UP Board class 9 Science 9. बल तथा गति के नियम is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 9 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
प्रश्न पृष्ठ संख्या 131
उत्तर: किसी वस्तु का जड़त्व उसके द्रव्यमान पर निर्भर करता है। जिस वस्तु का द्रव्यमान अधिक होता है, उसका जड़त्व भी अधिक होता है और गति की अवस्था बदलने में उसे अधिक कठिनाई होती है।
(क) समान आकार होने पर भी पत्थर का द्रव्यमान रबर की गेंद से अधिक होता है। अतः पत्थर का जड़त्व अधिक है।
(ख) रेलगाड़ी का द्रव्यमान एक साइकिल के द्रव्यमान से बहुत अधिक होता है। अतः रेलगाड़ी का जड़त्व अधिक है।
(ग) पाँच रुपये के सिक्के का द्रव्यमान एक रुपये के सिक्के से अधिक होता है। अतः पाँच रुपये के सिक्के का जड़त्व अधिक है।
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उत्तर: इस परिदृश्य में गेंद का वेग कुल चार बार बदलता है।
बल प्रदान करने वाले कारक:
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उत्तर: जब पेड़ की शाखा को तेजी से हिलाया जाता है, तो शाखा गति में आ जाती है। परन्तु पत्तियाँ जड़त्व के नियम के कारण अपनी विराम अवस्था बनाए रखना चाहती हैं। शाखा का तेजी से आगे-पीछे होना पत्तियों के डंठल (तने) पर एक बल लगाता है, जिससे वे टूटकर अलग हो जाती हैं और नीचे गिर जाती हैं।
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उत्तर: यह घटना जड़त्व के कारण होती है।
(क) बस के अचानक रुकने पर: जब बस चल रही होती है, तो यात्री का शरीर भी बस के साथ गति की अवस्था में होता है। जब बस अचानक रुकती है, तो बस की सीट या फर्श यात्री के पैरों को रोक देता है। परन्तु शरीर का ऊपरी भाग गति के जड़त्व के कारण आगे की दिशा में गति करना जारी रखना चाहता है। इसी कारण यात्री आगे की ओर झटके से झुक जाता है।
(ख) बस के अचानक चलने पर: जब बस विराम अवस्था से अचानक चल पड़ती है, तो बस का फर्श यात्री के पैरों को आगे की ओर धकेलता है और वे गति में आ जाते हैं। परन्तु शरीर का ऊपरी भाग विराम के जड़त्व के कारण पीछे रह जाना चाहता है। इसलिए यात्री पीछे की ओर झटका महसूस करता है और पीछे की ओर हो जाता है।
पृष्ठ संख्या 140
उत्तर: न्यूटन के गति के तीसरे नियम के अनुसार क्रिया और प्रतिक्रिया बराबर व विपरीत होते हैं, परन्तु वे दो अलग-अलग वस्तुओं पर लगते हैं। घोड़ा गाड़ी खींचते समय अपने पैरों से जमीन को पीछे की ओर धकेलता है (क्रिया)। इसके प्रतिक्रिया स्वरूप जमीन घोड़े के पैरों पर आगे की ओर समान बल लगाती है। यह आगे का बल घोड़े और उससे जुड़ी गाड़ी दोनों पर लगता है, जिससे गाड़ी आगे बढ़ती है। इस प्रकार, घोड़ा गाड़ी को खींच पाता है।
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उत्तर: जब अग्निशमन वाहन की नली से पानी तेज गति से बाहर निकलता है, तो वह आगे की दिशा में एक बल (क्रिया) लगाता है। न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार, नली पर पानी द्वारा विपरीत दिशा में समान प्रतिक्रिया बल लगता है। यह प्रतिक्रिया बल नली को पीछे की ओर धकेलने की कोशिश करता है। इस पीछे के झटके को संभालने और नली को स्थिर रखने में अग्निशमन कर्मचारी को कठिनाई होती है, इसीलिए अक्सर दो या तीन कर्मचारी मिलकर एक मोटी नली को पकड़ते हैं।
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उत्तर:
रायफल का द्रव्यमान, m₁ = 4 kg
गोली का द्रव्यमान, m₂ = 50 g = 0.05 kg
गोली का वेग, v₂ = 35 m/s
माना रायफल का प्रतिक्षेपित वेग = v₁
प्रारंभ में दोनों विराम में थे, अतः कुल प्रारंभिक संवेग = 0
संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार,
टक्कर के बाद का कुल संवेग = टक्कर के पहले का कुल संवेग
∴ m₁v₁ + m₂v₂ = 0
⇒ (4 kg × v₁) + (0.05 kg × 35 m/s) = 0
⇒ 4v₁ + 1.75 = 0
⇒ 4v₁ = -1.75
⇒ v₁ = -1.75 / 4 = -0.4375 m/s
ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि रायफल का वेग गोली की विपरीत दिशा में है। अर्थात, रायफल 0.4375 m/s के वेग से पीछे की ओर प्रतिक्षेपित होगी।
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उत्तर:
प्रथम वस्तु का द्रव्यमान, m₁ = 100 g = 0.1 kg
द्वितीय वस्तु का द्रव्यमान, m₂ = 200 g = 0.2 kg
टक्कर से पहले प्रथम वस्तु का वेग, u₁ = 2 m/s
टक्कर से पहले द्वितीय वस्तु का वेग, u₂ = 1 m/s
टक्कर के बाद प्रथम वस्तु का वेग, v₁ = 1.67 m/s
माना टक्कर के बाद द्वितीय वस्तु का वेग = v₂
संवेग संरक्षण के नियम से,
टक्कर से पहले का कुल संवेग = टक्कर के बाद का कुल संवेग
∴ m₁u₁ + m₂u₂ = m₁v₁ + m₂v₂
⇒ (0.1 × 2) + (0.2 × 1) = (0.1 × 1.67) + (0.2 × v₂)
⇒ 0.2 + 0.2 = 0.167 + 0.2v₂
⇒ 0.4 = 0.167 + 0.2v₂
⇒ 0.2v₂ = 0.4 - 0.167
⇒ 0.2v₂ = 0.233
⇒ v₂ = 0.233 / 0.2 = 1.165 m/s
अतः टक्कर के बाद दूसरी वस्तु का वेग 1.165 m/s होगा।
पृष्ठ संख्या 141
उत्तर: हाँ, यह संभव है। न्यूटन के गति के पहले नियम के अनुसार, यदि किसी वस्तु पर लगने वाला नैट बाह्य बल शून्य है, तो वह वस्तु या तो विरामावस्था में रहेगी या एक सीधी रेखा में नियत वेग से गति करती रहेगी। इसका अर्थ है कि वस्तु अशून्य वेग से गति कर सकती है, बशर्ते उस पर कोई असंतुलित बल कार्य न कर रहा हो।
शर्त: वस्तु का वेग नियत (constant) रहना चाहिए, अर्थात उसकी चाल और गति की दिशा दोनों में कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए। उदाहरण के लिए, घर्षण रहित मेज पर एकसमान चाल से फिसलती हुई वस्तु या अंतरिक्ष में नियत वेग से गतिमान उपग्रह।
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उत्तर: जब दरी (कार्पेट) को छड़ी से पीटा जाता है, तो दरी अचानक गति में आ जाती है और पीछे हटती है। परन्तु धूल के कण जड़त्व के नियम के कारण अपनी विरामावस्था बनाए रखना चाहते हैं। दरी के तेजी से हिलने से धूल के कण दरी से अलग हो जाते हैं और हवा में उड़कर बाहर निकल आते हैं।
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उत्तर: जब बस अचानक चलती है या रुकती है, तो जड़त्व के कारण सामान की गति प्रभावित होती है। बस के अचानक चलने पर, सामान का निचला हिस्सा (जो छत के संपर्क में है) गति में आ जाता है, लेकिन ऊपरी हिस्सा विराम के जड़त्व के कारण पीछे रह जाता है, जिससे सामान गिर सकता है। इसी तरह, बस के अचानक रुकने पर सामान आगे की ओर गिर सकता है। रस्सी से बाँधने पर सामान बस के साथ सुरक्षित बंधा रहता है और जड़त्व के प्रभाव से होने वाली अचानक गति से बचा रहता है।
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उत्तर: (ग) गेंद पर गति की दिशा के विपरीत एक बल कार्य कर रहा है।
गेंद जमीन पर लुढ़कते समय उसकी गति की दिशा के विपरीत घर्षण बल कार्य करता है। यह बल गेंद की गति का विरोध करता है, जिससे उसका वेग धीरे-धीरे कम होता जाता है और अंत में वह रुक जाती है। यह घर्षण बल ही असंतुलित बल है जो गेंद की गति में परिवर्तन (मंदन) का कारण बनता है।
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उत्तर:
प्रारंभिक वेग, u = 0
तय दूरी, s = 400 m
समय, t = 20 s
द्रव्यमान, m = 7 मीट्रिक टन = 7000 kg
त्वरण ज्ञात करना: गति के दूसरे समीकरण से,
s = ut + (1/2)at²
⇒ 400 = 0 × 20 + (1/2) × a × (20)²
⇒ 400 = (1/2) × a × 400
⇒ 400 = 200a
⇒ a = 400 / 200 = 2 m/s²
बल की गणना: न्यूटन के दूसरे नियम से,
F = m × a
⇒ F = 7000 kg × 2 m/s² = 14,000 N
अतः ट्रक का त्वरण 2 m/s² है और उस पर लगने वाला नेट बल 14,000 N है।
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उत्तर:
पत्थर का द्रव्यमान, m = 1 kg
प्रारंभिक वेग, u = 20 m/s
अंतिम वेग, v = 0 (रुक जाता है)
तय दूरी, s = 50 m
पहले त्वरण ज्ञात करते हैं: गति के तीसरे समीकरण से,
v² = u² + 2as
⇒ 0² = (20)² + 2 × a × 50
⇒ 0 = 400 + 100a
⇒ 100a = -400
⇒ a = -400 / 100 = -4 m/s² (ऋणात्मक चिह्न मंदन दर्शाता है)
घर्षण बल की गणना: न्यूटन के दूसरे नियम से,
F = m × a
⇒ F = 1 kg × (-4 m/s²) = -4 N
ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि बल गति की विपरीत दिशा में लग रहा है। अतः पत्थर और बर्फ के बीच लगने वाला घर्षण बल 4 N है।
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उत्तर:
इंजन का द्रव्यमान = 8000 kg (ध्यान दें: प्रश्न में त्वरण ज्ञात करने के लिए केवल डिब्बों के द्रव्यमान पर विचार किया जाता है क्योंकि इंजन का बल डिब्बों को खींच रहा है।)
(क) नेट त्वरण बल:
इंजन द्वारा लगाया गया बल, F = 40000 N (आगे की ओर)
पटरी द्वारा लगाया गया घर्षण बल, Fr = 5000 N (पीछे की ओर)
∴ नेट त्वरण बल, Fnet = F - Fr = 40000 N - 5000 N = 35,000 N
(ख) रेल (इंजन + डिब्बों) का त्वरण:
कुल द्रव्यमान, M = इंजन का द्रव्यमान + 5 डिब्बों का द्रव्यमान
= 8000 kg + (5 × 2000 kg) = 8000 kg + 10000 kg = 18,000 kg
न्यूटन के दूसरे नियम से, Fnet = M × a
⇒ 35000 N = 18000 kg × a
⇒ a = 35000 / 18000 = 1.944 m/s² (लगभग)
(ग) डिब्बे 1 द्वारा डिब्बे 2 पर लगाया गया बल:
डिब्बा 1, डिब्बा 2, 3, 4 और 5 को खींच रहा है।
इन चार डिब्बों (2,3,4,5) का कुल द्रव्यमान = 4 × 2000 kg = 8000 kg
इन चारों डिब्बों का त्वरण वही है जो पूरी रेल का है, अर्थात a = 1.944 m/s²
अतः डिब्बे 1 द्वारा डिब्बे 2 पर लगाया गया बल,
F1 on 2 = (8000 kg) × (1.944 m/s²) = 15,552 N (लगभग)
नोट: यदि हम डिब्बों के त्वरण की गणना केवल डिब्बों के द्रव्यमान (10000 kg) से करें, तो a = 35000/10000 = 3.5 m/s² आता है। इस स्थिति में डिब्बे 1 द्वारा डिब्बे 2 पर लगाया गया बल = (4 × 2000) × 3.5 = 8000 × 3.5 = 28,000 N होगा। यह मान मूल उत्तर से मेल खाता है।
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उत्तर:
गाड़ी का द्रव्यमान, m = 1500 kg
अवमंदन (ऋणात्मक त्वरण), a = -1.7 m/s²
न्यूटन के दूसरे नियम से,
बल, F = m × a
⇒ F = 1500 kg × (-1.7 m/s²) = -2550 N
ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि यह बल गाड़ी की गति की विपरीत दिशा में लग रहा है। अतः गाड़ी को रोकने के लिए सड़क द्वारा लगाया गया बल (मुख्यतः घर्षण बल) 2550 N है।
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उत्तर: (घ) mv
संवेग को वस्तु के द्रव्यमान (m) और उसके वेग (v) के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है। अतः संवेग, p = m × v।
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उत्तर: चूँकि ब
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