UP Board Class 10 Hindi 15. निदा फ़ाज़ली is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 10 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
यहाँ पर पाठ से संबंधित सभी प्रश्नों के विस्तृत एवं सरल उत्तर दिए गए हैं।
उत्तर: अरब में लशकर को नूह के नाम से इसलिए याद किया जाता है क्योंकि एक बार उन्होंने एक घायल कुत्ते को दुत्कार दिया था। इस छोटी-सी क्रूरता के लिए उन्हें इतना गहरा पश्चाताप हुआ कि वे जीवन भर रोते रहे। उनकी इस संवेदनशीलता और पश्चाताप की भावना ने उन्हें नूह जैसी दयालु विभूति के रूप में प्रसिद्ध कर दिया।
उत्तर: लेखक की माँ शाम के समय पेड़ों से पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं। उनका विश्वास था कि शाम को पेड़ सोने की तैयारी में होते हैं और उस समय पत्ते तोड़ने से पेड़ों को पीड़ा होती है, वे रोते हैं और हमें बद्दुआ दे सकते हैं। यह उनकी प्रकृति के प्रति गहरी आस्था और संवेदनशीलता को दर्शाता है।
उत्तर: प्रकृति में आए असंतुलन का सीधा परिणण यह हुआ है कि मौसम चक्र पूरी तरह गड़बड़ा गया है। अब गर्मी में अत्यधिक गर्मी पड़ती है, बेवक्त बरसातें होती हैं, बाढ़, सूखा, भूकंप और तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ गई हैं। साथ ही, नए-नए रोग भी फैल रहे हैं, जो मानव जीवन के लिए चुनौती बन गए हैं।
उत्तर: लेखक के घर में कबूतरों ने दो अंडे दिए थे। एक अंडा बिल्ली ने तोड़ दिया और दूसरा अंडा लेखक की माँ के हाथ से फिसलकर टूट गया। एक मासूम जीवन को बचाने में अपनी असमर्थता और अनजाने में हुई इस घटना से वे अत्यंत दुखी हुईं। इस दुख और पश्चाताप के प्रायश्चित के रूप में उन्होंने पूरे दिन का रोज़ा रखा।
उत्तर: लेखक ने ग्वालियर से बंबई आकर शहरीकरण के गहरे प्रभाव को महसूस किया। ग्वालियर में बड़े घर, विशाल आँगन और खुली हवा थी, जबकि बंबई में जीवन छोटे-छोटे डिब्बेनुमा फ्लैटों में सिमट गया था। चारों ओर सिर्फ कंक्रीट की इमारतें दिखती थीं। पशु-पक्षियों के लिए कोई जगह नहीं बची थी। यह बदलाव मानव की बढ़ती स्वार्थपरता और प्रकृति से दूरी को दर्शाता है।
उत्तर: 'डेरा डालने' का आशय है - अस्थायी रूप से किसी स्थान पर रहना या ठहरना। पाठ के संदर्भ में, इसका अर्थ है कि पक्षियों को अब पेड़ों पर घोंसला बनाने के लिए उचित स्थान नहीं मिल पाते, इसलिए वे मजबूरी में इमारतों की खिड़कियों, छज्जों या अन्य जगहों पर अस्थायी ठिकाना बना लेते हैं। यह प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का दुखद परिणाम है।
उत्तर: शेख अयाज़ के पिता ने देखा कि एक काला चींटा उनकी बाँह पर रेंग रहा है। उन्हें एहसास हुआ कि यह चींटा शायद कुएँ (उसका प्राकृतिक घर) से उनके साथ चिपटकर यहाँ तक आ गया है। उन्होंने स्वयं को एक 'घरवाले को बेघर' करने वाला माना। इस भूल का तुरंत प्रायश्चित करने और चींटे को उसके घर (कुएँ पर) वापस पहुँचाने के लिए वे भोजन छोड़कर तुरंत उठ खड़े हुए। यह उनकी अद्भुत संवेदनशीलता और नैतिक जिम्मेदारी की भावना को दर्शाता है।
उत्तर: बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है। आवास और संसाधनों की माँग पूरी करने के लिए मनुष्य ने जंगल काट डाले, पहाड़ तोड़े और समुद्र को भी पीछे धकेलकर उसकी जमीन पर कब्जा कर लिया। इससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया। पशु-पक्षियों के आवास नष्ट हो गए। परिणामस्वरूप, अनियमित मौसम, बाढ़, सूखा, भूकंप जैसी आपदाएँ बढ़ गई हैं और नए-नए रोग उत्पन्न हो रहे हैं, जो मानव सभ्यता के लिए खतरा बन गए हैं।
उत्तर: लेखक के घर की खिड़की के कोने में कबूतरों ने घोंसला बना लिया था। कबूतर बार-बार घर के अंदर आकर अपने बच्चों की देखभाल करते थे, जिससे घर गंदा हो जाता था। विशेषकर लेखक के पुस्तकालय की किताबों और दस्तावेजों को नुकसान पहुँचने का डर था। इस समस्या से निपटने और कबूतरों को घर के अंदर आने से रोकने के लिए लेखक की पत्नी को मजबूरी में खिड़की में जाली लगवानी पड़ी।
उत्तर: समुद्र के गुस्से की वजह मनुष्य की लगातार की जा रही दखलंदाजी थी। बिल्डरों ने अपनी इमारतें बनाने के लिए समुद्र को पीछे धकेल-धकेल कर उसकी जमीन हड़प ली थी, जिससे वह सिकुड़ता चला गया। अपनी इस दुर्दशा और मनुष्य की लालच से तंग आकर समुद्र ने आखिरकार गुस्से में आकर अपनी शक्ति दिखाई। उसने अपनी उफनती लहरों पर तैर रहे तीन जहाजों को उठाकर तीन अलग-अलग दिशाओं में फेंक दिया - एक वर्ली के तट पर, दूसरा बांद्रा में और तीसरा गेटवे ऑफ इंडिया के पास। इस घटना में जहाजों में सवार लोग बुरी तरह घायल हुए।
उत्तर: इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक यह गहरा दार्शनिक संदेश देना चाहता है कि सभी प्राणियों (मनुष्य, पशु-पक्षी) का मूल तत्व एक ही है - मिट्टी। जन्म लेने पर हम मिट्टी से अलग-अलग रूप धारण करते हैं और मृत्यु के बाद फिर से उसी मिट्टी में मिल जाते हैं, सभी पहचान मिट जाती है। ऐसे में, जब अंत सबका एक समान है, तो जीवित अवस्था में ऊँच-नीच, छोटे-बड़े, इंसान-जानवर का भेद करना निरर्थक है। हमें सभी प्राणियों के साथ प्रेम और समानता का व्यवहार करना चाहिए।
उत्तर: इस कथन का आशय है कि प्रकृति भी एक सजीव इकाई की तरह है जो मनुष्य के अत्याचारों को लंबे समय तक चुपचाप सहन करती रहती है। लेकिन उसकी सहनशक्ति की एक सीमा होती है। जब यह सीमा पार हो जाती है, तो वह अपना भयंकर रूप दिखाती है। बंबई (मुंबई) में समुद्र द्वारा जहाजों को उठाकर फेंक देने की घटना इसी 'प्रकृति के गुस्से' का एक ज्वलंत उदाहरण है, जो मनुष्य को उसकी हद बताती है।
उत्तर: इस पंक्ति का तात्पर्य यह है कि जो व्यक्ति या तत्व वास्तव में महान और विशाल हृदय वाला होता है, वह छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित नहीं होता। उसमें धैर्य और सहनशीलता अधिक होती है। पाठ में यह बात समुद्र के लिए कही गई है, जो विशाल होने के कारण लंबे समय तक मनुष्य के अतिक्रमण को सहता रहा। लेकिन जब उसकी सहन की सीमा टूट गई, तो उसके क्रोध का प्रकोप भी उतना ही भयानक था, जो सामान्य नहीं था।
उत्तर: इस कथन का आशय तेजी से फैल रहे शहरीकरण के दुखद पहलू से है। मनुष्य ने अपने लिए जगह बनाने के चक्कर में पेड़ काट डाले, जंगल साफ कर डाले, तालाब पाट डाले। इससे पक्षियों और छोटे जानवरों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो गए। कुछ जीव तो शहर छोड़कर चले गए, लेकिन जो रह गए, उन्हें मजबूरी में इमारतों के कोनों, छतों या पार्कों में अस्थायी ठिकाने बनाकर गुजारा करना पड़ रहा है। यह मानव की स्वार्थपरता की पीड़ादायक तस्वीर है।
उत्तर: इन पंक्तियों में शेख अयाज के पिता की अतुलनीय संवेदनशीलता, नैतिक ईमानदारी और सभी प्राणियों के प्रति समदृष्टि की भावना छिपी हुई है। वह स्वयं को एक चींटे का 'घरवाला' मानते हैं और यह मानकर कि उन्होंने उसे अनजाने में उसके घर (कुएँ) से दूर ले आकर 'बेघर' कर दिया है, वे तुरंत अपनी इस भूल को सुधारना चाहते हैं। यह दर्शाता है कि उनके लिए हर जीव का जीवन और उसका आवास समान रूप से महत्वपूर्ण है और किसी को भी उसके घर से बेदखल करना पाप है।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
उत्तर: बड़े-बड़े बिल्डर अधिक से अधिक मुनाफा कमाने और बढ़ती आबादी के लिए आवासीय परिसर बनाने के लिए समुद्र को पीछे धकेलकर उसकी जमीन हथिया रहे थे।
उत्तर: लेखक का बचपन का घर ग्वालियर शहर में था और बाद में वे मुंबई के वर्सोवा इलाके में रहने लगे।
उत्तर: पहले के विशाल आँगन वाले घरों के स्थान पर अब छोटे-छोटे फ्लैट और मकान बन गए हैं, इसलिए लेखक कहता है कि जीवन अब डिब्बेनुमा घरों में सिमटने लगा है।
उत्तर: कबूतर इसलिए परेशानी में फड़फड़ा रहे थे क्योंकि उनके दोनों अंडे नष्ट हो गए थे - एक बिल्ली ने तोड़ दिया और दूसरा लेखक की माँ के हाथ से गिरकर टूट गया।
जैसे: (क) माँ ने भोजन परोसा। कर्ता कारक
(ख) मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ। संप्रदान कारक
(ग) मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया। कर्ता कारक, कर्म कारक
(घ) कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे। अधिकरण कारक
(ङ) दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो। अधिकरण कारक, कर्म कारक
| एकवचन | बहुवचन |
|---|---|
| चींटी | चींटियाँ |
| घोड़ा | घोड़े |
| आवाज | आवाज़ें |
| बिल | बिलों |
| फौज | फौजें |
| रोटी | रोटियाँ |
| बिंदु | बिंदु |
| दीवार | दीवारें |
| टुकड़ा | टुकड़े |
(क) आजकल ज़माना बहुत खराब है। (जमाना/ज़माना)
(ख) पूरे कमरे को सजा दो। (सजा/सज़ा)
(ग) ज़रा चीनी तो देना। (जरा/ज़रा)
(घ) माँ दही जमाना भूल गई। (जमाना/ज़माना)
(ङ) दोषी को सज़ा दी गई। (सजा/सज़ा)
(च) महात्मा के चेहरे पर तेज था। (तेज/तेज़)
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