UP Board Class 10 Hindi 12. यशपाल लखनवी - अंदाज is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 10 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर:- लेखक जब अचानक डिब्बे में चढ़ा, तो नवाब साहब के चेहरे पर एकांत में विचार करने के क्रम में खलल पड़ने का असंतोष स्पष्ट दिखाई दिया। उन्होंने लेखक की ओर देखा तक नहीं और न ही बातचीत शुरू करने का कोई इशारा किया। उनकी यह उदासीनता और अनिच्छा ही लेखक को यह एहसास दिलाने के लिए काफी थी कि नवाब साहब उनसे बात करने में कोई रुचि नहीं रखते।
उत्तर:- नवाब साहब ने लेखक को खीरा खाने का निमंत्रण दिया था, जिसे लेखक ने मना कर दिया। इसके बाद अगर वे स्वयं खीरा खाते, तो यह उनकी छोटी इच्छा और सामान्य स्वभाव का पर्दाफाश हो जाता। इसलिए, अपनी झूठी शान और रुतबा बनाए रखने के लिए उन्होंने पूरी तैयारी के साथ खीरे के फाँक तैयार किए और फिर सिर्फ सूँघकर फेंक दिया। यह कृत्य उनके दिखावटी, आडंबरपूर्ण और सामंती मानसिकता वाले स्वभाव को दर्शाता है, जहाँ दिखावा हकीकत से ज़्यादा महत्वपूर्ण है।
उत्तर:- हम लेखक यशपाल के इस विचार से पूर्णतः सहमत हैं। कहानी के मूलभूत अंग होते हैं - विचार (कथ्य), घटनाएँ (कथानक) और पात्र। विचार कहानी को दिशा देता है, घटनाएँ उसे आगे बढ़ाती हैं और पात्र उन घटनाओं को जीवंत बनाते हैं। इनमें से किसी एक के अभाव में भी कहानी अधूरी और नीरस रह जाती है। इसलिए, एक सार्थक और प्रभावशाली कहानी रचने के लिए ये तीनों तत्व अनिवार्य हैं।
उत्तर:- इस पाठ के लिए 'दिखावे की कीमत', 'नवाबी दिखावा' या 'झूठी शान' जैसे नाम भी उपयुक्त रहेंगे। क्योंकि पूरी कहानी में नवाब साहब अपनी सामंती हैसियत और झूठे अहंकार को बनाए रखने के चक्कर में एक साधारण खीरा खाने की अपनी इच्छा का भी दमन कर देते हैं, जो उनके आडंबरपूर्ण जीवनशैली को ही दर्शाता है।
उत्तर:- नवाब साहब ने खीरा खाने की तैयारी एक विशिष्ट और आडंबरपूर्ण तरीके से शुरू की। सबसे पहले उन्होंने दोनों हरे-भरे खीरों को तौलिए पर रखा। फिर उन्हें खिड़की से बाहर निकालकर लोटे के पानी से धोया और तौलिए से पोंछकर सुखा लिया। इसके बाद जेब से चाकू निकालकर खीरों के दोनों सिरे काटे। खीरों को बीच से चीरकर उनका झाग निकाला और फिर बड़ी सावधानी से उनकी फाँकों को छीला। छिली हुई फाँकों पर उन्होंने जीरा, नमक और लाल मिर्च पाउडर की सुर्खी बुरकी। अंत में, उन्होंने एक-एक करके इन सजी-धजी फाँकों को उठाया, गंध ली और बिना खाए ही खिड़की से बाहर फेंक दिया।
उत्तर:- हम आइसक्रीम का रसास्वादन लेने के लिए विशेष तैयारी करते हैं। पहले आइसक्रीम को फ्रिज से निकालकर थोड़ी देर बाहर रखते हैं ताकि वह ज़्यादा कड़ी न रहे। फिर उसे एक सुंदर कटोरी में निकालते हैं। उसके ऊपर चॉकलेट सिरप, कटे हुए ताज़े फल (जैसे स्ट्रॉबेरी, केला) और कुछ ड्राई फ्रूट्स डालकर उसे आकर्षक बनाते हैं। इसके बाद ही धीरे-धीरे उसका आनंद लेते हैं।
उत्तर:- नवाबों की एक प्रसिद्ध सनक थी 'कबूतरबाज़ी' का शौक। वे दुर्लभ और महंगी नस्लों के कबूतर पालते थे। कबूतरों के लिए अलग से महलनुमा लॉफ्ट (बसेरे) बनवाए जाते थे और उनकी देखभाल के लिए नौकर नियुक्त होते थे। वे कबूतरों की उड़ान की प्रतियोगिताएँ (उड़ान) आयोजित करवाते थे और जीतने वाले कबूतर के मालिक को भारी इनाम दिया जाता था। यह शौक अक्सर उनकी अपव्ययी और दिखावटी जीवनशैली को दर्शाता था।
उत्तर:- हाँ, सनक का एक सकारात्मक रूप भी हो सकता है। जब कोई सनक समर्पण, लगन और सकारात्मक बदलाव के लिए होती है, तो वह व्यक्ति और समाज के लिए वरदान साबित होती है। उदाहरण के लिए:
1. स्वच्छता की सनक: महात्मा गांधी ने स्वच्छता और सादगी को अपनी जीवनशैली बना लिया था, जो एक सकारात्मक सनक थी।
2. अनुसंधान की सनक: वैज्ञानिक थॉमस एडिसन को बार-बार प्रयोग करने की सनक ने ही बल्ब जैसे अनेक आविष्कार दिए।
3. सेवा की सनक: मदर टेरेसा को गरीबों और बीमारों की सेवा करने की सनक ने उन्हें संत का दर्जा दिलाया।
1. एक सफेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मार कर बैठे थे।
उत्तर:- बैठे थे - अकर्मक क्रिया
2. नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया।
उत्तर:- दिखाया - सकर्मक क्रिया (कर्म - 'उत्साह')
3. ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है।
उत्तर:- कल्पना करना - अकर्मक क्रिया (यहाँ 'करना' सहायक क्रिया है और क्रिया का मूल रूप 'कल्पना' है जो अकर्मक है।)
4. अकेले सफ़र का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे।
उत्तर:- काटना - सकर्मक क्रिया (कर्म - 'वक्त')
खरीदे होंगे - सकर्मक क्रिया (कर्म - 'खीरे')
5. खीरों के सिरे काटे और उन्हें गोदकर झाग निकाला
उत्तर:- काटे - सकर्मक क्रिया (कर्म - 'सिरे')
गोदकर झाग निकाला - सकर्मक क्रिया (कर्म - 'खीरे' का झाग)
6. नवाब साहब ने सतृष्ण आँखों से नमक - मिर्च के संयोग से चमकती खीरे की फाँको की ओर देखा।
उत्तर:- देखा - अकर्मक क्रिया (प्रयोग) (यहाँ 'देखा' क्रिया का कोई सीधा कर्म नहीं है, बल्कि यह 'की ओर' के साथ प्रयुक्त हुई है।)
7. नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थककर लेट गए।
उत्तर:- थककर - अकर्मक क्रिया
लेट गए - अकर्मक क्रिया
8. जेब से चाकू निकाला।
उत्तर:- निकाला - सकर्मक क्रिया (कर्म - 'चाकू')
UP Board Class 10 Hindi 12. यशपाल लखनवी - अंदाज Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for Class 10 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.
It is essential to know the importance of UP Board Class 10 Hindi 12. यशपाल लखनवी - अंदाज textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board Class 10 Hindi 12. यशपाल लखनवी - अंदाज :
There are various features of UP Board Class 10 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.