UP Board class 9 Hindi 8. स्वामी आनंद - शुक्रतारे के सामने is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 9 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
1. महादेव भाई अपना परिचय किस रूप में देते थे?
महादेव भाई स्वयं को महात्मा गांधी जी का 'हम्माल' तथा 'पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर' कहकर परिचय देते थे। इसका अर्थ था कि वे गांधी जी के लिए हर प्रकार का छोटा-बड़ा काम करने वाले एक विश्वसनीय सहयोगी थे।
इस पत्रिका के मुख्य लेखक हार्नमैन को, गांधी जी का समर्थक होने के कारण, अंग्रेज सरकार ने देश से निकाल दिया था और वे इंग्लैंड चले गए थे। इस प्रकार मुख्य लेखक के चले जाने से पत्रिका में लेखों की कमी हो गई थी।
सत्याग्रह आंदोलन में व्यस्त रहने के कारण गांधी जी के पास समय की कमी थी। इसलिए उन्होंने निश्चय किया कि 'यंग इंडिया' अब साप्ताहिक न रहकर सप्ताह में केवल दो बार प्रकाशित होगी।
गांधी जी से मिलने से पूर्व महादेव भाई अंग्रेजी सरकार के अनुवाद विभाग में कार्य करते थे। साथ ही, उन्होंने अहमदाबाद में वकालत की प्रैक्टिस भी शुरू कर दी थी।
महादेव भाई के झोलों में हमेशा ताज़े अखबार, विभिन्न पत्र-पत्रिकाएँ, पत्र तथा पुस्तकें भरी रहती थीं, ताकि गांधी जी को सभी नवीनतम जानकारियाँ मिल सकें।
महादेव भाई ने गांधी जी की आत्मकथा 'सत्य के प्रयोग' (मूल गुजराती) का अंग्रेजी में अनुवाद किया था, जिसका शीर्षक 'The Story of My Experiments with Truth' है।
अहमदाबाद से निकलने वाले दो प्रमुख साप्ताहिक पत्र थे - (1) यंग इंडिया (अंग्रेजी) और (2) नवजीवन (गुजराती)।
महादेव भाई अत्यंत परिश्रमी थे। वे प्रतिदिन 17 से 18 घंटे तक लगातार काम करते थे और इतनी कुशलता से काम करते थे कि चार घंटे का कार्य वे मात्र एक घंटे में पूरा कर लेते थे।
महादेव भाई की मृत्यु के बाद, जब भी गांधी जी अपने सचिव प्यारेलाल जी को बुलाना चाहते, तो अनायास उनके मुख से 'महादेव' नाम निकल जाता था। यही उनकी गहरी आत्मीयता को दर्शाता है। इसके अलावा गांधी जी ने यह कहकर अपनी पीड़ा व्यक्त की - 'ए रे जख्म जोगे नहि जशे' (यह घाव कभी भरने वाला नहीं है)।
10. गांधीजी ने महादेव को अपना वारिस कब कहा था?
सन् 1919 में, जलियाँवाला बाग हत्याकांड के बाद जब गांधी जी पंजाब जा रहे थे, तो पलवल रेलवे स्टेशन पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के उस क्षण में ही गांधी जी ने महादेव भाई को अपना 'वारिस' (उत्तराधिकारी) घोषित किया था।
महादेव भाई गांधी जी से मिलने आने वाले हर व्यक्ति से पहले स्वयं मिलते, उनकी समस्याएँ ध्यान से सुनते और उन पर एक संक्षिप्त टिप्पणी (नोट) तैयार करते। फिर वह नोट गांधी जी को दिखाकर, आगंतुक की उनसे सीधी मुलाकात करवाते थे।
महादेव भाई की प्रमुख साहित्यिक देन में गांधी जी की आत्मकथा 'सत्य के प्रयोग' का अंग्रेजी अनुवाद, उनकी विस्तृत डायरियाँ, 'यंग इंडिया' में लिखे गए लेख तथा रवींद्रनाथ टैगोर जैसे लेखकों की कहानियों के अनुवाद शामिल हैं।
महादेव भाई प्रतिदिन वर्धा की तीव्र गर्मी में सेवाग्राम से मगनवाडी तक का लगभग 11 मील का सफर पैदल तय करते थे। लंबे समय तक इस कठोर दिनचर्या और अत्यधिक कार्यभार के कारण उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया, जिससे उनकी अकाल मृत्यु हो गई।
गांधी जी महादेव भाई की लेखन क्षमता की बहुत प्रशंसा करते थे। वे कहते थे कि महादेव भाई के लिखे नोट पूर्णतः सटीक और त्रुटिहीन होते थे, उनमें अल्पविराम (कॉमा) तक की कोई गलती नहीं होती थी और उनकी लिखावट भी अत्यंत सुंदर थी।
15. पंजाब में फ़ौजी शासन ने क्या कहर बरसाया?
पंजाब में फ़ौजी शासन ने भयानक दमन का सहारा लिया। अधिकांश राष्ट्रीय नेताओं को गिरफ्तार कर आजीवन कारावास की सजा देकर अंडमान (काला पानी) भेज दिया गया। लाहौर के प्रसिद्ध अंग्रेजी दैनिक 'ट्रिब्यून' के संपादक कालीनाथ राय को 10 वर्ष की जेल हुई। सबसे भीषण घटना 1919 का जलियाँवाला बाग हत्याकांड था, जहाँ निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाई गईं।
महादेव भाई अपनी अनुकरणीय कर्तव्यनिष्ठा, विलक्षण लेखन कला, विनम्र स्वभाव और सत्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे। वे गांधी जी के इतने करीबी थे कि उनका अधिकांश समय गांधी जी के साथ बीतता था। विरोधियों से भी वे तर्कपूर्ण बात करते थे। देश-विदेश में उनकी लेखनी की धाक थी। इन सब गुणों के कारण वे सभी के चहेते बन गए थे।
महादेव भाई की लिखावट अद्वितीय रूप से सुंदर, स्पष्ट और शुद्ध थी। गांधी जी द्वारा वाइसराय को भेजे जाने वाले सभी महत्वपूर्ण पत्र उन्हीं से लिखवाए जाते थे। उनकी इस लिखावट को देखकर दिल्ली व शिमला में बैठे वाइसराय भी आश्चर्यचकित रह जाते थे। बड़े-बड़े ब्रिटिश अधिकारी भी मानते थे कि पूरी ब्रिटिश सेवा में उनके जैसी सुंदर लिखावट वाला कोई नहीं है।
18. 'अपना परिचय उनके 'पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर' के रूप में देने में वे गौरवान्वित महसूस करते थे।'
इस कथन का आशय है कि महादेव भाई स्वयं को केवल गांधी जी का सचिव ही नहीं, बल्कि उनका सर्वस्व मानते थे। 'पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर' का अर्थ है - अध्यात्मिक गुरु, रसोइया, पानी ढोने वाला और खर (खच्चर यानी सब कुछ ढोने वाला)। वे गांधी जी की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखते थे और इन सभी भूमिकाओं को निभाने में वे गर्व का अनुभव करते थे।
यहाँ 'इस पेशे' से तात्पर्य वकालत से है। इस कथन का आशय यह है कि उस समय वकालत के पेशे में सच्चाई से काम लेना आम बात नहीं थी। वकील का काम अक्सर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करना होता था - गलत को सही (स्याह को सफेद) और सही को गलत (सफेद को स्याह) सिद्ध करना। गांधी जी ने इसी नैतिक द्वंद्व के कारण इस पेशे को छोड़ दिया था।
इसका आशय है कि जिस प्रकार शुक्र (वीनस) ग्रह आकाश में बहुत चमकीला और आकर्षक दिखाई देता है, लेकिन अचानक ही अस्त हो जाता है, ठीक वैसे ही महादेव भाई ने अपनी प्रतिभा और सेवा से सबको मोह लिया, परंतु असमय (केवल 42 वर्ष की आयु में, 1942 में) ही इस दुनिया से चले गए।
महादेव भाई द्वारा लिखे गए पत्र न केवल तर्कपूर्ण और प्रभावशाली होते थे, बल्कि उनकी अद्भुत सुंदर लिखावट भी होती थी। गांधी जी की ओर से आने वाले ऐसे पत्रों को पढ़कर दिल्ली और शिमला में बैठे वाइसराय (ब्रिटिश शासक) हैरानी और बेबसी महसूस करते थे। उनकी लेखन शैली और हस्तलेख की उत्कृष्टता देखकर वे आश्चर्य से लंबी साँसें लेने लगते थे।
| मूल शब्द | नया शब्द |
|---|---|
| सप्ताह | साप्ताहिक |
| साहित्य | साहित्यिक |
| व्यक्ति | वैयक्तिक |
| राजनीति | राजनीतिक |
| अर्थ | आर्थिक |
| धर्म | धार्मिक |
| मास | मासिक |
| मूल शब्द | नया शब्द (उपसर्ग सहित) |
|---|---|
| आर्य | अनार्य |
| डर | निडर |
| क्रय | विक्रय |
| उपस्थित | अनुपस्थित |
| नायक | अधिनायक |
| आगत | स्वागत |
| मार्ग | कुमार्ग |
| लोक | परलोक |
| भाग्य | सौभाग्य |
1. आड़े हाथों लेना - परीक्षा में फेल होने पर पिता जी ने पुत्र को आड़े हाथों ले लिया।
2. दाँतों तले अँगुली दबाना - नन्ही बच्ची का मधुर गाना सुनकर सभी श्रोताओं ने दाँतों तले अँगुली दबा ली।
3. लोहे के चने चबाना - इस परियोजना को समय पर पूरा करना लोहे के चने चबाने के समान कठिन है।
4. अस्त हो जाना - महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का चला जाना विज्ञान जगत के एक सूर्य का अस्त हो जाना था।
5. मंत्र-मुग्ध करना - पंडित रविशंकर के सितार वादन ने पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया।
| शब्द | पर्यायवाची शब्द |
|---|---|
| वारिस | उत्तराधिकारी, दायाद |
| मुकाम | लक्ष्य, मंज़िल, पड़ाव |
| तालीम | शिक्षा, सीख, ज्ञान |
| जिगरी | अंतरंग, घनिष्ठ, पक्का मित्र |
| फ़र्क | अंतर, भेद, प्रभेद |
| गिरफ़्तार | बंदी, कैद, कारागृह में डालना |
1. महादेव भाई अपना परिचय 'पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर' के रूप में दिया करते थे।
2. पीड़ितों के दल-के-दल ग्रामदेवी के मणिभवन पर उमड़ा करते थे।
3. दोनों साप्ताहिक अहमदाबाद से निकला करते थे।
4. देश-विदेश के समाचार-पत्र गांधीजी की गतिविधियों पर टीका-टिप्पणी किया करते थे।
5. गांधीजी के पत्र हमेशा महादेव की लिखावट में जाया करते थे।
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