UP Board Class 10 Hindi 16. रवींद्र केलेवर is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 10 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
1. शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?
उत्तर:- शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग होता है क्योंकि शुद्ध सोना (24 कैरेट) नरम और शुद्ध होता है, जबकि गिन्नी के सोने में टिकाऊपन लाने के लिए थोड़ी मात्रा में ताँबा मिलाया जाता है। यह मिलावट उसे मजबूत और अधिक चमकदार बना देती है।
उत्तर:- प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट उन व्यक्तियों को कहते हैं जो आदर्शों को केवल सिद्धांत तक सीमित न रखकर, उन्हें व्यवहारिक जीवन में उतारने का प्रयास करते हैं। वे आदर्श और व्यवहार के बीच एक सामंजस्य स्थापित करते हैं।
उत्तर:- इस पाठ के संदर्भ में, शुद्ध आदर्श वह है जिसमें व्यक्तिगत लाभ-हानि का कोई स्थान नहीं होता। यह समाज के शाश्वत मूल्यों और सर्वकल्याण की भावना पर आधारित होता है तथा व्यावहारिक समझौतों से अप्रभावित रहता है।
उत्तर:- लेखक ने जापानियों के दिमाग में 'स्पीड का इंजन' लगने की बात इसलिए कही है क्योंकि जापान के लोग तीव्र गति से काम करने, निरंतर आगे बढ़ने और प्रगति की दौड़ में शामिल रहने के लिए जाने जाते हैं। उनकी जीवनशैली अत्यधिक व्यस्त और गतिशील है।
उत्तर:- जापानी में चाय पीने की पारंपरिक और अनुष्ठानिक विधि को "चा-नो-यू" कहा जाता है, जिसका अंग्रेजी में अर्थ "टी सेरेमनी" होता है। इस सेरेमनी को संपन्न कराने वाले व्यक्ति को "चाजीन" कहते हैं।
उत्तर:- जापान में चाय सेरेमनी के लिए बने स्थान की मुख्य विशेषता उसकी पूर्ण शांति और गरिमामय वातावरण है। यह एक छोटी, सादगी से सजी पर्णकुटी होती है, जहाँ एक बार में केवल तीन लोगों को ही प्रवेश दिया जाता है ताकि ध्यान भंग न हो।
7. शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?
उत्तर:- शुद्ध सोना नरम होता है और उसे मजबूत बनाने के लिए ताँबा मिलाया जाता है। ठीक इसी प्रकार, शुद्ध आदर्श भी कठोर व्यवहारिक दुनिया में टिक पाने में कमजोर हो सकते हैं। व्यावहारिकता का पुट (ताँबे की मिलावट) उन्हें मजबूत और टिकाऊ बनाता है, हालांकि इससे उनकी शुद्धता थोड़ी कम हो जाती है।
उत्तर:- चाजीन ने टी-सेरेमनी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी क्रिया, जैसे अतिथियों का स्वागत करना, अँगीठी सुलगाना, चायदानी रखना, बर्तनों को साफ करना और चाय परोसना, इतनी शांत, सहज और सम्मानजनक ढंग से की कि हर क्रिया एक कलात्मक प्रदर्शन लग रही थी।
उत्तर:- 'टी-सेरेमनी' में एक समय पर केवल तीन लोगों को ही प्रवेश दिया जाता था। इसका उद्देश्य वहाँ पूर्ण शांति और एकाग्रता बनाए रखना था, ताकि व्यक्ति भागदौड़ भरी जिंदगी से कुछ पल के लिए मुक्त होकर वर्तमान क्षण का शांतिपूर्वक आनंद ले सके।
उत्तर:- चाय पीने के बाद लेखक ने महसूस किया कि उनके मस्तिष्क की दौड़ती हुई गति धीमी पड़ गई। उन्हें लगा जैसे वे भूत और भविष्य की सारी चिंताओं से मुक्त होकर केवल वर्तमान क्षण में जी रहे हैं। उन्हें आसपास के सन्नाटे की आवाज़ तक सुनाई देने लगी।
11. गांधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए।
उत्तर:- महात्मा गांधी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी क्योंकि वे शुद्ध आदर्शों (सत्य, अहिंसा) को व्यावहारिक जन-आंदोलनों का रूप देने में सफल रहे। उन्होंने सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे अभियान चलाए, जो पूरी तरह आदर्शवादी सिद्धांतों पर आधारित थे, फिर भी उनमें जनसाधारण को जोड़ने की व्यावहारिक समझ थी। उनके इसी विलक्षण मिश्रण के कारण करोड़ों लोग उनके नेतृत्व में एकजुट हो गए।
उत्तर:- सत्य, अहिंसा, दया, ईमानदारी, सहिष्णुता और परोपकार जैसे मूल्य शाश्वत हैं। वर्तमान समय में इनकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। आज के तनावपूर्ण, हिंसक और भौतिकवादी युग में इन मूल्यों के बिना सामाजिक सद्भाव और व्यक्तिगत शांति असंभव है। ये मूल्य ही समाज को टूटने से बचाते हैं और टिकाऊ विकास का मार्ग दिखाते हैं।
उत्तर:- एक बार मैंने सड़क पर एक बुजुर्ग व्यक्ति को गिरते देखा। शुद्ध आदर्श (सहायता करना) के चलते मैंने तुरंत उसे उठाया और अस्पताल पहुँचाने में मदद की। हानि यह हुई कि मेरी एक महत्वपूर्ण कक्षा छूट गई और मुझे बाद में बहुत समझाना पड़ा। लाभ यह मिला कि उस व्यक्ति और उसके परिवार का आशीर्वाद तथा मन की शांति प्राप्त हुई।
उत्तर:- एक बार मैंने देखा कि मेरा मित्र परीक्षा में नकल कर रहा है। शुद्ध आदर्श था कि तुरंत अध्यापक को बता दूँ, लेकिन इससे उसकी फजीहत होती और दोस्ती खत्म हो जाती। व्यावहारिकता का पुट देते हुए, मैंने परीक्षा के बाद उसे अकेले में समझाया कि नकल करना गलत है और उसे अगली बार मदद करने का वादा किया। इससे न तो उसका अपमान हुआ और न ही दोस्ती बिगड़ी, बल्कि उसने गलती स्वीकार कर ली।
उत्तर:- 'शुद्ध सोने में ताँबा मिलाना' का अर्थ है आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर तक गिरा देना। गांधीजी ऐसा नहीं करते थे। वे 'ताँबे में सोना मिलाते' थे, यानी सामान्य व्यवहारिक जीवन और राजनीति में भी शुद्ध आदर्शों (सोने) का समावेश करते थे। उन्होंने व्यावहारिक आंदोलनों (जैसे नमक सत्याग्रह) के माध्यम से शुद्ध आदर्शों (सत्य-अहिंसा) को जन-जन तक पहुँचाया, न कि आदर्शों को कम करके व्यवहार के अनुकूल बनाया। इसीलिए वे एक 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' थे।
उत्तर:- 'गिरगिट' कहानी का अवसरवादी पात्र केवल व्यावहारिक लाभ देखता है, जबकि इस पाठ के आधार पर कहा जा सकता है कि जीवन में आदर्शवादिता का मूलभूत महत्त्व है। समाज के शाश्वत मूल्य आदर्शवादियों ने ही दिए हैं। हालाँकि, केवल आदर्शों से जीवन चलाना कठिन है। इसलिए, गिन्नी के सोने की तरह, आदर्श (सोना) के साथ थोड़ी व्यावहारिकता (ताँबा) का सही मिश्रण ही सबसे उपयुक्त और टिकाऊ मार्ग है।
उत्तर:- लेखक के मित्र ने मानसिक रोग का मुख्य कारण पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका से होने वाली अनियंत्रित आर्थिक प्रतिस्पर्धा और जीवन की अत्यधिक तेज गति को बताया। उनके अनुसार, लोग एक महीने का काम एक दिन में करने की होड़ में शारीरिक व मानसिक रूप से टूट जाते हैं। मैं इससे पूर्णतः सहमत हूँ क्योंकि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव और अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा ने मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
उत्तर:- लेखक ने ऐसा इसलिए कहा होगा क्योंकि भूतकाल बीत चुका है और भविष्य अभी आया नहीं है। भूत के दुखों या भविष्य की चिंताओं में जीने से व्यक्ति केवल तनावग्रस्त होता है। जो घटना हमारे सामने घट रही है, वही वास्तविक और सत्य है। 'चा-नो-यू' सेरेमनी का अनुभव करते हुए लेखक ने स्वयं महसूस किया कि वर्तमान क्षण में जीने से ही वास्तविक शांति मिलती है।
19. समाज के पास अगर शाश्वत मूल्यों जैसा कुछ है तो वह आदर्शवादी लोगों का ही दिया हुआ है।
उत्तर:- इस कथन का आशय यह है कि समाज में मौजूद सत्य, न्याय, दया जैसे स्थायी और उच्च मूल्यों की नींव शुद्ध आदर्शवादी विचारकों, संतों और समाज सुधारकों ने ही रखी है। व्यावहारिकतावादी लोग अक्सर लाभ-हानि के आधार पर चलते हैं, जबकि शाश्वत मूल्यों की स्थापना वे ही लोग कर पाते हैं जो व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर सोचते हैं।
उत्तर:- इसका आशय है कि जो लोग स्वयं को 'व्यावहारिक आदर्शवादी' कहलाना पसंद करते हैं, उनके जीवन में धीरे-धीरे आदर्श गौण हो जाते हैं और व्यावहारिक लाभ-हानि की गणना प्रमुख होने लगती है। आदर्श के नाम पर वे केवल व्यावहारिक और स्वार्थपूर्ण निर्णय लेने लगते हैं, जिससे उनका मूल 'आदर्शवाद' समाप्त हो जाता है।
उत्तर:- इस कथन का आशय आधुनिक जीवनशैली की अत्यधिक तेज गति और उससे पैदा होने वाले मानसिक तनाव से है। लोग इतने व्यस्त और अशांत हो गए हैं कि उनके पास सामान्य गति से चलने या सोच-समझकर बोलने का समय नहीं है। यहाँ तक कि अकेले में भी उनका मस्तिष्क शांत नहीं रहता और वे अंदर ही अंदर चिंताओं में घिरे रहते हैं।
उत्तर:- इस पंक्ति का आशय यह है कि चाजीन द्वारा चाय परोसने की प्रत्येक छोटी क्रिया (जैसे बर्तन उठाना, पोंछना, चाय डालना) इतनी सुंदर, लयबद्ध और सम्मानजनक थी कि वह एक साधारण काम न होकर एक उच्चकोटि का कलात्मक प्रदर्शन लग रही थी। जिस प्रकार संगीत के 'जयजयवंती' राग में हर सुर मधुर और तालबद्ध होता है, उसी प्रकार उसकी हर हरकत में एक अनूठी सुंदरता और शांति थी।
उत्तर:-
व्यावहारिकता - जीवन में केवल व्यावहारिकता से ही काम नहीं चलता, आदर्शों का भी महत्व है।
आदर्श - महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के आदर्श को अपनाया।
विलक्षण - आइंस्टीन एक विलक्षण बुद्धि के स्वामी थे।
शाश्वत - परिवर्तन ही संसार का शाश्वत नियम है।
उत्तर:-
(क) माता-पिता = माता और पिता
(ख) पाप-पुण्य = पाप और पुण्य
(ग) सुख-दुख = सुख और दुःख
(घ) रात-दिन = रात और दिन
(ङ) अन्न-जल = अन्न और जल
(च) घर-बाहर = घर और बाहर
(छ) देश-विदेश = देश और विदेश
उत्तर:-
(क) सफल = सफलता
(ख) विलक्षण = विलक्षणता
(ग) व्यावहारिक = व्यावहारिकता
(घ) सजग = सजगता
(ङ) आदर्शवादी = आदर्शवादिता
(च) शुद्ध = शुद्धता
उत्तर:-
उत्तर - (जवाब) मैंने प्रश्न का उत्तर लिख दिया है।
उत्तर - (दिशा) वृक्ष की छाया उत्तर दिशा की ओर जाती है।
कर - (हाथ) भगवान की मूर्ति के कर कमल सुशोभित हैं।
कर - (टैक्स) हर नागरिक को समय पर कर चुकाना चाहिए।
अंक - (संख्या) परीक्षा में उसे अच्छे अंक प्राप्त हुए।
अंक - (भाग) इस नाटक के पाँच अंक हैं।
नग - (पहाड़) हिमालय एक विशाल नग है।
नग - (रत्न) उसकी अँगूठी में हीरा नग जड़ा है।
उत्तर:-
(क) अँगीठी सुलगायी और उस पर चायदानी रखी।
(ख) चाय तैयार हुई और उसने वह प्यालों में भरी।
(ग) बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया और तौलिये से बरतन साफ किए।
उत्तर:-
(क) चाय पीने की यह वह विधि है जिसे जापान में चा-नो-यू कहते हैं।
(ख) बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था जिसमें पानी भरा हुआ था।
(ग) जैसे ही चाय तैयार हुई, वैसे ही उसने उसे प्यालों में भरकर हमारे सामने रख दिया।
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