UP Board class 9 Hindi 1. इस जल प्रलय में - फणीश्वरनाथ रेणु is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 9 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर:- बाढ़ की आशंका सुनते ही लोगों ने सुरक्षा और आवश्यक सामान जुटाने में जुट गए। उन्होंने रोज़मर्रा के लिए ज़रूरी चीज़ें जैसे ईंधन, आलू, मोमबत्ती, दियासलाई, पीने का साफ़ पानी और दवाइयाँ (जैसे कम्पोज की गोलियाँ) इकट्ठा करनी शुरू कर दीं। दुकानदारों ने अपने सामान को निचले हिस्सों से हटाकर ऊँची जगहों पर रखना शुरू किया ताकि बाढ़ के पानी से नुकसान न हो। इस तरह सभी लोग संभावित संकट से निपटने के लिए पहले से ही सावधानीपूर्वक तैयारियाँ करने लगे।
उत्तर:- लेखक की उत्सुकता स्वाभाविक जिज्ञासा और नए अनुभव के कारण थी। उन्होंने बाढ़ के बारे में कई कहानियाँ पढ़ी और सुनी थीं, लेकिन उन्होंने खुद कभी बाढ़ का सामना नहीं किया था। यह जानने की इच्छा कि बाढ़ का पानी शहर में कैसे घुसता है, किस रफ़्तार से बढ़ता है और लोगों पर क्या प्रभाव डालता है, उन्हें बेचैन कर रही थी। इसलिए वे बाढ़ को अपनी आँखों से देखने और उसकी वास्तविक जानकारी प्राप्त करने के लिए बहुत उत्सुक थे।
उत्तर:- 'पानी कहाँ तक आ गया है?' यह सवाल लोगों की ज़ुबान पर लगातार चढ़ा हुआ था। इससे लोगों के मन में मौजूद कई भावनाएँ सामने आती हैं। पहली भावना है कौतूहल और उत्सुकता कि बाढ़ कितनी भयानक होगी। दूसरी, एक डर और चिंता कि कहीं पानी उनके घर तक न आ जाए। तीसरी, सुरक्षा की भावना – यह जानकर कि पानी कितनी दूर है, वे अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए समय रहते कोई कदम उठा सकते थे।
उत्तर:- बाढ़ के बढ़ते हुए पानी को 'मृत्यु का तरल दूत' कहा गया है। इसे ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि यह पानी जीवनदायी न होकर विनाश लेकर आता है। यह तेज़ बहाव के साथ आकर इंसानों, जानवरों, घरों और फसलों को नष्ट कर देता है, जिससे अनगिनत लोगों की जान चली जाती है और हज़ारों बेघर हो जाते हैं। यह पानी मौत की सूचना देने वाले दूत की तरह धीरे-धीरे नहीं, बल्कि एक भयानक रूप में सामने आता है।
उत्तर:- आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं:
उत्तर:- इस कथन के माध्यम से समाज में मौजूद संकीर्ण क्षेत्रवाद, स्वार्थपरता और संवेदनहीनता पर करारी चोट की गई है। यह दिखाता है कि कैसे प्रभावशाली या सुविधासंपन्न लोग दूसरे इलाकों के लोगों के संकट में उनकी मदद करने के बजाय उन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं। उनकी मानसिकता सिर्फ़ अपने तक सीमित रह जाती है और वे दूसरों की पीड़ा को महसूस नहीं कर पाते, जो एक स्वस्थ समाज के लिए ठीक नहीं है।
उत्तर:- बाढ़ के डर से दुकानें बंद हो रही थीं, लेकिन पान की बिक्री बढ़ गई थी। इसका मुख्य कारण था लोगों का कौतूहल। बड़ी संख्या में लोग बाढ़ देखने इकट्ठा हो रहे थे। ऐसे में पान खाते हुए वे आपस में बातचीत करके समय बिता सकते थे और रेडियो से मिल रही ताज़ा खबरों पर चर्चा कर सकते थे। पान एक सामाजिक व्यवहार का हिस्सा बन गया था, इसलिए उसकी माँग बढ़ गई।
उत्तर:- जब लेखक को लगा कि बाढ़ का पानी उसके इलाके तक भी आ सकता है, तो उन्होंने तुरंत कई व्यावहारिक तैयारियाँ शुरू कर दीं:
उत्तर:- बाढ़ के बाद गंदे पानी और अस्वच्छ परिस्थितियों के कारण कई संक्रामक बीमारियाँ फैलने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। इनमें शामिल हैं:
उत्तर:- नौजवान और कुत्ते के इस कार्य के पीछे गहरी मित्रता, निस्वार्थ प्रेम और आत्मीयता की भावना थी। दोनों एक-दूसरे के इतने करीब थे कि उनके बीच जानवर और इंसान का भेद मिट गया था। नौजवान के लिए कुत्ता सिर्फ़ एक पालतू जानवर नहीं, बल्कि एक सच्चा साथी था। कुत्ते ने भी अपने मालिक के प्रति अटूट वफादारी और स्नेह के कारण ही उसके साथ खतरनाक पानी में कूदने का फैसला किया। दोनों एक-दूसरे के बिना रहने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे।
उत्तर:- लेखक एक रचनात्मक व्यक्ति थे, इसलिए उन्हें लगा कि अगर उनके पास कैमरा या टेप रिकॉर्डर होता तो वे इस दृश्य को कैद कर लेते। लेकिन फिर उन्हें एहसास हुआ कि अगर वे ऐसा करते तो वे इस घटना का सिर्फ़ एक दर्शक या रिपोर्टर बनकर रह जाते। उनकी पूरी ऊर्जा उपकरण संभालने और रिकॉर्डिंग में लग जाती। 'कलम चोरी होना' एक प्रतीक है जिसका अर्थ है कि अब उनके पास लिखने का कोई साधन भी नहीं बचा। इस तरह वे बाढ़ के इस अनुभव को पूरी तरह से जी सकते थे, बिना किसी बाहरी चीज़ के व्यवधान के। यही सोचकर उन्होंने यह कथन कहा, जो संतोष और मुक्ति की भावना व्यक्त करता है।
उत्तर:- मीडिया का काम सूचना देना है, लेकिन कई बार वह घटनाओं को इतना बढ़ा-चढ़ाकर, एकतरफ़ा या लगातार दिखाकर पेश करता है कि वही समस्या और बड़ी हो जाती है। एक उदाहरण साम्प्रदायिक तनाव का है। कई बार छोटी सी झड़प की खबरों को बार-बार और भड़काऊ तरीके से दिखाने से दो समुदायों के बीच गलतफहमी और नफरत फैल जाती है, जिससे हिंसा भड़क उठती है। इस तरह मीडिया की भूमिका सूचना देने की बजाय समस्या को हवा देने वाली बन जाती है।
उत्तर:- जुलाई 2005 में मुंबई में आई भयानक बाढ़ एक ऐसी ही आपदा थी। लगातार कई दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर को पानी में डुबो दिया। रेल और सड़क यातायात पूरी तरह ठप्प हो गया। हज़ारों लोग अपने दफ्तरों, स्कूलों और गाड़ियों में फँस गए। बिजली और संचार के साधन लंबे समय तक बंद रहे। इस आपदा में कई लोगों की जान चली गई और शहर को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। यह घटना दिखाती है कि कैसे एक प्राकृतिक आपदा एक बड़े महानगर की पूरी व्यवस्था को चरमरा सकती है।
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