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UP Board Class 10 Hindi (4. जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य) solution PDF

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UP Board Class 10 Hindi (4. जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य) solution

UP Board Class 10 Hindi 4. जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य Hindi Medium Solutions - PDF

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UP Board Class-10 Hindi Kshitij Solutions - Chapter 4: जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य

1. कवि आत्मकथा लिखने से क्‍यों बचना चाहता है ?

कवि जयशंकर प्रसाद आत्मकथा लिखने से कई कारणों से बचना चाहते हैं:

  1. आत्मकथा में व्यक्ति को अपनी मानसिक दुर्बलताओं, असफलताओं और निजी कमजोरियों को खुलकर लिखना पड़ता है, जिससे कवि स्वयं को उपहास का पात्र बनता हुआ महसूस करता है।
  2. कवि का स्वभाव अत्यंत सरल और भोला है, जिसके कारण उन्हें जीवन में कई बार धोखा मिला है। अपने इन व्यक्तिगत अनुभवों को सार्वजनिक करना उन्हें उचित नहीं लगता।
  3. जीवन में बीती हुई पीड़ादायक घटनाएँ उनके मन में गहरे घाव छोड़ गई हैं। उन घटनाओं को फिर से याद करके लिखने से ये घाव फिर से हरे हो जाएँगे, जिससे कवि फिर से दुखी हो जाएगा।
  4. कवि अपने निजी जीवन के सुख-दुख को दुनिया के सामने प्रदर्शित करके उनका मूल्य नहीं गिराना चाहता। वह अपनी पीड़ा और अनुभवों को केवल अपने तक ही सीमित रखना चाहता है।

2. आत्मकथा सुनाने के संदर्भ में 'अभी समय भी नहीं' कवि ऐसा क्यों कहता है ?

कवि के अनुसार, आत्मकथा लिखने का अभी सही समय नहीं है, क्योंकि:

  1. कवि का जीवन दुःख, अभाव और संघर्षों से भरा रहा है। उसे मुश्किल से अपनी पुरानी वेदनाओं से मुक्ति मिली है। आत्मकथा लिखकर वह फिर से उन दुखद यादों में खो जाना नहीं चाहता और अपने मन को फिर से आहत नहीं करना चाहता।
  2. कवि को लगता है कि उसने अभी तक जीवन में कोई ऐसी महान उपलब्धि हासिल नहीं की है जिसे वह लोगों के सामने एक प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत कर सके। आत्मकथा तो वे लोग लिखते हैं जिनके जीवन में सीख देने योग्य अनुभव हों, और कवि स्वयं को अभी उस स्तर पर नहीं पाता।

3. स्मृति को 'पाथेय' बनाने से कवि का क्या आशय है ?

'पाथेय' शब्द का अर्थ है रास्ते में सहारा देने वाला भोजन या ऊर्जा। कवि के लिए, उसकी प्रेयसी की मधुर स्मृतियाँ ही उसके जीवन-पथ का पाथेय हैं। उसकी प्रेमिका अब उसके साथ नहीं है, लेकिन उसकी यादें कवि के हृदय में जीवित हैं। इन्हीं सुखद स्मृतियों के सहारे कवि अपने वर्तमान के एकाकी और उदास जीवन को जीने का साहस जुटाता है। ये यादें उसके लिए आगे बढ़ने की शक्ति का स्रोत बन गई हैं।

4.1 भाव स्पष्ट कीजिए -
मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया। आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

इन पंक्तियों में कवि जीवन में सुख की असारता और उसकी अनुपलब्धता की बात कर रहा है। कवि कहता है कि जिस प्रेम और सुख का सपना उसने देखा था, वह उसे वास्तविक जीवन में कभी प्राप्त नहीं हुआ। वह सुख तो एक स्वप्न की तरह था जो आते-आते, साकार होने से पहले ही मुस्कुराता हुआ दूर भाग गया। इसका भाव यह है कि मनुष्य अक्सर जिस सुख की कल्पना करता है, वह वास्तविकता में उतना सुलभ और स्थायी नहीं होता। सुख एक छलावा है, जो पाने से पहले ही हाथ से फिसल जाता है।

4.2 भाव स्पष्ट कीजिए -
जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में। अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।

इन पंक्तियों में कवि ने अपनी प्रेयसी के अद्वितीय सौंदर्य का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन किया है। कवि कहता है कि उसकी प्रेमिका के लाल (अरुण) गाल इतने मनमोहक और सुंदर थे कि प्रेम से भरी भोर (उषा) भी अपनी सुहाग (लालिमा) की मधुर छटा उन्हीं गालों की छाया से प्राप्त करती थी। अर्थात्, सुबह की लालिमा भी उस नायिका के गालों के सौंदर्य के आगे फीकी पड़ जाती थी। यहाँ कवि ने प्रकृति (उषा) को भी प्रेम करने वाली (अनुरागिनी) बताकर एक सुंदर बिंब की रचना की है।

5. 'उज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की' - कथन के माध्यम से कवि क्‍या कहना चाहता है?

इस कथन के माध्यम से कवि यह व्यक्त करना चाहता है कि अपनी प्रेयसी के साथ बिताए गए चाँदनी रातों के वे पवित्र और मधुर क्षण उसके लिए एक उज्ज्वल गाथा (श्रेष्ठ कथा) के समान हैं। ये स्मृतियाँ इतनी कीमती और निजी हैं कि उन्हें सार्वजनिक रूप से सुनाना या लिखना उनकी पवित्रता को भंग करना होगा। कवि इन यादों को दुनिया के सामने रखकर उनका मजाक नहीं उड़ाना चाहता। वह चाहता है कि ये मधुर स्मृतियाँ उसके अपने हृदय तक सीमित रहें और उसके अंधकारमय वर्तमान में आगे बढ़ने का एकमात्र सहारा बनी रहें।

6. 'आत्मकथ्य' कविता की काव्यभाषा की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित कविता 'आत्मकथ्य' की काव्यभाषा की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. खड़ी बोली का सशक्त प्रयोग: इस कविता में साहित्यिक खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया गया है, जो भावों को सहजता से व्यक्त करती है।
    उदाहरण: "यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मलिन उपहास।"
  2. सजीव एवं मनोहारी बिंब योजना: कवि ने भावों को स्पष्ट करने के लिए नवीन और ललित बिंबों का प्रयोग किया है।
    उदाहरण: "जिसके अरुण-कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में..."
  3. नवीन एवं साहित्यिक शब्दावली: कविता में विडंबना, प्रवंचना, आलिंगन, पाथेय जैसे सारगर्भित शब्दों का प्रयोग हुआ है, जिससे काव्य की गरिमा बढ़ी है।
  4. छायावादी विशेषता - मानवीकरण: कवि ने निर्जीव वस्तुओं या भावों को मानव के समान सजीव बना दिया है।
    उदाहरण: "थकी सोई है मेरी मौन व्यथा।" "अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं।"
  5. अलंकारों का सहज प्रयोग:
    • पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार: "खिल-खिलाकर", "आते-आते"
    • रूपक अलंकार: "अरुण कपोल" (गालों को सुबह की लालिमा के रूप में चित्रित करना)
    • अनुप्रास अलंकार: "मेरी मौन", "अनुरागिनी उषा"

7. कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था उसे कविता में किस रूप में अभिव्यक्त किया है ?

कवि ने अपने सुख के स्वप्न को एक अनबूझी और अधूरी प्रेम-कथा के रूप में अभिव्यक्त किया है। उसने सुख को एक ऐसी प्रेयसी के माध्यम से दिखाया है जो स्वप्न में उसके पास आते-आते, उसे गले लगाने से पहले ही मुस्कुराते हुए दूर भाग जाती है। यह प्रतीकात्मक रूप से यह दर्शाता है कि कवि का सुख सदैव उसकी पहुँच से बाहर रहा। वह सुख एक छलावा था, एक स्वप्न था जो जागृत होते ही टूट गया। इस प्रकार, कवि ने अपनी जीवन की अधूरी आकांक्षाओं और प्रेम में असफलता को ही सुख का स्वप्न बताकर एक गहरी व्यथा को व्यक्त किया है।

रचना और अभिव्यक्ति

1. इस कविता के माध्यम से प्रसाद जी के व्यक्त्तित्व की जो झलक मिलती है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।

'आत्मकथ्य' कविता के आधार पर जयशंकर प्रसाद जी के व्यक्तित्व की निम्नलिखित झलक मिलती है:

  • सरल एवं भोला स्वभाव: कवि स्वयं को 'सरल' और 'दुर्बल' कहते हैं, जो उनके निश्छल और भोले व्यक्तित्व को दर्शाता है। इसी सरलता के कारण उन्हें जीवन में धोखे भी मिले।
  • गंभीर एवं मर्यादित: वे अपने दुःखों और निजी अनुभवों को सार्वजनिक करके उन्हें हल्का नहीं करना चाहते। उनमें एक गहरी मर्यादा और गरिमा का भाव है।
  • विनयशीलता: अपनी उपलब्धियों का बखान करने के बजाय, वे अपनी कमजोरियों को स्वीकार करते हैं, जो उनकी विनम्रता को प्रकट करता है।
  • संवेदनशील हृदय: कविता में व्यक्त प्रेम, विरह और पीड़ा से स्पष्ट है कि प्रसाद जी का हृदय अत्यंत कोमल और संवेदनशील था।
  • आत्म-मंथन की प्रवृत्ति: पूरी कविता आत्म-विश्लेषण से भरी है, जो दर्शाता है कि वे स्वयं को और अपने अनुभवों को गहराई से समझने वाले व्यक्ति थे।

2. आप किन व्यक्तियों की आत्मकथा पढ़ना चाहेंगे और क्यों ?

हम निम्नलिखित प्रकार के व्यक्तियों की आत्मकथा पढ़ना चाहेंगे:

  • महान स्वतंत्रता सेनानी एवं देशभक्त: जैसे- महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह। कारण: उनके अदम्य साहस, त्याग और देशप्रेम से प्रेरणा लेने के लिए।
  • विज्ञानी एवं आविष्कारक: जैसे- ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, थॉमस एडिसन। कारण: उनकी जिज्ञासा, लगन और असफलताओं से सीखकर सफलता का मार्ग जानने के लिए।
  • सफल खिलाड़ी: जैसे- सचिन तेंदुलकर, माइकल फेल्प्स, मिल्खा सिंह। कारण: अनुशासन, समर्पण और प्रतिस्पर्धा में मानसिक दृढ़ता सीखने के लिए।
  • समाज सुधारक एवं नेता: जैसे- डॉ. बी.आर. अंबेडकर, नेल्सन मंडेला। कारण: समाज में परिवर्तन लाने के लिए किए गए संघर्ष और उनकी दूरदर्शिता को समझने के लिए।

इनकी आत्मकथाएँ पढ़कर हमें जीवन में चुनौतियों का सामना करने, लक्ष्य निर्धारित करने और उसे प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है।

3. कोई भी अपनी आत्मकथा लिख सकता है। उसके लिए विशिष्ट या बड़ा होना जरूरी नहीं। हरियाणा राज्य के गुड़गाँव में घरेलू सहायिका के रुप में काम करने वाली बेबी हालदार की आत्मकथा बहुतों के द्वारा सराही गई। आत्मकथात्मक शैली में अपने बारे में कुछ लिखिए।

मेरा परिचय
मेरा नाम आर्यन शर्मा है और मैं कक्षा 10 का छात्र हूँ। मैं एक छोटे से कस्बे में अपने माता-पिता और छोटी बहन के साथ रहता हूँ। मेरे पिता एक सरकारी कर्मचारी हैं और माँ घर संभालती हैं।

मेरा दैनिक जीवन
मेरी दिनचर्या सुबह पाँच बजे शुरू हो जाती है। सबसे पहले मैं अपने दादाजी के साथ मंदिर जाता हूँ। फिर घर लौटकर योगा करता हूँ और पढ़ाई में लग जाता हूँ। स्कूल से लौटने के बाद, मैं अपनी बहन को उसके गृहकार्य में मदद करता हूँ और फिर खेलने के लिए मैदान में चला जाता हूँ। शाम को पूरा परिवार एक साथ चाय पीता है और दिनभर की बातें करता है।

मेरी रुचियाँ एवं संघर्ष
मुझे क्रिकेट खेलना और विज्ञान के प्रयोग करना बहुत पसंद है। मेरा सबसे बड़ा संघर्ष समय का प्रबंधन है। पढ़ाई, खेल और परिवार के साथ समय बिताने के बीच संतुलन बनाना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है। एक बार मैंने स्कूल की विज्ञान प्रतियोगिता में भाग लिया था, लेकिन मॉडल बनाने में असफल रहा। उस असफलता ने मुझे सिखाया कि हार से ही सीख मिलती है।

मेरे सपने
मेरा सपना एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने का है ताकि मैं ऐसे एप्लिकेशन बना सकूँ जो गाँव के किसानों और छोटे दुकानदारों की समस्याएँ हल कर सकें। मैं चाहता हूँ कि मेरी सफलता से मेरे माता-पिता का नाम रोशन हो और मैं अपने समाज के विकास में योगदान दे सकूँ।

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