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UP Board class 9 Hindi (1. रामविलास शर्मा - धूल) solution PDF

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UP Board class 9 Hindi (1. रामविलास शर्मा - धूल) solution

UP Board class 9 Hindi 1. रामविलास शर्मा - धूल Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 9 Hindi स्पर्श 1 - पाठ 1: धूल (रामविलास शर्मा)

1. हीरे के प्रेमी उसे किस रुप में पसंद करते हैं?

हीरे के प्रेमी उसे चमकदार, साफ़ और तराशे हुए रूप में पसंद करते हैं। वे उसकी चमक और सुडौल आकार से मोहित होते हैं, जो आँखों को चौंधिया देने वाला होता है।

2. लेखक ने संसार में किस प्रकार के सुख को दुर्लभ माना है?

लेखक ने अखाड़े की उस विशेष मिट्टी में लेटने और लिपटने के सुख को दुर्लभ माना है। यह मिट्टी तेल और मट्ठे से सिझाई जाती है, पवित्र मानी जाती है और देवताओं पर भी चढ़ाई जाती है। इसका शरीर से स्पर्श एक अद्वितीय आनंद देता है।

3. मिट्टी की आभा क्या है? उसकी पहचान किससे होती है?

मिट्टी की आभा या चमक का नाम ही 'धूल' है। मिट्टी की असली पहचान इसी धूल से होती है, जैसे चाँद की पहचान चाँदनी से होती है।

प्रश्न-अभ्यास (लिखित)

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए-

4. धूल के बिना किसी शिशु की कल्पना क्यों नहीं की जा सकती?

शिशु का जीवन मिट्टी और धूल से गहराई से जुड़ा होता है। माँ की गोद से उतरकर वह पहली बार मातृभूमि की धूल पर ही कदम रखता है। धूल में खेलना, घुटनों के बल चलना उसके बचपने का अभिन्न अंग है। धूल शिशु के मुख की सहज सुंदरता को और निखार देती है, इसलिए उसे 'धूल भरा हीरा' कहा जाता है। धूल के बिना शिशु की कल्पना अधूरी है।

5. हमारी सभ्यता धूल से क्‍यों बचना चाहती है?

आधुनिक नगरीय सभ्यता धूल को गंदगी और पिछड़ेपन का प्रतीक मानती है। वह कृत्रिम सुंदरता और साफ-सुथरे वातावरण को महत्व देती है। धूल से बचने के लिए लोग ऊँची इमारतों में रहना पसंद करते हैं ताकि उनका जीवन इससे दूर रहे। यह सभ्यता वास्तविकता से दूर एक बनावटी दुनिया में रहना चाहती है।

6. अखाड़े की मिट्टी की क्‍या विशेषता होती है?

अखाड़े की मिट्टी कोई साधारण मिट्टी नहीं होती। इसे तेल और मट्ठे से सिझाकर विशेष बनाया जाता है, जिससे यह पवित्र और उपयोगी हो जाती है। पहलवान इसकी पूजा करते हैं और इसके स्पर्श से उनके शरीर को मजबूती मिलती है। इस मिट्टी में लोटने का सुख एक दुर्लभ और पवित्र अनुभव माना जाता है।

7. श्रद्धा, भक्ति, स्नेह की व्यंजना के लिए धूल सर्वोत्तम साधन किस प्रकार है।

धूल भावनाओं को व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है। श्रद्धा प्रकट करने के लिए योद्धा धूल को आँखों पर लगाते हैं। भक्ति दिखाने के लिए मातृभूमि की धूल माथे से लगाई जाती है। स्नेह व्यक्त करने के लिए धूल में सने शिशु को चूमा जाता है। इस प्रकार धूल इन गहन भावनाओं को प्रकट करने का सर्वोत्तम साधन है।

8. इस पाठ में लेखक ने नगरीय सभ्यता पर क्या व्यंग्य किया है?

लेखक ने नगरीय सभ्यता पर व्यंग्य करते हुए कहा है कि यह सभ्यता प्रकृति और सहजता से दूर भागती है। यह धूल और मिट्टी को घृणा की दृष्टि से देखती है और उससे बचने के लिए ऊँची-ऊँची इमारतों में रहती है। इस सभ्यता को असली हीरे (ग्रामीण जीवन) की बजाय काँच के बने नकली हीरे (ऊपरी दिखावा) अच्छे लगते हैं।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -

9. लेखक 'बालकृष्ण' के मुँह पर छाई गोधूलि को श्रेष्ठ क्यों मानता है?

लेखक के अनुसार, बालकृष्ण के मुँह पर लगी गोधूलि (गायों के खुरों से उड़ी धूल) उनकी सहज सुंदरता को और बढ़ा देती है। यह धूल उनकी पार्थिवता (पृथ्वी से जुड़ाव) को निखारती है। कोई भी बनावटी प्रसाधन या श्रृंगार इस प्राकृतिक सौंदर्य की बराबरी नहीं कर सकता। इसलिए लेखक इस धूल को श्रेष्ठ मानता है।

10. लेखक ने धूल और मिट्टी में क्या अंतर बताया है?

लेखक ने धूल और मिट्टी के अंतर को बहुत सूक्ष्म और गहरा बताया है। उनके अनुसार, दोनों का संबंध वैसा ही है जैसे शरीर और आत्मा, देह और प्राण, चाँद और चाँदनी का होता है। मिट्टी साकार रूप है, तो धूल उसकी आभा या चमक है। एक के बिना दूसरे की कल्पना अधूरी है। मिट्टी की पहचान ही उसकी धूल से होती है।

11. ग्रामीण परिवेश में प्रकृति धूल के कौन-कौन से सुंदर चित्र प्रस्तुत करती है?

ग्रामीण परिवेश में प्रकृति धूल के अनेक मनोरम चित्र प्रस्तुत करती है:

  • सूर्य की किरणें जब अमराइयों के पीछे से धूल पर पड़ती हैं, तो आकाश सोने जैसा चमकने लगता है।
  • सांझ के समय गोधूलि (गायों के झुंड से उठने वाली धूल) का दृश्य एक अद्भुत सौंदर्य बिखेरता है।
  • शिशु के मुख पर लगी धूल फूल की पंखुड़ियों जैसी सुंदर लगती है।
  • पशुओं के खुरों या बैलगाड़ियों से उड़ती धूल रुई के बादलों सी प्रतीत होती है।
  • अखाड़े की सिझाई हुई मिट्टी का अपना एक विशेष आकर्षण होता है।

12. 'हीरा वही घन चोट न टूटे' - का संदर्भ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

इस कहावत का अर्थ है कि असली हीरा वही है जो हथौड़े की जोरदार चोट से भी न टूटे। पाठ में इसका प्रयोग ग्रामीण जीवन और शहरी जीवन के अंतर को दर्शाने के लिए किया गया है। ग्रामीण लोग हीरे के समान होते हैं - मजबूत, सहनशील और संघर्षों से न टूटने वाले। वहीं, शहरी सभ्यता काँच के समान नाजुक और दिखावटी होती है, जो एक चोट में चकनाचूर हो जाती है। कठिन परिस्थितियाँ ही इन दोनों के बीच का वास्तविक अंतर स्पष्ट कर देती हैं।

13. धूल, धूलि, धूली, धूरि और गोधूलि की व्यंजनाओं को स्पष्ट कीजिए।

ये सभी शब्द धूल के ही विभिन्न रूप और अर्थ-छवियाँ प्रस्तुत करते हैं:

  • धूल: यथार्थवादी गद्य का प्रतीक है।
  • धूलि: यह धूल की कविता है, जिसमें काव्यात्मक सौंदर्य है।
  • धूली: यह छायावादी दर्शन को व्यक्त करती है।
  • धूरि: यह लोक-संस्कृति के नवजागरण का प्रतीक है।
  • गोधूलि: यह विशेष रूप से गाँव की शाम को, गायों के झुंड से उठने वाली धूल को कहते हैं। यह ग्रामीण जीवन की अनमोल धरोहर है।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए -

14. 'धूल' पाठ का मूल भाव स्पष्ट कीजिए।

इस पाठ का मूल भाव धूल के प्रति हमारे नजरिए को बदलना है। लेखक धूल के महत्व को रेखांकित करते हुए आधुनिक नगरीय सभ्यता की उस आलोचना करते हैं जो धूल को घृणा की दृष्टि से देखती है, जबकि यही धूल हमारे जीवन, संस्कृति और सौंदर्यबोध का मूल आधार है।

15. कविता को विडंबना मानते हुए लेखक ने क्या कहा है?

लेखक ने कहा है कि कविता में गोधूलि बेला की जो मधुर महिमा गाई जाती है, वह वास्तव में गायों के पैरों से उड़ने वाली गाँव की साधारण धूल ही है। विडंबना यह है कि जिस धूल की कविता में प्रशंसा की जाती है, उसी से शहरी लोग दूर भागते हैं क्योंकि वे उसके वास्तविक अनुभव से कटे हुए हैं।

निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

16. फूल के ऊपर जो रेणु उसका श्रृंगार बनती है, वही धूल शिशु के मुँह पर उसकी सहज पार्थिवता को निखार देती है।

इस कथन का आशय है कि जिस प्रकार फूल पर जमी हल्की धूल उसकी सुंदरता में चार चाँद लगा देती है, ठीक उसी प्रकार शिशु के मुख पर लगी धूल उसकी प्राकृतिक और मिट्टी से जुड़ी हुई सहज सुंदरता को और अधिक निखार देती है। यह सौंदर्य किसी भी बनावटी प्रसाधन से कहीं अधिक आकर्षक होता है।

17. 'धन्य-धन्य वे हैं नर मैले जो करत गात कनिया लगाय धूरि ऐसे लरिकान की' - लेखक इन पंक्तियों द्वारा क्या कहना चाहता है?

इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक यह कहना चाहता है कि वे लोग भाग्यशाली हैं जो धूल में सने बच्चों को गले लगाते हैं और उन पर लगी धूल को अपने शरीर पर लगने देते हैं। हालाँकि, लेखक को इन पंक्तियों में 'मैले' और 'ऐसे लरिकान' जैसे शब्दों में धूल के प्रति हीन भाव और भेदभाव नजर आता है, जबकि वे धूल को पवित्र मानते हैं।

18. मिट्टी और धूल में अंतर है, लेकिन उतना ही, जितना शब्द और रस में, देह और प्राण में, चाँद और चाँदनी में।

इस कथन का आशय यह है कि मिट्टी और धूल एक-दूसरे के पूरक हैं, अलग नहीं। जिस प्रकार शब्द के बिना रस, देह के बिना प्राण और चाँद के बिना चाँदनी का कोई अस्तित्व नहीं, उसी प्रकार मिट्टी के बिना धूल और धूल के बिना मिट्टी की चमक अधूरी है। दोनों एक ही सत्य के दो पहलू हैं।

19. हमारी देशभक्ति धूल को माथे से न लगाए तो कम-से-कम उस पर पैर तो रखे।

लेखक इस कथन के माध्यम से आधुनिक देशभक्ति की सतही परिभाषा पर चिंता व्यक्त करते हैं। वे कहते हैं कि यदि हम में वीरों जैसी श्रद्धा नहीं है कि मातृभूमि की धूल माथे पर लगाएँ, तो कम से कम इतना तो करें कि उस धूल पर पैर रखकर, उससे जुड़े रहें। देशभक्ति का अर्थ है अपनी मिट्टी से प्रेम और उसका सम्मान करना, न कि उससे घृणा करना।

20. वे उलटकर चोट भी करेंगे और तब काँच और हीरे का भेद जानना बाकी न रहेगा।

इसका आशय यह है कि जब कठिन समय आएगा (समय का हथौड़ा चलेगा), तब हीरे (ग्रामीण जीवन की मजबूती) और काँच (शहरी जीवन की नाजुकता) का अंतर स्पष्ट हो जाएगा। हीरा (सच्चा, मजबूत व्यक्ति) चोट सह लेगा, जबकि काँच (दिखावटी व्यक्ति) टूट जाएगा और उलटकर दूसरों को चोट पहुँचाने की कोशिश भी कर सकता है। संकट ही असली पहचान कराता है।

भाषा अध्ययन

21. निम्नलिखित शब्दों के उपसर्ग छाँटिए-

शब्दउपसर्गमूल शब्द
विज्ञापितविज्ञापित
संसर्गसम्सर्ग
उपमानउपमान
संस्कृतिसम्स्कृति
दुर्लभदुर्लभ
निर्वासनिर्वास
दुर्भाग्यदुर्भाग्य

22. लेखक ने इस पाठ में धूल चूमना, धूल माथे पर लगाना, धूल होना जैसे प्रयोग किए हैं। धूल से संबंधित अन्य पाँच प्रयोग और बताइए तथा उन्हें वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

  1. धूल चटाना (शिकस्त देना): भारतीय क्रिकेट टीम ने विरोधी टीम को धूल चटा दी।
  2. धूल फाँकना (कठिन परिश्रम करना): परीक्षा में सफलता पाने के लिए उसने पूरे साल धूल फाँकी।
  3. धूल में मिलना (नष्ट हो जाना): बारिश में उनकी सारी मेहनत से बनाई रंगोली धूल में मिल गई।
  4. धूल उड़ाना (बर्बाद करना): उसके गलत निवेश ने सारी पूँजी धूल में उड़ा दी।
  5. धूल धूसरित (धूल से सना हुआ): खेतों में काम करके आया किसान धूल धूसरित लेकिन खुश दिख रहा था।

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