UP Board class 5 EVS 6. बूँद -बूँद दरिया -दरिया is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 5 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
61. अपने स्कूल के आस-पास के इलाके को देखो। क्या वहाँ कच्चा मैदान, पक्की सड़कें, नालियाँ, आदि हैं। इलाका किस तरह का है? जैसे-ढलानवाला, पथरीला या किसी और तरह का। तुम्हें क्या लगता है, बारिश का पानी बहकर , कहाँ-कहाँ जाता होगा? जैसे-जमीन में, नालियों में, गड्डों में आदि।
उत्तर : मेरे स्कूल के आस-पास का इलाका मुख्य रूप से पक्की सीमेंट की सड़कों वाला है। यहाँ कुछ कच्चे मैदान भी हैं। यह इलाका थोड़ा ढलानवाला है। बारिश का पानी सड़कों पर बहकर पहले नालियों में जाता है, फिर वहाँ से बड़ी नालियों में और अंत में नदी में मिल जाता है। कच्चे मैदानों में कुछ पानी जमीन के अंदर भी समा जाता है और कुछ गड्ढों में इकट्ठा हो जाता है।
51. क्या तुम्हारे यहाँ कभी पानी की किल्लत हुई है? अगर हुई है, तो उसका कारण बताओ।
उत्तर : हाँ, मेरे यहाँ कभी-कभी पानी की किल्लत हो जाती है। इसके मुख्य कारण हैं - गर्मियों में पानी के स्रोतों का सूख जाना, कई बार पानी की पाइपलाइन में टूट-फूट होना, या फिर बिजली कटौती के कारण पानी के पंप न चल पाना। कभी-कभी बहुत अधिक पानी के इस्तेमाल से भी पानी की कमी महसूस होती है।
52. अपनी दादी, नानी या किसी और बड़ी से बातचीत करो कि जब वे तुम्हारी उम्र की थीं, तब- (क) घर में पानी कहाँ से आता था? क्या तब और अब में कोई बदलाव हुआ है? (ख) मुसाफिरों के लिए पानी का किस-किस तरह का इंतजाम होता था? जैसे प्याउ, मशक या कुछ और? आजकल सफर में लोग क्या करते हैं?
उत्तर : (क) मेरी दादी जी बताती हैं कि जब वे छोटी थीं, तब घर में पानी मुख्य रूप से कुएँ और नदी से आता था। लोग बाल्टी या मटके में पानी भरकर लाते थे। अब बहुत बड़ा बदलाव आया है। अब पानी घर-घर में नलों के द्वारा पहुँचता है, जो UP Board जल बोर्ड या हैंडपंप से आता है।
(ख) पहले मुसाफिरों के लिए रास्ते में प्याऊ (सार्वजनिक पीने के पानी की जगह), बावड़ी या कुएँ होते थे। कुछ लोग यात्रा में पानी मशक (चमड़े का थैला) में ले जाते थे। आजकल सफर में लोग आमतौर पर प्लास्टिक की बोतल में पानी खरीदकर या घर से भरकर ले जाते हैं। ट्रेन या बस स्टेशनों पर भी पानी की बोतलें मिल जाती हैं।
51. क्या तुम्हारे घर या स्कूल के आस-पास तालाब, कुआँ या बावडी बनी है? उसे देखने जाओ और पता भी करो।
(i) यह कितना पुराना है? किसने बनवाया होगा?
(ii) इसके आस-पास किस तरह की इमारत बनी है?
(iii) पानी साफ है या नहीं? क्या इसकी सफाई होती है?
(iv) यहाँ से कौन-कौन पानी भरता है?
(v) क्या कभी यहाँ कोई त्योहार मनाया जाता है?
(vi) पानी कहीं सूख तो नहीं गया?
उत्तर : हाँ, मेरे गाँव के पास एक बड़ा तालाब है।
(i) यह तालाब लगभग 200 साल पुराना बताया जाता है। बुजुर्गों के अनुसार इसे उस समय के स्थानीय राजा ने बनवाया था ताकि गाँव वालों और जानवरों को पानी मिल सके।
(ii) इसके आस-पास कुछ पुराने पक्के घाट बने हुए हैं और दूर-दूर तक खेत हैं।
(iii) तालाब का पानी अब बहुत साफ नहीं रहा। इसमें कुछ हरियाली (शैवाल) दिखती है। इसकी सफाई बरसात से पहले कभी-कभार ही की जाती है।
(iv) अब गाँव में नल आ जाने के कारण कोई पीने का पानी यहाँ से नहीं भरता। लेकिन किसान खेत की सिंचाई के लिए और कुछ लोग अपने मवेशियों को पिलाने के लिए यहाँ से पानी ले जाते हैं।
(v) हाँ, हर साल मकर संक्रांति के दिन यहाँ एक छोटा मेला लगता है और लोग स्नान करते हैं।
(vi) गर्मियों में तालाब का पानी कम जरूर हो जाता है, लेकिन पूरी तरह कभी नहीं सूखता क्योंकि यह काफी गहरा है।
61. चर्चा करो-पुनीता के मोहल्ले में दो पुराने कुंए हैं। उसकी दादी बताती हैं कि लगभग 15-20 साल पहले तक उसमें पानी था। क्या कुँए सूखने की कुछ वजह ये हो सकती हैं?
(i) कई जगह मोटर लगाकर जमीन का पानी निकाला जा रहा है।
(ii) तालाब जिनमें बारिश का पानी इकट्ठा होता था, अब नहीं रहे।
(iii) पेड़ों के आस-पास और पार्क मे भी जमीन को सीमेंट से पक्का कर दिया गया है।
(iv) क्या तुम कोई और वजह भी सुझा सकते हो?
उत्तर : हाँ, दी गई सभी बातें कुँए सूखने की वजह हो सकती हैं।
(i) मोटर पंपों से जमीन का पानी बहुत तेजी से निकाला जा रहा है, जिससे जमीन के नीचे का पानी का स्तर (वाटर टेबल) नीचे चला गया है और कुएँ सूख गए हैं।
(ii) तालाबों को भरकर उन पर मकान बना दिए गए हैं। इससे बारिश का पानी जमीन में नहीं जा पाता और भूजल नहीं बढ़ पाता।
(iii) सीमेंट से जमीन को पक्का करने से बारिश का पानी सीधे नालियों में बह जाता है, जमीन के अंदर नहीं समा पाता।
(iv) इसके अलावा और भी कारण हैं, जैसे - पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, जिससे बारिश कम होती है और मिट्टी पानी सोख नहीं पाती। कुँए की सही देखभाल न होना और उसके आस-पास गंदगी जमा हो जाना भी एक कारण है।
01. आज लोग पानी का इंतजाम किस-किस तरह से करते हैं। चित्र को देखकर चर्चा करो।
उत्तर : आजकल लोग पानी का इंतजाम निम्नलिखित तरीकों से करते हैं:
1. नगर निगम/जल बोर्ड की पाइपलाइन - शहरों में घर-घर नल के द्वारा पानी पहुँचाया जाता है।
2. हैंडपंप या बोरवेल - गाँवों और कई शहरी इलाकों में जमीन से पानी निकालने के लिए हैंडपंप या मोटर वाले बोरवेल लगाए जाते हैं।
3. टैंकर - जहाँ पानी की कमी होती है, वहाँ टैंकरों के द्वारा पानी पहुँचाया जाता है।
4. बोतलबंद पानी - पीने के लिए लोग बाजार से शुद्ध बोतलबंद पानी भी खरीदते हैं।
5. वर्षा जल संचयन - कुछ लोग बारिश के पानी को इकट्ठा करके भी उपयोग में लाते हैं।
५2. तुम्हारे यहाँ जिस तरह पानी आता है उस पर (/) निशान लगाओ। अगर किसी अलग तरीके से आता है तो अलग से कॉपी में लिखो?
उत्तर : मेरे घर में पानी मुख्य रूप से UP Board जल बोर्ड की पाइपलाइन के द्वारा आता है। जब कभी पानी बंद हो जाता है तो हम सोसायटी के बोरवेल से भी पानी लेते हैं।
01. यह बिल कौन-से दफ्तर से आता है?
उत्तर : यह बिल UP Board जल बोर्ड के दफ्तर से आता है।
५2. तुम्हारे यहाँ अगर बिल आता है तो कहाँ से आता है?
उत्तर : हाँ, मेरे यहाँ भी पानी का बिल आता है। यह बिल हमारे शहर के नगर निगम के जल विभाग के दफ्तर से आता है।
53. इस बिल में दिल्ली जल बोर्ड के नीचे दिल्ली सरकार क्यों लिखा होता है?
उत्तर : इस बिल में दिल्ली जल बोर्ड के नीचे दिल्ली सरकार इसलिए लिखा होता है क्योंकि दिल्ली जल बोर्ड दिल्ली सरकार के अधीन काम करने वाली एक संस्था है। यह सरकारी विभाग ही है जो पूरे शहर में पानी की आपूर्ति और उसके बिल का प्रबंधन करता है।
64. बिल किसके नाम से है? कितने महीनों के कितने पैसे देने पड़ रहे हैं?
उत्तर : बिल श्रीमान मो. उमर और श्री मो. शोएब के संयुक्त नाम से है। यह बिल दो महीने (नवंबर और दिसंबर) का है और कुल 350 रुपये देने पड़ रहे हैं। इसका मतलब है कि प्रति महीने लगभग 175 रुपये बनते हैं।
65. क्या तुम्हारे यहाँ पानी के पैसे चुकाने पड़ते हैं? क्या तुम्हारे यहाँ अलग-अलग इलाकों में पानी का रेट अलग है? बड़ों से पता करो।
उत्तर : हाँ, हमें हर महीने पानी के पैसे चुकाने पड़ते हैं। बड़ों से पता चला कि अलग-अलग इलाकों में पानी का रेट अलग-अलग हो सकता है। आमतौर पर, शहरी इलाकों में जहाँ पानी की पाइपलाइन और सफाई की व्यवस्था बेहतर होती है, वहाँ का रेट ग्रामीण इलाकों की तुलना में थोड़ा अधिक होता है। कुछ सरकारी कॉलोनियों में भी रेट कम हो सकता है।
56. तुमने इस तरह की क्या कोई खबर पढ़ी है? लोगों ने मिल कर पानी की परेशानी को कैसे द्वूर किया? क्या किसी पुराने तालाब या बावडी को फिर ठीक करके इस्तेमाल किया?
उत्तर : हाँ, मैंने ऐसी कई खबरें पढ़ी हैं। एक मशहूर उदाहरण राजस्थान के अलवर जिले का है, जहाँ लोगों ने मिलकर पुराने जोहड़ (छोटे तालाब) और बाँधों की मरम्मत की। उन्होंने बारिश के पानी को रोककर जमीन के पानी के स्तर को बढ़ाया, जिससे पूरे इलाके में पानी की किल्लत दूर हो गई। महाराष्ट्र के रालेगन सिद्धि गाँव में भी लोगों ने वर्षा जल संचयन और पेड़ लगाकर पानी की समस्या को हल किया।
61. पोस्टर बनाओ-पृथ्वी पर पानी सभी का है, साझा है। कुछ और ऐसे ही नारे सोचो और साथ ही चित्र भी बनाकर अपना एक सुन्दर पोस्टर बनाओ।
उत्तर : पोस्टर के लिए नारे:
५2. यह बिल किस तारीख तक का है?
उत्तर : यह बिल 7 जनवरी तक का है। इस तारीख तक बिल का भुगतान करना जरूरी है।
53. इस बिल के लिए कितने पैसे भरने पड़ेंगे?
उत्तर : इस बिल के लिए कुल 50 रुपये भरने पड़ेंगे।
64. इनके अलावा बिल में और क्या-क्या देख पा रहे हो?
उत्तर : इस बिल में हम और भी जानकारी देख सकते हैं, जैसे:
- बिल की एक विशेष संख्या (बिल नंबर) है।
- बिल में 35 रुपये का एक अतिरिक्त शुल्क भी लगाया गया है, जो संभवतः पानी की पाइपलाइन या मीटर की मरम्मत के लिए है।
- ग्राहक का पता और बिल जारी करने की तारीख भी लिखी हुई है।
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