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UP Board class 5 EVS (16. कौन करेगा यह काम) solution PDF

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UP Board class 5 EVS (16. कौन करेगा यह काम) solution

UP Board class 5 EVS 16. कौन करेगा यह काम Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 5 EVS आस-पास

पाठ - 16: कौन करेगा यह काम?

51. क्या तुमने अपने आस-पास ऐसे दृश्य देखे हैं?

उत्तर: हाँ, मैंने अपने आस-पास अक्सर ऐसे दृश्य देखे हैं जहाँ लोग अलग-अलग तरह के काम करते हुए दिखाई देते हैं, जैसे सड़क साफ करना, कचरा उठाना, नालियाँ साफ करना आदि।

52. क्या कभी सोचा है, यह काम करना लोगों को कैसा लगता होगा?

उत्तर: हाँ, मैंने इस बारे में सोचा है। ऐसे काम अक्सर मुश्किल और असुविधाजनक होते हैं। इन्हें करने वाले लोगों को गंदगी और बदबू का सामना करना पड़ता है, जिससे उन्हें शारीरिक और मानसिक तकलीफ हो सकती है।

63. लोगों को ऐसे काम क्‍यों करने पढ़ते हैं?

उत्तर: लोग मुख्यतः आर्थिक मजबूरी के कारण ऐसे काम करते हैं। उनके पास रोजगार के दूसरे अवसर नहीं होते, इसलिए जीवन यापन के लिए उन्हें यही काम करने पड़ते हैं। कई बार यह काम पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता आ रहा होता है।

64. इस चित्र में किस तरह के काम किए जा रहे हैं? पाँच कामों के नाम लिखो।

उत्तर: इस चित्र में दिखाए गए पाँच काम निम्नलिखित हैं:

  1. दूध दुहना
  2. खाना बनाना
  3. बाल काटना
  4. झाड़ू लगाना
  5. गाड़ी चलाना

65. इस चित्र में दिखाये गये कामों में से कोई पाँच काम तुम्हें करने हों, तो तुम कौन से काम चुनोगे? क्यों?

उत्तर:

  1. गाड़ी चलाना: मैं यह काम चुनूंगा क्योंकि इसमें नई जगहों की यात्रा करने का मौका मिलता है और यह रोमांचक लगता है।
  2. बाल काटना: यह एक कलात्मक काम है। लोगों को अच्छा लुक देकर उन्हें खुश करना अच्छा लगेगा।
  3. दूध दुहना: पशुओं के साथ समय बिताना और स्वस्थ दूध देने में योगदान देना एक अच्छा अनुभव होगा।
  4. स्कूल जाना: पढ़ाई सबसे जरूरी काम है क्योंकि इससे हमारा भविष्य बनता है और हम समझदार नागरिक बनते हैं।
  5. खाना बनाना: अलग-अलग व्यंजन बनाना एक रचनात्मक कौशल है और परिवार व दोस्तों को खिलाने में खुशी मिलती है।

56. इनमें कौन से पाँच काम तुम नहीं चुनोगे? क्यों?

उत्तर:

  1. ठेला चलाना: यह बहुत शारीरिक श्रम वाला काम है और इसमें पूरे दिन भारी सामान ढोना पड़ता है।
  2. झाड़ू लगाना (सार्वजनिक स्थानों पर): क्योंकि इसमें धूल, कचरा और कई बार खतरनाक चीजों का सामना करना पड़ सकता है।
  3. दीवारों पर रंग करना: यह ऊंचाई पर किया जाने वाला जोखिम भरा काम है और रासायनिक गंध से परेशानी हो सकती है।
  4. बच्चे को खेलाना (देखभाल): इसमें बहुत जिम्मेदारी और धैर्य की जरूरत होती है, जो हर किसी के बस की बात नहीं है।
  5. ठेले पर सामान बेचना: इसमें पूरा दिन खुले में, गर्मी-सर्दी में बिताना पड़ता है और आमदनी भी निश्चित नहीं होती।

चर्चा करो

जो लोग तुम्हारे घर और स्कूल के आस-पास की सफाई करते हैं, उनसे बातचीत करो और पता करो-
(i) वे कब से यह काम कर रहे हैं?
(ii) कहाँ तक पढ़े हैं?
(iii) क्या उन्होंने और कोई काम ढूँढ़ने की कोशिश की?
(iv) क्या उनके परिवार के बड़े-बूढ़े भी यही काम करते थे?
(v) उनको इस काम में क्‍या परेशानियाँ आती हैं?

उत्तर: (कल्पित वार्तालाप के आधार पर)

  1. (i) वे बताते हैं कि वे लगभग 12-15 सालों से यह सफाई का काम कर रहे हैं।
  2. (ii) उन्होंने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है, लेकिन आगे पढ़ाई जारी नहीं रख सके।
  3. (iii) उन्होंने कुछ समय के लिए दुकान पर काम ढूंढने की कोशिश की, लेकिन नौकरी नहीं मिली।
  4. (iv) हाँ, उनके पिता और दादा भी इसी पेशे से जुड़े थे।
  5. (v) मुख्य परेशानी लोगों का अपमानजनक व्यवहार, कई बार समय पर वेतन न मिलना और काम करते समय सुरक्षा उपकरणों की कमी है।

51. तुम्हारी समझ में किस तरह के काम करना लोग पसंद नहीं करते? क्यों?

उत्तर: मेरी समझ से, सार्वजनिक शौचालयों और नालियों की सफाई, कचरा उठाने और मृत जानवरों को हटाने जैसे काम लोग पसंद नहीं करते। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये काम बहुत गंदे माने जाते हैं, इनमें बीमारी फैलने का डर रहता है और समाज में इन कामों को करने वालों को अक्सर सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता।

42. फिर इस तरह के काम कौन करता है? ये लोग ऐसे काम क्‍यों करते हैं जिन्हें कोई भी करना पसंद नहीं करता?

उत्तर: ये काम अक्सर समाज के वे लोग करते हैं जिनके पास आजीविका के सीमित विकल्प होते हैं। वे गरीबी, कम शिक्षा या सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण इन कामों के लिए मजबूर होते हैं। कई बार यह पेशा पीढ़ियों से चला आ रहा होता है, इसलिए उनके लिए दूसरा रास्ता ढूंढना मुश्किल हो जाता है।

कल्पना करो

63. क्या समाज में लोगों द्वारा किए जाने वाले सभी कामों को एक ही तरह से देखा जाता है? अगर नहीं, तो क्यों? क्या बदलाव होना जरूरी है?

उत्तर: नहीं, समाज में सभी कामों को एक ही तरह से नहीं देखा जाता। कुछ कामों को जैसे डॉक्टर, इंजीनियर बनना, बहुत सम्मानजनक माना जाता है, जबकि सफाई कर्मचारी या मजदूर के काम को कम महत्व दिया जाता है। यह भेदभाव अक्सर पैसे, शिक्षा और पुरानी सामाजिक मान्यताओं के कारण होता है। बदलाव जरूरी है। हमें यह समझना चाहिए कि हर काम समाज के लिए जरूरी है और हर श्रमिक का समान सम्मान होना चाहिए। शिक्षा और जागरूकता से इस सोच को बदला जा सकता है।

64. गांधीजी के पसंदीदा भजनों में से एक भजन का छोटा हिस्सा नीचे दिया है। यह भजन गुजराती भाषा में है। अपने आस-पास के लोगों की मदद लेकर इस भजन का मतलब पता करो और उसके बारे में सोचो।

उत्तर: (छात्र स्वयं करें। इस गतिविधि का उद्देश्य छात्रों को गांधीजी के विचारों से जोड़ना है। भजन का सार यह है कि ईश्वर सभी में व्याप्त है, चाहे वह सफाईकर्मी हो या कोई और, इसलिए सभी के प्रति प्रेम और सम्मान का भाव रखना चाहिए।)

Q1. अगर कोई भी यह काम न करे तो क्‍या होगा? यदि एक हफ्ते तक कोई भी तुम्हारे स्कूल या घर के आस-पास फैला कूड़ा-कचरा साफ न करे तो क्या होगा?

उत्तर: अगर एक हफ्ते तक कोई कचरा साफ न करे, तो हमारा वातावरण बहुत गंदा और अस्वस्थ हो जाएगा। कूड़े के ढेर लग जाएंगे, जिससे बदबू फैलेगी और मक्खियाँ-मच्छर पनपेंगे। इससे हैजा, टाइफाइड, डेंगू जैसी कई बीमारियाँ तेजी से फैल सकती हैं। स्कूल या घर के आस-पास रहना या पढ़ना मुश्किल हो जाएगा।

62. कचरा साफ करने के कुछ अलग तरीके जैसे मशीन या और कोई तरीका सोचो, जिससे लोगों को नापसंद काम न करना पड़े। अपने सोचे गए तरीके को चित्र बनाकर दिखाओ।

उत्तर: कचरा साफ करने के आधुनिक तरीके:

  1. रोबोटिक सफाईकर्मी: ऐसे रोबोट जो कचरा पहचानकर उसे उठा सकें और डस्टबिन में डाल सकें।
  2. अंडरग्राउंड वैक्यूम सिस्टम: घरों और सड़कों के नीचे पाइप लगे हों, जो कचरे को सीधे कचरा प्रसंस्करण केंद्र तक पहुंचा दें।
  3. ड्रोन की मदद: ड्रोन से पहचान करके बड़े-बड़े सार्वजनिक स्थानों पर कचरा इकट्ठा किया जा सकता है।
(छात्र इनमें से किसी एक विधि का चित्र बनाएं।)

बताओ

01. गांधीजी ने भी खुद और अपने साथियों के साथ सफाई का काम करना क्‍यों शुरू किया होगा? तुम्हें क्‍या लगता है?

उत्तर: मुझे लगता है गांधीजी ने यह काम इसलिए शुरू किया होगा ताकि वे समानता और स्वावलंबन का संदेश दे सकें। वे दिखाना चाहते थे कि कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। अपना और अपने आस-पास का काम खुद करने से हम दूसरों पर निर्भर नहीं रहते और हर श्रम का सम्मान करना सीखते हैं।

52. क्या तुम ऐसे किन्‍्हीं लोगों को जानते हो जो आस-पास के लोगों की कठिनाईयों को आसान करने की कोशिश करते हैं? पता करो।

उत्तर: हाँ, मेरे मोहल्ले में एक दादाजी रहते हैं। वे हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते हैं। जब भी सड़क पर कोई गड्ढा हो जाता है या नाली बंद हो जाती है, वे खुद पहल करके स्थानीय नगर निगम को सूचित करते हैं और जब तक काम नहीं हो जाता, वहाँ खुद निगरानी करते हैं। वे बच्चों को मुफ्त में पढ़ाते भी हैं।

53. गांधीजी के आश्रम में आने वाले नए मेहमानों को भी इस काम को सीखना पड़ता था। अगर तुम इन मेहमानों में से होते तो तुम क्या करते?

उत्तर: अगर मैं गांधीजी के आश्रम में एक नया मेहमान होता, तो मैं खुशी-खुशी सफाई का काम सीखता और करता। मैं समझता कि यह आत्मनिर्भर बनने और सभी कामों के महत्व को जानने का एक अच्छा तरीका है। मैं इसे एक चुनौती के रूप में लेता और अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करता।

54. तुम्हारे घर में 'टॉयलेट' की क्या व्यवस्था है? 'टॉयलेट' घर के अंदर है या बाहर? 'टॉयलेट' कौन साफ करता है?

उत्तर: मेरे घर में फ्लश वाला आधुनिक शौचालय (सेप्टिक टैंक के साथ) है, जो घर के अंदर ही बना हुआ है। शौचालय की सफाई हमारे परिवार के सभी सदस्य मिल-जुलकर करते हैं। मैं, मेरे भाई-बहन और माता-पिता सभी अपनी बारी-बारी से यह काम करते हैं।

55. गाँव में गंदी संडास की तरफ से लोटा लेकर आ रहे आदमी ने महादेवभाई के साथ कैसा बर्ताव किया? क्‍यों?

उत्तर: उस आदमी ने महादेवभाई के साथ बहुत अपमानजनक व्यवहार किया। वह उनसे दूर हट गया और उन्हें छूने से डरा क्योंकि उस समय समाज में सफाई कर्मचारियों को 'अछूत' माना जाता था। उसकी सोच थी कि उनसे छूने या नजदीक आने से वह अपवित्र हो जाएगा।

Q6. जो लोग टॉयलेट और नालियों वगैरह की सफाई का काम करते हैं, उनसे आम लोगों का किस तरह का बर्ताव होता है? लिखकर समझाओ।

उत्तर: पहले के समय में ऐसे काम करने वालों के साथ बहुत बुरा व्यवहार होता था। लोग उनसे दूरी बनाकर रखते थे, उन्हें अछूत समझते थे और उनके साथ बैठकर खाना-पीना तक पसंद नहीं करते थे। आजकल हालात बदल रहे हैं। अब कई लोग उनके काम की अहमियत समझते हैं और उनका सम्मान करते हैं। फिर भी, कुछ जगहों पर आज भी उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार देखने को मिलता है, जो कि गलत है।

57. तुम्हारे स्कूल की सफाई कौन करता है? क्या-क्या साफ करना पड़ता है?

उत्तर: हमारे स्कूल की सफाई के लिए नगर निगम के सफाई कर्मचारी और स्कूल द्वारा नियुक्त कुछ स्टाफ होते हैं। उन्हें कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, प्रार्थना स्थल, बरामदों, शौचालयों, बगीचे और मैदान की सफाई करनी पड़ती है। वे फर्श पोंछते हैं, कूड़ा इकट्ठा करते हैं और डस्टबिन खाली करते हैं।

68. क्या तुम्हारे जैसे बच्चे इसमें मदद करते हैं? अगर हाँ, तो किस तरह की?

उत्तर: हाँ, हम बच्चे भी सफाई में मदद करते हैं। हमारी कक्षा को 'स्वच्छता दल' बनाया गया है। हम अपनी कक्षा की डेस्क और कुर्सियाँ साफ करते हैं, ब्लैकबोर्ड धोते हैं, अपने टिफिन का कचरा कूड़ेदान में ही डालते हैं और स्कूल के बगीचे में पौधों की देखभाल में हाथ बंटाते हैं।

09. अगर मदद नहीं करते तो क्‍यों नहीं?

उत्तर: अगर कोई बच्चा मदद नहीं करता, तो उसके कई कारण हो सकते हैं। शायद उसे लगता हो कि यह उसका काम नहीं है, या उसके घर में उसे ऐसे काम करने की आदत नहीं है। कई बार बच्चे गंदगी से डरते हैं या दोस्तों के सामने शर्म महसूस करते हैं। लेकिन शिक्षक हमें समझाते हैं कि सफाई सबकी जिम्मेदारी है।

010. क्या सभी बच्चे सभी तरह के काम करते हैं?

उत्तर: हाँ, हमारे स्कूल में सभी बच्चों को, उनकी कक्षा के अनुसार, अलग-अलग तरह के सफाई के काम दिए जाते हैं। हर सप्ताह काम बदलते रहते हैं ताकि हर कोई हर तरह के काम को समझ सके और कर सके।

511. काम करने के लिए क्या क्लास की पढ़ाई छूट जाती है?

उत्तर: नहीं, पढ़ाई बिल्कुल नहीं छूटती। सफाई के काम के लिए स्कूल के समय में से ही एक विशेष अवधि (जैसे 20-30 मिनट) निर्धारित है, जो आमतौर पर सुबह की प्रार्थना के बाद या दोपहर के अंत में होती है। इस तरह पढ़ाई और व्यावहारिक काम दोनों का संतुलन बना रहता है।

612. क्या लड़के और लड़कियाँ एक ही तरह के काम करते हैं?

उत्तर: हमारे स्कूल में लड़के और लड़कियाँ दोनों मिल-जुलकर सभी तरह के काम करते हैं, जैसे कक्षा साफ करना, बगीचे में पानी देना, कूड़ा इकट्ठा करना आदि। हालाँकि, बहुत भारी सामान उठाने जैसे काम में शिक्षक अक्सर लड़कों की मदद लेते हैं, लेकिन मूल रूप से सभी काम सभी के लिए खुले हैं।

513. घर में तुम किस तरह के काम करते हो?

उत्तर: घर में मैं अपने माता-पिता का हाथ बंटाता हूँ। मैं अपना बिस्तर स्वयं ठीक करता हूँ, अपने कमरे और अध्ययन टेबल की सफाई रखता हूँ, खाने के बाद अपनी प्लेट रसोई तक ले जाता हूँ, कभी-कभी सब्जी छीलने या खरीदारी में मदद करता हूँ और छोटी बहन को होमवर्क करवाने में सहायता करता हूँ।

014. क्या लड़के-लड़कियों और मर्द-औरतों के किए जाने वाले कामों में समानता है?

उत्तर: आजकल बहुत से परिवारों में धीरे-धीरे समानता आ रही है। लेकिन अभी भी कई जगहों पर पुरानी सोच है। जैसे, रसोई का काम और बच्चों की देखभाल ज्यादातर महिलाओं का काम माना जाता है, जबकि बाहर का काम और मरम्मत के काम पुरुषों से जोड़े जाते हैं। यह भेदभाव सही नहीं है।

015. क्या तुम इसमें कुछ बदलाव लाना चाहोगे? किस तरह का?

उत्तर: हाँ, मैं चाहूंगा कि हर जगह समानता आए। लड़के और लड़कियाँ, पुरुष और महिलाएं, सभी को वह काम करने का अवसर मिले जो वे करना चाहते हैं और जिसमें वे सक्षम हैं। घर के सभी काम सभी सदस्य मिल-बाँट कर करें। इससे परिवार में एकता बढ़ेगी और हर कोई आत्मनिर्भर बनेगा।

हम क्या समझे

651. गांधीजी समझते थे कि हम सभी को हर तरह का काम करना सीखना चाहिए। इस बारे में तुम्हें क्या लगता है? अगर ऐसा हो तो क्या-क्या बदल सकता है? तुम्हारे घर में कुछ बदलाव आ सकते हैं?

उत्तर: मुझे लगता है गांधीजी का यह विचार बिल्कुल सही है। अगर हम सब हर तरह का छोटा-बड़ा काम करना सीख लें, तो:

  1. हम किसी पर निर्भर नहीं रहेंगे और आत्मनिर्भर बनेंगे।
  2. हर काम और हर श्रमिक के प्रति सम्मान की भावना पैदा होगी।
  3. समाज से छुआछूत और भेदभाव खत्म होने लगेगा।
मेरे घर में बदलाव: मेरे घर में पहले से ही सभी काम सब मिल-जुलकर करते हैं। फिर भी, मैं चाहूंगा कि मैं खाना बनाना और कपड़े इस्त्री करना भी सीखूं, और मेरी बहन छोटी-मोटी मरम्मत के काम सीखे। इससे हम और भी ज्यादा सक्षम बन सकेंगे।

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