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सीताराम सेकसरिया डायरी का एक पन्ना
उत्तर:- 26 जनवरी 1931 को एक ऐतिहासिक दिवस के रूप में मनाने के लिए कलकत्ता के नागरिकों ने विस्तृत तैयारियाँ कीं। शहर के अधिकांश मकानों और दुकानों को राष्ट्रीय झंडों और तिरंगे फूलों से सजाया गया। प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक इमारतों पर झंडे लहराए गए। मोनुमेंट के नीचे शाम को एक विशाल सभा का आयोजन किया गया, जहाँ झंडा फहराकर स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ने का कार्यक्रम रखा गया था। पूरा शहर उत्सव के माहौल में डूब गया था।
उत्तर:- उस दिन की निराली प्रकृति इस बात से स्पष्ट थी कि पुलिस की पाबंदी के बावजूद, सैकड़ों लोग दोपहर तीन बजे से ही मैदान में एकत्र होने लगे थे। स्त्रियों ने जुलूसों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो उस समय के लिए एक असाधारण बात थी। लोगों ने टोलियाँ बनाकर शहर में घूम-घूम कर राष्ट्रीय झंडे फहराए और सरकार को खुली चुनौती दी, जिससे एक नए उत्साह और साहस का वातावरण बना।
उत्तर:- पुलिस कमिश्नर के नोटिस में धमकी भरा लहजा था, जिसमें कानून की विशेष धाराओं का हवाला देकर सभा और जुलूस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था और भाग लेने वालों को दोषी ठहराने की बात कही गई थी। इसके विपरीत, कौंसिल के नोटिस में निडरता से घोषणा की गई थी कि मोनुमेंट के नीचे ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा और प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी। यह नोटिस सरकार के लिए एक सीधी और खुली चुनौती थी।
उत्तर:- धर्मतल्ले के मोड़ पर पहुँचते ही पुलिस ने जुलूस पर अचानक क्रूरतापूर्वक लाठीचार्ज शुरू कर दिया। इस हमले में कई लोग बुरी तरह घायल हो गए। साथ ही, जुलूस के नेता सुभाष चंद्र बोस को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इन हिंसक घटनाओं और नेतृत्व के अभाव के कारण संगठित जुलूस टूट गया और लोग इधर-उधर बिखर गए।
उत्तर:- डॉ. दास गुप्ता द्वारा घायलों की फोटो खींचने का प्रमुख उद्देश्य अंग्रेजी सरकार की बर्बरता को स्थायी प्रमाण के रूप में दर्ज करना था। इन तस्वीरों के माध्यम से पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह बताना संभव था कि किस प्रकार अहिंसक प्रदर्शनकारियों पर अमानवीय अत्याचार किए गए। यह चित्र जनजागरण और विदेशी समर्थन हासिल करने का एक शक्तिशाली माध्यम बन सकते थे।
उत्तर:- स्त्री समाज ने इस आंदोलन में अग्रणी और साहसिक भूमिका निभाई। जानकी देवी और मदालसा बजाज जैसी महिला नेताओं ने स्वतंत्र जुलूस निकाले और उनका सफल नेतृत्व किया। उन्होंने मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहराया और घोषणापत्र पढ़ा। लगभग 105 महिलाओं ने स्वेच्छा से गिरफ्तारी दी, जो उस समय के लिए एक क्रांतिकारी कदम था और उनके अदम्य साहस को दर्शाता था।
उत्तर:- जैसे ही जुलूस लाल बाजार पहुँचा, पुलिस ने बेरहमी से लाठीचार्ज शुरू कर दिया। इस हमले में अनेक प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। सुभाष चंद्र बोस को बलपूर्वक गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। महिला नेता मदालसा बजाज सहित बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में ले लिया गया, जिससे जुलूस पूरी तरह विघटित हो गया।
उत्तर:- यहाँ पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी किए गए उस कानून को भंग करने की बात कही गई है, जिसमें बिना अनुमति किसी भी सार्वजनिक सभा या जुलूस पर प्रतिबंध लगाया गया था।
पाठ के संदर्भ में, इस अन्यायपूर्ण कानून को भंग करना पूर्णतः उचित था। अंग्रेजी सरकार द्वारा लगाए गए ऐसे दमनकारी कानून लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन करते थे। शांतिपूर्ण सभा करके झंडा फहराना देशभक्ति का प्रतीक था और सरकार को यह दिखाने का एक तरीका था कि भारतीय अब डरने वाले नहीं हैं। यह 'खुली लड़ाई' स्वतंत्रता संग्राम को एक नई गति देने के लिए आवश्यक थी।
उत्तर:- मेरे विचार में यह दिन 'अपूर्व' इसलिए था क्योंकि इसने कलकत्ता के लोगों, विशेषकर महिलाओं की अद्वितीय साहसिकता और त्याग को प्रदर्शित किया। इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने पुलिस की धमकियों और प्रतिबंधों को ठेंगा दिखाया। महिलाओं का सामूहिक रूप से सक्रिय होना और जेल जाने को तैयार रहना एक नया इतिहास रच रहा था। यह दिन इसलिए भी अद्वितीय था क्योंकि इसने साबित कर दिया कि स्वतंत्रता की लड़ाई अब केवल कुछ नेताओं तक सीमित न रहकर आम जनता का आंदोलन बन चुकी थी।
उत्तर:- इस कथन का आशय यह है कि उस समय एक धारणा बन गई थी कि बंगाल या कलकत्ता के लोग स्वतंत्रता आंदोलन में पूरी तरह सक्रिय नहीं हैं, जो उनके लिए एक प्रकार का कलंक था। परन्तु 26 जनवरी 1931 के दिन कलकत्तावासियों ने जिस जोश, संगठन और साहस का परिचय दिया, उसने इस गलत धारणा को पूरी तरह से धो दिया और साबित कर दिया कि वे भी देश की आजादी के लिए किसी से पीछे नहीं हैं।
उत्तर:- इस पंक्ति का भाव यह है कि आमतौर पर स्वतंत्रता आंदोलन के कार्यक्रम गुप्त रूप से या पुलिस से बचकर आयोजित किए जाते थे। लेकिन इस बार कलकत्ता की जनता ने पुलिस कमिश्नर के स्पष्ट नोटिस और चेतावनी की परवाह न करते हुए, सार्वजनिक रूप से सभा की घोषणा कर दी। सरकार को इस तरह का सीधा और सार्वजनिक चुनौती देना एक नई रणनीति थी, जो अभूतपूर्व और अद्वितीय थी।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए -
उत्तर:- 26 जनवरी 1931 का दिन कलकत्तावासियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि पिछले वर्ष 1930 में लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में इसी तिथि को पहली बार 'पूर्ण स्वराज्य दिवस' घोषित किया गया था। इस वर्ष वे उस ऐतिहासिक दिन की पहली वर्षगाँठ बड़े उत्साह के साथ मनाना चाहते थे।
उत्तर:- सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाले मुख्य जुलूस के आयोजन और प्रबंध की जिम्मेदारी पूर्णोदास नामक व्यक्ति पर थी।
उत्तर:- विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू द्वारा झंडा गाड़ते ही पुलिस ने तुरंत उन्हें गिरफ्तार कर लिया और उनके साथ आए अन्य छात्रों को मार-पीटकर वहाँ से भगा दिया।
उत्तर:- लोग अपने घरों और सार्वजनिक स्थानों पर तिरंगा झंडा फहराकर यह संकेत देना चाहते थे कि यह देश उनका है और वे अंग्रेजी हुकूमत के कानूनों को नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय गौरव को मानते हैं। यह स्वतंत्रता के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का प्रतीक था।
उत्तर:- पुलिस ने शहर के प्रमुख पार्कों और मैदानों को इसलिए घेर लिया था ताकि लोग वहाँ एकत्रित होकर स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम न मना सकें और राष्ट्रीय झंडा न फहरा सकें। वे जनता के उत्साह को कुचलना चाहती थी।
(क) दो सौ आदमियों का जुलूस लाल बाजार गया और वहाँ पर गिरफ्तार हो गया।
उत्तर:- दो सौ आदमियों का जुलूस लाल बाजार जाकर गिरफ्तार हो गया।
(ख) मैदान में हज़ारों आदमियों की भीड़ होने लगी और लोग टोलियाँ बना-बनाकर मैदान में घूमने लगे।
उत्तर:- हज़ारों आदमियों की भीड़ इकट्ठा होने पर लोग टोलियाँ बनाकर मैदान में घूमने लगे।
(ग) सुभाष बाबू को पकड़ लिया गया और गाड़ी में बैठाकर लाल बाजार लॉकअप में भेज दिया गया।
उत्तर:- सुभाष बाबू को पकड़कर गाड़ी में बैठाकर लाल बाजार के लॉकअप में भेज दिया गया।
उत्तर:-
सरल वाक्य:
1. वह बहुत मेहनती छात्र थे।
2. उनका चेहरा गंभीर था।
संयुक्त वाक्य:
1. वे पढ़ाई में व्यस्त रहते थे और मुझे भी पढ़ाते थे।
2. मैंने बहुत कोशिश की, परंतु सफल नहीं हो पाया।
मिश्र वाक्य:
1. मुझे लगता था कि मैं परीक्षा पास कर लूँगा।
2. जब वे मुझे देखते, तो मैं डर जाता था।
उत्तर:-
1. श्रद्धा + आनंद = श्रद्धानंद
2. प्रति + एक = प्रत्येक
3. पुरुष + उत्तम = पुरुषोत्तम
4. झंडा + उत्सव = झंडोत्सव
5. पुन: + आवृत्ति = पुनरावृत्ति
6. ज्योति: + मय = ज्योतिर्मय
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