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UP Board class 5 EVS (17. फांद ली दीवार) solution PDF

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UP Board class 5 EVS (17. फांद ली दीवार) solution

UP Board class 5 EVS 17. फांद ली दीवार Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Solutions for Class 5 EVS आस-पास

पाठ - 17: फांद ली दीवार

पता करो।

61. क्या तुम्हारे घर के आस-पास भी कोई खेलने की जगह है?

उत्तर: हाँ, मेरे घर के पास एक बड़ा मैदान है जहाँ हम सभी बच्चे खेलने जाते हैं। यह एक सार्वजनिक पार्क के अंदर है और यहाँ खेलने के लिए बहुत जगह है।

५2. वहाँ कौन-कौन-से खेल खेले जाते हैं? कौन-कौन खेलता है?

उत्तर: उस मैदान में बच्चे क्रिकेट, फुटबॉल, बैडमिंटन और खो-खो जैसे खेल खेलते हैं। सुबह-शाम बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे और युवा वहाँ खेलते और व्यायाम करते नजर आते हैं।

53. क्या वहाँ तुम्हारी उम्र के बच्चों को भी खेलने का मौका मिलता है?

उत्तर: जी हाँ, बिल्कुल मिलता है। वहाँ अलग-अलग उम्र के बच्चों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित है। मेरी उम्र के बच्चे शाम के समय वहाँ जाकर अपने मनपसंद खेल खेल सकते हैं।

54. वहाँ खेल के अलावा और क्या-क्या होता है?

उत्तर: खेल के अलावा, वहाँ लोग सुबह-सुबह टहलने और दौड़ने आते हैं। कुछ लोग योगा और व्यायाम भी करते हैं। शाम को बुजुर्ग लोग बैठकर आपस में बातचीत करते हैं और बच्चे झूलों पर खेलते हैं। कभी-कभी मेलों और सामुदायिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होता है।

बताओ 01. क्या तुम्हारे घर में किसी ने तुम्हें कुछ खेलने से रोका है? कौन-कौन-से खेल?

उत्तर: हाँ, कभी-कभी मुझे रोका जाता है, लेकिन इसके पीछे कुछ अच्छे कारण होते हैं। जैसे कि जब मैं बहुत देर तक बाहर खेलता रहता हूँ या फिर पढ़ाई का समय होता है, तब मेरे माता-पिता मुझे खेलने से मना कर देते हैं। वे खासतौर पर ऐसे खेलों से रोकते हैं जिनमें चोट लगने का डर ज्यादा होता है, जैसे सड़क पर फुटबॉल खेलना।

५९2. किसने रोका? क्यों? फिर तुमने क्या किया?

उत्तर: मेरे माता-पिता ने मुझे रोका है। उनका कहना है कि सड़क पर खेलना सुरक्षित नहीं है क्योंकि वहाँ से गाड़ियाँ गुजरती रहती हैं। उन्होंने मुझे समझाया कि चोट लगने का खतरा रहता है। फिर मैंने उनकी बात मान ली और अब मैं केवल पार्क या मैदान में ही जाकर खेलता हूँ।

53. क्या किसी ने तुम्हारी मदद की, खेलने के लिए प्रोत्साहित किया?

उत्तर: हाँ, मेरे पिताजी और स्कूल के कोच ने मेरी बहुत मदद की है। वे मुझे हमेशा अच्छे से खेलने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। मेरे पिताजी मेरे लिए खेल का सामान लाते हैं और मेरे कोच मुझे नई-नई तकनीकें सिखाते हैं। उनका कहना है कि खेल से शरीर स्वस्थ और मन प्रसन्न रहता है।

चर्चा करो

51. क्या तुम्हारे इलाके या स्कूल में लड़के और लड़कियाँ अलग-अलग तरह के खेल खेलते हैं? अगर हाँ, तो लड़के क्‍या खेलते हैं और लड़कियाँ क्या खेलती हैं?

उत्तर: मेरे स्कूल में लड़के और लड़कियाँ दोनों ही लगभग सभी तरह के खेल खेलते हैं। हाँ, कभी-कभी देखने में आता है कि लड़के क्रिकेट और फुटबॉल ज्यादा खेलते हैं, जबकि लड़कियाँ बैडमिंटन, खो-खो और कबड्डी में ज्यादा रुचि दिखाती हैं। लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता, कई लड़कियाँ क्रिकेट भी बहुत अच्छा खेलती हैं।

62. तुम क्या सोचते हो कि लड़के-लड़कियों के खेल और खेलने के तरीकों में कोई अंतर होता है?

उत्तर: मेरी सोच है कि खेलने का तरीका या कौशल लड़का या लड़की होने पर निर्भर नहीं करता। अगर किसी को किसी खेल में रुचि है और वह उसे नियमित अभ्यास करता है, तो वह उसमें माहिर हो सकता है। फर्क सिर्फ समाज की पुरानी सोच के कारण दिखाई देता है, असल में कोई अंतर नहीं है।

53. तुम्हें क्या लगता है, लड़के-लड़कियों के खेलों में अंतर करना चाहिए या नहीं?

उत्तर: मुझे बिल्कुल नहीं लगता कि लड़के-लड़कियों के खेलों में अंतर करना चाहिए। हर किसी को अपनी पसंद और रुचि का खेल खेलने का अधिकार और मौका मिलना चाहिए। अंतर करने से हम कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे आने से रोक देते हैं।

54. अपने स्कूल या इलाके की तरफ से तुमने किसी खेल या प्रतियोगिता में कभी हिस्सा लिया है? तब तुम्हें कैसा लगा?

उत्तर: हाँ, मैंने अपने स्कूल की ओर से जिला स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता में भाग लिया था। उस समय मुझे बहुत गर्व महसूस हुआ कि मैं अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व कर रहा हूँ। थोड़ा तनाव भी था, लेकिन टीम के साथियों और कोच के समर्थन से हमने अच्छा प्रदर्शन किया। यह एक यादगार और सीख भरा अनुभव था।

55. क्‍या तुम खेलने के लिए दूसरी जगह गए थे? कैसी थी वह जगह? तुम्हें दूसरी जगह जाना कैसा लगा?

उत्तर: हाँ, मैं एक राज्य-स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पड़ोस के जिले के एक स्टेडियम में गया था। वह जगह बहुत बड़ी और साफ-सुथरी थी, उसमें अच्छे खेल मैदान और दर्शकों के बैठने की अच्छी व्यवस्था थी। दूसरी जगह जाकर नए दोस्त बनाना और अलग वातावरण में खेलना एक रोमांचक और नया अनुभव था।

066. क्या तुमने भारत और दूसरे देशों के बीच कोई मैच देखे हैं? कौन-से?

उत्तर: हाँ, मैंने टेलीविजन पर भारत और दूसरे देशों के बीच कई मैच देखे हैं। मैंने भारत बनाम पाकिस्तान का क्रिकेट मैच, भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया का हॉकी मैच और भारत बनाम बांग्लादेश का फुटबॉल मैच देखा है। ये मैच बहुत ही रोमांचक और जोश से भरे हुए होते हैं।

57. हम भारत के क्रिकेट खिलाड़ियों के बारे में जानते हैं, उन्हें चाहते हैं। ऐसा क्यों होता है? क्या किसी और खेल के भारतीय खिलाड़ियों को भी ऐसे ही सब जानते और चाहते हैं? हाँ या नहीं? तुम्हें इसके बारे में क्या लगता है? जैसे भारत के फुटबॉल या कबड्डी टीम के खिलाड़ियों को तुम पहचानते हो?

उत्तर: ऐसा इसलिए होता है क्योंकि क्रिकेट भारत में सबसे ज्यादा लोकप्रिय खेल है और इसके मैचों का टीवी, अखबारों में बहुत प्रचार होता है। हाँ, धीरे-धीरे अन्य खेलों के खिलाड़ी भी लोकप्रिय हो रहे हैं। जैसे हॉकी के पी.आर. श्रीजेश, बैडमिंटन की पी.वी. सिंधु, कबड्डी के अजय ठाकुर और फुटबॉल के सुनील छेत्री को भी बहुत से लोग जानते और पहचानते हैं। मैं भी इनमें से कई खिलाड़ियों को पहचानता हूँ। मुझे लगता है कि सभी खेलों और खिलाड़ियों को समान महत्व और प्रचार मिलना चाहिए।

58. लड़कियों को पढ़ाई, खेल या उनकी पसंद के कामों से रोका जाए तो क्या होगा?

उत्तर: अगर लड़कियों को उनकी पसंद के काम करने से रोका जाएगा, तो यह उनके विकास में बाधा डालेगा। समाज उनकी प्रतिभा और योगदान से वंचित रह जाएगा। देश की आधी आबादी (लड़कियाँ और महिलाएँ) अपनी क्षमता के अनुसार देश के विकास में भागीदार नहीं बन पाएँगी, जिससे देश पीछे रह जाएगा। हर किसी को अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए।

09. अगर तुम्हें किस खेल या ड्रामे में शामिल होने से रोका जाए तो तुम्हें कैसा लगेगा?

उत्तर: मुझे बहुत बुरा लगेगा। मैं निराश और दुखी महसूस करूँगा। मुझे लगेगा कि मेरी इच्छाओं और रुचियों का सम्मान नहीं किया जा रहा है। साथ ही, मुझे एक नई चीज़ सीखने और अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका नहीं मिल पाएगा, जो कि सही नहीं है।

0510. खेल के क्षेत्र में जमने किन-किन महिला खिलाड़ियों के बारे में सुना है? कौन-कौन और किस खेल में हैं?

उत्तर: मैंने खेल के क्षेत्र में नाम कमाने वाली कई महिला खिलाड़ियों के बारे में सुना है:

  1. पी.वी. सिंधु - बैडमिंटन (ओलंपिक पदक विजेता)
  2. मिताली राज - क्रिकेट (भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान)
  3. साइना नेहवाल - बैडमिंटन
  4. मैरी कॉम - मुक्केबाजी (विश्व चैंपियन)
  5. दीपा कर्माकर - जिम्नास्टिक
  6. हिमा दास - दौड़ (धावक)

011. तुमने खेल के अलावा और किस क्षेत्र में पहचान बनाने वाली महिलाओं के बारे में सुना है?

उत्तर: हाँ, खेल के अलावा भी कई क्षेत्रों में महिलाओं ने शानदार पहचान बनाई है। जैसे:

  • विज्ञान में: कल्पना चावला (अंतरिक्ष यात्री), डॉ. तस्लीमा नसरीन (वैज्ञानिक)
  • रक्षा सेवाओं में: पायलट अवनि चतुर्वेदी (फाइटर पायलट)
  • लेखन में: महादेवी वर्मा, अमृता प्रीतम (लेखिकाएँ)
  • समाज सेवा में: मदर टेरेसा
  • राजनीति में: इंदिरा गांधी, प्रतिभा पाटिल (भारत की पूर्व राष्ट्रपति)

012. तुम्हें क्या लगता है कि पहचान बनाने वाली महिलाओं के नाम पुरुष या लड़कों के नामों की अपेक्षा कम जाने जाते हैं? ऐसा क्‍यों?

उत्तर: कुछ साल पहले तक ऐसा हो सकता था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। आज पी.वी. सिंधु, मैरी कॉम, इंदिरा नूयी जैसी महिलाओं के नाम भी उतने ही प्रसिद्ध हैं। फिर भी, कुछ क्षेत्रों में पुरानी सोच के कारण महिलाओं के काम को उतना महत्व या प्रचार नहीं मिल पाता, जितना मिलना चाहिए। हमें इस सोच को बदलने की जरूरत है और हर क्षेत्र में सफल महिलाओं के बारे में भी उतनी ही चर्चा करनी चाहिए।

5013. अगर सभी लड़कियों को खेल या ड्रामे का मौका न दिया जाए तो ऐसी दुनिया तुम्हें कैसी लगेगी? ऐसा ही सभी लड़कों के साथ हो तो तुम्हें कैसा लगेगा?

उत्तर: अगर सभी लड़कियों को खेल या नाटक जैसी गतिविधियों से रोका जाए, तो मुझे लगेगा कि दुनिया बहुत नीरस और अधूरी है। हम लड़कियों की प्रतिभा, उनके जोश और उनके दृष्टिकोण से वंचित रह जाएँगे। ठीक इसी तरह, अगर सभी लड़कों को रोका जाए, तो भी दुनिया वैसी ही अधूरी और उदास लगेगी। एक अच्छी और संपन्न दुनिया के लिए सभी को, चाहे वह लड़का हो या लड़की, अपनी रुचि के काम करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए

014. क्‍या तुम किसी लड़की या महिला को जानते हो, जिसके जैसा तुम बनना चाहते हो? फिल्‍म एक्टर और मॉडल छोड़कर कुछ और सोचो।

उत्तर: हाँ, मैं डॉ. किरण बेदी जैसा बनना चाहूँगा। वह भारत की पहली महिला IPS अधिकारी थीं। उन्होंने न केवल पुलिस सेवा में बल्कि समाज सुधार के कामों में भी अद्भुत काम किया है। उनका जीवन अनुशासन, साहस और दूसरों की सेवा से भरा है। मैं भी उनकी तरह ईमानदार, बहादुर और समाज के लिए कुछ अच्छा करने वाला इंसान बनना चाहता हूँ।

लिखो

51. क्या तुमने या तुम्हारे किसी दोस्त ने कभी अपने स्कूल, क्लास या मोहल्ले की न में रा है? किसके साथ? कौन-सा खेल?

उत्तर: हाँ, मैंने और मेरे दोस्तों ने अपने मोहल्ले की क्रिकेट टीम के लिए खेला है। हमने अपने मोहल्ले की टीम बनाई थी और पड़ोस के दूसरे मोहल्ले की टीम के साथ एक दोस्ताना क्रिकेट मैच खेला था। यह मैच हमारे स्थानी पार्क में हुआ था और इसमें सभी उम्र के लोगों ने हिस्सा लिया था।

52. टीम के लिए खेलना या अपने लिए खेलने में क्या अंतर है? तुम्हें क्या अच्छा लगता है? क्यों?

उत्तर: अपने लिए खेलने का मतलब है सिर्फ अपने स्कोर या प्रदर्शन पर ध्यान देना। टीम के लिए खेलने का मतलब है टीम की जीत को सबसे ऊपर रखना, साथियों की मदद करना और सामूहिक रणनीति के अनुसार खेलना।
मुझे टीम के लिए खेलना ज्यादा अच्छा लगता है। क्योंकि जब पूरी टीम मिलकर खेलती है और जीतती है, तो खुशी दोगुनी हो जाती है। इसमें एकता, सहयोग और सच्ची दोस्ती की भावना पनपती है।

53. तुम्हारी टीम अफसाना के शोलापुर वाली टीम जैसी है या नागपाड़ा की टीम जैसी? क्‍यों?

उत्तर: मेरी टीम नागपाड़ा की टीम जैसी है। क्योंकि:

  • हमारी टीम में सभी सदस्य एक-दूसरे का सम्मान करते हैं।
  • अगर कोई गलती करता है, तो हम उसका मजाक नहीं उड़ाते बल्कि उसे सही तरीका बताते हैं और प्रोत्साहित करते हैं।
  • हमारा लक्ष्य सिर्फ जीतना नहीं, बल्कि अच्छा खेल और अच्छा व्यवहार दिखाना भी है।
  • हम सभी मिलकर एक जुट होकर खेलते हैं।

54. टीम में रहते हुए भी टीम के लिए खेलना या सिर्फ अपने लिए खेलने में से तुम्हें क्या अच्छा लगता है? क्यों?

उत्तर: मुझे हमेशा टीम के लिए खेलना अच्छा लगता है। टीम में रहकर सिर्फ अपने लिए खेलने से टीम का नुकसान हो सकता है और माहौल खराब हो सकता है। जब हम टीम के लिए खेलते हैं, तो हर कोई अपना सर्वश्रेष्ठ देता है, जिससे पूरी टीम मजबूत बनती है और जीतने की संभावना बढ़ जाती है। टीम की सफलता में ही हमारी सच्ची सफलता छिपी होती है।

सोचकर लिखो |

01. अखबार की रिपोर्ट में लिखा था, अफ़साना दीवार फाँद चुकी है। लिंग-भेद की दीवार भी जो इसकी माँ ने खड़ी की है। सोचकर अपने शब्दों में लिखो कि वह कौन-सी दीवार थी। लिंग-भेद का क्या मतलब होगा?

उत्तर: अफसाना की माँ ने उसके मन में यह धारणा बना दी थी कि लड़कियाँ क्रिकेट नहीं खेल सकतीं, यह सिर्फ लड़कों का खेल है। यही पुरानी सोच एक दीवार थी जो अफसाना और उसके सपने के बीच खड़ी थी। लिंग-भेद का मतलब है लड़के और लड़कियों के बीच केवल उनके लिंग (यानी लड़का या लड़की होने) के आधार पर अंतर करना, उनके काम या अवसरों को बाँट देना। जैसे यह सोचना कि लड़के मजबूत काम करेंगे और लड़कियाँ घर का काम, या लड़के क्रिकेट खेलेंगे और लड़कियाँ गुड़िया से खेलेंगी।

हम क्या समझे |

51. तुम क्‍या सोचते हो लड़के-लड़कियों के खेलों में अंतर करना चाहिए कि नहीं। लिखो।

उत्तर: मैं सोचता हूँ कि लड़के-लड़कियों के खेलों में बिल्कुल भी अंतर नहीं करना चाहिए। खेल प्रतिभा, रुचि और मेहनत पर निर्भर करता है, लड़का या लड़की होने पर नहीं। हर बच्चे को वह खेल खेलने का पूरा अधिकार होना चाहिए जिसमें उसकी रुचि और क्षमता है। अंतर करने से हम कई भविष्य के चैंपियनों को पीछे धकेल देते हैं।

52. अगर तुम अपनी टीम के लीडर बनोगे तो अपनी टीम को तुम कैसे तैयार करोगे?

उत्तर: अगर मैं अपनी टीम का लीडर बनूँगा, तो मैं इन बातों पर ध्यान दूँगा:

  1. सम्मान और एकता: सबसे पहले मैं यह सुनिश्चित करूँगा कि टीम के सभी सदस्य एक-दूसरे का सम्मान करें और आपस में मिलजुल कर रहें।
  2. प्रोत्साहन: हर खिलाड़ी की तारीफ करूँगा और गलतियाँ होने पर उन्हें सुधारने में मदद करूँगा, डाँटूगा नहीं।
  3. टीम भावना: सभी को समझाऊँगा कि टीम की जीत व्यक्तिगत जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण है।
  4. अनुशासन: नियमित अभ्यास, समय की पाबंदी और खेल भावना का पालन करवाऊँगा।
  5. मजा: यह भी ध्यान रखूँगा कि खेलते समय सभी को मजा आए, क्य

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Other Chapters of class 5 EVS
1. कैसे पहचाना चींटी ने दोस्त को
2. कहानी सपेरों की
3. चखने से पचने तक
4. खाएं आम बारहों महीने
5. बीज बीज बीज
6. बूँद -बूँद दरिया -दरिया
7. पानी के प्रयोग
8. मच्छरों की दावत
9. डायरी कमर सीधी ऊपर चढ़ो
10. इमारतें
11. सुनीता
12. खत्म हो जाए तो
13. बसेरा ऊँचाई पर
14. जब धरती काँपी
15. उसी से ठंडा उसी से गर्म
16. कौन करेगा यह काम
17. फांद ली दीवार
18. जाएँ तो जाएँ कहाँ
19. किसानों की कहानी-बीज की जुबानी
20. किसके जंगल
21. किसकी झलक किसकी छाप
22. फिर चला काफिला
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