UP Board class 9 Hindi 1. गिल्लू - महादेवी वर्मा is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 9 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर:- सोनजुही की पीली कली को देखकर लेखिका महादेवी वर्मा को उनका पालतू गिलहरी गिल्लू याद आ गया। उनके मन में विचार आया कि जिस तरह यह कली हरी पत्तियों के बीच छिपी है, उसी तरह गिल्लू भी लता की हरियाली में छिपकर बैठा रहता था और फिर अचानक लेखिका के कंधे पर कूदकर उन्हें चौंका देता था। पहले लेखिका उस कली को ढूँढती थीं, लेकिन अब गिल्लू के बिना उस लघुप्राण की कमी खल रही थी। गिल्लू से गहरे लगाव के कारण उसकी मृत्यु के बाद भी लेखिका उसे भुला नहीं पाई थीं और उसकी यादें ताजा हो उठीं।
उत्तर:- कौए का व्यवहार और संस्कृति में स्थान विरोधाभासी है, इसीलिए उसे एक साथ समादरित और अनादरित कहा गया है। समादर उसे श्राद्ध जैसे धार्मिक कर्मों में मिलता है, जहाँ यह मान्यता है कि पितृ कौए का रूप धारण करके आते हैं और उन्हें भोजन दिया जाता है। वहीं दूसरी ओर, उसकी कर्कश और कर्कश आवाज़, उसका काले रंग का रूप और उसका मैला खाने का स्वभाव लोगों को अप्रिय लगता है, जिस कारण उसका अनादर भी होता है। इस प्रकार वह एक ही समय में पूज्य और उपेक्षित दोनों है।
उत्तर:- लेखिका ने गिलहरी के घायल बच्चे का बहुत सावधानी से और स्नेहपूर्वक उपचार किया। सबसे पहले उसे अपने कमरे में ले गईं। फिर रुई की सहायता से उसके शरीर से खून साफ किया और घावों पर पेंसिलिन का मरहम लगाया ताकि संक्रमण न फैले। उसे दूध पिलाने के लिए रुई की बत्ती को दूध में भिगोकर उसके मुँह के पास लगाया गया। शुरू में दूध की बूँदें गिर जाती थीं, लेकिन लेखिका के लगातार प्रयासों के बाद तीन दिन में वह स्वस्थ हो गया और उसने दूध पीना शुरू कर दिया।
उत्तर:- जब लेखिका किसी काम में व्यस्त होतीं और गिल्लू उनका ध्यान चाहता, तो वह एक विशेष तरीका अपनाता। वह लेखिका के पैरों के पास तक दौड़कर आता और फिर तेजी से परदे पर चढ़ जाता। इसके बाद वह उतनी ही फुर्ती से नीचे उतर आता। यह 'परदे पर चढ़ना-उतरना' का खेल वह तब तक दोहराता रहता, जब तक कि लेखिका उसे पकड़ने के लिए खुद नहीं उठ जाती थीं।
उत्तर:- गिल्लू को मुक्त करने की आवश्यकता तब महसूस हुई जब बाहर की गिलहरियाँ खिड़की की जाली के पास आकर चिक-चिक की आवाज़ करने लगीं। गिल्लू भी जाली के पास बैठकर उन्हें देखता रहता, जिससे लेखिका को समझ आया कि अब वह बड़ा हो गया है और अपने प्राकृतिक परिवेश व साथियों के बीच रहना चाहता है। उसे पिंजरे में बंद रखना उचित नहीं होगा। इसलिए लेखिका ने खिड़की की जाली का एक कोना खोल दिया, ताकि गिल्लू स्वतंत्र रूप से आ-जा सके और अपनी प्रजाति के साथियों के साथ रह सके।
उत्तर:- एक बार लेखिका के अस्पताल से लौटने पर गिल्लू ने एक वफादार परिचारिका की भूमिका निभाई। वह लेखिका के तकिए के पास बैठ जाता और अपने नन्हे-नन्हे कोमल पंजों से उनके सिर और बालों को बहुत ही हल्के हाथों से सहलाता रहता। यह स्पर्श इतना सुकून देने वाला और कोमल था कि जब वह वहाँ से हटता, तो लेखिका को ऐसा लगता मानो कोई देखभाल करने वाली नर्स उनका साथ छोड़कर जा रही हो। इस तरह उसने लेखिका की बीमारी में सच्ची सेवा की।
उत्तर:- गिल्लू ने अपने अंतिम दिनों में कई ऐसे लक्षण दिखाए जिनसे उसके जीवन के अंत का आभास होने लगा। उसने खाना-पीना पूरी तरह छोड़ दिया और बाहर जाना भी बंद कर दिया। वह अपना पसंदीदा झूला छोड़कर लेखिका के बिस्तर पर बिना हिले-डुले लेट गया। उसके शरीर का तापमान गिरने लगा और पंजे पूरी तरह ठंडे पड़ गए। सबसे मार्मिक बात यह थी कि उसने रात भर लेखिका की उँगली थामे रखी और प्रातःकाल की पहली किरण के साथ ही शांति से अपने प्राण त्याग दिए।
उत्तर:- इस कथन का आशय है कि सुबह होते ही गिल्लू ने अपनी देह त्याग दी। लेखिका यहाँ पुनर्जन्म में विश्वास व्यक्त करती हैं। 'किसी और जीवन में जागने के लिए सो गया' का अर्थ है कि गिल्लू के प्राण इस शरीर को छोड़कर किसी नए रूप में, किसी नए जन्म में प्रकट होंगे। यह कथन मृत्यु को एक अंत न मानकर एक नई शुरुआत के रूप में देखता है और लेखिका के दुःख में एक आध्यात्मिक सांत्वना भरता है।
उत्तर:- सोनजुही की लता के नीचे गिल्लू की समाधि बनाने से लेखिका के मन में एक गहन और सुखद विश्वास पैदा हुआ। उन्हें लगने लगा कि गिल्लू का सार तत्व, उसकी आत्मा, उसी सोनजुही के रूप में प्रकट होगी। उनका मानना था कि एक दिन वह पीली कली या कोमल पत्ता उसी गिल्लू का रूपांतरित स्वरूप होगा, जिसे वे फिर से देख और महसूस कर पाएँगी। यह विश्वास उन्हें गिल्लू की स्मृति से जोड़े रखता था और एक प्रकार का आश्वासन देता था कि प्रेम का बंधन मृत्यु के बाद भी बना रहता है।
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