UP Board class 5 EVS 17. फांद ली दीवार is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. class 5 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
61. क्या तुम्हारे घर के आस-पास भी कोई खेलने की जगह है?
उत्तर: हाँ, मेरे घर के पास एक बड़ा मैदान है जहाँ हम सभी बच्चे खेलने जाते हैं। यह एक सार्वजनिक पार्क के अंदर है और यहाँ खेलने के लिए बहुत जगह है।
उत्तर: उस मैदान में बच्चे क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन और खो-खो जैसे खेल खेलते हैं। सुबह-शाम बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे और युवा वहाँ खेलते और व्यायाम करते नजर आते हैं।
उत्तर: जी हाँ, बिल्कुल मिलता है। वहाँ अलग-अलग उम्र के बच्चों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित है। मेरी उम्र के बच्चे शाम के समय वहाँ जाकर अपने मनपसंद खेल खेल सकते हैं।
उत्तर: खेल के अलावा, वहाँ लोग सुबह-सुबह टहलने और दौड़ने आते हैं। कुछ लोग योगा और व्यायाम भी करते हैं। शाम को बुजुर्ग लोग बैठकर आपस में बातचीत करते हैं और बच्चे झूलों पर खेलते हैं। कभी-कभी मेलों और सामुदायिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होता है।
उत्तर: हाँ, कभी-कभी मुझे रोका जाता है, लेकिन इसके पीछे कुछ अच्छे कारण होते हैं। जैसे कि जब मैं बहुत देर तक बाहर खेलता रहता हूँ या फिर पढ़ाई का समय होता है, तब मेरे माता-पिता मुझे खेलने से मना कर देते हैं। वे खासतौर पर ऐसे खेलों से रोकते हैं जिनमें चोट लगने का डर ज्यादा होता है, जैसे सड़क पर फुटबॉल खेलना।
उत्तर: मेरे माता-पिता ने मुझे रोका है। उनका कहना है कि सड़क पर खेलना सुरक्षित नहीं है क्योंकि वहाँ से गाड़ियाँ गुजरती रहती हैं। उन्होंने मुझे समझाया कि चोट लगने का खतरा रहता है। फिर मैंने उनकी बात मान ली और अब मैं केवल पार्क या मैदान में ही जाकर खेलता हूँ।
उत्तर: हाँ, मेरे पिताजी और स्कूल के कोच ने मेरी बहुत मदद की है। वे मुझे हमेशा अच्छे से खेलने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। मेरे पिताजी मेरे लिए खेल का सामान लाते हैं और मेरे कोच मुझे नई-नई तकनीकें सिखाते हैं। उनका कहना है कि खेल से शरीर स्वस्थ और मन प्रसन्न रहता है।
51. क्या तुम्हारे इलाके या स्कूल में लड़के और लड़कियाँ अलग-अलग तरह के खेल खेलते हैं? अगर हाँ, तो लड़के क्या खेलते हैं और लड़कियाँ क्या खेलती हैं?
उत्तर: मेरे स्कूल में लड़के और लड़कियाँ दोनों ही लगभग सभी तरह के खेल खेलते हैं। हाँ, कभी-कभी देखने में आता है कि लड़के क्रिकेट और फुटबॉल ज्यादा खेलते हैं, जबकि लड़कियाँ बैडमिंटन, खो-खो और कबड्डी में ज्यादा रुचि दिखाती हैं। लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता, कई लड़कियाँ क्रिकेट भी बहुत अच्छा खेलती हैं।
उत्तर: मेरी सोच है कि खेलने का तरीका या कौशल लड़का या लड़की होने पर निर्भर नहीं करता। अगर किसी को किसी खेल में रुचि है और वह उसे नियमित अभ्यास करता है, तो वह उसमें माहिर हो सकता है। फर्क सिर्फ समाज की पुरानी सोच के कारण दिखाई देता है, असल में कोई अंतर नहीं है।
उत्तर: मुझे बिल्कुल नहीं लगता कि लड़के-लड़कियों के खेलों में अंतर करना चाहिए। हर किसी को अपनी पसंद और रुचि का खेल खेलने का अधिकार और मौका मिलना चाहिए। अंतर करने से हम कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे आने से रोक देते हैं।
उत्तर: हाँ, मैंने अपने स्कूल की ओर से जिला स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता में भाग लिया था। उस समय मुझे बहुत गर्व महसूस हुआ कि मैं अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व कर रहा हूँ। थोड़ा तनाव भी था, लेकिन टीम के साथियों और कोच के समर्थन से हमने अच्छा प्रदर्शन किया। यह एक यादगार और सीख भरा अनुभव था।
उत्तर: हाँ, मैं एक राज्य-स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पड़ोस के जिले के एक स्टेडियम में गया था। वह जगह बहुत बड़ी और साफ-सुथरी थी, उसमें अच्छे खेल मैदान और दर्शकों के बैठने की अच्छी व्यवस्था थी। दूसरी जगह जाकर नए दोस्त बनाना और अलग वातावरण में खेलना एक रोमांचक और नया अनुभव था।
उत्तर: हाँ, मैंने टेलीविजन पर भारत और दूसरे देशों के बीच कई मैच देखे हैं। मैंने भारत बनाम पाकिस्तान का क्रिकेट मैच, भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया का हॉकी मैच और भारत बनाम बांग्लादेश का फुटबॉल मैच देखा है। ये मैच बहुत ही रोमांचक और जोश से भरे हुए होते हैं।
उत्तर: ऐसा इसलिए होता है क्योंकि क्रिकेट भारत में सबसे ज्यादा लोकप्रिय खेल है और इसके मैचों का टीवी, अखबारों में बहुत प्रचार होता है। हाँ, धीरे-धीरे अन्य खेलों के खिलाड़ी भी लोकप्रिय हो रहे हैं। जैसे हॉकी के पी.आर. श्रीजेश, बैडमिंटन की पी.वी. सिंधु, कबड्डी के अजय ठाकुर और फुटबॉल के सुनील छेत्री को भी बहुत से लोग जानते और पहचानते हैं। मैं भी इनमें से कई खिलाड़ियों को पहचानता हूँ। मुझे लगता है कि सभी खेलों और खिलाड़ियों को समान महत्व और प्रचार मिलना चाहिए।
उत्तर: अगर लड़कियों को उनकी पसंद के काम करने से रोका जाएगा, तो यह उनके विकास में बाधा डालेगा। समाज उनकी प्रतिभा और योगदान से वंचित रह जाएगा। देश की आधी आबादी (लड़कियाँ और महिलाएँ) अपनी क्षमता के अनुसार देश के विकास में भागीदार नहीं बन पाएँगी, जिससे देश पीछे रह जाएगा। हर किसी को अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए।
उत्तर: मुझे बहुत बुरा लगेगा। मैं निराश और दुखी महसूस करूँगा। मुझे लगेगा कि मेरी इच्छाओं और रुचियों का सम्मान नहीं किया जा रहा है। साथ ही, मुझे एक नई चीज़ सीखने और अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका नहीं मिल पाएगा, जो कि सही नहीं है।
उत्तर: मैंने खेल के क्षेत्र में नाम कमाने वाली कई महिला खिलाड़ियों के बारे में सुना है:
उत्तर: हाँ, खेल के अलावा भी कई क्षेत्रों में महिलाओं ने शानदार पहचान बनाई है। जैसे:
उत्तर: कुछ साल पहले तक ऐसा हो सकता था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। आज पी.वी. सिंधु, मैरी कॉम, इंदिरा नूयी जैसी महिलाओं के नाम भी उतने ही प्रसिद्ध हैं। फिर भी, कुछ क्षेत्रों में पुरानी सोच के कारण महिलाओं के काम को उतना महत्व या प्रचार नहीं मिल पाता, जितना मिलना चाहिए। हमें इस सोच को बदलने की जरूरत है और हर क्षेत्र में सफल महिलाओं के बारे में भी उतनी ही चर्चा करनी चाहिए।
उत्तर: अगर सभी लड़कियों को खेल या नाटक जैसी गतिविधियों से रोका जाए, तो मुझे लगेगा कि दुनिया बहुत नीरस और अधूरी है। हम लड़कियों की प्रतिभा, उनके जोश और उनके दृष्टिकोण से वंचित रह जाएँगे। ठीक इसी तरह, अगर सभी लड़कों को रोका जाए, तो भी दुनिया वैसी ही अधूरी और उदास लगेगी। एक अच्छी और संपन्न दुनिया के लिए सभी को, चाहे वह लड़का हो या लड़की, अपनी रुचि के काम करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
उत्तर: हाँ, मैं डॉ. किरण बेदी जैसा बनना चाहूँगा। वह भारत की पहली महिला IPS अधिकारी थीं। उन्होंने न केवल पुलिस सेवा में बल्कि समाज सुधार के कामों में भी अद्भुत काम किया है। उनका जीवन अनुशासन, साहस और दूसरों की सेवा से भरा है। मैं भी उनकी तरह ईमानदार, बहादुर और समाज के लिए कुछ अच्छा करने वाला इंसान बनना चाहता हूँ।
51. क्या तुमने या तुम्हारे किसी दोस्त ने कभी अपने स्कूल, क्लास या मोहल्ले की न में रा है? किसके साथ? कौन-सा खेल?
उत्तर: हाँ, मैंने और मेरे दोस्तों ने अपने मोहल्ले की क्रिकेट टीम के लिए खेला है। हमने अपने मोहल्ले की टीम बनाई थी और पड़ोस के दूसरे मोहल्ले की टीम के साथ एक दोस्ताना क्रिकेट मैच खेला था। यह मैच हमारे स्थानी पार्क में हुआ था और इसमें सभी उम्र के लोगों ने हिस्सा लिया था।
उत्तर: अपने लिए खेलने का मतलब है सिर्फ अपने स्कोर या प्रदर्शन पर ध्यान देना। टीम के लिए खेलने का मतलब है टीम की जीत को सबसे ऊपर रखना, साथियों की मदद करना और सामूहिक रणनीति के अनुसार खेलना।
मुझे टीम के लिए खेलना ज्यादा अच्छा लगता है। क्योंकि जब पूरी टीम मिलकर खेलती है और जीतती है, तो खुशी दोगुनी हो जाती है। इसमें एकता, सहयोग और सच्ची दोस्ती की भावना पनपती है।
उत्तर: मेरी टीम नागपाड़ा की टीम जैसी है। क्योंकि:
उत्तर: मुझे हमेशा टीम के लिए खेलना अच्छा लगता है। टीम में रहकर सिर्फ अपने लिए खेलने से टीम का नुकसान हो सकता है और माहौल खराब हो सकता है। जब हम टीम के लिए खेलते हैं, तो हर कोई अपना सर्वश्रेष्ठ देता है, जिससे पूरी टीम मजबूत बनती है और जीतने की संभावना बढ़ जाती है। टीम की सफलता में ही हमारी सच्ची सफलता छिपी होती है।
01. अखबार की रिपोर्ट में लिखा था, अफ़साना दीवार फाँद चुकी है। लिंग-भेद की दीवार भी जो इसकी माँ ने खड़ी की है। सोचकर अपने शब्दों में लिखो कि वह कौन-सी दीवार थी। लिंग-भेद का क्या मतलब होगा?
उत्तर: अफसाना की माँ ने उसके मन में यह धारणा बना दी थी कि लड़कियाँ क्रिकेट नहीं खेल सकतीं, यह सिर्फ लड़कों का खेल है। यही पुरानी सोच एक दीवार थी जो अफसाना और उसके सपने के बीच खड़ी थी। लिंग-भेद का मतलब है लड़के और लड़कियों के बीच केवल उनके लिंग (यानी लड़का या लड़की होने) के आधार पर अंतर करना, उनके काम या अवसरों को बाँट देना। जैसे यह सोचना कि लड़के मजबूत काम करेंगे और लड़कियाँ घर का काम, या लड़के क्रिकेट खेलेंगे और लड़कियाँ गुड़िया से खेलेंगी।
51. तुम क्या सोचते हो लड़के-लड़कियों के खेलों में अंतर करना चाहिए कि नहीं। लिखो।
उत्तर: मैं सोचता हूँ कि लड़के-लड़कियों के खेलों में बिल्कुल भी अंतर नहीं करना चाहिए। खेल प्रतिभा, रुचि और मेहनत पर निर्भर करता है, लड़का या लड़की होने पर नहीं। हर बच्चे को वह खेल खेलने का पूरा अधिकार होना चाहिए जिसमें उसकी रुचि और क्षमता है। अंतर करने से हम कई भविष्य के चैंपियनों को पीछे धकेल देते हैं।
उत्तर: अगर मैं अपनी टीम का लीडर बनूँगा, तो मैं इन बातों पर ध्यान दूँगा:
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