UP Board class 5 EVS 11. सुनीता is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 5 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: हमारी पृथ्वी एक विशाल गेंद की तरह गोल है। यह संतरे या ग्लोब के समान है। हम इसकी सतह पर रहते हैं। अपनी कॉपी में आप एक गोल पृथ्वी बनाकर उस पर एक छोटा सा व्यक्ति (अपना चित्र) खड़ा दिखा सकते हैं। अपने दोस्तों के चित्र देखकर पता करें कि उन्होंने पृथ्वी और अपने आप को कैसे बनाया है।
उत्तर: पृथ्वी में एक अदृश्य शक्ति होती है जिसे गुरुत्वाकर्षण कहते हैं। यह शक्ति हर चीज को पृथ्वी के केंद्र की ओर खींचती है। इसी कारण हम, हमारा घर, पेड़-पौधे सब पृथ्वी पर चिपके रहते हैं और नीचे नहीं गिरते।
उत्तर: नहीं, अर्जेंटीना के लोग भी हमारी तरह ही सीधे खड़े होते हैं। पृथ्वी गोल है, इसलिए 'ऊपर' और 'नीचे' का विचार सापेक्ष है। गुरुत्वाकर्षण सबको पृथ्वी के केंद्र की ओर खींचता है, इसलिए हर जगह के लोगों को लगता है कि वे सीधे खड़े हैं।
उत्तर: अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण बल लगभग नहीं होता (शून्य गुरुत्व)। धरती पर गुरुत्व बल हमारे बालों को नीचे की ओर खींचता है, लेकिन अंतरिक्ष में ऐसा कोई बल नहीं होता। इसलिए सुनीता के बाल हवा में तैरते हुए या खड़े हुए दिखाई देते थे और नीचे नहीं बैठते थे।
उत्तर:
| तिथि | क्या हो रहा है? |
|---|---|
| 9 दिसंबर 2006 | अंतरिक्ष यान ने उड़ान भरी। सुनीता और अन्य यात्री धरती से अंतरिक्ष की ओर रवाना हुए। |
| 11 दिसंबर 2006 | अंतरिक्ष यान में पहुँचने के बाद, गुरुत्वहीनता के कारण सभी यात्री हवा में तैरने लगे। |
| 11 दिसंबर 2006 | यात्रियों ने तैरते हुए ही विशेष तरीके से अपना भोजन किया। |
| 12 दिसंबर 2006 | सुनीता अंतरिक्ष यान में ही कुछ वैज्ञानिक प्रयोग और काम कर रही हैं। |
उत्तर: नहीं, अंतरिक्ष यान जैसे वातावरण में गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण हम एक जगह बैठ नहीं पा रहे हैं। सब कुछ और सब लोग हवा में तैर रहे हैं।
उत्तर: गुरुत्वाकर्षण न होने से बाल भी ऊपर की ओर उड़े हुए या खड़े हुए हैं, वे नीचे नहीं गिर रहे।
उत्तर: बस्ता और किताबें भी गुरुत्वहीनता के कारण कक्षा में ही हवा में तैर रही हैं और इधर-उधर घूम रही हैं।
उत्तर: टीचर भी हवा में तैर रही हैं। जब उन्होंने चॉक छोड़ी, तो वह भी तैरने लगी और टीचर उसे पकड़ने की कोशिश कर रही हैं।
उत्तर: अंतरिक्ष में सब कुछ अलग तरीके से करना पड़ता है:
उत्तर: यह एक रोचक गतिविधि है। आप अपने दोस्तों के साथ मिलकर अभिनय कर सकते हैं कि कैसे सब कुछ तैर रहा है, या फिर गुरुत्वहीनता का दृश्य अपनी कॉपी में चित्र बनाकर दिखा सकते हैं।
उत्तर: हाँ, अंतरिक्ष से ली गई तस्वीर में भारत के आकार (एक विशाल त्रिभुज के समान) को देखकर हम उसे पहचान सकते हैं।
उत्तर: हाँ, भारत के दक्षिण में समुद्र में स्थित श्रीलंका द्वीप को भी पहचाना जा सकता है।
उत्तर: तस्वीर में नीले रंग वाला भाग समुद्र है। यह भारत के पूर्व, पश्चिम और दक्षिण में दिखाई दे रहा है।
उत्तर:
उत्तर: नहीं, सुनीता अंतरिक्ष से इन देशों को अलग-अलग नहीं बता सकती थी। अंतरिक्ष से केवल पहाड़, नदियाँ, मैदान और समुद्र दिखते हैं। देशों की सीमाएँ तो मानव द्वारा बनाई गई काल्पनिक रेखाएँ हैं, जो जमीन पर नहीं बल्कि केवल नक्शे पर होती हैं।
उत्तर: हाँ, ग्लोब पर भारत को आसानी से ढूंढा जा सकता है। इसके अलावा हमने विशाल नीले महासागर (हिंद महासागर, प्रशांत महासागर), अन्य महाद्वीप (एशिया, अफ्रीका) और कई देशों के नाम देखे।
उत्तर: ग्लोब पर समुद्र (नीला भाग) पृथ्वी के अधिकांश हिस्से में फैला हुआ है। भारत के तीन ओर – पूर्व में बंगाल की खाड़ी, पश्चिम में अरब सागर और दक्षिण में हिंद महासागर दिख रहा है।
उत्तर: ग्लोब पर हमने भारत के पड़ोसी देश जैसे पाकिस्तान, चीन, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और दूर के देश जैसे ऑस्ट्रेलिया, जापान, अमेरिका, रूस आदि देखे।
उत्तर: हाँ, हम उन सभी क्रिकेट खेलने वाले देशों को ग्लोब पर देख और पहचान सकते हैं। उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रेलिया दक्षिणी गोलार्ध में एक बड़े द्वीप के रूप में, इंग्लैंड यूरोप में और दक्षिण अफ्रीका अफ्रीका महाद्वीप के दक्षिणी सिरे पर स्थित है।
उत्तर: इस प्रश्न का उत्तर आपकी अपनी खोज पर निर्भर है। आपने ग्लोब पर भूमध्य रेखा, देशांतर रेखाएँ, उत्तरी व दक्षिणी ध्रुव, विभिन्न पर्वत श्रृंखलाओं के चिह्न या कोई नया देश भी देखा होगा। अपने अवलोकन को लिखें।
उत्तर: हाँ, मैंने भारत के नक्शे पर अपने राज्य [छात्र अपने राज्य का नाम लिखें, जैसे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब आदि] को उसके स्थान और आकार से पहचान लिया और उस पर उसका नाम लिख दिया।
उत्तर: मेरे राज्य [छात्र अपने राज्य का नाम लिखें] से लगे हुए राज्य हैं: [छात्र अपने राज्य के पड़ोसी राज्यों के नाम लिखें, उदाहरण के लिए यदि राज्य उत्तर प्रदेश है तो - उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार]।
उत्तर: हाँ, मैं अन्य राज्यों में गया हूँ, जैसे [छात्र अपने अनुभव के अनुसार राज्यों के नाम लिखें, जैसे राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु आदि]। वहाँ की संस्कृति, भाषा और खान-पान अलग था, जो बहुत रोचक लगा।
उत्तर: शाहमीर की सोच सही नहीं है। राज्यों के बीच जमीन पर कोई वास्तविक लकीर या दीवार नहीं बनी होती। ये सीमाएँ केवल नक्शों पर खींची गई काल्पनिक रेखाएँ हैं ताकि प्रशासन और पहचान आसान हो। असल में, एक राज्य से दूसरे राज्य में प्रवेश करने पर केवल नामपट्ट (बोर्ड) या कभी-कभी चौकी दिखाई देती है।
उत्तर: चाँद एक गोल गेंद (गोलाकार) की तरह है, सिक्के की तरह चपटा नहीं। हमें वह कभी पूरा गोल और कभी आधा या कम दिखाई देता है, यह सूर्य की रोशनी और पृथ्वी के सापेक्ष उसकी स्थिति पर निर्भर करता है।
उत्तर: यह एक व्यावहारिक गतिविधि है। आप देखेंगे कि चाँद का आकार बदलता रहता है। आज रात जो आकार है, उसका चित्र बनाएँ। एक सप्ताह बाद शायद वह आधा (अर्धचंद्र) दिखेगा, और 15 दिन बाद पूर्णिमा के दिन वह पूरा गोल (पूर्ण चंद्र) दिखाई देगा। इन सभी चरणों के चित्र बनाएँ।
उत्तर: (छात्रों को हिंदू कैलेंडर या सामान्य कैलेंडर देखकर स्वयं पता करना चाहिए। उदाहरण के तौर पर) मान लीजिए अगली पूर्णमासी 15 नवंबर को है। उस दिन चाँद शाम को सूर्यास्त के समय के आसपास निकलेगा और पूरी रात पूरा गोल और चमकीला दिखाई देगा।
उत्तर: चाँद से जुड़े कई त्योहार हैं, जैसे:
| तारीख | चंद्रोदय | चंद्रास्त |
|---|---|---|
| 28-10-2007 | 19:16 | 08:05 |
| 29-10-2007 | 20:17 | 10:03 |
| 30-10-2007 | 21:22 | 11:08 |
| 31-10-2007 | 22:29 | 12:03 |
उत्तर: 28 अक्तूबर को चाँद शाम के 19 बजकर 16 मिनट पर निकला।
उत्तर: 29 अक्तूबर को चाँद शाम के 20 बज कर 17 मिनट पर निकला।
उत्तर: 29 अक्तूबर को चाँद निकलने में 28 अक्तूबर की तुलना में 1 घंटे 1 मिनट का फर्क आया। (20:17 - 19:16 = 1 घंटा 1 मिनट)
उत्तर: नहीं, कल ठीक सात बजे चाँद नहीं दिखेगा। तालिका से पता चलता है कि चंद्रोदय का समय प्रतिदिन लगभग 50 मिनट से 1 घंटा बाद होता है। इसलिए कल चाँद सात बजे के बाद ही निकलेगा।
उत्तर:
उत्तर: बच्चे फिसल पट्टी पर नीचे की ओर इसलिए फिसलते हैं क्योंकि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल हर चीज को अपने केंद्र की ओर (नीचे की दिशा में) खींचता है। यह बल हमें ऊपर से नीचे फिसलने में मदद करता है। नीचे से ऊपर जाने के लिए हमें इस गुरुत्व बल के विरुद्ध काम करना पड़ता है, जिसके लिए ऊर्जा लगती है (जैसे सीढ़ियाँ चढ़कर), इसलिए हम स्लाइड पर नीचे से ऊपर नहीं फिसल सकते।
उत्तर: नहीं, अंतरिक्ष यान में फिसल पट्टी पर ऐसे नहीं फिसल सकेंगे। अंतरिक्ष यान में गुरुत्वाकर्षण लगभग नहीं होता (शून्य गुरुत्व)। फिसलने के लिए नीचे खींचने वाले गुरुत्व बल की जरूरत होती है। बिना गुरुत्व के, बच्चे फिसल पट्टी पर चिपके रहेंगे या हवा में तैरेंगे, लेकिन नीचे की ओर नहीं फिसल पाएँगे।
उत्तर: तारे दिन और रात
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