UP Board class 5 EVS 1. कैसे पहचाना चींटी ने दोस्त को is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 5 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
51. तुम स्कूल के मैदान में बैठे खाना खा रहे हो और चील आकर फुर्ती से तुम्हारी रोटी ले गयी?
उत्तर : हाँ, ऐसा कई बार हो सकता है। जब हम खुले में खाना खाते हैं, तो चील जैसे पक्षी तेजी से झपट्टा मारकर खाना उठा ले जाते हैं क्योंकि उनकी नजर बहुत तेज होती है और वे ऊपर से ही जमीन पर पड़ी चीजें देख लेते हैं।
उत्तर : हाँ, ऐसा हो सकता है। कुत्ते की सुनने की शक्ति बहुत तेज होती है। भले ही वह सो रहा हो, लेकिन पास से कोई आवाज या कदमों की आहट आते ही उसके कान सजग होकर खड़े हो जाते हैं ताकि वह खतरे को भांप सके।
उत्तर : हाँ, यह एक आम बात है। चींटियों को मीठी चीजों की गंध बहुत दूर से ही आ जाती है। जब मीठा जमीन पर गिरता है तो पहली चींटी उसकी गंध पाकर वहाँ पहुँचती है और फिर वह अपने साथियों को बुलाने के लिए एक रासायनिक संकेत छोड़ती है, जिससे कुछ ही मिनटों में चींटियों का पूरा झुंड वहाँ इकट्ठा हो जाता है।
उत्तर : हर चींटियों की टोली की एक अलग विशेष गंध होती है। चींटियाँ अपने शरीर से एक रासायनिक पदार्थ छोड़ती हैं जो उनकी पहचान बताता है। जब यह चींटी दूसरी टोली की चींटियों के पास गई, तो उनकी अलग गंध से उसे पता चल गया कि ये उसकी अपनी टोली की नहीं हैं।
उत्तर : पहरेदार चींटी ने अपने एंटीना (स्पर्शिका) से इस चींटी की गंध सूंघकर उसे पहचाना। चूंकि यह चींटी उसी टोली की थी, इसलिए उसकी गंध परिचित थी और पहरेदार चींटी ने उसे अंदर जाने दिया।
उत्तर:
(क) चींटियाँ आमतौर पर 5-10 मिनट के अंदर आ जाती हैं। यह समय उनके बिल की दूरी पर निर्भर करता है।
(ख) सबसे पहले आमतौर पर एक या दो चींटियाँ खोजी के रूप में आती हैं। जब उन्हें खाना मिल जाता है, तो वे वापस जाकर दूसरों को संकेत देती हैं और फिर धीरे-धीरे पूरा झुंड इकट्ठा हो जाता है।
(ग) चींटियाँ खाने की चीज को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटती या तोड़ती हैं और उन्हें अपने मुंह से पकड़कर अपने बिल की ओर ले जाती हैं ताकि उसे भविष्य के लिए स्टोर कर सकें।
(घ) वे उस जगह से सीधे अपने बिल में जाती हैं। वे अपने रास्ते में एक रासायनिक गंध छोड़ती हैं ताकि बाकी चींटियाँ भी उसी रास्ते से आ-जा सकें।
(च) हाँ, वे अक्सर एक-दूसरे के पीछे एक सीधी कतार या लाइन बनाकर चलती हैं। ऐसा वे उस गंध के निशान का पालन करने के कारण करती हैं जो पहली चींटी ने छोड़ा होता है।
उत्तर : जब हम पेंसिल से उनका रास्ता रोकते हैं, तो चींटियाँ थोड़ी देर के लिए भटक सकती हैं। लेकिन वे जल्द ही पेंसिल के चारों ओर घूमकर या उस पर चढ़कर अपना रास्ता ढूंढ लेती हैं और फिर से अपनी कतार बना लेती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वे जमीन पर बनी गंध की रेखा को फिर से ढूंढने की कोशिश करती हैं।
उत्तर : चींटियाँ चलते समय अपने पीछे एक विशेष रासायनिक गंध (फेरोमोन) छोड़ती हैं। यह गंध उनके लिए रास्ते का नक्शा बनाती है। जब हम पेंसिल से रास्ता रोकते हैं, तो यह गंध का निशान टूट जाता है। चींटियाँ इस गंध को खोजने के लिए इधर-उधर घूमती हैं और जैसे ही उन्हें फिर से वह गंध मिलती है, वे फिर से उसी रास्ते पर चलने लगती हैं।
उत्तर : हाँ, मच्छरों से सभी परेशान होते हैं। मच्छर हमें कई तरीकों से ढूंढ लेते हैं:
उत्तर : कुत्तों की सूंघने की अद्भुत शक्ति का इस्तेमाल हम निम्नलिखित कामों में करते हैं:
उत्तर : हमारी सूंघने की शक्ति हमारे दैनिक जीवन में बहुत काम आती है:
उत्तर : हम बिना देखे कुछ जानवरों को उनकी विशिष्ट गंध से पहचान सकते हैं, जैसे:
उत्तर:
| इनकी गंध अच्छी लगती है। | इनकी गंध अच्छी नहीं लगती है। |
|---|---|
| 1. गुलाब जैसे फूलों की खुशबू | 1. कचरे के ढेर की बदबू |
| 2. ताजा बना हुआ खाना (जैसे पराठा, सब्जी) | 2. सड़ी हुई मछली या सब्जी की गंध |
| 3. बारिश के बाद मिट्टी की सुगंध | 3. गोबर या पशुओं के मल की गंध |
| 4. इत्र या अगरबत्ती की खुशबू | 4. नाले या गंदे पानी की बदबू |
| 5. ताजी कटी हुई घास की गंध | 5. पेंट, कीटनाशक या तेज रसायनों की गंध |
उत्तर : जरूरी नहीं है। हर व्यक्ति की पसंद और गंध के प्रति संवेदनशीलता अलग-अलग होती है। किसी को जो गंध अच्छी लगती है, हो सकता है दूसरे को वह अच्छी न लगे। इसलिए सभी के उत्तर एक जैसे नहीं हो सकते।
उत्तर : निम्नलिखित जानवरों के बाहरी कान स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं:
उत्तर : कई जानवरों के कान हम मनुष्यों के कानों से काफी बड़े होते हैं, जैसे:
उत्तर : हम जानवरों की भाषा तो नहीं समझ सकते, लेकिन उनकी अलग-अलग आवाजों से उनके मूड या इरादे का अंदाजा लगा सकते हैं। जैसे:
उत्तर : जानवर हमारी भाषा के शब्दों का अर्थ नहीं समझते, लेकिन वे हमारी आवाज के लहजे, इशारों और बार-बार दोहराए जाने वाले आदेशों को समझना सीख जाते हैं। कुछ पालतू जानवर इसमें माहिर होते हैं, जैसे:
उत्तर : (छात्र स्वयं चर्चा करें। सुझाव:) हाँ, अक्सर हम अपने घर के लोगों के कपड़ों से उनकी विशेष गंध पहचान सकते हैं। जैसे माँ के कपड़ों से रसोई के मसालों या उनके इत्र की खुशबू आ सकती है। पिताजी के कपड़ों से ऑफिस या उनके साबुन की गंध आ सकती है। हर व्यक्ति की एक अलग प्राकृतिक गंध भी होती है जिसे हम पहचान सकते हैं।
उत्तर : (छात्र स्वयं चर्चा करें। सुझाव:) भीड़-भाड़ वाली जगहों पर कई तरह की गंध एक साथ मिल जाती हैं। वहाँ खाने-पीने की चीजों की सुगंध, पसीने की गंध, इत्र की गंध, धूल-मिट्टी की गंध सब कुछ एक साथ महसूस होता है। कभी-कभी यह मिश्रण अच्छा लगता है (जैसे मेले में), तो कभी बहुत बुरा लगता है (जैसे हवा न लगने वाली भरी बस में)।
उत्तर : ऐसा हमारी सोच और भावनाओं के कारण होता है। सुशीला के लिए अपनी छोटी बेटी का मल भी गंदा नहीं लगता क्योंकि उसके प्रति उसका गहरा प्यार और लगाव है। वह उसे अपना ही एक हिस्सा मानती है। लेकिन दीपक (जो शायद पड़ोसी का बच्चा है) की पौटी साफ करते समय वह उसे 'दूसरे' के रूप में देखती है और उसकी गंध उसे बुरी लगती है, इसलिए वह स्वाभाविक रूप से अपना मुँह ढक लेती है। यह दिखाता है कि गंध की अनुभूति हमारी मानसिकता से जुड़ी होती है।
उत्तर : कूड़े के ढेर से आने वाली सड़ांध और बदबू हमें बहुत ही खराब और परेशान करने वाली लगती है। हम जल्दी से नाक बंद कर लेते हैं और वहाँ से दूर भागना चाहते हैं। लेकिन जो बच्चा दिनभर वहाँ काम करता है, उसकी सूंघने की इंद्रियाँ उस गंध के अभ्यस्त (Habituated) हो जाती हैं। उसका दिमाग उस गंध को अनदेखा करना सीख जाता है ताकि वह अपना काम कर सके। यह उसकी मजबूरी है, लेकिन यह भी दिखाता है कि हमारा शरीर और दिमाग कैसे अलग-अलग परिस्थितियों के अनुकूल खुद को ढाल लेता है।
उत्तर : गंध का अच्छा या बुरा होना पूरी तरह से एक जैसा नहीं होता। इसमें दो बातें शामिल हैं:
उत्तर : उल्लू और बाज (ईगल) जैसे शिकारी पक्षियों की आँखें सामने की तरफ होती हैं। इससे उन्हें शिकार की दूरी का सही अंदाजा लगाने में मदद मिलती है।
उत्तर : कबूतर, मुर्गी, तोता, मोर और गौरैया जैसे अधिकांश पक्षियों की आँखें सिर के दोनों तरफ होती हैं। इससे उन्हें लगभग 300 डिग्री का व्यापक दृष्टि क्षेत्र मिलता है और वे शिकारियों से आसानी से बच सकते हैं। इन पक्षियों की आँखें उनके सिर की तुलना में आमतौर पर छोटी होती हैं, लेकिन बहुत तेज होती हैं।
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