UP Board Book Logo

UPBoardBook Desktop Banner UPBoardBook Mobile Banner

UP Board Class 10 Hindi (5. मैं क्यों लिखता हूँ) solution PDF

UP Board Class 10 Hindi 5. मैं क्यों लिखता हूँ is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 10 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.

UP Board Class 10 Hindi (5. मैं क्यों लिखता हूँ) solution

UP Board Class 10 Hindi 5. मैं क्यों लिखता हूँ Hindi Medium Solutions - PDF

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

Click Here to

UP Board Solution Class 10 Hindi 5. मैं क्यों लिखता हूँ Image 1
UP Board Solution Class 10 Hindi 5. मैं क्यों लिखता हूँ Image 2
UP Board Solution Class 10 Hindi 5. मैं क्यों लिखता हूँ Image 3

UP Board Class-10 Hindi Solutions Kritika Chapter - 5: मैं क्यों लिखता हूँ

1. लेखक के अनुसार प्रत्यक्ष अनुभव की अपेक्षा अनुभूति उनके लेखन में कहीं अधिक मदद करती है, क्यों?

उत्तर:- लेखक के विचार में, प्रत्यक्ष अनुभव वह घटना है जो हमारी आँखों के सामने घटित होती है। वहीं अनुभूति हमारी संवेदनशीलता और कल्पना के माध्यम से उस सत्य को गहराई से अपने भीतर समा लेती है, भले ही वह घटना सीधे तौर पर लेखक के साथ न घटी हो। अनुभूति, अनुभव से कहीं अधिक शक्तिशाली है क्योंकि यह लेखक के हृदय में छिपे भावों और विचारों को बाहर निकालने का मार्ग प्रशस्त करती है। जब तक हृदय में किसी विषय को लेकर गहरी अनुभूति नहीं जागती, तब तक सच्चा और प्रभावशाली लेखन संभव नहीं है। यही अनुभूति एक आंतरिक विवशता पैदा करती है जो लेखक को लिखने के लिए बाध्य कर देती है। इसलिए लेखक के लिए, लेखन का मूल आधार प्रत्यक्ष अनुभव नहीं, बल्कि उससे उपजी हुई गहन अनुभूति होती है।

2. लेखक ने अपने आपको हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता कब और किस तरह महसूस किया?

उत्तर:- लेखक हिरोशिमा के परमाणु विस्फोट और उसके भयावह परिणामों के बारे में अखबारों में पढ़ चुका था और जापान यात्रा के दौरान पीड़ितों के अस्पताल में जाकर भी देखा था, लेकिन इन प्रत्यक्ष अनुभवों ने भी उसे पूरी तरह से भोक्ता (पीड़ित) नहीं बनाया। कुछ दिनों बाद, जब उसने एक पत्थर पर किसी व्यक्ति की उजली छाया देखी, तब उसकी समझ में आया। यह छाया उस व्यक्ति की थी जो विस्फोट के समय वहाँ खड़ा रहा होगा और विस्फोट की तीव्र ऊर्जा ने उसे पल भर में भाप बना दिया, केवल उसकी छाया पत्थर पर अंकित रह गई। इस पल ने लेखक को झकझोर दिया। यह अनुभूति इतनी तीव्र थी कि लेखक स्वयं को उस विस्फोट का एक भोक्ता महसूस करने लगा, मानो वह दर्द उसका अपना हो। इस तरह उस पत्थर पर देखी गई छाया ने उसे हिरोशिमा की त्रासदी का वास्तविक भोक्ता बना दिया।

3.1 मैं क्यों लिखता हूँ? के आधार पर बताइए कि -
लेखक को कौन-सी बातें लिखने के लिए प्रेरित करती हैं?

उत्तर:- इस पाठ के आधार पर समझा जा सकता है कि लेखक को मुख्य रूप से निम्नलिखित बातें लिखने के लिए प्रेरित करती हैं:

  1. आंतरिक विवशता या मन की व्याकुलता: यह सबसे प्रबल प्रेरणा है। हृदय में उठने वाली अनुभूतियाँ, विचार और भावनाएँ लेखक को लिखने के लिए विवश कर देती हैं।
  2. बाह्य दबाव: इसमें संपादकों या प्रकाशकों का आग्रह या निरंतर लिखने का दबाव शामिल है।
  3. आर्थिक आवश्यकता: जीविकोपार्जन के लिए लेखन करना भी एक कारण हो सकता है।
  4. प्रसिद्धि या ख्याति की इच्छा: समाज में नाम कमाने और अपनी बात को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाने की चाह भी प्रेरित करती है।

3.2 मैं क्यों लिखता हूँ? के आधार पर बताइए कि -
किसी रचनाकार के प्रेरणा स्रोत किसी दूसरे को कुछ भी रचने के लिए किस तरह उत्साहित कर सकते हैं?

उत्तर:- एक रचनाकार की प्रेरणा दूसरे के लिए उत्साह का स्रोत बन सकती है। जब कोई व्यक्ति किसी लेखक, कवि या कलाकार की रचना पढ़ता या देखता है, तो उसमें छिपी गहन अनुभूति और अभिव्यक्ति की शक्ति उसे भी अपने भीतर झाँकने और कुछ नया रचने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। उदाहरण के लिए, किसी कवि की सामाजिक अन्याय पर लिखी कविता पढ़कर एक युवा लेखक भी अपने आस-पास के अन्याय को देखने और उस पर लिखने के लिए प्रेरित हो सकता है। इस तरह, एक रचनाकार की अभिव्यक्ति दूसरे के मन में भी रचनात्मक विचारों के बीज बो सकती है और उसे अपनी अनुभूतियों को कलमबद्ध करने के लिए उत्साहित कर सकती है।

4. कुछ रचनाकारों के लिए आत्मानुभूति/स्वयं के अनुभव के साथ-साथ बाह्य दबाव भी महत्वपूर्ण होता है। ये बाह्य दबाव कौन-कौन- से हो सकते हैं?

उत्तर:- रचनाकारों पर पड़ने वाले प्रमुख बाह्य दबाव निम्नलिखित हो सकते हैं:

  1. आर्थिक दबाव: जीवनयापन और आय के स्रोत के रूप में लेखन करने की विवशता।
  2. संपादकीय आग्रह या समयसीमा: पत्र-पत्रिकाओं के संपादकों द्वारा नियत समय में रचना देने का दबाव।
  3. प्रकाशक की माँग: बाजार में चलन के अनुसार या पाठकों की रुचि के अनुरूप लिखने का दबाव।
  4. सामाजिक-राजनीतिक विचारधारा का दबाव: किसी विशेष विचारधारा या वर्ग के पक्ष में लिखने के लिए होने वाला दबाव।
  5. प्रसिद्धि और पाठकों की अपेक्षाएँ: सफलता पाने के बाद पाठकों की एक निश्चित शैली या विषय की अपेक्षा पूरी करने का दबाव।

5. क्या बाह्य दबाव केवल लेखन से जुड़े रचनाकारों को ही प्रभावित करते हैं या अन्य क्षेत्रों से जुड़े कलाकारों को भी प्रभावित करते हैं, कैसे?

उत्तर:- बाह्य दबाव केवल लेखकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर कलात्मक और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोग इनसे प्रभावित होते हैं। हर कलाकार अपनी आंतरिक प्रेरणा से काम करता है, लेकिन बाहरी परिस्थितियाँ उसकी रचना को आकार देने में भूमिका निभाती हैं।

  • अभिनेता/नर्तक: इन पर निर्देशक, निर्माता, दर्शकों की पसंद और बॉक्स ऑफिस के दबाव होते हैं।
  • गायक/संगीतकार: इन पर संगीत कंपनियों, आयोजकों और बाजार में चलन के अनुसार संगीत बनाने का दबाव रहता है।
  • चित्रकार/मूर्तिकार: इन पर अपने ग्राहकों या खरीददारों की रुचि, विषय और शैली के दबाव का सामना करना पड़ता है।
  • वास्तुकार: इन पर ग्राहक के बजट, स्थान की सीमाओं और सरकारी नियमों का दबाव होता है।
इस प्रकार, हर कलाकार को अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता और बाह्य दबावों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

6. हिरोशिमा पर लिखी कविता लेखक के अंत : व बाह्य दोनों दबाव का परिणाम है यह आप कैसे कह सकते हैं ?

उत्तर:- हिरोशिमा पर लिखी गई कविता निश्चित रूप से लेखक के आंतरिक और बाह्य दोनों प्रकार के दबावों का परिणाम है।

  • बाह्य दबाव: लेखक की जापान यात्रा और हिरोशिमा का दौरा एक बाह्य घटना थी। उस अस्पताल और जले हुए पत्थर को देखना एक प्रत्यक्ष अनुभव था जिसने एक बाहरी उद्दीपन का काम किया।
  • आंतरिक दबाव (अनुभूति): केवल दौरा करने भर से कविता नहीं लिखी गई। जब उस पत्थर पर मानव-छाया देखकर लेखक के मन में मानवीय पीड़ा, विनाश और त्रासदी की गहन अनुभूति जागी, तभी एक आंतरिक विवशता पैदा हुई। यही अनुभूति उसे लिखने के लिए बाध्य करने वाली आंतरिक शक्ति बनी।
इस प्रकार, बाहरी यात्रा ने अवसर दिया और आंतरिक अनुभूति ने अभिव्यक्ति का मार्ग—दोनों के संयोग से ही यह कविता सामने आई।

7. हिरोशिमा की घटना विज्ञान का भयानकतम दुरुपयोग है। आपकी दृष्टि में विज्ञान का दुरुपयोग कहाँ-कहाँ और किस तरह से हो रहा है?

उत्तर:- हिरोशिमा के अलावा भी विज्ञान का दुरुपयोग समाज में अनेक रूपों में हो रहा है, जैसे:

  1. पर्यावरण प्रदूषण: कारखानों, वाहनों और प्रौद्योगिकी के अंधाधुंध उपयोग से वायु, जल और भूमि प्रदूषण फैल रहा है, जिससे जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।
  2. साइबर अपराध: इंटरनेट और कंप्यूटर तकनीक का उपयोग हैकिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, डेटा चोरी और अश्लील सामग्री के प्रसार के लिए किया जा रहा है।
  3. जैविक हथियार एवं कीटनाशकों का दुरुपयोग: जैविक युद्ध के लिए रोगाणुओं का विकास और खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों की अत्यधिक मात्रा का प्रयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
  4. भ्रूण हत्या एवं अंग व्यापार: अल्ट्रासाउंड जैसी तकनीक का दुरुपयोग लिंग जाँच और भ्रूण हत्या के लिए हो रहा है। इसी तरह, चिकित्सा विज्ञान की उन्नति के बावजूद मानव अंगों का अवैध व्यापार हो रहा है।
  5. विनाशकारी हथियारों की होड़: दुनिया के अनेक देश परमाणु, रासायनिक और अन्य सामूहिक विनाश के हथियार बनाने में संलग्न हैं, जो मानवता के लिए स्थायी खतरा हैं।

8. एक संवेदनशील युवा नागरिक की हैसियत से विज्ञान का दुरुपयोग रोकने में आपकी क्या भूमिका है?

उत्तर:- एक संवेदनशील युवा नागरिक के रूप में विज्ञान के दुरुपयोग को रोकने में हमारी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है:

  1. जागरूकता फैलाना: हम सोशल मीडिया, समूह चर्चाओं या स्कूल-कॉलेज के कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को विज्ञान के सदुपयोग और दुरुपयोग के परिणामों के बारे में शिक्षित कर सकते हैं।
  2. उत्तरदायी उपभोक्ता बनना: ऊर्जा और संसाधनों का संयम से उपयोग करके, प्लास्टिक के कम इस्तेमाल से और इलेक्ट्रॉनिक कचरे का उचित निपटान करके पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते हैं।
  3. साइबर नैतिकता का पालन: इंटरनेट का जिम्मेदारी से उपयोग करके, गलत सूचना न फैलाकर और साइबर बुलिंग का विरोध करके डिजिटल दुरुपयोग रोक सकते हैं।
  4. सामाजिक बुराइयों का विरोध: लिंग भेद, भ्रूण हत्या और अश्लील सामग्री के प्रसार जैसी सामाजिक बुराइयों, जिनमें विज्ञान का दुरुपयोग होता है, का शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर सकते हैं।
  5. शांति और मानवता के पक्ष में आवाज उठाना: हम हिंसक और विनाशकारी तकनीकों के विकास के विरोध में शांतिपूर्ण अभियानों का हिस्सा बन सकते हैं और विज्ञान को मानव कल्याण के लिए प्रयुक्त करने की वकालत कर सकते हैं।
छोटे-छोटे सकारात्मक कदमों से ही बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

Get UP Board Class 10 Hindi 5. मैं क्यों लिखता हूँ Solution in Hindi Medium

UP Board Class 10 Hindi 5. मैं क्यों लिखता हूँ Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for Class 10 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.

Importance of UP Board Class 10 Hindi 5. मैं क्यों लिखता हूँ Text Solutions

It is essential to know the importance of UP Board Class 10 Hindi 5. मैं क्यों लिखता हूँ textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board Class 10 Hindi 5. मैं क्यों लिखता हूँ :

  • These TextSolutions are very clear and accurate which helps student to understand concept with ease.
  • It is also to mention that these text Solutions are prepared by the content experts of subject, thus these Solutions helps student in clearing their doubts and understand the core concept easily.
  • It is considered to be the best study material for competitive exam preparation.

Features of UP Board Class 10 textSolutions

There are various features of UP Board Class 10 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.

  • Best feature of these textSolutions is free availability of content in PDF format
  • Second feature that content generated and written is clear and easy to read.
  • There are various illustration and images are shown in the Solution so that student can easily understand the concept and should be more appealing to the student.
  • Each chapter is explained thoroughly
Uttar Pradesh Solutions are very helpful and handy. Specially subjects like UP Board Class 10 Physics Part - II Solutions are very interesting to study.

Other Chapters of Class 10 Hindi
2. गुरदयाल सिह - सपनों के-से दिन
3. राही मासूम रजा- टोपी शुक्ला
1. माता का आँचल
2. जॉर्ज पंचम की नाक
3. साना-साना हाथ जोड़ि
4. एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!
5. मैं क्यों लिखता हूँ
1. सूरदास
2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
3. देव
4. जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य
5. सूर्यकांत त्रिपाठी निरला - उत्साह अट नहीं रही ह
6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल
7. गिरिज़ाकुमार माथुर - छाया मत छून
8. ऋतुराज - कन्यादान
9 मंगलेश डबराल - संगतकार
10. स्वयं प्रक़ाश - नेताजी का चश्मा
11. रामवृझ बेनीपुरी - बालगोबिन भगत
12. यशपाल लखनवी - अंदाज
13. सर्वेशवऱ दयाल सक़्सेऩा - मानवीय करुणा की दिव्य चमक
14. मन्नु भंड़ारी - एक कहानी यह भी
15. महवीर प्रसाद द्विवेदी - स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन
16. यतींद्र मिश्र - नौबतखाने में इबादत
17. भदंत आनंद कौसल्यायन - संस्कृति
1. कबीरः साख़ी
2. मीराः पद्य
3. बिहारीः दोहे
4. मैथिलीशरण ग़ुप्त- मनुष्यता
5. सुमित्रानंदऩ पंतः पर्वत प्रदेश मे प्रवास
6. महादेवी वर्मा
7. वीरेन ड़ंग़वालः तोप
9. रवींद्र नाथ ठाक़ुर - आत्मत्राण
10. प्रेमचंदः बड़े भाई साहब
11. सीताराम सेकसरिया डायरी का एक पन्ना
12. लीलाधर मंडलोई
13. प्रहलाद अग्रवाल
14. अंतोन चेखव
15. निदा फ़ाज़ली
16. रवींद्र केलेवर
17. हबीब तनवीर
1. वाड्मयं तपः
2. आज्ञा गुरूणां हि अविचारणीया
3. किं किम् उपादेयम्
4. नास्ति त्यागसमम् सुखम्
5. अभ्यासवशगं मनः
6. साधुवृत्ति समाचरेत्
7. रमणीया की सृष्टि - ऐषा
8. तिरुक्कुरल्-सूक्ति -सौरभम्
9. राट्रं संरषयमेव ही
10. सुस्वागत भो ! अरुणाचलेऽस्मिन्
11. कालोऽहम्
;