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UP Board class 5 EVS (15. उसी से ठंडा उसी से गर्म) solution PDF

UP Board class 5 EVS 15. उसी से ठंडा उसी से गर्म is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 5 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.

UP Board class 5 EVS (15. उसी से ठंडा उसी से गर्म) solution

UP Board class 5 EVS 15. उसी से ठंडा उसी से गर्म Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 5 EVS आस-पास

पाठ - 15: उसी से ठंडा उसी से गर्म

करके देखो

01. क्या तुमने भी कभी सर्दी में अपने हाथों पर फेंक मारी है? कैसा लगता है?

उत्तर : हाँ, मैंने सर्दी में अपने हाथों पर फेंक मारी है। जब हम ठंड में हाथों पर फेंक मारते हैं, तो मुँह से निकली गर्म हवा हमारी त्वचा से टकराती है, जिससे हाथों को एक अच्छी और सुकून देने वाली गर्माहट महसूस होती है। यह गर्मी अस्थायी होती है, लेकिन तुरंत आराम देती है।

62. अपने हाथों को मुँह के पास लाकरजोर से दो-तीन बार फैंक मारो। मुँह से छोड़ी हुई फेंक की हवा आस-पास की हवा के मुकाबले कैसी लगी?

उत्तर : जब हम मुँह के पास हाथ रखकर जोर से फेंक मारते हैं, तो मुँह से निकली हवा आस-पास की सामान्य हवा की तुलना में काफी गर्म और नम लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यह हवा हमारे शरीर के अंदर गर्म होती है और बाहर निकलते समय उसका तापमान अधिक होता है।

53. अगर हाथों को मुँह से थोड़ी दूरी पर रखो, तब भी क्या मुँह से निकली हुई हवा गर्म लगेगी? क्यों?

उत्तर : नहीं, अगर हाथ मुँह से थोड़ी दूरी पर रखे जाएँ, तो फेंक की हवा उतनी गर्म नहीं लगेगी। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मुँह से निकलने के बाद गर्म हवा बाहर की ठंडी हवा के संपर्क में आती है और दोनों मिल जाती हैं। इस प्रक्रिया में गर्म हवा का कुछ ताप बाहर की हवा को दे देती है, जिससे वह ठंडी हो जाती है और हाथों तक पहुँचते-पहुँचते उसकी गर्मी कम हो जाती है।

सोचो और बताओ 01. क्या तुम कोई और ऐसी स्थिति सोच सकते हो जब फेंक मारने से गर्मी मिलती है?

उत्तर : हाँ, फेंक मारने से गर्मी पाने के कई उदाहरण हैं। जैसे:
1. जब हम ठंड में कानों को गर्म करने के लिए हाथों पर फेंक मारकर फिर कानों को ढकते हैं।
2. अगर चश्मे का लेंस ठंड में धुंधला हो जाए, तो उसे साफ करने के लिए उस पर फेंक मारते हैं। फेंक की गर्मी से लेंस पर जमी बर्फ की परत पिघल जाती है।
3. सर्दियों में बिस्तर पर जाने से पहले, ठंडे तकिए या चादर को गर्म करने के लिए भी फेंक मार सकते हैं।

52. अपने रुमाल या किसी भी मुलायम कपड़े को दो-तीन बार मोड़ दो। उसे मुंह के पास लाकर दो-तीन बार जोर से फेंक मारो। क्‍या रूमाल या कपड़ा कुछ गर्म हो गया? करके देखो।

उत्तर : हाँ, जब हम मोड़े हुए रुमाल पर जोर से फेंक मारते हैं, तो रुमाल हल्का गर्म हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मुँह से निकली गर्म और नम हवा सीधे कपड़े के रेशों से टकराती है। कपड़ा इस गर्मी को अपने अंदर सोख लेता है, जिससे हमें उसे गर्म महसूस होता है। इस तरकीब का इस्तेमाल अक्सर छोटी-मोटी चोट या दर्द वाली जगह को सेंकने के लिए किया जाता है।

53. बालिशितिये ने देखा कि लकड़हारा गर्म-गर्म आलू को फेंक मारकर ठंडा कर रहा था। अगर वह बिना फेंक मारे ही गर्म-गर्म आलू को खा लेता तो ।

उत्तर : अगर लकड़हारा बिना फेंक मारे ही गर्म-गर्म आलू खा लेता, तो उसके मुँह के अंदर का नाजुक ऊतक (टिशू) जल सकता था। आलू की सतह का अधिक तापमान जीभ, तालू और गले में छाले पैदा कर सकता है, जिससे तेज दर्द और परेशानी होती। फेंक मारने से आलू की सतह की गर्म हवा उड़ जाती है और वह खाने लायक तापमान पर आ जाता है।

54. क्या कभी कुछ गर्म खाने या पीने से तुम्हारी जीभ जली है? तुम अपने गर्म खाने को कैसे-कैसे ठंडा करते हो?

उत्तर : हाँ, कभी-कभी बहुत गर्म दूध या चाय पीने से जीभ जल जाती है। मैं गर्म खाने को निम्नलिखित तरीकों से ठंडा करता हूँ:
1. फेंक मारकर: खाने के ऊपर फेंक मारने से गर्म हवा निकल जाती है।
2. हवा में ठंडा होने देना: खाने को थाली में कुछ मिनट के लिए खुला छोड़ देता हूँ।
3. पंखे की हवा लगाना: प्लेट के ऊपर पंखा चलाकर हवा करता हूँ।
4. छोटे-छोटे कौर लेना: खाने को हवा में उड़ा कर या थोड़ा फैलाकर खाता हूँ ताकि वह जल्दी ठंडा हो जाए।

65. अगर रोटी, चावल और दाल बहुत गर्म हैं तो तुम तीनों को किस-किस तरीके से ठंडा करोगे?

उत्तर : रोटी, चावल और दाल को अलग-अलग तरीके से ठंडा किया जा सकता है:
रोटी: रोटी को हवा में हिलाकर या प्लेट में फैलाकर रख देंगे। इसकी पतली परत जल्दी ठंडी हो जाती है।
चावल: चावल को कटोरी में हल्का फैला देंगे और चम्मच से हल्का हिलाएँगे। इससे चावल के दानों के बीच की गर्म हवा निकल जाएगी।
दाल: दाल को ठंडा करने के लिए कटोरी में फैंक मार सकते हैं या एक साफ चम्मच से हिलाते हुए हवा लगा सकते हैं। इसे भी कुछ देर खुला छोड़ सकते हैं।

66. तुम और क्या-क्या करने के लिए फैंक मारते हो?

उत्तर : मैं फेंक मारकर निम्नलिखित काम करता हूँ:
सीटी बजाने के लिए - मुँह की आकृति बनाकर फेंक से तेज आवाज निकालता हूँ।
धूल उड़ाने के लिए - किताबों, फर्नीचर या खिलौनों पर जमी धूल को फेंक मारकर साफ करता हूँ।
चश्मा साफ करने के लिए - लेंस पर फेंक मारकर धूल हटाता हूँ और फिर कपड़े से पोंछता हूँ।
गुब्बारा फुलाने के लिए - गुब्बारे के मुँह में हवा भरने से पहले उसे फैलाने के लिए भी फेंक मारता हूँ।
पेंटिंग सुखाने के लिए - रंग भरने के बाद कभी-कभी तेजी से सूखाने के लिए उस पर हल्की फेंक मारता हूँ।

अलग-अलग चीजों से सीटी बजाओ

651. नीचे दी गई चीजों से आवाजें निकालकर देखो। लिखो उनमें से किससे सबसे तेज सीटी बजी और किससे सबसे धीरे। आवाज की तेजी को क्रम में लिखो

उत्तर : इन विभिन्न चीजों से आवाज निकालने पर पता चलता है कि आवाज की तेजी उस वस्तु की बनावट और हवा के बहाव पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर:
सबसे तेज आवाज: पेन के धातु वाले ढक्कन से निकलती है क्योंकि उसमें हवा का रास्ता संकरा और नुकीला होता है।
सबसे धीमी आवाज: टॉफी की मुलायम पन्नी से आती है क्योंकि वह लचीली होती है और हवा को तेजी से कंपन करने नहीं देती।
आवाज का तेजी से धीमी की ओर क्रम इस प्रकार हो सकता है: 1. पेन का ढक्कन, 2. गुब्बारा, 3. पत्ता, 4. टॉफी की पन्नी। (ध्यान दें: यह क्रम प्रयोग करने वाले व्यक्ति और वस्तु की मोटाई पर भी निर्भर कर सकता है।)

52. क्या तुमने कभी देखा या सुना है कि लोग अलग-अलग चीजों के इस्तेमाल से अलग-अलग तरह का संगीत बजाते। हैं। जैसे-बाँसुरी, ढोलक, बीन, मृदंग, गिटारे, आदि। क्या तुम आँखें बंद करके इनकी आवाजें पहचान सकते हो? इन सभी चीजों के बारे में और बातें पता करो। चित्र भी इकट्टे करो।

उत्तर : हाँ, मैं आँखें बंद करके भी इन वाद्ययंत्रों की अलग-अलग आवाज़ों को पहचान सकता हूँ क्योंकि हर यंत्र की अपनी एक विशेष ध्वनि होती है।
बाँसुरी: यह बाँस से बना एक सुषिर वाद्य है। इसमें फूँक मारने वाला एक छेद और स्वर निकालने के लिए अंगुलियों से बजाए जाने वाले छह-सात छेद होते हैं। इसकी आवाज मधुर और कोमल होती है।
ढोलक: यह लकड़ी के खोल पर चमड़ा मढ़कर बनाया जाने वाला ताल वाद्य है। इसे हथेली और उँगलियों से पीटकर बजाया जाता है। इसकी आवाज तेज और गूँजने वाली होती है।
बीन: यह सपेरों का प्रसिद्ध वाद्य है। इसे दो बाँस की नलिकाओं को साथ जोड़कर बनाया जाता है और फूँक मारकर बजाया जाता है। इसकी आवाज लंबी और रेंगने वाली (सरपट) होती है।
मृदंग: यह भी ढोलक की तरह का एक ताल वाद्य है, लेकिन इसके दोनों सिरों का व्यास अलग-अलग होता है। इससे निकलने वाली आवाज 'धा', 'धिन' जैसी होती है और यह कर्नाटक संगीत में खूब प्रयोग होता है।
गिटार: यह पश्चिमी वाद्य है जिसका शरीर लकड़ी का बना होता है और उस पर धातु के तार लगे होते हैं। तारों को उँगलियों से झनझनाकर या प्लक करके बजाया जाता है। इसकी आवाज मधुर और गुनगुनाने वाली होती है।
(छात्रों को सलाह: इन वाद्ययंत्रों के चित्र इंटरनेट, पुरानी किताबों या पोस्टर से इकट्ठा कर सकते हैं।)

लिखो

01. क्या तुम ऐसी चीजों के नाम बता सकते हो, जिनमें फेंक मारने से सुहावनी आवाज निकलती है? उनके नाम लिखो।

उत्तर : हाँ, ऐसे कई वाद्ययंत्र हैं जिनमें फूँक मारने से सुरीली और सुहावनी आवाज़ निकलती है। कुछ नाम इस प्रकार हैं:
1. बाँसुरी
2. शहनाई
3. माउथ ऑर्गन (हारमोनिका)
4. बैगपाइप (स्कॉटलैंड का लोक वाद्य)
5. सनाई (शहनाई जैसा वाद्य)
6. ढपली (कभी-कभी इसे फूँक से भी बजाया जाता है)
7. सीटी (अलग-अलग डिजाइन वाली)

करके देखो और चर्चा करो

01. क्या तुमने कभी देखा है कि कोई चश्मा साफ करने के लिए अपने मुँह से हवा निकाल रहा हो? मुँह से निकली हवा से चश्मा साफ करने में कैसे मदद मिलती होगी?

उत्तर : हाँ, मैंने अक्सर लोगों को चश्मा साफ करने के लिए उस पर फेंक मारते देखा है। मुँह से निकली गर्म और नम हवा चश्मे के शीशे (लेंस) पर पहुँचती है। यह हवा शीशे पर जमी सूखी धूल के कणों को थोड़ा नम कर देती है और उन्हें ढीला कर देती है। इसके बाद जब हम कपड़े से शीशे को पोंछते हैं, तो यह नम और ढीली हुई धूल आसानी से साफ हो जाती है और चश्मा चमकदार बन जाता है। बिना फेंक मारे सूखे कपड़े से पोंछने पर धूल के कण शीशे पर खरोंच भी लगा सकते हैं।

62. एक स्टील का गिलास लो। उसे मुँह के पास लाकर मुँह खोलकर जोर से साँस छोड़ो। इस तरह दो-तीन बार साँस छोड़कर देखो। क्या गिलास कुछ धुंधला-सा हो गया है?

उत्तर : हाँ, जब हम स्टील के गिलास पर दो-तीन बार जोर से साँस छोड़ते हैं, तो गिलास की सतह धुंधली हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारी साँस में मौजूद गर्म जलवाष्प (पानी की बहुत बारीक बूंदें) ठंडे गिलास की सतह से टकराती हैं। टकराते ही यह जलवाष्प ठंडी होकर फिर से पानी की सूक्ष्म बूंदों में बदल जाती है और गिलास पर एक पतली सी नम परत जमा देती है, जिससे वह धुंधला दिखाई देने लगता है।

53. क्‍या तुम इसी तरह शीशे को भी धुंधला बना सकते हो?शीशे को छूकर पता लगा सकते हो कि यह धुंधलापन किस वजह से है? छोड़ी हुई हवा सूखी है या गीली?

उत्तर : हाँ, बिल्कुल। शीशे पर भी इसी तरह फेंक मारकर उसे धुंधला बनाया जा सकता है। जब हम शीशे को छूते हैं, तो धुंधली सतह पर हल्की-सी नमी महसूस होती है। यह धुंधलापन हमारी साँस में मौजूद जलवाष्प के कारण होता है। हमारे फेफड़ों से निकलने वाली हवा शरीर के तापमान के कारण गर्म होती है और उसमें पानी की भाप (जलवाष्प) मिली होती है। जब यह गर्म और गीली हवा ठंडे शीशे से टकराती है, तो भाप ठंडी होकर पानी की सूक्ष्म बूंदों में बदल जाती है और शीशे पर जम जाती है, जिससे वह धुंधला दिखाई देता है।

54. अपने हाथ को अपनी छाती पर रखो। अब साँस भरो। क्या हुआ? छाती अंदर गई या बाहर?

उत्तर : जब हम गहरी साँस भरते हैं, तो हमारी छाती बाहर की ओर फैलती है या उभरती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि साँस भरते समय हमारे फेफड़े हवा से फूल जाते हैं, जिससे पसलियों के बीच की मांसपेशियाँ फैलती हैं और छाती चौड़ी हो जाती है।

55. अपनी छाती का नाप लो-एक लंबी गहरी साँस भरो। 0) अपने साथी से कहो कि वह एक धागे से तुम्हारी छाती का नाप ले। नाप ............... ? (0) अब साँस छोड़ो और फिर अपने साथी से तुम्हारी छाती नापने को कहो। नाप ............... (॥) क्या छाती के नाप में कुछ फर्क आया?

उत्तर :
(i) गहरी साँस भरने पर छाती का नाप: जब हम पूरी तरह साँस भर लेते हैं, तो छाती फूल जाती है। इस स्थिति में छाती का नाप अधिक होता है। उदाहरण के लिए, यह नाप 28 इंच हो सकता है।
(ii) साँस छोड़ने के बाद छाती का नाप: जब हम पूरी तरह साँस बाहर निकाल देते हैं, तो छाती सिकुड़ जाती है। इस स्थिति में छाती का नाप कम हो जाता है। उदाहरण के लिए, यह नाप 26 इंच हो सकता है।
(iii) फर्क: हाँ, छाती के नाप में स्पष्ट फर्क आता है। ऊपर दिए गए उदाहरण के अनुसार, नाप में 2 इंच का अंतर आया। यह अंतर इस बात का प्रमाण है कि साँस लेने और छोड़ने के साथ हमारी छाती फैलती और सिकुड़ती है।

हर मिनट में कितनी साँस

01. अपनी नाक के आगे अँगुली रखो। FA तुम नाक से साँस छोड़ते समय हवा को महसूस कर सकते हो?

उत्तर : हाँ, जब हम नाक के सामने उँगली रखकर साँस छोड़ते हैं, तो हम नाक से निकलने वाली हवा के हल्के झोंके को स्पष्ट रूप से महसूस कर सकते हैं। यह हवा गर्म और नम होती है। यह प्रयोग दिखाता है कि साँस छोड़ते समय हवा शरीर से बाहर निकलती है।

52. अब गिनो कि एक मिनट में तुमने कितनी बार साँस ली और छोड़ी।

उत्तर : जब मैं शांत बैठा हुआ हूँ और आराम कर रहा हूँ, तो एक मिनट में मैं लगभग 15 से 20 बार साँस लेता और छोड़ता हूँ। साँस लेना और छोड़ना मिलाकर एक चक्र होता है। (छात्र ध्यान दें: आपकी उम्र और शारीरिक स्थिति के अनुसार यह संख्या थोड़ी कम या ज्यादा हो सकती है।)

53. अब अपने स्थान पर तीस बार उँचा-उँचा कूदो। क्या साँस फूलने लगी?

उत्तर : हाँ, तीस बार उँचा कूदने के बाद मेरी साँस फूलने लगी। मुझे तेजी से साँस लेने और छोड़ने की जरूरत महसूस होने लगी। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कूदने जैसे व्यायाम से शरीर की मांसपेशियों को अधिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। इस ऊर्जा को पैदा करने के लिए शरीर को अधिक ऑक्सीजन चाहिए होती है, इसीलिए फेफड़े तेजी से काम करने लगते हैं और हमारी साँसें तेज हो जाती हैं।

Q4. अब फिर अपनी नाक के आगे अँगुली रखकर गिनो कि तुमने एक मिनट में कितनी बार साँस छोड़ी।

उत्तर : कूदने के तुरंत बाद, जब मैं एक मिनट में साँस छोड़ने की गिनती करता हूँ, तो यह संख्या बढ़ जाती है। अब मैं एक मिनट में लगभग 30 से 40 बार (या उससे भी अधिक) साँस छोड़ता हूँ। इसका मतलब है कि मेरी साँस की गति लगभग दोगुनी हो गई है।

65. बैठे-बैठे और कूदने के बाद साँस गिनी तो कितना फर्क पाया?

उत्तर : बैठे-बैठे (आराम की अवस्था में) और कूदने के बाद (श्रम की अवस्था में) साँस गिनने पर एक बड़ा फर्क पता चलता है। आराम की अवस्था में मैं एक मिनट में लगभग 18 बार साँस छोड़ रहा था, जबकि कूदने के बाद यह संख्या बढ़कर लगभग 38 बार प्रति मिनट हो गई। इस प्रकार, लगभग 20 बार का फर्क आया। यह प्रयोग साबित करता है कि जब हम कोई शारीरिक काम करते हैं, तो हमारे शरीर को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है और इसीलिए हमारी साँस की गति बढ़ जाती है।

हम क्या समझे

01. अमित खेलते-खेलते दीवार से टकरा गया और उसका माथा झट से सूज गया। दीदी ने तुरंत ही दुपट्टे को तीन-चार बार मोड़कर, उस पर फेंक मारी और अमित के माथे पर रख दिया। सोचो दीदी ने ऐसा क्‍यों किया होगा?

उत्तर : दीदी ने ऐसा अमित के दर्द को कम करने और सूजन को घटाने के लिए किया होगा। जब चोट लगती है, तो उस जगह पर रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं और द्रव जमा होने से सूजन आ जाती है, जिससे दर्द होता है। दुपट्टे पर फेंक मारकर उसे ह

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Other Chapters of class 5 EVS
1. कैसे पहचाना चींटी ने दोस्त को
2. कहानी सपेरों की
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