UP Board class 5 EVS 4. खाएं आम बारहों महीने is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 5 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: अमन को आलू से एक तेज़ और बुरी गंध आ रही थी। साथ ही, कुछ आलुओं पर काले धब्बे और अंकुर निकल आए थे। इन्हीं लक्षणों को देखकर और सूंघकर अमन को लगा कि आलू खराब हो गए हैं।
उत्तर: हाँ, मैंने कई बार खराब हुआ खाना देखा है, जैसे कि सड़े हुए फल या बासी दाल-सब्ज़ी। पता यूँ चलता है:
- गंध: खराब खाने से अजीब और बदबूदार गंध आने लगती है।
- रंग: उसके रंग में बदलाव आ जाता है, जैसे हरे या काले धब्बे पड़ जाना।
- दिखावट: खाना चिपचिपा, गीला या फफूंद लगा हुआ दिखाई देने लगता है।
उत्तर: यदि नीतू वह खराब आलू खा लेती, तो उसे पेट दर्द, उल्टी, दस्त या फूड पॉइजनिंग जैसी बीमारी हो सकती थी। खराब भोजन में हानिकारक कीटाणु पनप जाते हैं, जो शरीर के लिए बहुत नुकसानदायक होते हैं।
उत्तर: पैकेट पर दी गई जानकारी से हमें निम्नलिखित बातों का पता चलता है:
1. उत्पाद का नाम और ब्रांड।
2. बनाने की तारीख और उपयोग की अंतिम तारीख (एक्सपायरी डेट)।
3. शुद्ध वजन (कितना ग्राम या किलो है)।
4. उपयोग की गई सामग्री (सामग्री सूची)।
5. पोषक तत्वों की जानकारी।
6. निर्माता का पता और संपर्क जानकारी।
7. भंडारण के निर्देश (कहाँ और कैसे रखें)।
उत्तर: जब मैं बाजार से कोई पैक्ड सामान खरीदता हूँ, तो मैं सबसे पहले इन तीन बातों को ज़रूर देखता हूँ:
- एक्सपायरी डेट: ताकि पता चल सके कि उत्पाद ताज़ा है और कब तक इस्तेमाल किया जा सकता है।
- शुद्ध वजन: यह जानने के लिए कि हम कितना सामान खरीद रहे हैं।
- सामग्री सूची: यह देखने के लिए कि उत्पाद किन चीज़ों से बना है और क्या उसमें कोई ऐसी चीज़ है जिससे एलर्जी हो सकती है।
- जो दो-तीन दिन में खराब हो सकती हैं
- हफ़्ते भर तक खराब नहीं होंगी -
- महीने भर तक खराब नहीं होंगी -
उत्तर:
दो-तीन दिन में खराब हो सकती हैं: दूध, दही, पके हुए चावल/रोटी, पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, कटे हुए फल।
हफ़्ते भर तक खराब नहीं होंगी: आलू, प्याज, केला, नींबू, अंडे, केक (अगर फ्रिज में रखें)।
महीने भर तक खराब नहीं होंगी: आटा, चावल, दालें, चीनी, नमक, तेल, घी, डिब्बाबंद सामान, सूखे मेवे।
उत्तर: मैंने और मेरे दोस्त ने अपनी-अपनी सूचियाँ बनाई। हमने देखा कि दोनों की सूचियाँ लगभग एक जैसी ही हैं, क्योंकि ज़्यादातर खाद्य पदार्थ एक निश्चित समय में ही खराब होते हैं। हालाँकि, कुछ अंतर इस बात पर निर्भर करते थे कि हम उन चीज़ों को कहाँ रखते हैं – जैसे फ्रिज में रखने पर वे ज़्यादा दिन चलती हैं।
उत्तर: नहीं, हमारी सूची हर मौसम में एक जैसी नहीं रहेगी। मौसम के साथ बदलाव आएगा:
- गर्मी और बरसात: इन मौसमों में गर्मी और नमी ज़्यादा होती है, जिससे दूध, सब्ज़ियाँ, बचा हुआ खाना बहुत जल्दी (1-2 दिन में) खराब हो जाता है।
- सर्दी: सर्दियों में ठंड और सूखापन रहता है, इसलिए वही खाना 2-3 दिन या उससे भी ज़्यादा समय तक खराब हुए बिना रह सकता है।
उत्तर: अगर हमारे घर पर कोई खाना खराब हो जाता है, तो हम उसे तुरंत कूड़ेदान में फेंक देते हैं ताकि कोई गलती से भी उसे न खा ले और बीमार न पड़ जाए। कभी-कभी, सब्ज़ियों के छिलके जैसे कुछ खराब हिस्सों को कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए भी इकट्ठा किया जाता है।
उत्तर: आम के गूदे में गुड़ और चीनी मिलाकर अच्छी तरह धूप में सुखाने से 'आम पापड़' या 'आम की टॉफी' (जिसे कुछ जगहों पर मामिडी तांड्रा भी कहते हैं) बनाई जाती है। यह एक मीठा और खट्टा सूखा व्यंजन होता है जिसे लंबे समय तक स्टोर करके खाया जा सकता है।
उत्तर: बाबा ने सबसे पके हुए आम इसलिए पहले छाँटे क्योंकि पके आम मीठे, रसीले और नरम होते हैं। इनमें रेशे (फाइबर) कम होते हैं, जिससे गूदा आसानी से निकलता है और पापड़ बनाते समय चिकना और बिना गुठली के मिश्रण तैयार हो पाता है। कच्चे या कम पके आम खट्टे और रेशेदार होते हैं, जो पापड़ के लिए उतने अच्छे नहीं माने जाते।
उत्तर: भाइयों ने मामिडी तांड्रा (आम पापड़) बनाने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया:
चरण 1 (तैयारी): सबसे पहले बाज़ार से चटाई, कैज्युरीना पेड़ के पतले डंडे, नारियल की रस्सी, गुड़ और चीनी खरीदी।
चरण 2 (मचान बनाना): आँगन में अच्छी धूप वाली जगह चुनी। वहाँ डंडों की मदद से एक ऊँचा चौकोर ढाँचा (मचान) बनाया और उस पर रस्सी से चटाई बाँध दी।
चरण 3 (आम का गूदा तैयार करना): पके हुए आमों को छीलकर उनका गूदा निकाला। इस गूदे को एक बारीक छलनी से छान लिया ताकि कोई रेशा न रह जाए।
चरण 4 (मिश्रण बनाना): छने हुए गूदे में पिसा हुआ गुड़ और चीनी मिलाकर अच्छी तरह घोल बना लिया।
चरण 5 (सुखाना): इस घोल की एक पतली और समान परत चटाई पर फैला दी। इसे 3-4 दिन तक तेज़ धूप में सुखाया गया। हर दिन पलटकर दूसरी तरफ से भी सुखाया गया।
चरण 6 (काटना और स्टोर करना): एक सप्ताह बाद जब परत पूरी तरह सूखकर कड़क हो गई, तो उसे चौकोर या आयताकार टुकड़ों में काट लिया गया और एक डिब्बे में भरकर रख लिया गया।
उत्तर: मेरे घर में आम से कई स्वादिष्ट चीज़ें बनती हैं:
कच्चे आम से: आम का अचार, कैरी पन्ना (ठंडाई), हरी चटनी, आम की सब्ज़ी और आम चूरन।
पके आम से: आम का रस (शरबत), आम की लस्सी, आम पन्ना, आम की कल्फी, आम पापड़ और आम की मिठाई।
उत्तर: मुझे निम्नलिखित तरह के अचारों के बारे में पता है:
उत्तर: हाँ, तस्वीर में ब्रेड के पैकेट पर हरे-हरे और सफेद रंग के धब्बे दिखाई दे रहे हैं। ये धब्बे फफूंद (मोल्ड) के हैं। बीजी ने इन धब्बों को देखकर ही समझ लिया होगा कि ब्रेड खराब हो गई है और उसे खाना सुरक्षित नहीं है, इसलिए उन्होंने पैकेट वापस लौटा दिया।
उत्तर: उन्हें ब्रेड इसलिए खराब लगी क्योंकि पैकेट पर साफ दिखाई दे रहे हरे-सफेद फफूंद के धब्बे खराब होने का स्पष्ट संकेत हैं। फफूंद लगा हुआ खाना खाने से सेहत को नुकसान पहुँच सकता है।
(क) पता करो, इस बदलाव का क्या कारण हो सकता है? ब्रेड पर फफूदी कहाँ से आई होगी?
उत्तर: ब्रेड पर पानी डालकर बंद डिब्बे में रखने से उसमें नमी और गर्मी बनी रहती है। यह वातावरण फफूंद (मोल्ड) नामक सूक्ष्म जीवों के पनपने के लिए आदर्श होता है। फफूंद के बीजाणु (स्पोर्स) हवा, पानी या धूल के साथ हर जगह मौजूद रहते हैं। ये बीजाणु हवा के माध्यम से उड़कर नम ब्रेड पर आकर बैठ गए होंगे और वहाँ अनुकूल परिस्थितियाँ पाकर तेज़ी से बढ़ने लगे, जिससे हरे-सफेद धब्बे दिखाई दिए।
(ख) अलग-अलग खाना कई तरह से खराब हो सकता है। कुछ खाना जल्दी खराब होता है, तो कुछ देर में। खाना किन-किन कारणों से और किन स्थितियों में जल्दी खराब होता है, उसकी सूची बनाओ।
उत्तर: खाना निम्नलिखित कारणों और स्थितियों में जल्दी खराब होता है:
उत्तर:
पके हुए चावल – एक कटोरे में डालकर पानी के बर्तन में रखने पर। (इससे चावल ठंडे रहते हैं और खराब होने से बचते हैं।)
हरा धनिया – गीले कपड़े में लपेट कर रखते हैं। (इससे धनिया ताज़ा और हरा बना रहता है।)
दूध – उबालते हैं। (उबालने से दूध में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया मर जाते हैं और वह ज़्यादा देर तक चलता है।)
प्याज, लहसुन – खुले में रखते हैं, नमी से बचाकर। (इन्हें हवादार और सूखी जगह पर रखने से ये अंकुरित नहीं होते और लंबे समय तक चलते हैं।)
उत्तर: हाँ, मेरे घर पर मेरी दादी जी और माँ अचार बनाती हैं। वे ख़ास तौर पर आम का अचार, नींबू का अचार और मिर्च का अचार बनाती हैं। उन्होंने यह तरीका अपनी माँ (मेरी परदादी) और सास (मेरी नानी) से सीखा है। यह तरीका पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमारे परिवार में चला आ रहा है।
उत्तर: मेरे घर में आम का अचार इस तरह बनाया जाता है:
सामग्री: कच्चे आम, सरसों का तेल, नमक, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, सौंफ, मेथी दाना, राई और कलौंजी।
तरीका:
1. कच्चे आमों को अच्छी तरह धोकर सुखा लेते हैं और फिर उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लेते हैं।
2. इन टुकड़ों पर हल्दी और नमक लगाकर 1-2 दिन धूप में सुखाते हैं।
3. एक कड़ाही में तेल गर्म करके उसमें राई, मेथी, सौंफ और कलौंजी डालकर भूनते हैं।
4. इस भुने हुए मसाले को पीसकर उसमें लाल मिर्च पाउडर मिला लेते हैं।
5. सूखे आम के टुकड़ों में यह मसाला मिलाकर एक साफ और सूखे मर्तबान (जार) में भर देते हैं।
6. ऊपर से तेल डालकर अच्छी तरह बंद कर देते हैं और इसे कुछ दिन धूप में रखते हैं। कुछ दिनों बाद अचार खाने के लिए तैयार हो जाता है।
उत्तर:
पापड़: उड़द की दाल या मूंग की दाल को भिगोकर पीस लेते हैं। इसमें नमक, जीरा, काली मिर्च आदि मसाले मिलाते हैं। इस लोई से छोटी-छोटी लोइयाँ बनाकर बेलन से बेलकर पतला पापड़ बनाते हैं और इन्हें धूप में सुखा लेते हैं।
चटनी: हरी धनिया, पुदीना, हरी मिर्च, नींबू का रस, नमक और थोड़ी चीनी को सिल-बट्टे पर या मिक्सर में पीसकर बनाई जाती है। कभी-कभी इसमें टमाटर या आम भी मिलाया जाता है।
बड़ियाँ: उड़द की दाल को भिगोकर बारीक पीस लेते हैं। इसमें नमक, हल्दी, मिर्च पाउडर और मसाले मिलाकर गोल-गोल बड़ियाँ बना लेते हैं। इन्हें सूती कपड़े पर रखकर कई दिनों तक धूप में सुखाया जाता है।
उत्तर: दो दिन के रेल सफर के लिए मैं ऐसा खाना ले जाना पसंद करूँगा जो जल्दी खराब न हो, पौष्टिक हो और खाने में आसान हो।
खाने की सूची: पराठे (आलू/मूली के), पूरी-सब्ज़ी, उबले हुए अंडे, आलू के चिप्स, केले और सेब जैसे फल, बिस्कुट, केक, सूखे मेवे (काजू, बादाम), और पैक्ड जूस।
पैक करने का तरीका: पराठे और पूरी-सब्ज़ी को एयरटाइट डिब्बों में रखूँगा। फलों को अलग से कपड़े के थैले में। बिस्कुट और केक को उनके मूल पैकेट में ही रखूँगा। सब कुछ एक बड़े इंसुलेटेड बैग (टिफिन बॉक्स) में पैक करूँगा।
सबसे पहले क्या खाऊँगा: मैं सबसे पहले पूरी-सब्ज़ी खाऊँगा क्योंकि इसमें तेल होता है और यह बाकी चीज़ों के मुकाबले जल्दी खराब हो सकती है। उसके बाद पराठे और फिर बाकी की सूखी चीज़ें खाऊँगा।
उत्तर: अचार रखने से पहले शीशियों को धूप में सुखाना बहुत ज़रूरी है ताकि उनमें मौजूद सारी <
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