UP Board Class 10 Hindi 10. प्रेमचंदः बड़े भाई साहब is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 10 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर: छोटे भाई ने बड़े भाई की डाँट सुनकर एक सख्त टाइम-टेबिल बनाया। उसने सोचा कि अब वह नियमित पढ़ेगा और बड़े भाई को नाराज़ होने का कोई मौका नहीं देगा। लेकिन, उसका मन हमेशा खेल-कूद की ओर भागता था। खुले मैदान, दोस्तों के साथ फुटबॉल खेलने का मज़ा, और पतंगबाज़ी का लालच उसे अपनी योजना से भटका देता था, इसलिए वह टाइम-टेबिल का पालन नहीं कर पाया।
उत्तर: गुल्ली-डंडा खेलते हुए पकड़े जाने पर बड़े भाई साहब बहुत नाराज हुए। उन्होंने छोटे भाई को समझाया कि एक बार अच्छे अंक लाने का मतलब यह नहीं कि वह घमंड करने लगे। उन्होंने कहा कि घमंड तो रावण जैसे शक्तिशाली को भी ले डूबा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उसे इसी तरह समय बर्बाद करना है तो वह घर चला जाए, क्योंकि पिता की कमाई को खेल-कूद में उड़ाना ठीक नहीं है।
उत्तर: बड़े भाई साहब अपने आप को एक जिम्मेदार बड़ा भाई मानते थे। वे चाहते थे कि उनका छोटा भाई उनसे अच्छी आदतें सीखे। अगर वे खुद खेलते या आलस करते, तो छोटा भाई भी वही करता। इसलिए, अपने भाई पर अच्छा प्रभाव डालने के लिए और एक आदर्श बनने के चक्कर में उन्हें अपनी इच्छाएँ, जैसे खेलने की या मस्ती करने की, दबानी पड़ती थीं।
उत्तर: बड़े भाई साहब छोटे भाई को लगातार मेहनत करने, खेल-कूद पर कम ध्यान देने और अनुशासन में रहने की सलाह देते थे। वे समझाते थे कि पढ़ाई की नींव मजबूत होनी चाहिए, वरना भविष्य में मुश्किल आएगी। उनका मानना था कि एक बार अच्छे नंबर आ जाने पर घमंड नहीं करना चाहिए, बल्कि और मेहनत करनी चाहिए।
उत्तर: जब बड़े भाई साहब फेल हो गए, तो वे कुछ नरम पड़ गए। छोटे भाई ने इस स्थिति का गलत फायदा उठाया। उसने सोचा कि अब बड़े भाई उसे ज्यादा डाँट नहीं सकते। उसकी स्वच्छंदता बढ़ गई; वह खेल-कूद और पतंगबाज़ी में और भी ज्यादा समय बिताने लगा और पढ़ाई को लगभग नज़रअंदाज कर दिया।
उत्तर: मेरे विचार में, छोटा भाई कक्षा में अव्वल नहीं आता अगर बड़े भाई की डाँट-फटकार न होती। छोटे भाई का मन तो पूरी तरह खेल में लगा था। बड़े भाई का डर ही उसे कुछ देर के लिए किताबों के पास बैठा पाता था। अगर उसे पूरी आज़ादी मिल जाती, तो वह शायद पढ़ाई को बिल्कुल ही छोड़ देता और उसका रिजल्ट खराब होता। इसलिए, बड़े भाई का अनुशासन उसके लिए ज़रूरी था।
उत्तर: इस पाठ में लेखक ने उस शिक्षा प्रणाली पर व्यंग्य किया है जो केवल रटने और परीक्षा पास करने पर जोर देती है। उनके अनुसार, इस प्रणाली में:
उत्तर: बड़े भाई साहब के अनुसार, जीवन की असली समझ केवल किताबें पढ़ने से नहीं आती। यह समझ अनुभव और व्यवहारिक ज्ञान से आती है। उनका कहना था कि हमारे बुजुर्गों ने शायद ज्यादा किताबी पढ़ाई नहीं की, लेकिन जीवन के अनुभवों ने उन्हें बहुत समझदार बना दिया था। इसलिए, किताबी ज्ञान के साथ-साथ दुनिया का अनुभव होना भी बहुत ज़रूरी है।
उत्तर: छोटे भाई के मन में श्रद्धा तब उत्पन्न हुई जब उसे एहसास हुआ कि बड़े भाई साहब उसकी भलाई के लिए कितना कुछ त्याग रहे हैं। उन्होंने खेलने-कूदने की अपनी इच्छाओं को केवल इसलिए दबा दिया ताकि वे एक अच्छे उदाहरण बन सकें। छोटे भाई को यह भी समझ आया कि बड़े भाई को उसकी सफलता से कोई ईर्ष्या नहीं थी, बल्कि वे तो बस अपना फर्ज निभा रहे थे। यह जानकर उसके मन में बड़े भाई के प्रति गहरा आदर पैदा हुआ।
उत्तर: बड़े भाई साहब के स्वभाव की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
उत्तर: बड़े भाई साहब ने जिंदगी के अनुभव को किताबी ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण बताया है। उनका मानना था कि किताबें तो सिर्फ तथ्य बताती हैं, लेकिन असली ज्ञान तब आता है जब हम उन तथ्यों को जीवन में अपनाते हैं और अनुभव से सीखते हैं। अनुभव ही हमें समझदारी, धैर्य और जीवन के असली मूल्य सिखाता है।
उत्तर: पाठ के इस अंश से पता चलता है: "मैं भाई साहब का अदब करता था और उनकी नज़र बचाकर कनकौए उड़ाता था। मांझा देना, कन्ने बाँधना, पतंग टूर्नामेंट की तैयारियाँ आदि सब गुप्त रूप से हल हो जाती थीं।" इससे स्पष्ट है कि वह भाई साहब से डरता भी था और उनका आदर भी करता था, इसीलिए उनकी नज़र बचाकर ही अपने शौक पूरे करता था।
उत्तर: इस कथन का आशय यह है कि परीक्षा उत्तीर्ण कर लेना ही जीवन की सफलता नहीं है। असली सफलता तब है जब हमारी बुद्धि का सही विकास हो, यानी हम सोचने-समझने, समस्याओं को सुलझाने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करें। केवल रटकर नंबर लाना बुद्धि का विकास नहीं है।
उत्तर: इस पंक्ति का आशय है कि जिस तरह एक इंसान कितनी भी मुसीबत में हो, वह अपने प्रियजनों और सांसारिक सुखों के मोह को नहीं छोड़ पाता, ठीक उसी तरह लेखक (छोटा भाई) बड़े भाई की डाँट-फटकार सहने के बावजूद भी खेल-कूद के प्रति अपने लगाव और आकर्षण को नहीं त्याग पाता था।
उत्तर: इसका आशय है कि जिस प्रकार एक मजबूत और ऊँची इमारत के लिए उसकी नींव का मजबूत होना जरूरी है, उसी प्रकार एक सफल और स्थिर जीवन के लिए शिक्षा की नींव मजबूत होनी चाहिए। अगर शुरुआत में ही पढ़ाई ठीक से नहीं हुई, तो भविष्य में ज्ञान का 'मकान' कभी भी गिर सकता है।
उत्तर: इस पंक्ति में लेखक ने कटी हुई पतंग का बहुत सुंदर वर्णन किया है। उसकी आँखें आकाश में उस उड़ती हुई पतंग पर टिकी हैं, जो धीरे-धीरे नीचे गिर रही है। वह पतंग को एक ऐसे यात्री की तरह देख रहा है जो स्वर्ग (आकाश) से धरती पर आ रहा है, मानो कोई आत्मा नए जन्म के लिए धरती पर आ रही हो। इससे छोटे भाई का पतंगों के प्रति गहरा लगाव और कल्पनाशीलता दिखाई देती है।
उत्तर: यह बात इस अंश से स्पष्ट होती है: "मैं तुमसे पाँच साल बड़ा हूँ और हमेशा रहूँगा। मुझे जिंदगी का जो तजुर्बा है, तुम उसकी बराबरी नहीं कर सकते।" इस कथन से बड़े भाई साहब अपने अनुभव को छोटे भाई से अधिक परिपक्व और महत्वपूर्ण बता रहे हैं।
उत्तर: यह बात इस घटना से स्पष्ट होती है जब एक कटी पतंग (कनकौआ) उनके ऊपर से गुजरती है: "भाई साहब लंबे हैं ही, छलांग लगाकर उसकी डोर पकड़ ली और बेतहाशा होस्टल की तरफ़ दौड़े।" इस क्षण में बड़े भाई साहब का भीतर का बच्चा बाहर आ जाता है और वे पतंग लूटने के लिए दौड़ पड़ते हैं, जो दिखाता है कि वे भी मस्ती करना चाहते हैं।
उत्तर: यह भावना इस अंश में साफ झलकती है: "तो भाईजान, यह गरूर दिल से निकाल डालो... मेरे रहते तुम बेराह न चलने पाओगे। अगर तुम यों न मानोगे तो मैं (थप्पड़ दिखाकर) इसका प्रयोग भी कर सकता हूँ। मैं जानता हूँ, तुम्हें बातें जहर लग रही हैं।" यहाँ वे डाँट के साथ-साथ प्यार से समझा भी रहे हैं कि उनका उद्देश्य केवल भाई को सही रास्ते पर लाना है।
उत्तर: कथा नायक (छोटे भाई) की रुचि खेल-कूद के सभी कार्यों में थी। उसे फुटबॉल, बॉलीबॉल, गुल्ली-डंडा खेलना, पतंग उड़ाना, कागज़ की तितलियाँ बनाना, दीवार पर चढ़ना और दोस्तों के साथ घूमना-फिरना बहुत पसंद था।
उत्तर: बड़े भाई साहब छोटे भाई से मिलते ही हमेशा यही पहला सवाल पूछते थे - "कहाँ थे?"
उत्तर: दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई को लगने लगा कि उसकी किस्मत बहुत अच्छी है और बिना ज्यादा मेहनत के भी वह पास हो जाता है। इससे उसके अंदर घमंड आ गया और वह पहले से भी ज्यादा स्वच्छंद व मनमर्जी करने लगा।
उत्तर: बड़े भाई साहब छोटे भाई से पाँच साल बड़े थे। कहानी के समय वे नौवीं कक्षा में पढ़ रहे थे, जबकि छोटा भाई पाँचवीं कक्षा में था।
उत्तर: पढ़ाई से थककर दिमाग को आराम देने के लिए बड़े भाई साहब कॉपी या किताब के हाशिये पर चिड़ियों, कुत्तों-बिल्लियों के चित्र बनाते थे। कभी एक ही शब्द को बार-बार सुंदर अक्षरों में लिखते, तो कभी बिना मतलब की शब्द-रचना करते या किसी का चेहरा बनाने लगते थे।
उत्तर:
नसीहत: उपदेश, सीख, सलाह
रोष: क्रोध, गुस्सा, क्षोभ
आजादी: स्वतंत्रता, स्वाधीनता, मुक्ति
राजा: नृप, भूपति, महीप
ताजुब्ब: आश्चर्य, अचंभा, हैरानी
उत्तर:
सिर पर नंगी तलवार लटकना: कर्ज न चुकाने के कारण उसके सिर पर साहूकार की नंगी तलवार लटकी रहती थी।
आड़े हाथों लेना: समय पर काम न करने पर मैनेजर ने कर्मचारी को आड़े हाथों लिया।
अंधे के हाथ बटेर लगना: बिना तैयारी के ही प्रतियोगिता जीतना उसके लिए अंधे के हाथ बटेर लगने जैसा था।
लोहे के चने चबाना: आज के जमाने में बिना कोचिंग के मेडिकल की परीक्षा पास करना लोहे के चने चबाने के समान है।
दाँतों पसीना आना: गणित के इस कठिन सवाल ने मेरे दाँतों पसीना ला दिया।
ऐरा-गैरा नत्थू खैरा: अब तो हालत यह है कि कोई भी ऐरा-गैरा नत्थू खैरा आकर हमें सलाह देने लगता है।
उत्तर:
तत्सम: चेष्टा, आधिपत्य, प्रात:काल, विद्वान, निपुण, अवहेलना
तद्भव: आँख, घुड़कियाँ, फटकार, पन्ना
देशज: जानलेवा, आँखफोड़, भाईसाहब, मेला-तमाशा
आगत: पोजीशन, फजीहत, तालीम, पुख्ता, हाशिया, जमात, हर्फ़, मसलन, स्पेशल, स्कीम, टाइम-टेबिल
उत्तर:
(क) उन्होंने वहीं हाथ पकड़ लिया। - सकर्मक (कर्म: हाथ)
(ख) फिर चोरों-सा जीवन कटने लगा। - अकर्मक
(ग) शैतान का हाल भी पढ़ा ही होगा। - सकर्मक (कर्म: हाल)
(घ) मैं यह लताड़ सुनकर आँसू बहाने लगता। - सकर्मक (कर्म: लताड़, आँसू)
(ङ) समय की पाबंदी पर एक निबंध लिखो। - सकर्मक (कर्म: निबंध)
(च) मैं पीछे - पीछे दौड़ रहा था। - अकर्मक
उत्तर:
विचार + इक = वैचारिक
इतिहास + इक = ऐतिहासिक
संसार + इक = सांसारिक
दिन + इक = दैनिक
नीति + इक = नैतिक
प्रयोग + इक = प्रायोगिक
अधिकार + इक = आधिकारिक
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