UP Board class 9 Hindi 1. प्रेमचंद - दो बैलों की कथा is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 9 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर:- कांजीहौस एक प्रकार का पशु-शरणालय होता था जहाँ आवारा या बेसहारा पशुओं को रखा जाता था। वहाँ पशुओं की नियमित हाजिरी लेने के पीछे कई व्यावहारिक कारण होते थे:
उत्तर:- उस छोटी बच्ची के मन में हीरा-मोती के प्रति सहानुभूति और प्रेम उमड़ आया, क्योंकि उसने अपने जीवन में भी ऐसा ही दर्द झेला था। इसके मुख्य कारण थे:
उत्तर:- प्रेमचंद ने इस कहानी के माध्यम से बैलों की जीवन-शैली से कई गहन नैतिक मूल्यों को प्रस्तुत किया है:
उत्तर:- प्रेमचंद ने गधे के प्रति 'मूर्ख' शब्द की रूढ़ धारणा को चुनौती देते हुए उसके सकारात्मक गुणों को उजागर किया है। उन्होंने दिखाया है कि गधे का सीधापन उसकी मूर्खता नहीं, बल्कि उसकी अदम्य सहनशीलता और सरलता है। लेखक का मानना है कि संसार में सद्गुणों का इतना अनादर कहीं नहीं होता। गधा कभी क्रोध नहीं करता और हर स्थिति में धैर्य बनाए रखता है। प्रेमचंद इस कहानी में गधे के इसी 'सीधेपन' की दुर्दशा दिखाते हैं, न कि 'मूर्खता' की। वे समाज को यह संदेश देते हैं कि सरलता और सहनशीलता दुर्बलता के चिह्न नहीं, बल्कि महान गुण हैं।
उत्तर:- हीरा और मोती की अगाध मित्रता कहानी की अनेक घटनाओं से स्पष्ट होती है:
उत्तर:- हीरा का यह कथन प्रेमचंद के स्त्री-सम्मानवादी और प्रगतिशील दृष्टिकोण को प्रकट करता है। इससे पता चलता है कि लेखक उस समय के समाज में स्त्रियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और शोषण के विरोधी थे। वे चाहते थे कि समाज में स्त्रियों की रक्षा के लिए नियम बनें और उन पर अमल भी हो। हीरा और मोती सभ्य समाज के प्रतीक हैं, इसलिए उनके माध्यम से लेखक यह संदेश देते हैं कि स्त्रियों के प्रति शारीरिक हिंसा या अत्याचार पूर्णतः अनुचित है। प्रेमचंद नारी को सम्मान की दृष्टि से देखते थे और पुरुषों व स्त्रियों की समानता में विश्वास रखते थे।
उत्तर:- इस कहानी में पशु और मनुष्य के बीच के सहजीवी और भावनात्मक संबंध को बहुत खूबसूरती से दर्शाया गया है। किसान के लिए पशु केवल श्रम का साधन नहीं, बल्कि परिवार का एक सदस्य होते हैं। झूरी हीरा-मोती से अपने बच्चों की तरह प्यार करता है और उन्हें कभी दूर नहीं करना चाहता। वह उन्हें फूल की छड़ी से भी नहीं मारता। इससे स्पष्ट है कि पारंपरिक किसान समाज में पशुओं के साथ मानवीय और संवेदनशील व्यवहार किया जाता था। बदले में पशु भी अपने मालिक के प्रति पूर्ण निष्ठा रखते हैं और उनके लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। यह रिश्ता लेन-देन का नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और विश्वास का है।
उत्तर:- मोती का यह कथन उसके चरित्र की निम्नलिखित विशेषताओं को उजागर करता है:
उत्तर:- इस कथन का आशय है कि हीरा-मोती में एक अदृश्य आत्मिक सम्बन्ध और तारतम्य था। वे बिना बोले ही एक-दूसरे के मन की बात समझ जाते थे और हमेशा दूसरे के हित के बारे में सोचते थे। मनुष्य स्वयं को सर्वश्रेष्ठ प्राणी मानता है, लेकिन अक्सर उसमें यह क्षमता नहीं होती कि वह निस्वार्थ भाव से दूसरे के दिल की बात समझ सके। मनुष्य का व्यवहार प्रायः स्वार्थ से प्रेरित होता है, जबकि इन बैलों का आपसी प्रेम निस्वार्थ और पूर्ण था। लेखक कहना चाहते हैं कि मनुष्य को भी ऐसी निस्वार्थ भावना और संवेदनशीलता सीखनी चाहिए।
उत्तर:- इस वाक्य का भाव यह है कि उस छोटी सी रोटी से हीरा-मोती की शारीरिक भूख तो नहीं मिट सकती थी, लेकिन उनकी भावनात्मक भूख अवश्य शांत हो गई। गया के घर में उनके साथ दुर्व्यवहार हो रहा था, जिससे वे उदास और आहत थे। ऐसे में उस नन्हीं बच्ची ने जो प्यार और सहानुभूति दिखाई, वह उनके लिए भोजन से भी बढ़कर थी। उस रोटी में छिपा प्रेम और अपनत्व ही उनके हृदय का वास्तविक भोजन बन गया। यह घटना बताती है कि प्रेम और स्नेह की छोटी-सी अभिव्यक्ति भी कष्टों को हल्का कर सकती है।
उत्तर:- ग. वह हीरा-मोती के व्यवहार से बहुत दुखी था।
उत्तर:- हीरा और मोती ने हर अवसर पर शोषण का विरोध किया - चाहे वह गया का दुर्व्यवहार हो या कांजीहौस की निर्मम कैद। मेरे विचार में उनका यह विरोध पूर्णतः उचित और प्रशंसनीय था। यह सच है कि विरोध करने पर उन्हें सूखी रोटियाँ, डंडे और कैद सहनी पड़ी, लेकिन शोषण को चुपचाप सहन करना उससे भी बड़ी यातना है। शोषित व्यक्ति (या पशु) के पास केवल भय और दुख ही रह जाता है। विरोध करने से ही अन्यायी को उसकी गलती का अहसास होता है और व्यवस्था में बदलाव की संभावना पैदा होती है। इसलिए, स्वाभिमान और आजादी के लिए संघर्ष करना और उसकी कीमत चुकाना हमेशा शोषण को सहने से बेहतर है।
उत्तर:- हाँ, यह कहानी निश्चित रूप से स्वतंत्रता के संघर्ष का एक प्रतीकात्मक चित्रण है। हीरा-मोती उन क्रांतिकारी भारतीयों के प्रतीक हैं जो अपने 'स्वदेश' (झूरी का घर/मातृभूमि) से बहुत प्यार करते हैं और परदेस (गया का घर/गुलामी) में रहना पसंद नहीं करते। वे आजादी पाने के लिए हर बाधा - भूख, प्यास, डंडे और कैद - का डटकर सामना करते हैं। कांजीहौस की दीवार तोड़ना गुलामी की जंजीरों को तोड़ने का प्रतीक है। उनका अंततः घर वापस पहुँचना, उस स्वतंत्रता की प्राप्ति जैसा है जिसके लिए हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अथक संघर्ष किया था। इस प्रकार, यह कहानी आजादी के मूल्य और उसके लिए किए जाने वाले बलिदान की ओर संकेत करती है।
उत्तर:-
'ही' निपात के प्रयोग वाले वाक्य:
'भी' निपात के प्रयोग वाले वाक्य:
उत्तर:-
वाक्य का भेद: मिश्र वाक्य
मुख्य उपवाक्य: अधमरे से पड़े हुए सभी जानवर चेत उठे।
गौण उपवाक्य: दीवार का गिरना था। (संज्ञा उपवाक्य)
उत्तर:-
वाक्य का भेद: मिश्र वाक्य
मुख्य उपवाक्य: सहसा एक दढियल आदमी आया।
गौण उपवाक्य: जिसकी आँखे लाल थी और मुद्रा अत्यन्त कठोर। (विशेषण उपवाक्य)
उत्तर:-
वाक्य का भेद: मिश्र वाक्य
मुख्य उपवाक्य: हीरा ने कहा।
गौण उपवाक्य: गया के घर से नाहक भागे। (संज्ञा उपवाक्य, 'कहा' का कर्म)
उत्तर:-
वाक्य का भेद: मिश्र वाक्य
मुख्य उपवाक्य: तो बिकेंगे।
गौण उपवाक्य: मैं बेचूँगा। (क्रिया-विशेषण उपवाक्य, शर्त बता रहा है)
उत्तर:-
वाक्य का भेद: मिश्र वाक्य
मुख्य उपवाक्य: मैं बे-मारे न छोड़ता।
गौण उपवाक्य: अगर वह मुझे पकड़ता। (क्रिया-विशेषण उपवाक्य, शर्त बता रहा है)
उत्तर:-
| मुहावरा | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|
| जी तोड़ काम करना | परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए रमेश ने जी तोड़कर मेहनत की। |
| टाल जाना | अपने दोस्त से उधार लिए पैसे वापस करने की बात आने पर राजेश हमेशा टाल जाता है। |
| जान से हाथ धोना | बाढ़ में फँसे कई लोगों को बचाने की कोशिश करते हुए वह सिपाही जान से हाथ धो बैठा। |
| नौ दो ग्यारह होना | कक्षा में शोर मचाते हुए बच्चे शिक्षक के आते ही नौ दो ग्यारह हो गए। |
| ईंट का जवाब पत्थर से देना | प्रतिद्वंद्वी टीम के खिलाड़ी के असभ्य व्यवहार पर हमार
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