UP Board Book Logo

UPBoardBook Desktop Banner UPBoardBook Mobile Banner

UP Board Class 10 Hindi (2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद) solution PDF

UP Board Class 10 Hindi 2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 10 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.

UP Board Class 10 Hindi (2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद) solution

UP Board Class 10 Hindi 2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Hindi Medium Solutions - PDF

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

Click Here to

UP Board Solution Class 10 Hindi 2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Image 1
UP Board Solution Class 10 Hindi 2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Image 2
UP Board Solution Class 10 Hindi 2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Image 3
UP Board Solution Class 10 Hindi 2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Image 4
UP Board Solution Class 10 Hindi 2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Image 5
UP Board Solution Class 10 Hindi 2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Image 6

UP Board Class-10 Hindi Kshitij Solutions

पाठ - 2 : तुलसीदास (राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद)

1. परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए ?

उत्तर:- परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष टूटने के बारे में निम्नलिखित तर्क दिए -

  1. बचपन में हमने बहुत से धनुष तोड़े, पर किसी ने कभी क्रोध नहीं किया। फिर इस धनुष से आपको इतना विशेष लगाव क्यों है?
  2. हमें यह शिवजी का धनुष भी एक साधारण धनुष जैसा ही लगा, इसलिए हमने इसे महत्व नहीं दिया।
  3. श्री राम ने इसे जानबूझकर नहीं तोड़ा। वे तो केवल उसे उठाना चाहते थे, छूते ही वह स्वयं टूट गया।
  4. इस धनुष को तोड़ते समय राम ने किसी के लाभ-हानि के बारे में नहीं सोचा था। अतः इसमें उनका कोई दोष नहीं है।

2. परशुराम के क्रोध करने पर राम और लक्ष्मण की जो प्रतिक्रियाएँ हुईं उनके आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर:- इस प्रसंग के आधार पर राम और लक्ष्मण के स्वभाव में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है -

राम के स्वभाव की विशेषताएँ: राम अत्यंत विनम्र, धैर्यवान और शांत स्वभाव के हैं। परशुराम के क्रोध पर भी वे शांत रहे और उन्हें 'प्रभु' व 'दास' कहकर संबोधित करते हुए सम्मानपूर्वक अपनी बात रखी। उनकी वाणी मधुर और समझदारी भरी थी, जिससे क्रोधी व्यक्ति को भी शांत करने की क्षमता थी।

लक्ष्मण के स्वभाव की विशेषताएँ: लक्ष्मण उग्र, निडर और व्यंग्य करने वाले स्वभाव के हैं। उन्होंने परशुराम के क्रोध का जवाब हँसकर और तीखे व्यंग्यात्मक तर्कों से दिया। वे बिना डरे स्पष्टवादिता से बोले और परशुराम की धमकियों से भी विचलित नहीं हुए। उनमें युवा साहस और तेजस्विता स्पष्ट झलकती है।

3. लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको सबसे अच्छा लगा उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखिए।

उत्तर:-
लक्ष्मण: हे मुनिवर! आप तो बाल ब्रह्मचारी हैं, फिर इस धनुष के टूटने पर इतना क्रोध क्यों? बचपन में हमने ऐसे न जाने कितने खिलौने तोड़े, पर किसी ने हम पर ऐसा कोप नहीं किया।
परशुराम: अरे राजकुमार! तू अभी बालक है और काल के वश में ऐसी बातें कर रहा है। यह कोई साधारण धनुष नहीं, भगवान शिव का धनुष है! सावधान, मेरे इस परशु (फरसे) को देख! यह गर्भ में पल रहे शिशु तक का नाश करने में सक्षम है।
लक्ष्मण: (हँसते हुए) मुनि जी! आप बार-बार इस फरसे को दिखाकर मुझे डराना चाहते हैं? जिस प्रकार फूँक मारने से पहाड़ नहीं उड़ता, उसी प्रकार मैं आपके इस फरसे से भयभीत नहीं होने वाला।

4. परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा, निम्न पद्यांश के आधार पर लिखिए -
बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही | |
भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही | |
सहसबाहुभुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा | |
मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।

उत्तर:- दिए गए पद्यांश के आधार पर परशुराम ने स्वयं के बारे में सभा में निम्न बातें कहीं -
1. वे बाल ब्रह्मचारी हैं और उनका स्वभाव अत्यंत क्रोधी है।
2. संपूर्ण विश्व में वे क्षत्रिय कुल के द्रोही (शत्रु) के रूप में प्रसिद्ध हैं।
3. अपने भुजबल से उन्होंने अनेक बार पृथ्वी को क्षत्रिय राजाओं से रहित कर दिया और उसे ब्राह्मणों को दान में दे दिया।
4. उन्होंने अपने परशु (फरसे) से सहस्रबाहु की भुजाएँ काट डाली थीं।
5. उन्होंने लक्ष्मण से कहा कि हे राजपुत्र! मेरे इस भयानक फरसे को अच्छी तरह देख लो। तू अपने माता-पिता को चिंता में डालने का कारण क्यों बन रहा है? मेरा यह फरसा इतना भयानक है कि यह गर्भस्थ शिशु का भी विनाश कर सकता है।

5. लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताई ?

उत्तर:- लक्ष्मण ने वीर योद्धा की निम्नलिखित विशेषताएँ बताई हैं -

  1. वीर योद्धा युद्धभूमि में अपनी वीरता का प्रदर्शन करते हैं, व्यर्थ में अपनी डींग नहीं हाँकते।
  2. वीर पुरुष धैर्यवान होते हैं और छोटी-छोटी बातों पर क्षुब्ध नहीं होते।
  3. उनमें अहंकार नहीं होता, वे विनम्र रहते हैं।
  4. वे किसी के विरुद्ध गलत या अपशब्दों का प्रयोग नहीं करते।
  5. वीर योद्धा दुर्बल, ब्राह्मण, गाय या निरपराध लोगों पर अपनी शक्ति का प्रयोग नहीं करते। वे हमेशा अन्याय के विरुद्ध खड़े होते हैं।
  6. जब कोई उन्हें ललकारता है, तो वे परिणाम की चिंता किए बिना निडर होकर उसका सामना करते हैं।

6. साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है। इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

उत्तर:- साहस और शक्ति मनुष्य को शारीरिक व मानसिक रूप से सबल बनाते हैं, किंतु यदि इनके साथ विनम्रता न हो तो व्यक्ति अहंकारी और उद्दंड बन सकता है। विनम्रता एक ऐसा गुण है जो साहस और शक्ति को नियंत्रित कर उन्हें सही दिशा देती है। विनम्र व्यक्ति अपनी शक्ति का दुरुपयोग नहीं करता, बल्कि उसका उपयोग दूसरों की रक्षा और सहायता के लिए करता है। इस पाठ में राम साहस, शक्ति और विनम्रता के संगम हैं, जबकि परशुराम में केवल साहस और शक्ति है, विनम्रता का अभाव है। राम की विनम्रता के आगे परशुराम का क्रोध और अहंकार भी टिक नहीं पाया। इसलिए सच्चा वीर वही है जिसमें साहस और शक्ति के साथ-साथ विनम्रता भी हो।

7. भाव स्पष्ट कीजिए -

1. बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी | |
पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू | |

उत्तर:-
प्रसंग: यह पंक्तियाँ तुलसीदास कृत 'रामचरितमानस' से ली गई हैं, जहाँ लक्ष्मण परशुराम की धमकियों का जवाब दे रहे हैं।
भाव: लक्ष्मण मुस्कुराते हुए कोमल वाणी में परशुराम पर व्यंग्य करते हुए कहते हैं - हे मुनिश्रेष्ठ! आप स्वयं को बहुत बड़ा योद्धा मानते हैं और बार-बार मुझे अपना फरसा दिखाकर डरा रहे हैं। मानो आपकी एक फूँक से पहाड़ उड़ जाएगा! अर्थात्, जिस तरह फूँक से पहाड़ नहीं उड़ता, उसी तरह मुझे एक बालक समझकर आपके इस फरसे से डरना व्यर्थ है।

2. इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं | |
देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना | |

उत्तर:-
प्रसंग: यह पंक्तियाँ तुलसीदास कृत 'रामचरितमानस' से हैं, जहाँ लक्ष्मण परशुराम को अपनी वीरता का अहसास करा रहे हैं।
भाव: लक्ष्मण कहते हैं कि हे परशुराम! यहाँ कोई 'कुम्हड़बतिया' (छुई-मुई का पौधा) नहीं है जो आपकी उँगली (तर्जनी) देखकर मुरझा जाए। हम बालक अवश्य हैं, किंतु फरसे, धनुष और बाण भी हमने बहुत देखे हैं। इसलिए हमें नादान समझकर अपनी वीरता का बखान करना बंद कीजिए। हम आपकी धमकियों से भयभीत नहीं हैं।

3. गाधिसनु कह हृदय हसि मुनिहि हरियरे सूझ।
अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहूँ न बूझ अबूझ | |

उत्तर:-
प्रसंग: यह पंक्तियाँ तुलसीदास कृत 'रामचरितमानस' से हैं, जहाँ विश्वामित्र मन ही मन परशुराम की स्थिति पर टिप्पणी कर रहे हैं।
भाव: विश्वामित्र मन ही मन हँसते हुए सोचते हैं कि गाधिपुत्र (परशुराम) को अभी क्रोध और अहंकार के कारण चारों ओर केवल हरियाली (सतही दृश्य) ही दिख रही है। वे राम-लक्ष्मण को गन्ने की मीठी खाँड़ (निर्बल) समझ रहे हैं, जबकि वे तो लोहे की तलवार (अत्यंत बलवान) के समान हैं। परशुराम की स्थिति सावन के अंधे की तरह हो गई है, जिसे हर चीज हरी ही दिखती है। वे अभी तक इस भ्रम में हैं और सच्चाई को नहीं समझ पा रहे।

8. पाठ के आधार पर तुलसी के भाषा सौंदर्य पर दस पंक्तियाँ लिखिए।

उत्तर:- इस पाठ के आधार पर तुलसीदास जी के भाषा सौंदर्य की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं -
1. तुलसीदास की भाषा अवधी है, जो सरल, मधुर और हृदयस्पर्शी है।
2. उन्होंने दोहा और चौपाई छंदों का सुंदर प्रयोग किया है, जिससे भाषा में लयात्मकता आई है।
3. भाषा में अनुप्रास अलंकार की छटा सर्वत्र बिखरी है, जैसे - 'बालकु बोलि बधधौं'।
4. उपमा अलंकार के प्रयोग से भाव स्पष्ट और सजीव हुए हैं, जैसे - 'कोटि कुलिस सम बचनु'।
5. रूपक अलंकार के माध्यम से अर्थ गहराई प्राप्त करता है, जैसे - 'रघुकुलभानु'।
6. व्यंग्यात्मक शैली का प्रयोग लक्ष्मण के संवादों में विशेष रूप से हुआ है, जो पाठ को रोचक बनाता है।
7. भाषा में मुहावरेदार प्रयोग एवं लोकजीवन के शब्दों का समावेश है।
8. संवादात्मक शैली के कारण पात्रों के चरित्र और भाव स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आते हैं।
9. भाषा में प्रवाह है और वह सामान्य जन तक आसानी से पहुँचने वाली है।
10. कोमल एवं कठोर, दोनों प्रकार के भावों को व्यक्त करने की अद्भुत क्षमता तुलसी की भाषा में है।

9. इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा सौंदर्य है। उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:- इस पूरे प्रसंग में लक्ष्मण के माध्यम से व्यंग्य का बहुत सुंदर और प्रभावी प्रयोग हुआ है। कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं -
1. "बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥"
व्यंग्य: लक्ष्मण कहते हैं कि बचपन में हमने बहुत से धनुष तोड़े, पर किसी ने क्रोध नहीं किया। यहाँ वे परशुराम के अत्यधिक क्रोध पर व्यंग्य करते हुए कह रहे हैं कि यह धनुष कोई विशेष नहीं है, आप बेवजह रोष कर रहे हैं।

2. "इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥"
व्यंग्य: लक्ष्मण कहते हैं कि यहाँ कोई छुई-मुई का पौधा नहीं है जो आपकी उँगली देखकर मुरझा जाए। यहाँ वे परशुराम की धमकी भरी अंगुली और उनके अहंकार पर करारा व्यंग्य कर रहे हैं कि हम आपसे डरने वाले नहीं हैं।

3. "पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥"
व्यंग्य: लक्ष्मण कहते हैं कि आप बार-बार मुझे फरसा दिखाकर डराना चाहते हैं, मानो फूँक मारते ही पहाड़ उड़ जाएगा। यहाँ वे परशुराम की शक्ति के प्रदर्शन को अतिशयोक्तिपूर्ण और हास्यास्पद बता रहे हैं।

10. निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए -

1. बालकु बोलि बधधौं नहि तोही।
उत्तर: अनुप्रास अलंकार - इसमें 'ब' वर्ण की बार-बार आवृत्ति हुई है ('बालकु', 'बोलि', 'बधधौं')।

2. कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा।
उत्तर: (i) अनुप्रास अलंकार - 'क' वर्ण की आवृत्ति ('कोटि', 'कुलिस')।
(ii) उपमा अलंकार - परशुराम के वचनों की तुलना कोटि (करोड़ों) वज्रों के समान की गई है। 'सम' शब्द उपमा का सूचक है।

3. तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा॥
उत्तर: (i) उत्प्रेक्षा अलंकार - 'कालु हाँक जनु लावा' में उत्प्रेक्षा है। यहाँ 'जनु' शब्द उत्प्रेक्षा का वाचक है। अर्थात् ऐसा प्रतीत होता है मानो आप स्वयं यमराज को हाँककर ला रहे हैं।
(ii) पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार - 'बार बार' में पुनरुक्ति है क्योंकि 'बार' शब्द की दो बार आवृत्ति हुई है और अर्थ में कोई भिन्नता नहीं है।

4. लखन उतर आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु। बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु॥
उत्तर: (i) उपमा अलंकार -
    a) 'उतर आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु' - परशुराम के क्रोध की तुलना आहुति पाकर बढ़े हुए अग्नि (कृसानु) से की गई है। 'सरिस' उपमा सूचक शब्द है।
    b) 'जल सम बचन' - राम के वचनों की तुलना जल के समान शीतलता प्रदान करने वाले बताया गया है।
(ii) रूपक अलंकार - 'रघुकुलभानु' में रूपक अलंकार है। रघुकुल को दिन (दिवस) माना गया है और राम को उसका सूर्य (भानु) बताया गया है। अर्थात् राम रघुकुल के सूर्य हैं।

रचना-अभिव्यक्ति

1. ' सामाजिक जीवन में क्रोध की जरूरत बराबर पड़ती है। यदि क्रोध न हो तो मनुष्य दूसरे के द्वारा पहुँचाए जाने वाले बहुत से कष्टों की चिर-निवृत्ति का उपाय ही न कर सके।'
आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी का यह कथन इस बात की पुष्टि करता है कि क्रोध हमेशा नकारात्मक भाव लिए नहीं होता बल्कि कभी- कभी सकारात्मक भी होता है। इसके पक्ष या विपक्ष में अपना मत प्रकट कीजिए।

उत्तर:-
पक्ष में विचार: क्रोध एक स्वाभाविक मानवीय भाव है और न्याय व सुधार के लिए यह आवश्यक भी हो सकता है। जब कोई अन्याय होता है, तो उसके विरुद्ध आवाज उठाने के लिए एक प्रकार का सकारात्मक क्रोध ही तो प्रेरित करता है। एक शिक्षक का विद्यार्थी की लापरवाही पर क्रोध उसे सुधारने के लिए होता है। समाज में फैली बुराइयों के खिलाफ लड़ने के लिए भी क्रोध एक ऊर्जा देता है। अतः न्याय, सुधार और परिवर्तन के लिए नियंत्रित क्रोध सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।

विपक्ष में विचार: क्रोध अक्सर विवेक को ढक लेता है और व्यक्ति को गलत निर्णय लेने पर मजबूर कर देता है। क्रोध में लिया गया कोई भी कदम आमतौर पर विनाशकारी ही होता है। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, रिश्तों को तोड़ता है और मानसिक शांति भंग करता है। जैसा कि इस पाठ में दिखता है, परशुराम का क्रोध उन्हें एक बालक से विवाद करने पर उतारू कर देता है। अतः क्रोध पर नियंत्रण रखना और धैर्य से काम लेना ही बुद्धिमानी है। क्रोध के बजाय शांत चित्त से समस्या का समाधान ढूँढ़ना अधिक प्रभावी होता है।

2. संकलित अंश में राम का व्यवहार विनयपूर्ण और संयत है, लक्ष्मण लगातार व्यंग्य बाणों का उपयोग करते हैं और परशुराम का व्यवहार क्रोध से भरा हुआ है। आप अपने आपको इस परिस्थिति में रखकर लिखें कि आपका व्यवहार कैसा होता।

उत्तर:- यदि मैं स्वयं को इस परिस्थिति में रखूँ, तो मेरा व्यवहार श्री राम और लक्ष्मण के बीच का होता। लक्ष्मण की तरह मैं भी परशुराम के अहंकार और अनुचित क्रोध को चुपचाप सहन नहीं कर पाता। मैं उन्हें यह जरूर समझाने का प्रयास करता कि धनुष टूटना एक दुर्घटना थी और इसमें राम का कोई दोष नहीं है। हालाँकि, लक्ष्मण की तरह तीखे व्यंग्य और उपहास का सहारा लेने के बजाय, मैं राम की तरह विनम्रता बनाए रखते हुए, लेकिन दृढ़ता के साथ, अपनी बात रखने का प्रयास करता। मेरा उद्देश्य विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि गलतफहमी दूर करना और स्थिति को शांत करना होता।

3. अपने किसी परिचित या मित्र के स्वभाव की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:- मेरी एक सहेली नेहा का स्वभाव इस पाठ के पात्रों की याद दिलाता है। उसके स्वभाव की मुख्य विशेषताएँ हैं -
1. साहसी एवं निडर: वह किसी भी अन्याय के सामने चुप नहीं रहती, ठीक लक्ष्मण की तरह। कक्षा में किसी के साथ गलत होते देख वह तुरंत आवाज उठाती है।
2. व्यंग्यात्मक समझदारी: गलत बात का विरोध करते समय वह कभी-कभी हल्के-फुल्के व्यंग्य का सहारा लेती है, जिससे सामने वाला उलझ नहीं पाता और बात भी समझ जाता है।
3. विनम्रता: लक्ष्मण के विपरीत, नेहा में राम जैसी विनम्रता भी है। वह बड़ों का आदर करती है और अपनी बात अक्सर शालीनता से रखती है।
4. सहायक प्रवृत्ति: वह हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहती है, चाहे पढ़ाई हो या कोई व्यक्तिगत समस्या।
उसका यह मिला-जुला स्वभाव उसे हम सबके बीच बहुत सम्मान दिलाता है।

4. दूसरों की क्षमता को कम नहीं समझना चाहिए - इस शीर्षक को ध्यान में रखते हुए एक कहानी लिखिए।

उत्तर:-

दूसरों की क्षमता को कम नहीं समझना चाहिए
हमारे विद्यालय में रोहित नाम का एक विद्यार्थी था। एक दुर्घटना में उसका एक पैर चोटिल हो गया था, जिसके कारण वह थोड़ा लंगड़ाकर चलता था। कुछ छात्र उसकी इस शारीरिक स्थिति का मज़ाक उड़ाते, उसे 'लंगड़ा' कहकर बुलाते और खेलकूद की गतिविधियों में उसे कमजोर समझते थे। रोहित इन सब बातों को अनसुना करके हमेशा चुपचाप अपनी प

Get UP Board Class 10 Hindi 2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Solution in Hindi Medium

UP Board Class 10 Hindi 2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for Class 10 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.

Importance of UP Board Class 10 Hindi 2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Text Solutions

It is essential to know the importance of UP Board Class 10 Hindi 2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board Class 10 Hindi 2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद :

  • These TextSolutions are very clear and accurate which helps student to understand concept with ease.
  • It is also to mention that these text Solutions are prepared by the content experts of subject, thus these Solutions helps student in clearing their doubts and understand the core concept easily.
  • It is considered to be the best study material for competitive exam preparation.

Features of UP Board Class 10 textSolutions

There are various features of UP Board Class 10 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.

  • Best feature of these textSolutions is free availability of content in PDF format
  • Second feature that content generated and written is clear and easy to read.
  • There are various illustration and images are shown in the Solution so that student can easily understand the concept and should be more appealing to the student.
  • Each chapter is explained thoroughly
Uttar Pradesh Solutions are very helpful and handy. Specially subjects like UP Board Class 10 Physics Part - II Solutions are very interesting to study.

Other Chapters of Class 10 Hindi
2. गुरदयाल सिह - सपनों के-से दिन
3. राही मासूम रजा- टोपी शुक्ला
1. माता का आँचल
2. जॉर्ज पंचम की नाक
3. साना-साना हाथ जोड़ि
4. एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!
5. मैं क्यों लिखता हूँ
1. सूरदास
2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
3. देव
4. जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य
5. सूर्यकांत त्रिपाठी निरला - उत्साह अट नहीं रही ह
6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल
7. गिरिज़ाकुमार माथुर - छाया मत छून
8. ऋतुराज - कन्यादान
9 मंगलेश डबराल - संगतकार
10. स्वयं प्रक़ाश - नेताजी का चश्मा
11. रामवृझ बेनीपुरी - बालगोबिन भगत
12. यशपाल लखनवी - अंदाज
13. सर्वेशवऱ दयाल सक़्सेऩा - मानवीय करुणा की दिव्य चमक
14. मन्नु भंड़ारी - एक कहानी यह भी
15. महवीर प्रसाद द्विवेदी - स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन
16. यतींद्र मिश्र - नौबतखाने में इबादत
17. भदंत आनंद कौसल्यायन - संस्कृति
1. कबीरः साख़ी
2. मीराः पद्य
3. बिहारीः दोहे
4. मैथिलीशरण ग़ुप्त- मनुष्यता
5. सुमित्रानंदऩ पंतः पर्वत प्रदेश मे प्रवास
6. महादेवी वर्मा
7. वीरेन ड़ंग़वालः तोप
9. रवींद्र नाथ ठाक़ुर - आत्मत्राण
10. प्रेमचंदः बड़े भाई साहब
11. सीताराम सेकसरिया डायरी का एक पन्ना
12. लीलाधर मंडलोई
13. प्रहलाद अग्रवाल
14. अंतोन चेखव
15. निदा फ़ाज़ली
16. रवींद्र केलेवर
17. हबीब तनवीर
1. वाड्मयं तपः
2. आज्ञा गुरूणां हि अविचारणीया
3. किं किम् उपादेयम्
4. नास्ति त्यागसमम् सुखम्
5. अभ्यासवशगं मनः
6. साधुवृत्ति समाचरेत्
7. रमणीया की सृष्टि - ऐषा
8. तिरुक्कुरल्-सूक्ति -सौरभम्
9. राट्रं संरषयमेव ही
10. सुस्वागत भो ! अरुणाचलेऽस्मिन्
11. कालोऽहम्
;