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UP Board class 5 EVS (18. जाएँ तो जाएँ कहाँ) solution PDF

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UP Board class 5 EVS (18. जाएँ तो जाएँ कहाँ) solution

UP Board class 5 EVS 18. जाएँ तो जाएँ कहाँ Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 5 EVS आस-पास

पाठ - 18 जाएँ तो जाएँ कहाँ

सोचो और बताओ 01. जात्र्या भीड़ में रहकर भी अकेला महसूस कर रहा था। क्या तुम्हारे साथ भी कभी ऐसा हुआ है?

उत्तर : हाँ, ऐसा अक्सर होता है। जब हम किसी नई जगह पर होते हैं या ऐसे लोगों के बीच होते हैं जिनसे हमारा परिचय नहीं होता, तो भीड़ में भी अकेलापन महसूस हो सकता है। मेरे साथ भी स्कूल की नई कक्षा में या किसी बड़े मेले में ऐसा हुआ है।

52. अपनी जगह छोड़कर दूर नई जगह जाकर रहना कैसा लगता होगा?

उत्तर : अपनी पुरानी जगह छोड़कर नई जगह जाना एक मिला-जुला अनुभव होगा। एक तरफ नई जगह की उत्सुकता और नए दोस्त बनाने की खुशी होगी, तो दूसरी तरफ पुराने दोस्तों, परिवेश और यादों को छोड़ने का दुख भी होगा। शुरुआत में डर और असहजता भी महसूस हो सकती है।

63. जात्र्या जैसे परिवार बड़े शहरों में क्यों आते होंगे?

उत्तर : जात्र्या जैसे परिवार आमतौर पर बड़े शहरों में रोजगार की तलाश में आते हैं। उनके गाँव या छोटे शहरों में काम के अवसर कम होते हैं, इसलिए वे यह सोचकर बड़े शहर आते हैं कि यहाँ उन्हें काम मिल जाएगा और वे अपने परिवार का भरण-पोषण बेहतर ढंग से कर पाएँगे। कभी-कभी प्राकृतिक आपदाएँ या विकास परियोजनाएँ (जैसे बाँध बनना) भी उन्हें विस्थापित कर देती हैं, जिससे उन्हें शहर आना पड़ता है।

54. क्या तुमने ऐसे बच्चों को देखा है, जो काम पर भी जाते हैं?

उत्तर : हाँ, मैंने ऐसे बच्चों को देखा है। वे चाय की दुकानों पर, ढाबों पर, कारखानों में या सड़कों पर छोटे-मोटे काम करते हुए दिखाई देते हैं। यह देखकर बहुत दुख होता है कि उनकी उम्र पढ़ने-खेलने की है, लेकिन वे काम करने को मजबूर हैं।

65. ये बच्चे किस तरह के काम करते हैं? क्यों करने पड़ते होंगे?

उत्तर : ये बच्चे अक्सर छोटे-छोटे काम करते हैं, जैसे – सड़कों या कूड़ेदानों से कचरा बीनना, चाय की दुकान या ढाबे पर बर्तन साफ करना, सामान बेचना, या घरों में छोटे-मोटे काम करना।
उन्हें यह काम गरीबी की वजह से करने पड़ते हैं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब होती है कि बच्चों को भी कमाई में हाथ बँटाना पड़ता है। कई बार परिवार में बड़े बीमार होते हैं या फिर माता-पिता नहीं होते, जिसकी वजह से बच्चों को काम करना पड़ता है।

बताओ 01. खेड़ी गाँव में बच्चे क्या-क्या सीखते थे?

उत्तर : खेड़ी गाँव के बच्चे प्रकृति और अपने परिवेश से जुड़ी कई महत्वपूर्ण चीजें सीखते थे। वे मछली पकड़ना, अलग-अलग पक्षियों को पहचानना और उनकी आवाज़ की नकल करना, ढोल बजाना, लोक नृत्य और गीत सीखते थे। ये सब कौशल उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और संस्कृति का हिस्सा थे।

52. तुम अपने बड़ों से क्या-क्या सीखते हो?

उत्तर : मैं अपने बड़ों से बहुत कुछ सीखता हूँ। दादा-दादी से पुरानी कहानियाँ और नैतिक मूल्य सीखता हूँ। माता-पिता से अनुशासन, समय का महत्व, बड़ों का आदर करना और छोटों से प्यार से बात करना सीखता हूँ। वे मुझे घर के छोटे-मोटे काम, पेड़-पौधों की देखभाल और समाज में अच्छे व्यवहार के बारे में भी सिखाते हैं।

ca जिन चीजों का ज्ञान जात्र्या को खेड़ी में हासिल हुआ, उनमें से कितना उन्हें मुंबई में काम आया?

उत्तर : जात्र्या को खेड़ी में जो ज्ञान मिला, उसमें से कुछ चीजें मुंबई में भी उसके काम आई होंगी। उसकी मछली पकड़ने की कला शायद समुद्र के किनारे काम आ सकती थी। ढोल बजाना, गाना-नाचना जैसे कौशल शहर के किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम या मनोरंजन में उसकी मदद कर सकते थे। सबसे बढ़कर, प्रकृति के साथ रहकर उसने जो धैर्य और समस्याओं से जूझने की ताकत सीखी थी, वह शहर की मुश्किल जिंदगी में जरूर उसके काम आई होगी।

54. क्या तुम हर रोज पक्षियों की आवाजें सुनते हो? कौन-कौन से?

उत्तर : हाँ, मैं लगभग रोज ही पक्षियों की आवाजें सुनता हूँ। सुबह-सुबह चिड़ियों की चहचहाहट, कौवे का काँव-काँव, कबूतर का गुटरगूँ और कभी-कभी कोयल की मधुर आवाज सुनाई देती है। ये आवाजें प्रकृति का संगीत हैं और दिन की शुरुआत अच्छी कर देती हैं।

55. क्या तुम किसी पक्षी की आवाज की नकल कर सकते हो? करके दिखाओ।

उत्तर : हाँ, मैं कुछ पक्षियों की आवाज की नकल कर सकता हूँ। जैसे कौवे की आवाज "काँव-काँव", मुर्गे की आवाज "कुकड़ू कूँ", और कबूतर की आवाज "गुटर गूँ-गूँ" जैसी कर सकता हूँ। यह मजेदार है और पक्षियों को पहचानने में भी मदद करता है।

56. तुम रोज ऐसी कौन-सी आवाजों सुनते हो, जो खेड़ी के लोग नहीं सुनते होंगे?

उत्तर : मैं रोज ऐसी कई आवाजें सुनता हूँ जो शहर में ही सुनाई देती हैं। जैसे – हलचल भरी सड़कों पर गाड़ियों के हॉर्न और इंजन की आवाज, रिक्शा और ऑटो के इंजन की आवाज, फैक्ट्रियों या कंस्ट्रक्शन साइट से आने वाला शोर, और कभी-कभी हवाई जहाज की गूँजती हुई आवाज।

57. क्या तुमने सन्नाटा महसूस किया है? कब और कहाँ?

उत्तर : हाँ, मैंने सन्नाटा महसूस किया है। यह आमतौर पर रात के समय होता है जब सब सो रहे होते हैं और आसपास कोई आवाज नहीं होती। कभी-कभी स्कूल की लाइब्रेरी में या सुबह बहुत जल्दी पार्क में जाने पर भी ऐसा शांत और सन्नाटे जैसा माहौल महसूस होता है।

चर्चा करो और बताओ

61. जात्र्या के गाँव के कई लोगों को अपने जंगल-जमीन छोड़ना मंजूर न था। ऐसा क्यों? न चाहते हुए भी उन्हें अपना गाँव छोड़ना ही पड़ा। सोचो क्यों?

उत्तर : जात्र्या के गाँव के लोगों को अपनी जमीन और जंगल छोड़ना इसलिए मंजूर नहीं था क्योंकि वह जगह उनकी पहचान और जीवन का आधार थी। वहाँ उनके पूर्वज रह चुके थे, उनकी यादें जुड़ी थीं, और वे प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीना जानते थे।
उन्हें गाँव छोड़ना इसलिए पड़ा क्योंकि वहाँ बाँध बनने वाला था, जिससे पूरा इलाका पानी में डूब जाने वाला था। यह एक विकास परियोजना थी, जिसके लिए उन्हें विस्थापित होना पड़ा, भले ही वे नहीं चाहते थे।

९५2. जात्र्या के खे के परिवार में कितने लोग थे? जात्रया जब अपवार के बारे में सोचता तो उसके मन में कौन-कौन आता?

उत्तर : जात्र्या के खेड़ी वाले परिवार में केवल तीन लोग थे – जात्र्या, उसकी माँ और उसके पिता।
लेकिन जब जात्र्या अपने भविष्य के परिवार के बारे में सोचता था, तो उसके मन में उसकी आने वाली पत्नी और उनके बच्चे आते थे। वह एक बड़े और प्यार भरे परिवार का सपना देखता था।

53. अपने परिवार के बाद तोचते हो तो तुम्हारे मन में कौन-कौन आता है?

उत्तर : जब मैं अपने परिवार के बारे में सोचता हूँ, तो सबसे पहले मेरे माता-पिता, मेरे भाई-बहन और मेरे दादा-दादी का चेहरा मेरे सामने आता है। फिर मुझे अपने चाचा-चाची, मामा-मामी और उनके बच्चों (मेरे चचेरे और ममेरे भाई-बहन) की याद आती है। मेरे लिए परिवार का मतलब सिर्फ एक घर में रहने वाले लोग नहीं, बल्कि वे सभी रिश्तेदार हैं जिनसे प्यार और जुड़ाव महसूस होता है।

54. क्या तुमने ऐसे लोगों के बारे में सुना है, जो अपनी पुरानी जगह से हटना पसंद नहीं करते? उनकी कुछ बातें बताओ।

उत्तर : हाँ, मैंने ऐसे कई लोगों के बारे में सुना है। मेरे दादाजी अक्सर कहते हैं कि वे अपने गाँव को छोड़कर शहर में रहने आए, लेकिन उनका मन हमेशा गाँव में ही लगा रहता है। वे कहते हैं कि गाँव की शुद्ध हवा, खुला आसमान, हरियाली और वहाँ के सरल लोग शहर में नहीं मिलते। शहर का शोर-शराबा और भागदौड़ भरी जिंदगी उन्हें पसंद नहीं है। वे गाँव की शांति और अपने पुराने दोस्तों को याद करते हैं।

55. क्या तुम कोई ऐसी जगह जानते हो, जहाँ स्कूल है ही नहीं?

उत्तर : हाँ, मैंने अपने माता-पिता से सुना है कि कुछ दूर-दराज के गाँवों या पहाड़ी इलाकों में अभी भी स्कूल नहीं हैं, या फिर स्कूल है तो वहाँ शिक्षक नहीं आते। कई बार स्कूल इमारत तो होती है, लेकिन उसमें पढ़ाई का सही माहौल नहीं होता। ऐसे में बच्चों को पढ़ने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर दूसरे गाँव जाना पड़ता है।

कल्पना करो

५1. जहाँ बाँध बनता है, वहाँ के लोगों को क्या-क्या परेशानियाँ होती होंगी?

उत्तर : जहाँ बाँध बनता है, वहाँ के लोगों को निम्नलिखित परेशानियों का सामना करना पड़ता है:

  1. उनके घर, खेत और पूरा गाँव पानी में डूब जाता है।
  2. उनकी जमीन और रोजी-रोटी के साधन (जैसे खेती, पशुपालन) खत्म हो जाते हैं।
  3. उन्हें अपनी पुश्तैनी जमीन और घर छोड़कर विस्थापित होना पड़ता है।
  4. उन्हें नई जगह पर फिर से घर बनाना, नए रोजगार की तलाश करनी और नए माहौल में ढलना पड़ता है, जो बहुत मुश्किल होता है।
  5. कई बार सरकार द्वारा दी जाने वाली मुआवजा राशि या नई जमीन भी उनकी पुरानी जमीन जितनी अच्छी नहीं होती।

९2. खेड़ी गाँव और जात्र्या के सपनों के नए गाँव के चित्र अपनी कॉपी में बनाओ। अपने साथी का चित्र भी देखो। उनमें अंतर Eat

उत्तर : (छात्रों को स्वयं चित्र बनाने हैं। सामान्य अंतर इस प्रकार हो सकते हैं:)
खेड़ी गाँव के चित्र में – हरे-भरे जंगल, नदी, झोपड़ियाँ, मछली पकड़ते लोग, पेड़ों पर चिड़ियाँ, खुले मैदान में खेलते बच्चे दिखाई देंगे।
सपनों के गाँव के चित्र में – पक्के घर, साफ-सुथरी सड़कें, स्कूल, पंखे वाली दुकानें, बगीचे, खेल का मैदान और खुशहाल लोग दिखाई देंगे।
अंतर: खेड़ी गाँव प्रकृति के करीब और साधारण जीवन दर्शाता है, जबकि सपनों का गाँव आधुनिक सुविधाओं और विकास का प्रतीक है।

लिखो

01. क्या सिंदूरी गाँव जात्रया के सपनों के गाँव जैसा था?

उत्तर : नहीं, सिंदूरी गाँव जात्र्या के सपनों के गाँव जैसा बिल्कुल भी नहीं था। जात्र्या जिस खुशहाल, हरा-भरा और प्यार भरा गाँव सोचता था, सिंदूरी उसके उलट एक कठोर और व्यवसायिक जगह थी जहाँ हर चीज का मोल था।

५2. 'सिंदूरी' और “अपने सपनों के गाँव में उसे क्या अंतर मिला?

उत्तर : सिंदूरी और अपने सपनों के गाँव में जात्र्या को बहुत बड़ा अंतर दिखा:

  • सिंदूरी में: हर चीज के लिए पैसे चाहिए थे, चाहे वह पानी हो या जगह। बीमार पड़ने पर अस्पताल जाना पड़ता था और दवा खरीदनी पड़ती थी। यहाँ रिश्ते पैसे से जुड़े हुए थे।
  • सपनों के गाँव में: जात्र्या सोचता था कि वहाँ लोग एक-दूसरे की मदद करेंगे। बीमार पड़ने पर जड़ी-बूटियों से इलाज होगा। प्रकृति से सब कुछ मुफ्त में मिलेगा और जीवन सरल और खुशहाल होगा।

53. क्या तुम कभी किसी के घर “'बिन-बुलाए मेहमान थे? कैसा लगा?

उत्तर : हाँ, एक बार मैं अपने दोस्त के घर बिना बताए पहुँच गया था क्योंकि उस दिन स्कूल की छुट्टी थी। शुरू में थोड़ा अजीब लगा क्योंकि उसके घरवाले मेरे आने की तैयारी नहीं कर पाए थे। लेकिन उन्होंने बहुत प्यार से स्वागत किया और मुझे महसूस नहीं होने दिया कि मैं बिन बुलाया आया हूँ। हालाँकि, अब मैं समझता हूँ कि किसी के घर जाने से पहले सूचित कर देना चाहिए।

54. जब तुम्हारे यहाँ कुछ दिन मेहमान रहने आते हैं, तब तुम्हारे परिवार वाले क्या-क्या करते हैं?

उत्तर : जब हमारे यहाँ मेहमान आते हैं तो पूरा परिवार उनकी खातिरदारी में जुट जाता है:

  • मेरी माँ उनके लिए विशेष और स्वादिष्ट खाना बनाती हैं।
  • हम लोग उनके लिए कमरे और बिस्तर की अच्छे से व्यवस्था करते हैं।
  • पापा उन्हें घुमाने ले जाते हैं या उनके साथ बैठकर बातें करते हैं।
  • हम बच्चे उनका मनोरंजन करते हैं, उन्हें खेल दिखाते हैं या उनके साथ खेलते हैं।
  • हम सब मिलकर यह कोशिश करते हैं कि मेहमानों को हमारे घर में सब कुछ अच्छा लगे और वे खुश रहें।

सोचो 61. जात्रयाभाई ने क्या सोचकर मुंबई जाने की ठानी? क्या उन्हें मुंबई वैसा ही मिला?

उत्तर : जात्रयाभाई ने सोचा कि अगर उन्हें 'बिन बुलाए मेहमान' ही कहलाना है, तो वे ऐसी जगह जाएँगे जहाँ उनके सपने पूरे हो सकें। उन्हें लगा कि बड़े शहर मुंबई में रोजगार के अवसर होंगे और वे अपने परिवार के लिए एक बेहतर जीवन बना पाएँगे।
नहीं, मुंबई उन्हें वैसा नहीं मिला जैसा वे सोचकर गए थे। वहाँ भी उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। रहने की जगह छोटी और महँगी थी, काम मेहनत वाला था, और बड़े शहर का जीवन उनके गाँव के सरल जीवन से बहुत अलग और चुनौतीपूर्ण था।

९2. जात्रयाभाई के बच्चे मुंबई में किस तरह के स्कूल में जाते होंगे?

उत्तर : जात्रयाभाई के बच्चे मुंबई में शायद सरकारी स्कूल या नगर निगम के स्कूल में जाते होंगे। ऐसे स्कूलों में फीस कम होती है या नहीं के बराबर होती है, जिससे गरीब परिवारों के बच्चे भी पढ़ सकें। हालाँकि, इन स्कूलों में अक्सर छात्रों की संख्या ज्यादा होती है और संसाधनों की कमी हो सकती है, लेकिन फिर भी ये बच्चों को शिक्षा का अवसर देते हैं।

पता करो और लिखो

51. क्या तुम किसी बच्चे या परिवार को जानते हो, जो अपनी जगह से हटाए गए हों? उनसे बात करो।

उत्तर : हाँ, मैं अपने पड़ोस में रहने वाले एक परिवार को जानता हूँ जो बाढ़ की वजह से अपना गाँव छोड़कर यहाँ आया है।

  1. वे कहाँ से आए हैं? उन्हें यहाँ क्यों आना पड़ा?
    वे बिहार के एक गाँव से आए हैं। हर साल आने वाली बाढ़ ने उनके खेत और घर बर्बाद कर दिए, जिससे रहना मुश्किल हो गया और रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया। इसलिए वे काम की तलाश में शहर आ गए।
  2. उनकी पहली जगह कैसी थी? उसकी तुलना में नई जगह कैसी है?
    उनकी पहली जगह (गाँव) शांत, हरा-भरा और खुला था। वहाँ सब लोग एक-दूसरे को जानते थे। नई जगह (शहर) में भीड़भाड़ है, शोर है और सब अपने-अपने काम में व्यस्त रहते हैं। यहाँ रोजगार तो मिल गया, लेकिन गाँव जैसा प्यार और खुलापन नहीं मिल पाता।
  3. क्या उनकी भाषा और रहन-सहन यहाँ के लोगों से अलग है? कैसे?
    हाँ, थोड़ा अलग है। उनकी बोली थोड़ी अलग है और कुछ शब्दों के मायने भी अलग हैं। रहन-सहन में, वे गाँव की तरह सादगी से रहना पसंद करते हैं, जबकि शहर में लोग ज्यादा आधुनिक तरीके से रहते हैं। उनके खान-पान और त्योहार मनाने के तरीके भी थोड़े अलग हैं।
  4. उनकी भाषा के कुछ शब्द सीखकर लिखो।
    • पानी के लिए वे कभी-कभी "जल" शब्द का इस्तेमाल करते हैं।
    • बच्चे को वे "बालक" या "छोरा" कहते हैं।
    • खाना के लिए "भात" शब्द बोलते हैं।
  5. क्या वे कुछ ऐसी चीजें बनाना जानते हैं, जो तुम नहीं जानते? क्या?
    हाँ, वे बाँस से बहुत सुंदर टोकरियाँ, चटाइयाँ और पंखे बनाना जानते हैं। वे मिट्टी के बर्तन भी बनाने में माहिर हैं। ये सब कलाएँ मैं नहीं जानता।

चर्चा करो

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Other Chapters of class 5 EVS
1. कैसे पहचाना चींटी ने दोस्त को
2. कहानी सपेरों की
3. चखने से पचने तक
4. खाएं आम बारहों महीने
5. बीज बीज बीज
6. बूँद -बूँद दरिया -दरिया
7. पानी के प्रयोग
8. मच्छरों की दावत
9. डायरी कमर सीधी ऊपर चढ़ो
10. इमारतें
11. सुनीता
12. खत्म हो जाए तो
13. बसेरा ऊँचाई पर
14. जब धरती काँपी
15. उसी से ठंडा उसी से गर्म
16. कौन करेगा यह काम
17. फांद ली दीवार
18. जाएँ तो जाएँ कहाँ
19. किसानों की कहानी-बीज की जुबानी
20. किसके जंगल
21. किसकी झलक किसकी छाप
22. फिर चला काफिला
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