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UP Board class 5 EVS (14. जब धरती काँपी) solution PDF

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UP Board class 5 EVS (14. जब धरती काँपी) solution

UP Board class 5 EVS 14. जब धरती काँपी Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 5 EVS आस-पास

पाठ - 14 जब धरती काँपी

चर्चा करो और लिखो

51. क्या तुमने या तुम्हारे किसी जानने वाले ने कभी ऐसी मुसीबत का सामना किया है?
उत्तर : हाँ, मेरे मामा जी उत्तराखंड में रहते हैं। उन्होंने वर्ष 2013 में आई भयंकर बाढ़ और भूस्खलन का सामना किया था। उनका गाँव पानी और मिट्टी के बहाव में आ गया था, जिससे घर और सामान का बहुत नुकसान हुआ।

52. ऐसे समय में किन लोगों ने मदद की? उनकी सूची बनाओ।
उत्तर : प्राकृतिक आपदा के समय निम्नलिखित लोगों और समूहों ने मदद की:

  • परिवार के सदस्य और रिश्तेदार।
  • पड़ोसी और गाँव के अन्य लोग, जिन्होंने खाना, कपड़े और सुरक्षा दी।
  • स्थानीय नेताओं ने राहत कार्य का आयोजन किया।
  • UP Board और राज्य सरकार के अधिकारी, जिन्होंने राहत शिविर लगाए।
  • डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी, जिन्होंने घायलों का इलाज किया।
  • सेना और एनडीआरएफ के जवान, जिन्होंने लोगों को बचाया और मलबा हटाया।
  • कई गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) के कार्यकर्ता, जिन्होंने खाने-पीने का सामान बाँटा।
  • दूसरे शहरों और राज्यों के लोग, जिन्होंने पैसे और जरूरी सामान भेजकर मदद की।

चर्चा करो

01. जस्मा के गाँव में बाहर के बहुत सारे लोग आए। ये कौन लोग होंगे? इन लोगों ने किस प्रकार की मदद की होगी?
उत्तर : जस्मा के गाँव में बाहर से आए लोगों में निम्नलिखित शामिल होंगे:

  • राहत कर्मी और डॉक्टर: उन्होंने घायलों को प्राथमिक उपचार दिया और दवाइयाँ बाँटीं।
  • सेना और पुलिस के जवान: उन्होंने गिरे हुए घरों के मलबे से लोगों को निकाला और कानून-व्यवस्था बनाए रखी।
  • सरकारी अधिकारी: उन्होंने राहत शिविर लगाए, जहाँ लोगों को खाना, पानी और कंबल मिले।
  • इंजीनियर और तकनीशियन: उन्होंने टूटे पुलों और सड़कों की मरम्मत शुरू की।
  • समाज सेवी संस्थाओं के स्वयंसेवक: उन्होंने बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल की और लोगों का हौसला बढ़ाया।

52. जस्मा के गाँव के लोगों ने अपना गाँव संस्था के बताए तरीके के अनुसार फिर से खड़ा किया। घरों को अब कैसे मजबूत बनाया?
उत्तर : जस्मा के गाँव के लोगों ने विशेषज्ञों की सलाह से अपने नए घरों को भूकंपरोधी बनाया। उन्होंने ये कदम उठाए:

  • घर की नींव (फाउंडेशन) गहरी और मजबूत बनाई, ताकि वह हिलने पर न धंसे।
  • दीवारों में लोहे की जाली (RCC फ्रेम) का इस्तेमाल किया, जो झटके सहन कर सके।
  • छत को हल्की लेकिन मजबूत सामग्री (जैसे प्री-कास्ट स्लैब) से बनाया, ताकि गिरने का खतरा कम हो।
  • खिड़की और दरवाजे छोटे और मजबूत रखे।
  • घरों के बीच पर्याप्त दूरी रखी, ताकि एक घर गिरने से दूसरे को नुकसान न पहुँचे।

53. सोचो, अगर तुम्हारे यहाँ भूकंप आ जाए, तो तुम्हारे घर में किस तरह का नुकसान हो सकता है?
उत्तर : यदि मेरे यहाँ भूकंप आ जाए, तो निम्नलिखित नुकसान हो सकते हैं:

  • दीवारों और छत में दरारें पड़ सकती हैं या वे पूरी तरह गिर सकती हैं।
  • घर में रखी शीशे की चीजें, पंखे, लाइट्स आदि टूटकर गिर सकते हैं।
  • बड़े फर्नीचर जैसे अलमारी या फ्रिज लुढ़क सकते हैं और चोट का कारण बन सकते हैं।
  • पानी और बिजली की लाइनें टूट सकती हैं, जिससे कई दिनों तक बिजली-पानी बंद रह सकता है।
  • कीमती सामान जैसे टीवी, कंप्यूटर आदि खराब हो सकते हैं।
  • सबसे बड़ा नुकसान परिवार के सदस्यों के घायल होने या उनके सामने आने का डर होगा।

लिखो।

54. ऐसे समय में तुम अपने पालतू जानवरों की सुरक्षा तथा देखभाल के लिए क्या करोगे? लिखो ।
उत्तर : आपदा के समय मैं अपने पालतू जानवरों (जैसे कुत्ता या बिल्ली) की देखभाल इस तरह करूँगा/करूँगी:

  • सबसे पहले, उन्हें अपने पास रखूँगा और उनकी रस्सी या बॉक्स पकड़ लूँगा, ताकि वे डरकर भाग न जाएँ।
  • अगर हमें सुरक्षित स्थान पर जाना है, तो उन्हें भी अपने साथ ले जाऊँगा।
  • उनके लिए पीने का साफ पानी और कुछ खाने (जैसे बिस्कुट या उनका चारा) का इंतजाम करूँगा।
  • अगर वह घायल हो जाए, तो जल्द से जल्द पशु चिकित्सक (वेटनरी डॉक्टर) से संपर्क करूँगा।
  • उन्हें दिलासा दूँगा और प्यार से बात करूँगा, क्योंकि वे भी डरे हुए होते हैं।
नोट: विद्यार्थी अपने अनुभव के आधार पर इस प्रश्न का उत्तर स्वयं लिखें।

55. क्या कभी तुमने अपने इलाके में देखा है कि आस-पड़ोस के लोगों ने मिलकर एक-दूसरे की मदद की हो? कब-कब?
उत्तर : हाँ, मैंने अक्सर देखा है कि आस-पड़ोस के लोग मुसीबत के समय एक-दूसरे की मदद करते हैं। कुछ उदाहरण हैं:

  • जब पिछले साल हमारे मोहल्ले में एक घर में आग लग गई थी, तो सभी पड़ोसी पानी की बाल्टियाँ लेकर आग बुझाने में जुट गए थे और परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला था।
  • बारिश के मौसम में जब सड़क पर पानी भर जाता है, तो बड़े लोग छोटे बच्चों को स्कूल तक पहुँचाने में मदद करते हैं।
  • किसी बीमार पड़ोसी के लिए लोग खाना बनाकर भेजते हैं या उनके लिए दवाई ले आते हैं।

56. लोग अक्सर एक जगह पर पास-पास क्यों बसते हैं?
उत्तर : लोग एक जगह पर पास-पास बसने को पसंद करते हैं, इसके कई महत्वपूर्ण कारण हैं:

  • सुरक्षा और सहायता: मुसीबत के समय (जैसे बीमारी, आग, चोरी) पड़ोसी तुरंत मदद के लिए पहुँच सकते हैं।
  • सामाजिक जीवन: त्योहार, शादी-ब्याह या उत्सव मिल-जुलकर मनाए जा सकते हैं, जिससे खुशियाँ बढ़ती हैं।
  • सुविधाएँ: पास-पास रहने से स्कूल, अस्पताल, बाजार जैसी सुविधाएँ साझा की जा सकती हैं।
  • संस्कृति और परंपरा: एक ही समुदाय या संस्कृति के लोग साथ रहकर अपनी रीति-रिवाजों को जीवित रख पाते हैं।
  • अकेलापन दूर होता है: बच्चों के लिए दोस्त और बड़ों के लिए साथ बातचीत करने वाले लोग मिल जाते हैं, अकेलापन नहीं रहता।

57. अगर तुम्हारा घर अपने इलाके में अकेला घर होता यानी तुम्हारे आस-पास कोई न रहता तो कैसा होता? जैसे-तुम किसके साथ खेलते? क्या अकेले डर लगता? सभी त्योहार और खास मौके किसके साथ मिलकर मनाते, इत्यादि?
उत्तर : अगर मेरा घर अकेला होता, तो स्थिति बहुत मुश्किल और डरावनी होती:

  • खेलने के लिए दोस्त नहीं: मैं अकेला ही खेलता रह जाता। फुटबॉल, क्रिकेट जैसे दल के खेल खेलना असंभव हो जाता।
  • डर लगना: रात के समय या बुरे मौसम में बहुत डर लगता। अगर कोई अनजान व्यक्ति आ जाए या कोई जानवर घर के आसपास घूमे, तो मदद के लिए कोई नहीं होता।
  • उदास त्योहार: दिवाली पर पटाखे अकेले फोड़ना या होली पर रंग अकेले लगाना बिल्कुल मजेदार नहीं लगता। त्योहारों की खुशी बाँटने वाला कोई नहीं होता।
  • आपात स्थिति में मुश्किल: अगर कभी मेरे माता-पिता बीमार पड़ जाएँ या कोई दुर्घटना हो जाए, तो तुरंत मदद मिलना मुश्किल हो जाता।
  • ज्ञान और अनुभव की कमी: बड़ों से नई बातें सीखने, कहानियाँ सुनने का मौका नहीं मिल पाता।
इसलिए, पास-पास रहना सुरक्षित और सुखद जीवन के लिए बहुत जरूरी है।

58. लोगों को कई बार ऐसी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, जिनमें जान और माल का भारी नुकसान होता है। कई लोग बेघर हो जाते हैं। पिछले कुछ एक महीनों के अखबारों से दुनिया में आए भूकम्प, बाढ़, आग, तूफान आदि के बारे में समाचार इकट्ठा करो। उन्हें कॉपी में चिपकाओ।
उत्तर :

विद्यार्थियों के लिए निर्देश: इस गतिविधि को स्वयं करें। पिछले 2-3 महीनों के अखबार काटकर या इंटरनेट से प्रिंट आउट लेकर, दुनिया भर में आई किसी प्राकृतिक आपदा (जैसे - अमेरिका में जंगल की आग, जापान में भूकंप, भारत में बाढ़) के समाचारों का एक संग्रह तैयार करें। प्रत्येक समाचार के नीचे आपदा का नाम, स्थान, तारीख और मुख्य बिंदु लिखें।

लिखो

51. अपने घर की तुलना जस्मा के घर से करो। दोनों घरों को बनाने के लिए इस्तेमाल की गई चीजों की सूची कॉपी में बनाओ।
उत्तर:

जस्मा का पुराना घर (भूकंप से पहले) मेरा घर (आधुनिक शहरी/ग्रामीण)
  • मिट्टी की दीवारें
  • लकड़ी के खंभे और बीम
  • घास-फूस या टिन की छत
  • गोबर और मिट्टी का लेप
  • बाँस या पतली लकड़ी
  • ईंटों की दीवारें
  • सीमेंट, रेत, बजरी का गारा
  • लोहे की छड़ें (RCC)
  • सीमेंट कंक्रीट की छत
  • सीमेंट प्लास्टर और पेंट
  • लकड़ी या आयरन के दरवाजे-खिड़कियाँ

52. टी.वी. की रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में हजारों लोग घायल हुए और मरे भी। अगर यहाँ बनी इमारतें भूकम्प से सुरक्षित होतीं, तो क्या नुकसान में कुछ अंतर होता? क्या?
उत्तर : हाँ, बिल्कुल अंतर होता। अगर भुज की इमारतें भूकंपरोधी (Earthquake Resistant) बनाई गई होतीं, तो हालात बहुत बेहतर होते:

  • जान का नुकसान कम: मजबूत इमारतें पूरी तरह नहीं गिरतीं, इसलिए हजारों लोग मलबे के नीचे दबकर नहीं मरते। लोगों को बचाना आसान होता।
  • घायलों की संख्या कम: गिरते हुए पत्थर, सीमेंट के टुकड़े और शीशे से चोट लगने का खतरा बहुत कम हो जाता।
  • आर्थिक नुकसान कम: घर, स्कूल, अस्पताल और दुकानें बच जातीं। लोगों को फिर से सब कुछ बनाना नहीं पड़ता, जिससे पैसे और समय की बचत होती।
  • राहत कार्य आसान: क्योंकि सड़कें और पुल ज्यादा नुकसान नहीं उठाते, राहत दल जल्दी पहुँच पाते और मदद कर पाते।
  • मानसिक आघात कम: लोगों को अपना सब कुछ खोने का और अपनों को खोने का दुख नहीं झेलना पड़ता। वे जल्दी सामान्य जीवन में लौट आते।
इसलिए, भूकंप-प्रभावित क्षेत्रों में मजबूत निर्माण बहुत जरूरी है।

53. ऐसे समय पर जब लोगों के घर ही नहीं रहे, तब लोगों को किस-किस तरह की राहत की जरूरत पड़ी होगी?
उत्तर : जब लोगों के घर नष्ट हो जाते हैं, तो उन्हें तुरंत और लंबे समय तक निम्नलिखित राहत की जरूरत पड़ती है:

  • तत्काल जरूरतें (पहले कुछ दिन):
    • सुरक्षित आश्रय: तंबू, टेंट या सार्वजनिक भवन में रहने की जगह।
    • पीने का साफ पानी: टैंकर या बोतलबंद पानी की व्यवस्था।
    • खाना: पके हुए भोजन या ड्राई राशन (चावल, दाल, बिस्कुट)।
    • प्राथमिक चिकित्सा: डॉक्टर, दवाई और एम्बुलेंस सेवा।
    • कपड़े और कंबल: ठंड से बचने के लिए।
  • मध्यम अवधि की जरूरतें (कुछ हफ्तों तक):
    • स्वच्छता: शौचालय और स्नानघर की व्यवस्था, ताकि बीमारियाँ न फैलें।
    • बच्चों के लिए सुरक्षा: अस्थायी स्कूल या खेलने की जगह।
    • मानसिक सहायता: आघात से उबरने में मदद के लिए परामर्श।
    • नकद सहायता: ताकि लोग जरूरी चीजें खरीद सकें।
  • दीर्घकालिक जरूरतें (कई महीनों तक):
    • पुनर्वास: नए, मजबूत घर बनाने में मदद।
    • रोजगार: काम के नए अवसर पैदा करना, ताकि लोग अपना जीवन फिर से शुरू कर सकें।

64. ऐसे में किन-किन की मदद की जरूरत पड़ती होगी और किस काम के लिए? कॉपी में तालिका बनाकर लिखो।
उत्तर:

किसकी मदद की जरूरत? किस काम के लिए?
1. स्निफर कुत्ते और उनके प्रशिक्षक मलबे के नीचे दबे लोगों का पता लगाने के लिए। कुत्ते अपनी सूँघने की शक्ति से जीवित लोगों को ढूँढते हैं।
2. बुलडोजर और क्रेन चालक गिरे हुए मकानों के भारी मलबे को हटाने, सड़कें साफ करने और रास्ता बनाने के लिए।
3. डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिक्स घायल लोगों का इलाज करने, टीके लगाने और बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए।
4. स्थानीय प्रशासन और पुलिस राहत शिविर चलाने, सामान बाँटने, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए।
5. सेना और एनडीआरएफ के जवान खतरनाक जगहों से लोगों को बचाने, राहत सामग्री पहुँचाने और तकनीकी बचाव कार्य के लिए।
6. स्वयंसेवक (वालंटियर) खाना बनाने-बाँटने, बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल करने, लोगों का हौसला बढ़ाने के लिए।
7. इंजीनियर और तकनीशियन टूटे बिजली के खंभे, पानी की पाइपलाइन और संचार के टावरों को ठीक करने के लिए।
8. मनोवैज्ञानिक और काउंसलर आपदा के आघात से गुजर रहे लोगों, खासकर बच्चों की मानसिक मदद करने के लिए।

क्या-क्या करें?

01. संस्था के लोगों ने जस्मा के स्कूल में अभ्यास कराया कि भूकम्प आने पर क्या-क्या करना चाहिए।
उत्तर : भूकंप आने पर हमें निम्नलिखित सुरक्षा उपाय तुरंत अपनाने चाहिए:

  • शांत रहें और डरें नहीं: जल्दबाजी में भागने की कोशिश न करें।
  • ड्रॉप, कवर एंड होल्ड ऑन:
    1. ड्रॉप (झुक जाएँ): तुरंत जमीन पर घुटनों के बल झुक जाएँ।
    2. कवर (ढक लें): अपने सिर और गर्दन को हाथों से ढक लें और किसी मजबूत फर्नीचर (जैसे मेज, डेस्क या बेड) के नीचे छिप जाएँ।
    3. होल्ड ऑन (पकड़े रहें): उस मेज या फर्नीचर की टाँग मजबूती से पकड़ लें, ताकि झटकों से वह खिसके नहीं।
  • खिड़की, अलमारी और शीशे से दूर रहें: ये टूटकर गिर सकते हैं और चोट लगा सकते हैं।
  • लिफ्ट का इस्तेमाल न करें: सीढ़ियों का प्रयोग करें, लेकिन तभी जब वे सुरक्षित हों।
  • खुले मैदान में जाएँ: अगर आप बाहर हैं, तो इमारतों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर खुले मैदान में चले जाएँ।
  • झटके रुकने तक प्रतीक्षा करें: भूकंप के झटके रुकने के बाद ही सावधानी से बाहर निकलें।

52. क्या तुम्हें कभी स्कूल में या कहीं और इस बारे में बताया गया है कि भूकंप जैसी मुसीबत के समय क्या करना चाहिए?
उत्तर : हाँ, मेरे स्कूल में हर साल भूकंप सुरक्षा अभ्यास (Earthquake Drill) कराया जाता है। इसमें हमें सिखाया गया है:

  • अलार्म बजते ही शांति से और तेजी से अपनी डेस्क के नीचे बैठ जाना है।
  • सिर को किताब या बैग से ढक लेना है।

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Other Chapters of class 5 EVS
1. कैसे पहचाना चींटी ने दोस्त को
2. कहानी सपेरों की
3. चखने से पचने तक
4. खाएं आम बारहों महीने
5. बीज बीज बीज
6. बूँद -बूँद दरिया -दरिया
7. पानी के प्रयोग
8. मच्छरों की दावत
9. डायरी कमर सीधी ऊपर चढ़ो
10. इमारतें
11. सुनीता
12. खत्म हो जाए तो
13. बसेरा ऊँचाई पर
14. जब धरती काँपी
15. उसी से ठंडा उसी से गर्म
16. कौन करेगा यह काम
17. फांद ली दीवार
18. जाएँ तो जाएँ कहाँ
19. किसानों की कहानी-बीज की जुबानी
20. किसके जंगल
21. किसकी झलक किसकी छाप
22. फिर चला काफिला
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