UP Board Class 10 Hindi 12. लीलाधर मंडलोई is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 10 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
यहाँ पर पाठ से संबंधित सभी प्रश्नों के स्पष्ट एवं विस्तृत उत्तर दिए गए हैं।
उत्तर:- 26 जनवरी 1931 का दिन एक ऐतिहासिक दिवस बनाने के लिए कलकत्ता के नागरिकों ने विशेष तैयारियाँ कीं। शहर के अधिकांश मकानों और दुकानों को राष्ट्रीय झंडों और तिरंगे फूलों से सजाया गया, मानो देश पहले ही आज़ाद हो गया हो। शहर के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर तिरंगा लहराया गया। मोनुमेंट के नीचे शाम चार बजे एक विशाल सभा आयोजित करने और झंडा फहराने की योजना भी बनाई गई थी, जो सरकार को एक सीधी चुनौती थी।
उत्तर:- उस दिन की 'निराली' प्रकृति इस बात से स्पष्ट थी कि पुलिस की पाबंदियों और डर के माहौल के बावजूद, सैकड़ों लोग दोपहर तीन बजे से ही मैदान में एकत्र होने लगे थे। स्त्रियों ने भी जुलूसों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो उस समय के लिए एक असाधारण बात थी। लोगों ने टोलियाँ बनाकर शहर में घूम-घूम कर राष्ट्रीय झंडे फहराए और स्वतंत्रता के गीत गाए, जिससे एक नया उत्साह और जोश का वातावरण बना।
उत्तर:- पुलिस कमिश्नर के नोटिस में धमकी भरा लहजा था। इसमें कहा गया था कि कानून के तहत किसी भी सभा का आयोजन या उसमें शामिल होना गैर-कानूनी है और ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, कॉंसिल (स्वतंत्रता सेनानियों की समिति) के नोटिस में स्पष्ट और निडर घोषणा की गई थी कि मोनुमेंट के नीचे ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी। यह नोटिस सरकार को दिया गया एक खुला चुनौतीपत्र था।
उत्तर:- धर्मतल्ले के मोड़ पर पहुँचते ही पुलिस ने जुलूस पर अचानक बेरहमी से लाठियाँ बरसानी शुरू कर दीं। इस हमले में कई लोग घायल हो गए। साथ ही, जुलूस के नेता सुभाष चंद्र बोस को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। नेतृत्व के अभाव और पुलिस की हिंसक कार्रवाई के कारण संगठित जुलूस बिखर गया और वहाँ भगदड़ मच गई।
उत्तर:- डॉ. दास गुप्ता द्वारा घायलों के फोटो खींचने का मुख्य उद्देश्य अंग्रेजी सरकार की बर्बरता को दस्तावेजी सबूत के रूप में संजोना था। इन तस्वीरों को देश के विभिन्न समाचार पत्रों में छपवाकर पूरे देश के लोगों तक पहुँचाया जा सकता था, ताकि वे अंग्रेजों के अमानवीय अत्याचारों को अपनी आँखों से देख सकें। इससे जनता में रोष पैदा होता और स्वतंत्रता आंदोलन को और अधिक व्यापक समर्थन मिलता।
उत्तर:- इस आंदोलन में स्त्रियों की भूमिका अत्यंत सराहनीय और क्रांतिकारी थी। उन्होंने केवल शामिल ही नहीं हुईं, बल्कि अग्रणी भूमिका निभाई। जानकी देवी और मदालसा बजाज जैसी महिला नेताओं ने स्वतंत्र जुलूसों का सफल नेतृत्व किया। उन्होंने मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहराया और घोषणापत्र पढ़ा। लगभग 105 स्त्रियों ने स्वेच्छा से गिरफ्तारी दी, जो उनके अदम्य साहस और देशभक्ति का प्रमाण था।
उत्तर:- जैसे ही जुलूस लाल बाजार पहुँचा, पुलिस ने उस पर अंधाधुंध लाठीचार्ज शुरू कर दिया। इस हमले में अनेक लोग बुरी तरह घायल हो गए। सुभाष चंद्र बोस को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। महिला नेता मदालसा बजाज सहित कई अन्य लोगों को भी पुलिस ने पकड़ लिया। उस स्थान पर हाहाकार मच गया और जुलूस पूरी तरह तितर-बितर हो गया।
उत्तर:- यहाँ पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी किए गए उस कानून को भंग करने की बात कही गई है, जिसके तहत बिना अनुमति के किसी भी सार्वजनिक सभा पर पाबंदी थी।
विचार: मेरे विचार में उस समय परिस्थितियों के अनुसार कानून भंग करना पूर्णतः उचित और आवश्यक था। अंग्रेजों के ये कानून दमनकारी और जनता की आज़ादी को कुचलने के लिए बनाए गए थे। ऐसे अन्यायपूर्ण कानूनों का शांतिपूर्ण तरीके से उल्लंघन करना ही स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख हथियार था। इससे सरकार को खुली चुनौती मिलती थी और जनता में संघर्ष का नया जोश भरता था।
उत्तर:- यह दिन 'अपूर्व' इसलिए था क्योंकि इसने कलकत्ता की जनता की एक नई तस्वीर पेश की। पहली बार इतने बड़े पैमाने पर, इतनी निडरता के साथ सरकार को सीधी चुनौती दी गई। स्त्रियों का इतनी बड़ी संख्या में सक्रिय होकर गिरफ्तारी देना एक अभूतपूर्व घटना थी। हिंसा और दमन के बावजूद लोगों का जोश नहीं टूटा, बल्कि और बढ़ गया। इस दिन ने यह साबित कर दिया कि स्वतंत्रता की लड़ाई अब हर घर तक पहुँच चुकी है।
उत्तर:- इस कथन का आशय यह है कि उस समय यह धारणा बन गई थी कि बंगाल या कलकत्ता के लोग स्वतंत्रता आंदोलन में पूरी ताकत से भाग नहीं ले रहे हैं, जो उनके लिए एक प्रकार का कलंक था। परन्तु 26 जनवरी, 1931 के दिन कलकत्तावासियों ने अपने अद्भुत साहस, संगठन और त्याग से यह साबित कर दिया कि वे देश की आज़ादी के लिए किसी से पीछे नहीं हैं। उनके इस अभूतपूर्व योगदान ने उस गलत धारणा को पूरी तरह धो डाला।
उत्तर:- इस पंक्ति का आशय है कि पहले के आंदोलन अक्सर गुप्त या छिपकर चलाए जाते थे। लेकिन 26 जनवरी को कलकत्ता की जनता ने पुलिस कमिश्नर के नोटिस की परवाह किए बिना, सबके सामने स्पष्ट घोषणा कर दी कि वे सभा करेंगे और झंडा फहराएँगे। यह अंग्रेजी सरकार के सामने एक सीधी और बिना डरे दी गई ललकार थी, ऐसा खुला विरोध पहले शायद ही कभी देखने को मिला था।
उत्तर:- 26 जनवरी 1931 का दिन कलकत्तावासियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि पिछले वर्ष 1930 में लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में इसी तिथि को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाने का संकल्प लिया गया था। 1931 में यह दिन उस ऐतिहासिक संकल्प की पहली वर्षगाँठ थी, जिसे मनाने के लिए वे दृढ़संकल्पित थे।
उत्तर:- सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाले मुख्य जुलूस की सभी व्यवस्थाओं और संचालन की जिम्मेदारी पूर्णोदास नामक एक स्वतंत्रता सेनानी पर थी।
उत्तर:- जैसे ही विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू ने एक सार्वजनिक स्थान पर राष्ट्रीय झंडा गाड़ा, पुलिस ने तुरंत उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उनके साथ आए अन्य छात्रों और लोगों को पुलिस ने मारपीट कर वहाँ से भगा दिया।
उत्तर:- लोग अपने घरों और सार्वजनिक इमारतों पर तिरंगा फहराकर यह संदेश देना चाहते थे कि यह देश और इसका झंडा उनका अपना है, अंग्रेजों का नहीं। यह उनकी देशभक्ति, अंग्रेजी हुकूमत के प्रति अवज्ञा और पूर्ण स्वराज्य प्राप्त करने के अटूट संकल्प का प्रतीकात्मक प्रदर्शन था।
उत्तर:- पुलिस ने शहर के सभी बड़े पार्कों और मैदानों को इस डर से घेर लिया था कि कहीं लोग वहाँ एकत्रित होकर स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम न मना सकें। वे चाहती थी कि लोगों के इकट्ठा होने और झंडा फहराने के किसी भी अवसर को रोककर आंदोलन को दबा दिया जाए।
(क) दो सौ आदमियों का जुलूस लाल बाजार गया और वहाँ पर गिरफ्तार हो गया।
उत्तर:- दो सौ आदमियों का जुलूस लाल बाजार जाकर गिरफ्तार हो गया।
(ख) मैदान में हज़ारों आदमियों की भीड़ होने लगी और लोग टोलियाँ बना-बनाकर मैदान में घूमने लगे।
उत्तर:- हज़ारों आदमियों की भीड़ इकट्ठा होने पर लोग टोलियाँ बनाकर मैदान में घूमने लगे।
(ग) सुभाष बाबू को पकड़ लिया गया और गाड़ी में बैठाकर लाल बाजार लॉकअप में भेज दिया गया।
उत्तर:- सुभाष बाबू को पकड़कर गाड़ी में बैठाकर लाल बाजार के लॉकअप में भेज दिया गया।
1. श्रद्धा + आनंद = श्रद्धानंद
2. प्रति + एक = प्रत्येक
3. पुरुष + उत्तम = पुरुषोत्तम
4. झंडा + उत्सव = झंडोत्सव
5. पुन: + आवृत्ति = पुनरावृत्ति
6. ज्योति: + मय = ज्योतिर्मय
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