UP Board class 5 EVS 3. चखने से पचने तक is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 5 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर : जब भी मैं अपने पसंदीदा खाने के बारे में सोचता हूँ या उसे देखता हूँ, तो मेरे मुँह में पानी आ जाता है। यह शरीर की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है जो पाचन की तैयारी शुरू कर देती है।
| मनपसंद चीज | उसका स्वाद |
|---|---|
| 1. गुलाब जामुन | मीठा और मुलायम |
| 2. आलू के चिप्स | नमकीन और कुरकुरे |
| 3. आम | मीठा और रसीला |
| 4. नींबू पानी | खट्टा-मीठा और ताज़गी देने वाला |
| 5. पनीर टिक्का | मसालेदार और स्वादिष्ट |
उत्तर : मुझे अलग-अलग तरह के स्वाद पसंद हैं। हर तरह के स्वाद से हमें अलग-अलग पोषक तत्व मिलते हैं। सिर्फ एक ही स्वाद वाला खाना खाते रहने से बोरियत हो जाती है और शरीर को सभी ज़रूरी चीजें भी नहीं मिल पातीं।
उत्तर : हाँ, नींबू के रस की कुछ बूँदों से ही उसका खट्टा स्वाद का पता चल जाता है। हमारी जीभ पर स्वाद कलिकाएँ बहुत संवेदनशील होती हैं, जो थोड़ी सी मात्रा में भी स्वाद को पहचान लेती हैं।
उत्तर : हाँ, हम सौंफ के दाने को बिना चबाए भी पहचान सकते हैं। जीभ पर रखते ही उसकी मीठी और थोड़ी तेज़ खुशबू आती है, और जीभ के संपर्क में आते ही उसका हल्का मीठा स्वाद भी महसूस होने लगता है। इससे हम उसे पहचान जाते हैं।
उत्तर : खेल में झुम्पा ने मछली को उसकी विशेष गंध से पहचान लिया। हमारी नाक गंध पहचानने में बहुत तेज़ होती है। कई चीजें हैं जिन्हें हम बिना देखे और चखे, केवल सूँघकर ही पहचान सकते हैं, जैसे:
उत्तर : हाँ, कई बार कड़वी दवा पीते समय बड़े नाक बंद करने को कहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि किसी चीज का स्वाद उसकी गंध से भी जुड़ा होता है। नाक बंद करने से दवा की बुरी गंध नहीं आती, जिससे उसका कड़वा स्वाद कम महसूस होता है और दवा आसानी से पी जाती है।
उत्तर : (यह एक गतिविधि का प्रश्न है। छात्र अपने अनुभव के आधार पर लिखेंगे। उदाहरण के लिए) स्वाद मीठा था। खाने की चीज चीनी थी।
उत्तर : (छात्र अपने अनुभव के आधार पर लिखेंगे। सामान्यतः) मीठे स्वाद का पता जीभ के आगे के हिस्से में सबसे ज्यादा चला।
उत्तर : (छात्र अपने अनुभव के आधार पर जीभ के नक्शे में भरेंगे। सामान्य जानकारी यह है कि जीभ के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग स्वादों के प्रति संवेदनशील होते हैं।)
जीभ के आगे का हिस्सा: मीठा और नमकीन स्वाद।
जीभ के पीछे का हिस्सा: कड़वा स्वाद।
जीभ के किनारे का हिस्सा: खट्टा स्वाद।
उत्तर : नहीं, स्वाद का पता सिर्फ जीभ पर ही चलता है। होंठ, तालू या गालों के अंदर के हिस्से में स्वाद कलिकाएँ नहीं होतीं, इसलिए वहाँ रखने पर केवल उस चीज का स्पर्श या ठंडा-गर्म पता चलता है, स्वाद नहीं।
उत्तर : जीभ सूखी होने पर चीनी का स्वाद तुरंत नहीं आया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि भोजन का स्वाद पहचानने के लिए लार (मुँह का पानी) ज़रूरी है। लार भोजन के कणों में घुलकर उन्हें स्वाद कलिकाओं तक पहुँचाती है। बिना लार के, स्वाद कलिकाएँ ठीक से काम नहीं कर पातीं।
उत्तर : हाँ, जीभ की सतह बिल्कुल चिकनी नहीं होती। उस पर छोटे-छोटे दाने या उभार नज़र आते हैं। इन्हीं उभारों में स्वाद कलिकाएँ होती हैं, जो हमें विभिन्न स्वादों का पता लगाने में मदद करती हैं।
| खाने की चीज | स्वाद |
|---|---|
| टमाटर (कच्चा) | हल्का खट्टा, हल्का मीठा और रसीला |
| प्याज (कच्चा) | तीखा, कड़वा और चरचराहट देने वाला |
| सौंफ | मीठी, सुगंधित और ठंडक देने वाली |
| लौंग | तीखी, सुगंधित और थोड़ी जलन देने वाली |
| अदरक | तीखा, गर्म और ज़ायकेदार |
उत्तर : झुम्पा ने शायद हरी मिर्च या कोई बहुत तीखी चीज खाई होगी। तीखापन महसूस होने पर अक्सर लोग 'सी-सी' या 'आह' की आवाज़ निकालते हैं और ठंडा पानी माँगते हैं।
उत्तर : (यह एक मनोरंजक गतिविधि है। छात्र इसे करके अपने अनुभव लिख सकते हैं।)
उदाहरण:
- मीठा खाने पर: "म्मम्म... वाह!"
- बहुत खट्टा खाने पर: "ऊह... खट्टा है!" (आँखें मूंदकर)
- बहुत ठंडा आइसक्रीम खाने पर: "ब्र्र्र... ठंडा!"
(क) क्या चबाने से स्वाद में बदलाव आया?
उत्तर : थोड़ा चबाने पर रोटी या चावल का अपना सादा स्वाद ही रहता है। ज्यादा बदलाव नहीं आता।
(ख) अब रोटी का टुकड़ा या कुछ चावल मुँह में डालो और 20-25 बार चबाओ। क्या देर तक चबाने से स्वाद में बदलाव आया?
उत्तर : हाँ, जब हम रोटी या चावल को लंबे समय तक चबाते हैं, तो वह धीरे-धीरे मीठा लगने लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारी लार में मौजूद एंजाइम स्टार्च (रोटी/चावल में पाया जाने वाला पदार्थ) को शक्कर में बदलना शुरू कर देते हैं। यह पाचन की पहली सीढ़ी है।
उत्तर : बड़े लोग ऐसा इसलिए कहते हैं क्योंकि अच्छी तरह चबाकर खाने से भोजन छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाता है। इससे लार उसके साथ अच्छी तरह मिल पाती है और पेट के लिए उसे पचाना आसान हो जाता है। जल्दी-जल्दी निगलने से भोजन ठीक से नहीं पचता, जिससे पेट दर्द या बदहज़मी हो सकती है।
उत्तर : जब हम अमरूद का कड़ा टुकड़ा मुँह में डालते हैं, तो पहले वह सख्त लगता है। चबाने शुरू करते ही दाँत उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ते हैं। साथ ही, लार उससे मिलकर उसे नरम और गीला बनाने लगती है। लार के एंजाइम उसके स्वाद में भी बदलाव लाते हैं। अंत में, वही सख्त टुकड़ा एक नरम, गीले गोले के रूप में बदल जाता है, जिसे निगलना आसान हो जाता है।
उत्तर : हमारे मुँह में बनने वाली लार के तीन मुख्य काम हैं:
उत्तर : खाना हमारे शरीर में एक लंबी नली (पाचन तंत्र) से गुज़रता है। यह रास्ता इस प्रकार है:
मुँह → गले से होकर ग्रासनली (फूड पाइप) → पेट → छोटी आँत → बड़ी आँत
इस दौरान भोजन छोटे-छोटे पोषक तत्वों में टूटता है जो रक्त के द्वारा शरीर के हर हिस्से में पहुँचाए जाते हैं। बचा हुआ अपशिष्ट मल के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है।
(छात्रों के चित्र मुख्य रास्ते के हिसाब से एक जैसे ही होंगे।)
उत्तर : नहीं, सचमुच पेट में चूहे नहीं कूदते। यह एक मुहावरा है जिसका मतलब है बहुत ज़ोर की भूख लगना। जब हमें भूख लगती है तो पेट खाली होता है और उसकी मांसपेशियाँ सिकुड़ती-फैलती हैं, जिससे कभी-कभी आवाज़ या हलचल जैसा महसूस होता है। लोग इसी अनुभव को मज़ेदार तरीके से "पेट में चूहे कूदना" कह देते हैं।
उत्तर : भूख लगने के कई संकेत होते हैं, जैसे:
उत्तर : अगर हम दो दिन तक कुछ भी न खाएँ तो:
उत्तर : नहीं, हम दो दिन तक पानी के बिना नहीं रह सकते। पानी जीवन के लिए भोजन से भी ज़्यादा ज़रूरी है। हम जो पानी पीते हैं, वह:
उत्तर : रश्मि शायद एक गरीब परिवार से है जहाँ पर्याप्त पैसे नहीं हैं कि वह दिन में दो या तीन बार पेट भर खाना खा सके। इसलिए वह मजबूरी में पूरे दिन में सिर्फ एक रोटी खाकर ही गुज़ारा करती होगी।
उत्तर : कैलाश को शायद खेल-कूद में ज़्यादा दिलचस्पी न हो। अगर वह ज़रूरत से ज़्यादा मोटा है और केवल जंक फूड (चिप्स, कोल्ड ड्रिंक) खाता है, तो उसमें शारीरिक गतिविधि करने की ऊर्जा और इच्छा दोनों की कमी हो सकती है। उसे आलसी और सुस्त महसूस हो सकता है।
उत्तर : सही खाने का मतलब है संतुलित आहार लेना। यह वह खाना है जिसमें हमारे शरीर की वृद्धि, विकास और स्वस्थ रहने के लिए ज़रूरी सभी पोषक तत्व सही मात्रा में हों, जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन, खनिज, वसा और पानी। इसमें हरी सब्जियाँ, फल, दालें, दूध और साबुत अनाज शामिल होते हैं।
उत्तर : दोनों का खाना संतुलित नहीं है:
रश्मि का खाना: वह बहुत कम खाती है। उसके शरीर को विकास और दैनिक काम करने के लिए जितनी ऊर्जा और पोषण चाहिए, वह एक रोटी से नहीं मिल पाता। इससे वह कमजोर और कुपोषित हो सकती है।
कैलाश का खाना: वह घर का पौष्टिक खाना छोड़कर जंक फूड खाता है। चिप्स और कोल्ड ड्रिंक में केवल खाली कैलोरी, नमक और चीनी होती है, जिससे मोटापा बढ़ता है लेकिन पोषण नहीं मिलता। उसके शरीर को विटामिन, प्रोटीन आदि नहीं मिल पाते।
उत्तर : (छात्र अपने दादा-दादी से बात करके लिखेंगे। एक उदाहरण इस प्रकार हो सकता है:)
मेरे दादाजी बताते हैं कि जब वे मेरी उम्र के थे तो वे सुबह जल्दी उठकर स्कूल के लिए पैदल चलते थे। शाम को वे खेतों में काम करते या पशुओं की देखभाल करते थे। वे सादा और ताज़ा खाना खाते थे जैसे रोटी, दाल, स्थानीय सब्जियाँ, दही और कभी-कभी फल। उन दिनों पैक्ड चिप्स या कोल्ड ड्रिंक जैसी चीजें नहीं होती थीं।
उत्तर : (छात्र अपने बारे में लिखेंगे। उदाहरण:)
हमारा जीवन उनसे बहुत अलग है। हम स्कूल बस या कार से जाते हैं। खेलने के लिए मैदान की जगह अक्सर मोबाइल या कंप्यूटर गेम खेलते हैं। हमारे खाने में घर का बना खाना तो होता है, लेकिन साथ ही हम बिस्कुट, नमकीन, चॉकलेट और कोल्ड ड्रिंक भी खूब पीते हैं। हमारा शारीरिक परिश्रम बहुत कम है।
उत्तर : (छात्र अपना विश्लेषण लिखेंगे।) अलग है। पहले के बच्चों की जीवनशैली अधिक सक्रिय और प्रकृति के करीब थी। आज हमारी जीवनशैली अधिक आरामदायक और तकनीक पर निर्भर है, जिससे शारीरिक गतिविधि कम और जंक फूड का सेवन ज्यादा हो गया है।
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