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UP Board class 5 EVS (13. बसेरा ऊँचाई पर) solution PDF

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UP Board class 5 EVS (13. बसेरा ऊँचाई पर) solution

UP Board class 5 EVS 13. बसेरा ऊँचाई पर Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 5 EVS आस-पास

पाठ - 13 बसेरा ऊँचाई पर

पता करो 01. नक्शे में देखकर बताओ कि मुंबई से कश्मीर जाने के रास्ते में कौन-कौन से राज्य आएँगे?

उत्तर: मुंबई से कश्मीर जाने के रास्ते में आपको कई राज्यों से गुजरना पड़ेगा। ये राज्य हैं: महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू व कश्मीर। यह रास्ता भारत के पश्चिमी और उत्तरी भाग से होकर गुजरता है।

62. गौरव जानी मुंबई से दिल्ली तक के रास्ते में जिन राज्यों से गुजरे उनकी राजधानियों के नाम पता करो। क्‍या और भी कोई बड़ा शहर रास्ते में आया होगा?

उत्तर: गौरव जानी मुंबई से दिल्ली के रास्ते में जिन राज्यों से गुजरे, उनकी राजधानियाँ इस प्रकार हैं:

राज्यराजधानी
महाराष्ट्रमुंबई
गुजरातगांधीनगर
राजस्थानजयपुर
हरियाणाचंडीगढ़

हाँ, इस रास्ते में कई अन्य बड़े और महत्वपूर्ण शहर भी आते हैं, जैसे कि सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद, उदयपुर, अजमेर और गुड़गाँव आदि।

53. मनाली मैदानी इलाका है या पहाड़ी? वह शहर कौन-से राज्य में है?

उत्तर: मनाली एक पहाड़ी इलाका है। यह हिमालय की गोद में बसा एक बहुत ही खूबसूरत हिल स्टेशन है। मनाली हिमाचल प्रदेश राज्य में स्थित है।

564. तुम जिस इलाके में रहते हो वह कितनी उँचाई पर है?

उत्तर: मैं दिल्ली में रहता/रहती हूँ। दिल्ली समुद्र तल से लगभग 216 मीटर (709 फीट) की औसत ऊँचाई पर स्थित है। यह एक मैदानी इलाका है।

65. गौरव जानी ने ऐसा क्यों कहा-“इतनी उँचाई पर साँस लेने में भी मुश्किल हो रही थी"?

उत्तर: गौरव जानी ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ हवा का दबाव और ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। पहाड़ों की बहुत अधिक ऊँचाई पर हवा 'पतली' हो जाती है, जिससे फेफड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इस कारण साँस फूलने लगती है, थकान महसूस होती है और साँस लेने में कठिनाई हो सकती है। इसे 'हाइपोक्सिया' भी कहा जाता है।

56. तुम कभी पहाड़ी इलाके में गए हो? कहाँ?

उत्तर: हाँ, मैं पहाड़ी इलाके में गया/गई हूँ। मैं नैनीताल गया/गई था/थी, जो उत्तराखंड राज्य में एक सुंदर पहाड़ी शहर है।

57. वह कितनी उँचाई पर था? क्या वहाँ साँस लेने में तुम्हें भी परेशानी आई?

उत्तर: नैनीताल समुद्र तल से लगभग 2,084 मीटर (6,837 फीट) की ऊँचाई पर स्थित है। वहाँ मुझे साँस लेने में कोई विशेष परेशानी नहीं हुई क्योंकि यह ऊँचाई इतनी अधिक नहीं है कि शरीर पर ज्यादा असर डाले। हाँ, थोड़ी तेज चलने या सीढ़ियाँ चढ़ने पर साँस थोड़ी तेज चलने लगी थी।

68. तुम ज्यादा-से-ज्यादा कितनी उँचाई तक गए हो?

उत्तर: मैं अब तक सबसे अधिक गुलमर्ग गया/गई हूँ, जो जम्मू-कश्मीर में स्थित है। यह समुद्र तल से लगभग 2,650 मीटर (8,690 फीट) की ऊँचाई पर है।

69. तुमने पढ़ा कि चांगथांग इलाके में तापमान 0 से काफी कम हो जाता है। टी.वी. या अखबार में देखकर बताओ कि और कौन-से शहर हैं जिनको तापमान से भी कम हो जाता है। वे शहर भारत के हो सकते हैं या किसी और देश के भी। किन महीनों में तुम्हें ऐसे तापमान की खबरें देखने को मिलेंगी?

उत्तर: भारत और विदेशों में कई ऐसे शहर हैं जहाँ सर्दियों में तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है।

भारत के शहर: लेह, लद्दाख, ड्रास, कारगिल, शिमला, मनाली (कभी-कभी)।

विदेश के शहर: ओटावा (कनाडा), मॉस्को (रूस), शिकागो (अमेरिका), हेलसिंकी (फिनलैंड)

ऐसी ठंड की खबरें हमें मुख्य रूप से दिसंबर, जनवरी और फरवरी के महीनों में देखने और सुनने को मिलती हैं, क्योंकि ये साल के सबसे ठंडे महीने होते हैं।

010. देखो, जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग तरह के घर हैं, जो कि वहाँ के लोगों की जरूरत और मौसम के अनुरूप बनाए जाते हैं। क्‍या तुम्हारे इलाके में भी अलग-अलग तरह के घर हैं? अगर हाँ, तो इसके कारण सोचो।

उत्तर: हाँ, मेरे इलाके (शहरी क्षेत्र) में भी अलग-अलग तरह के घर हैं। इसके मुख्य कारण हैं:

  1. आर्थिक स्थिति: कुछ लोग बड़े-बड़े बंगलों में रहते हैं, तो कुछ छोटे फ्लैट्स या मकानों में। कुछ लोग झुग्गी-झोपड़ियों में भी रहते हैं।
  2. जलवायु: गर्मी से बचाव के लिए कई घरों में बरामदे, ढलवाँ छतें और हवादार कमरे बने होते हैं।
  3. उपलब्ध स्थान: शहरों में जगह कम होने के कारण ऊँची-ऊँची बहुमंजिला इमारतें (अपार्टमेंट) बनाई जाती हैं।
  4. पारंपरिक शैली: कुछ पुराने इलाकों में अभी भी पारंपरिक डिजाइन के मकान देखे जा सकते हैं।

011. तुम्हारे घर में क्या कोई खास बात है? जैसे-ज्यादा बारिश होती है तो ढलवाँ छत या बड़ा बरामदा, जहाँ गर्मियों में सोते हो और धूप में कुछ सुखाते हो।

उत्तर: हाँ, मेरे घर में एक सपाट छत है जो हमारे लिए बहुत उपयोगी है। हम इस छत का इस्तेमाल निम्नलिखित कामों के लिए करते हैं:

  • गर्मियों में: रात को ठंडी हवा में सोने के लिए।
  • सर्दियों में: दिन में धूप सेंकने और गर्माहट पाने के लिए।
  • हर मौसम में: कपड़े, अनाज, मसाले और दूसरी चीजें सुखाने के लिए।
  • पौधों के गमले रखने और छोटी सी हरियाली उगाने के लिए।

012. अपने घर के बारे में सोचो। घर बनाने के लिए किन चीजों का इस्तेमाल हुआ है? मिट्टी, पत्थर, लकड़ी या सीमेंट? अपने घर की खास बात चित्र द्वारा दिखाओ।

उत्तर: मेरे घर को बनाने में मुख्य रूप से ईंटें, सीमेंट, रेत, लोहे की सरियाँ (रॉड) और पत्थर का इस्तेमाल हुआ है। दरवाजे-खिड़कियाँ लकड़ी और एल्युमिनियम के बने हैं।

मेरे घर की खास बात: मेरे घर में एक आँगन है। यह घर का दिल है, जहाँ परिवार के सभी सदस्य इकट्ठा होते हैं, बच्चे खेलते हैं और कभी-कभी खाना भी बनता है। यह हवादार और रोशनी से भरपूर है।

(यहाँ छात्र अपने घर की एक साधारण सी रेखाचित्र बना सकते हैं, जिसमें आँगन, कमरे और छत दिखाई दे।)

बताओ

51. क्या तुम कभी टेंट में रहे हो? कहाँ? कैसा अनुभव था? मान लो, तुम्हें अकेले पहाड़ पर दो दिन तक एक टेंट में रहना है और तुम अपने साथ केवल दस चीजें ले जा सकते हो। उन दस चीजों की सूची बनाओ, जो तुम ले जाना चाहोगे।

उत्तर: हाँ, मैं एक बार स्कूल के ट्रेकिंग कैंप में टेंट में रहा/रही था/थी। यह रिशीकेश के पास था। यह अनुभव बहुत रोमांचक और यादगार था। रात को तारों के नीचे सोना, सुबह पक्षियों की आवाज़ से जागना और ताज़ी हवा में साँस लेना अद्भुत था।

दो दिन के टेंट कैंप के लिए मेरी दस जरूरी चीजों की सूची:

  1. गर्म स्वेटर और जैकेट
  2. रेज़र (बारिश से बचाने वाला) टेंट और स्लीपिंग बैग
  3. टॉर्च (अतिरिक्त बैटरियों के साथ)
  4. पीने का पानी और वॉटर बोतल
  5. डिब्बाबंद या सूखा खाना (जैसे बिस्कुट, चॉकलेट, नट्स)
  6. फर्स्ट-एड किट (प्राथमिक चिकित्सा बक्सा)
  7. मोबाइल फोन (पावर बैंक के साथ)
  8. टिशू पेपर और सैनिटाइज़र
  9. टूथब्रश, पेस्ट और तौलिया
  10. एक छोटी सी किताब या डायरी और पेन

52. तुमने किस-किस तरह के घर देखे हैं? उनके बारे में बताओ। चित्र भी बनाओ।

उत्तर: मैंने निम्नलिखित तरह के घर देखे हैं:

  1. ईंट-सीमेंट के मकान: शहरों में आम, मजबूत और बहुमंजिला।
  2. कच्चे मकान: गाँवों में मिट्टी, गोबर और घास-फूस से बने, गर्मी में ठंडे रहते हैं।
  3. लकड़ी के घर: पहाड़ी इलाकों में, ठंड से बचाव के लिए।
  4. हाउसबोट: कश्मीर की डल झील पर, पानी में तैरते हुए लकड़ी के बने घर।
  5. इग्लू: टीवी पर देखा, बर्फ के ब्लॉक्स से बना गुंबदनुमा घर।
  6. कारवाँ/टेंट: रेगिस्तान या पहाड़ों पर घुमंतू लोगों के रहने के लिए।
(यहाँ छात्र ईंट के मकान, कच्चे मकान और हाउसबोट का सरल चित्र बना सकते हैं।)

लिखो

61. ताशी के इलाके के लोग सर्दियों में नीचे की मंजिल पर रहते हैं। वे ऐसा क्यों करते होंगे?

उत्तर: ताशी के इलाके (लद्दाख) में सर्दियाँ अत्यधिक ठंडी होती हैं। लोग नीचे की मंजिल पर रहते हैं क्योंकि:

  • गर्माहट: नीचे की मंजिल जमीन के करीब होती है और उसमें खिड़कियाँ कम या बिल्कुल नहीं होतीं। इससे ठंडी हवा अंदर नहीं आ पाती और घर गर्म रहता है।
  • सुरक्षा: तेज हवाओं और बर्फ़ीले तूफानों से बचाव के लिए नीचे का हिस्सा अधिक सुरक्षित होता है।
  • परंपरा: ऊपरी मंजिल का उपयोग गर्मियों में रहने या सामान रखने के लिए किया जाता है, यह एक पारंपरिक और व्यावहारिक तरीका है।

५2. तुम्हारे घर की छत कैसी है? तुम्हारे यहाँ छत किन-किन कामों के लिए इस्तेमाल होती है?

उत्तर: मेरे घर की छत सपाट (फ्लैट) है और सीमेंट-कंक्रीट से बनी हुई है।

हम अपनी छत का इस्तेमाल निम्नलिखित कामों के लिए करते हैं:

  • कपड़े, दाल, अनाज और मसाले सुखाने के लिए।
  • सर्दियों में धूप सेंकने के लिए।
  • गर्मियों की रातों में हल्की हवा में सोने के लिए।
  • त्योहारों पर रंगोली बनाने या दीये जलाने के लिए।
  • छोटे-छोटे गमलों में पौधे और फूल उगाने के लिए।
  • कभी-कभी मेहमानों के साथ चाय पीने और बातें करने के लिए।

सोचो और लिखो

01. क्या इसमें कुछ घर पहचान पा रहे हो? ये लकड़ी और मिट्टी के घर हैं जिनमें सर्दियों में कोई नहीं रहता। गर्मियों में बकरवाल लोग यहाँ रहने आते हैं जब वे बकरियों को चराने के लिए पहाड़ों की उँचाइयों पर ले जाते हैं।

उत्तर: हाँ, मैं इन घरों को पहचान पा रहा/रही हूँ। ये ढलवाँ छत वाले, मजबूत लकड़ी और पत्थरों से बने छोटे-छोटे घर हैं। ये पहाड़ों की ऊँची घाटियों में बने होते हैं। इन्हें 'ढोक' या 'गड़रियों के झोंपड़े' कहा जा सकता है। बकरवाल लोग सर्दियों में निचले, गर्म इलाकों में रहते हैं और गर्मियों में जब ऊँचे पहाड़ों पर बर्फ पिघलती है और हरी-हरी घास उग आती है, तो वे अपने जानवरों के साथ इन्हीं झोंपड़ियों में रहने आते हैं।

Q2. अंदाजा लगाओ कि बकरवाल और चांगपो लोगों की जिंदगी में कौन-सी बातें मिलती-जुलती हो सकती हैं? और क्या फर्क है?

उत्तर:
मिलती-जुलती बातें (समानताएँ):

  • घुमक्कड़ जीवन: दोनों समुदाय एक जगह स्थायी रूप से नहीं रहते। वे मौसम के हिसाब से अपने रहने की जगह बदलते रहते हैं।
  • पशुपालन: दोनों की आजीविका का मुख्य स्रोत जानवर (भेड़, बकरी, याक) हैं। वे इनसे दूध, मांस और ऊन प्राप्त करते हैं।
  • ठंडे इलाके: दोनों ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के ठंडे पहाड़ी इलाकों में रहते और घूमते हैं।
  • टेंट/अस्थायी घर: दोनों ही आसानी से उठा-धर सकने वाले टेंट या अस्थायी झोंपड़ियों में रहते हैं।
फर्क (असमानताएँ):
  • रहने की ऊँचाई: चांगपा लोग लद्दाख के बहुत ऊँचे और सूखे पठार (चांगथांग) पर रहते हैं, जबकि बकरवाल लोग अपने जानवरों के साथ कम ऊँचाई वाली घाटियों से लेकर ऊँचे मैदानों (अल्पाइन मैदानों) तक का सफर करते हैं।
  • मुख्य जानवर: चांगपा लोगों के लिए याक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो अत्यधिक ठंड सहन कर सकता है। बकरवाल मुख्य रूप से बकरियों और भेड़ों पर निर्भर हैं।
  • ऊन की गुणवत्ता: चांगपा लोगों की पश्मीना बकरी से मिलने वाली पश्मीना ऊन दुनिया की सबसे बारीक और कीमती ऊनों में से एक है। बकरवालों के जानवरों की ऊन सामान्य होती है।

हम क्या समझे

61. तुमने जम्मू-कश्मीर के तरह-तरह के बसेरों के बारे में पढ़ा-कुछ उँचे पहाड़ पर, कुछ पानी में, कुछ जिनमें लकड़ी और पत्थर पर सुंदर डिजाइन हैं, कुछ जिन्हें बाँधकर किसी और जगह भी ले जाया जा सकता है। बताओ | यह बसेरे वहाँ के लोगों की जरूरत के हिसाब से कैसे बने हैं? यह घर तुम्हारे घर से कैसे अलग हैं?

उत्तर: जम्मू-कश्मीर के विभिन्न बसेरे वहाँ के कठोर मौसम, भूगोल और लोगों की जीवनशैली के अनुरूप बने हैं:

  • पहाड़ों पर पत्थर-लकड़ी के घर: मोटी दीवारें और छोटी खिड़कियाँ ठंड और तूफान से बचाती हैं। लकड़ी पर नक्काशी स्थानीय कला को दर्शाती है।
  • झीलों पर हाउसबोट: पानी में रहने की सुविधा देते हैं, पर्यटन को बढ़ावा देते हैं और जमीन की कमी की समस्या का हल हैं।
  • चांगपा लोगों के टेंट (रैबो): याक की ऊन से बने, हल्के और गर्म। इन्हें आसानी से तोड़कर एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है, जो उनकी खानाबदोश जीवनशैली के लिए आदर्श है।
मेरे घर से अंतर:
  • स्थायित्व: मेरा घर ईंट-सीमेंट का बना स्थायी घर है, जबकि वहाँ के कई घर अस्थायी या मौसमी हैं।
  • सामग्री: मेरे घर में आधुनिक सामग्री (सीमेंट, स्टील) का प्रयोग हुआ है, वहाँ प्राकृतिक सामग्री (लकड़ी, पत्थर, ऊन) का।
  • डिजाइन: मेरे घर का डिजाइन गर्म और शुष्क जलवायु के लिए है (हवादार, बरामदे), जबकि वहाँ के घरों का डिजाइन अत्यधिक ठंड से बचाव के लिए है (बंद, गर्म)।
  • जीवनशैली: मैं एक ही जगह रहता/रहती हूँ, जबकि चांगपा या बकरवाल लोगों का घर उनके साथ चलता है या वे मौसम के हिसाब से घर बदलते हैं।
इस प्रकार, घर लोगों की जरूरतों, पर्यावरण और संसाधनों का सही उदाहरण होते हैं।

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Other Chapters of class 5 EVS
1. कैसे पहचाना चींटी ने दोस्त को
2. कहानी सपेरों की
3. चखने से पचने तक
4. खाएं आम बारहों महीने
5. बीज बीज बीज
6. बूँद -बूँद दरिया -दरिया
7. पानी के प्रयोग
8. मच्छरों की दावत
9. डायरी कमर सीधी ऊपर चढ़ो
10. इमारतें
11. सुनीता
12. खत्म हो जाए तो
13. बसेरा ऊँचाई पर
14. जब धरती काँपी
15. उसी से ठंडा उसी से गर्म
16. कौन करेगा यह काम
17. फांद ली दीवार
18. जाएँ तो जाएँ कहाँ
19. किसानों की कहानी-बीज की जुबानी
20. किसके जंगल
21. किसकी झलक किसकी छाप
22. फिर चला काफिला
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