13: हम बीमार क्यों होते हैं

1. अच्छे स्वास्थ्य की दो आवश्यक स्थितियाँ बताइए |

उत्तर: अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए निम्नलिखित दो स्थितियाँ अत्यंत आवश्यक हैं:

  • पर्याप्त पोषण एवं संतुलित आहार: शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज) सही मात्रा में मिलने चाहिए, जिससे शरीर की सभी क्रियाएँ सुचारू रूप से चल सकें और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे।
  • स्वस्थ सामाजिक एवं मानसिक वातावरण: तनावमुक्त, सहयोगपूर्ण और सुरक्षित सामाजिक परिवेश तथा सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए उतने ही जरूरी हैं।

2. रोगमुक्ति की कोई दो आवश्यक परिस्थितियाँ बताइए |

उत्तर: रोगों से मुक्त रहने के लिए निम्नलिखित दो परिस्थितियाँ आवश्यक हैं:

  • स्वच्छता का पालन: व्यक्तिगत स्वच्छता (जैसे नियमित स्नान, हाथ धोना) के साथ-साथ आसपास के वातावरण की स्वच्छता (साफ पानी, कूड़ा प्रबंधन) रोगाणुओं के फैलने को रोकती है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता का मजबूत होना: संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है, जो रोगाणुओं से लड़कर हमें बीमार होने से बचाती है।

3. क्या उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर एक जैसे हैं अथवा भिन्न क्यों?

उत्तर: कुछ सीमा तक इनके उत्तर समान हैं, क्योंकि अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने वाली परिस्थितियाँ (जैसे अच्छा पोषण और स्वच्छता) स्वतः ही रोगों से बचाव करती हैं।

हालाँकि, ये अवधारणाएँ पूरी तरह एक जैसी नहीं हैं। अच्छे स्वास्थ्य का अर्थ केवल बीमारी की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कुशलता की स्थिति है। जबकि रोगमुक्ति का संकीर्ण अर्थ किसी विशेष रोग से मुक्त होना है। कोई व्यक्ति रोगमुक्त तो हो सकता है, लेकिन तनावग्रस्त या अवसाद में होने के कारण पूर्णतः स्वस्थ नहीं कहला सकता।


पृष्ठ संख्या 203

1. ऐसे तीन कारण लिखिए जिससे आप सोचते हैं कि आप बीमार हैं तथा चिकित्सक के पास जाना चाहते हैं| यदि इनमें से एक भी लक्षण हो तो क्या आप फिर भी चिकित्सक के पास जाना चाहेंगे? क्यों अथवा क्यों नहीं?

उत्तर: बीमार होने के तीन सामान्य लक्षण या कारण हो सकते हैं:

  1. तेज बुखार आना।
  2. लगातार उल्टी या दस्त होना।
  3. साँस लेने में तकलीफ या तेज सीने में दर्द।

यदि इनमें से केवल एक हल्का लक्षण (जैसे एक बार उल्टी होना) दिखे, तो तुरंत चिकित्सक के पास जाना जरूरी नहीं है। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अक्सर मामूली संक्रमण से स्वयं लड़ लेती है।

लेकिन, यदि कोई भी लक्षण गंभीर है, लंबे समय (दो-तीन दिन से अधिक) तक बना रहता है, या दैनिक कार्यों में बाधा डाल रहा है, तो बिना देरी किए चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए ताकि गंभीर समस्या का पता चल सके और समय पर इलाज हो सके।


2. निम्नलिखित में से किसके लंबे समय तक रहने के कारण आप समझते हैं कि आपके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा| तथा क्यों?

० यदि आप पीलिया रोग से ग्रस्त हैं|
* यदि आपके शरीर पर जूँ (Lice) हैं|
* यदि आप मुँहासों से ग्रस्त हैं|

उत्तर: इनमें से पीलिया रोग के लंबे समय तक रहने पर स्वास्थ्य पर सबसे बुरा प्रभाव पड़ेगा।

कारण: पीलिया यकृत (Liver) से संबंधित एक गंभीर रोग है। यह यकृत में सूजन या क्षति के कारण होता है, जिससे शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ बढ़ जाता है। लंबे समय तक रहने पर यह यकृत की कार्यक्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे पाचन संबंधी गंभीर समस्याएँ, कमजोरी और अन्य जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

जूँ या मुँहासे आमतौर पर त्वचा संबंधी समस्याएँ हैं, जो शारीरिक असुविधा या सामाजिक चिंता तो पैदा कर सकते हैं, लेकिन आमतौर पर पीलिया जैसे आंतरिक अंगों को प्रभावित करने वाले रोग की तरह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा नहीं बनते।


पृष्ठ संख्या 210

1. जब आप बीमार होते हैं तो आपको सुपाच्य तथा पोषणयुक्त भोजन करने का परामर्श क्यों दिया जाता है?

उत्तर: बीमार होने पर सुपाच्य और पोषणयुक्त भोजन करने की सलाह निम्नलिखित कारणों से दी जाती है:

  • ऊर्जा की पूर्ति: बीमारी के दौरान शरीर रोगाणुओं से लड़ने में अधिक ऊर्जा खर्च करता है। पोषक तत्वों से भरपूर भोजन इस ऊर्जा की आपूर्ति करता है।
  • पाचन तंत्र पर कम दबाव: सुपाच्य (आसानी से पचने वाला) भोजन पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालता, जो बीमारी में अक्सर कमजोर हो जाता है।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना: विटामिन, प्रोटीन और खनिज युक्त भोजन शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाओं के निर्माण और कार्य में मदद करके जल्दी ठीक होने की प्रक्रिया को तेज करता है।

2. संक्रामक रोग फैलने की विभिन्न विधियाँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तर: संक्रामक रोग निम्नलिखित विधियों से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकते हैं:

  1. वायु द्वारा: खाँसने, छींकने या बात करने पर निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के माध्यम से। उदाहरण: सर्दी-जुकाम, टीबी, कोविड-19।
  2. दूषित जल व भोजन द्वारा: रोगाणुओं से दूषित पानी पीने या भोजन खाने से। उदाहरण: हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए।
  3. सीधे संपर्क द्वारा: रोगी के सीधे शारीरिक संपर्क में आने, चुंबन लेने या यौन संपर्क से। उदाहरण: दाद, एड्स, सिफलिस।
  4. रोगवाहक जंतुओं द्वारा: मच्छर, मक्खी, जूँ आदि जंतु रोगाणुओं को एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुँचाते हैं। उदाहरण: मलेरिया (मच्छर), प्लेग (पिस्सू)।
  5. दूषित वस्तुओं/सतहों के संपर्क द्वारा: रोगी द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुओं (तौलिया, रुमाल, बर्तन) को छूने से।

3. संक्रामक रोगों को फैलने से रोकने के लिए आपके विद्यालय में कौन-कौन सी सावधानियाँ आवश्यक हैं?

उत्तर: विद्यालय में संक्रामक रोगों के फैलाव को रोकने के लिए निम्नलिखित सावधानियाँ बेहद जरूरी हैं:

  • विद्यार्थियों व शिक्षकों को नियमित रूप से साबुन से हाथ धोने के लिए प्रोत्साहित करना, खासकर भोजन से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद।
  • खाँसते या छींकते समय मुँह को रुमाल या टिशू से ढकना और उपयोग किए गए टिशू को ढक्कन वाले डस्टबिन में डालना।
  • विद्यालय परिसर, विशेषकर शौचालयों, कक्षाओं और पीने के पानी के स्रोतों की नियमित सफाई और कीटाणुरहित करना
  • बीमार छात्रों को घर पर आराम करने की सलाह देना ताकि दूसरों में संक्रमण न फैले।
  • मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए खुले पानी के जमाव (गमले, टायर आदि) को हटाना।
  • सभी छात्रों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करना।

4. प्रतिरक्षीकरण क्या है?

उत्तर: प्रतिरक्षीकरण (Immunization) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी व्यक्ति के शरीर को किसी विशेष संक्रामक रोग के प्रति प्रतिरोधी (Immune) बनाया जाता है। इसमें टीका (Vaccine) लगाया जाता है, जिसमें उस रोग के कमजोर या मृत रोगाणु या उनके कुछ अंश होते हैं। यह टीका शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को उस रोगाणु से लड़ने का "अभ्यास" कराता है और एंटीबॉडी बनाना सिखाता है। भविष्य में जब वही रोगाणु शरीर में प्रवेश करता है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली पहले से तैयार होने के कारण तेजी से उस पर हमला करके बीमार होने से बचाती है।


5. आपके पास में स्थित स्वास्थ्य केंद्र में टीकाकरण के कौन-से कार्यक्रम उपलब्ध हैं? आपके क्षेत्र में कौन-कौन सी स्वास्थ्य संबंधी मुख्य समस्या है?

उत्तर: (यह उत्तर सामान्य जानकारी के आधार पर दिया गया है। छात्र अपने स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र के अनुसार उत्तर दें।)

हमारे क्षेत्र के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में निम्नलिखित टीकाकरण कार्यक्रम उपलब्ध हैं:

  • शिशुओं व बच्चों के लिए: बीसीजी (टीबी), OPV (पोलियो), DPT (डिप्थीरिया, काली खाँसी, टिटनेस), MMR (खसरा, कण्ठमाला, रूबेला), हेपेटाइटिस-बी का टीका।
  • सभी आयु वर्ग के लिए: टेटनस का बूस्टर, टाइफाइड और हेपेटाइटिस के टीके।

हमारे क्षेत्र की प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएँ मलेरिया, डेंगू (मच्छर जनित रोग) और दूषित पानी से फैलने वाले रोग जैसे दस्त और पीलिया हैं।


पृष्ठ संख्या 211

1. पिछले एक वर्ष में आप कितनी बीमार हुए? बीमारी क्या थीं?

उत्तर: (यह एक व्यक्तिगत प्रश्न है। छात्रों को अपने अनुभव के आधार पर उत्तर देना चाहिए। एक नमूना उत्तर इस प्रकार हो सकता है:)

पिछले एक वर्ष में मैं दो बार बीमार हुआ/हुई। पहली बार मुझे मौसम बदलने के कारण तेज सर्दी-जुकाम और बुखार हुआ, जो लगभग एक सप्ताह में ठीक हो गया। दूसरी बार गर्मियों में दूषित पानी पीने के कारण पेट दर्द और उल्टी की समस्या हुई, जिसके लिए मुझे डॉक्टर से दवाई लेनी पड़ी।


2. डॉक्टर/नर्स/स्वास्थ्य कर्मचारी अन्य व्यक्तियों की अपेक्षा रोगियों के संपर्क में अधिक रहते हैं। पता करो कि वे अपने-आपको बीमार होने से कैसे बचाते हैं?

उत्तर: स्वास्थ्यकर्मी निम्नलिखित उपायों द्वारा स्वयं को संक्रमण से बचाते हैं:

  • व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) का उपयोग: रोगी का परीक्षण या उपचार करते समय मास्क, दस्ताने (Gloves), गाउन और चश्मा पहनना ताकि रोगाणु शरीर में प्रवेश न कर सकें।
  • स्वच्छता का कठोर पालन: हर रोगी के संपर्क के बाद सैनिटाइजर या साबुन से हाथ धोना। उपयोग की गई सुईयों, पट्टियों आदि को विशेष पात्रों में सुरक्षित निस्तारण करना।
  • नियमित टीकाकरण: खुद को हेपेटाइटिस-बी, टिटनेस, इन्फ्लुएंजा जैसे खतरनाक संक्रामक रोगों के टीके लगवाना।
  • स्वस्थ जीवनशैली: पौष्टिक आहार लेना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव प्रबंधन करना ताकि उनकी अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहे।

3. एक बच्चा अपनी बीमारी के विषय में नहीं बता पा रहा है| हम कैसे पता करेंगे कि (क) बच्चा बीमार है? (ख) उसे कौन-सी बीमारी है?

उत्तर:
(क) बच्चे के बीमार होने के संकेत:

  • सामान्य से अधिक चिड़चिड़ापन, रोना या सुस्ती दिखाना।
  • भूख कम लगना या दूध/भोजन लेने से मना करना।
  • सामान्य गतिविधियों और खेल में रुचि न लेना।
  • असामान्य नींद का पैटर्न (बहुत अधिक सोना या बेचैनी)।
(ख) बीमारी का पता लगाना:
  • शारीरिक लक्षणों की जाँच: बुखार थर्मामीटर से चेक करना, शरीर पर दाने, आँखों का लाल होना, खाँसी, उल्टी या दस्त जैसे दृश्यमान लक्षण देखना।
  • शारीरिक क्रियाओं में बदलाव: पेशाब या शौच के रंग और आवृत्ति में परिवर्तन पर ध्यान देना।
  • इन सभी संकेतों और लक्षणों के आधार पर बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) से परामर्श लेना सबसे सही तरीका है, जो सटीक जाँच के बाद बीमारी का निदान कर सकते हैं।

4. निम्नलिखित किन परिस्थितियों में कोई व्यक्ति पुनः बीमार हो सकता है? क्यों?
(क) जब वह मलेरिया से ठीक हो रहा है?
(ख) वह मलेरिया से ठीक हो चुका है और वह चेचक के रोगी की सेवा कर रहा है?
(ग) मलेरिया से ठीक होने के बाद चार दिन उपवास करता है और चेचक के रोगी की सेवा कर रहा है?

उत्तर: उपरोक्त परिस्थितियों में विकल्प (ग) में व्यक्ति के पुनः बीमार होने की सबसे अधिक संभावना है।

कारण:

  1. कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली: मलेरिया से ठीक होने के बाद भी शरीर पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हुआ होता। ऐसे में चार दिन का उपवास शरीर को आवश्यक पोषण और ऊर्जा से वंचित कर देगा, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता और भी कमजोर हो जाएगी।
  2. संक्रमण का उच्च जोखिम: इस कमजोर अवस्था में यदि वह व्यक्ति चेचक जैसे अत्यधिक संक्रामक रोग के मरीज की सेवा करता है, तो चेचक के विषाणु के संपर्क में आने और शरीर में प्रवेश करने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली उन विषाणुओं से प्रभावी ढंग से नहीं लड़ पाएगी और व्यक्ति चेचक की चपेट में आ सकता है।

5. निम्नलिखित में से किन परिस्थितियों में आप बीमार हो सकते हैं? क्‍यों?
(क) जब आपकी परीक्षा का समय है?
(ख) जब आप बस तथा रेलगाड़ी में दो दिन तक यात्रा कर चुके हैं?
(ग) जब आपका मित्र खसरा से पीड़ित है?

उत्तर: उपरोक्त में से विकल्प (ग) "जब आपका मित्र खसरा से पीड़ित है" में बीमार होने की सबसे स्पष्ट और direct संभावना है।

कारण: खसरा एक अत्यधिक संक्रामक विषाणु जनित रोग है जो वायु के माध्यम से तेजी से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के खाँसने, छींकने या बात करने पर निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों में विषाणु होते हैं, जो हवा में कुछ समय तक रह सकते हैं। यदि आप खसरा से पीड़ित मित्र के निकट संपर्क में आते हैं, तो इन विषाणुओं के आपकी साँस के जरिए शरीर में प्रवेश करने और आपको भी संक्रमित करने की संभावना बहुत अधिक होती है, खासकर यदि आपने खसरे का टीका नहीं लगवाया है।

नोट: परीक्षा का तनाव (क) और लंबी यात्रा की थकान (ख) भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकते हैं, जिससे किसी भी रोग के संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है, लेकिन ये सीधे बीमारी का कारण नहीं बनते।

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2. क्या हमारे आस – पास के पदार्थ शुद्ध हैं
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