UP Board Book Logo

UPBoardBook Desktop Banner UPBoardBook Mobile Banner

UP Board Class 10 Hindi (6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल) solution PDF

UP Board Class 10 Hindi 6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 10 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.

UP Board Class 10 Hindi (6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल) solution

UP Board Class 10 Hindi 6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल Hindi Medium Solutions - PDF

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

Click Here to

UP Board Solution Class 10 Hindi 6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल Image 1
UP Board Solution Class 10 Hindi 6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल Image 2
UP Board Solution Class 10 Hindi 6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल Image 3
UP Board Solution Class 10 Hindi 6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल Image 4
UP Board Solution Class 10 Hindi 6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल Image 5
UP Board Solution Class 10 Hindi 6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल Image 6
UP Board Solution Class 10 Hindi 6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल Image 7

UP Board Class-10 Hindi क्षितिज-2 Solutions


नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान

1. बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

उत्तर:- बच्चे की दंतुरित (पहली बार दाँत निकलने वाली) मुसकान कवि के मन पर एक जादुई और गहरा प्रभाव डालती है। यह मुसकान इतनी मोहक और प्राणवान है कि कवि को लगता है मानो उसके आस-पास के कठोर बाँस और बबूल के पेड़ों से भी शेफालिका के सुगंधित फूल झरने लगे हों। यह मुसकान कवि के निराश और मृत-सी पड़ी भावनाओं में नया जीवन भर देती है। इसके प्रभाव से इतना अधिक प्रसन्न होकर, कवि कहता है कि जो संन्यासी (सांसारिक मोह त्याग चुका व्यक्ति) बन चुका था, वह फिर से गृहस्थ जीवन में लौट आया है। बच्चे की यह निश्छल हँसी उसके हृदय को पिघला देती है।


2. बच्चे की मुसकान और एक बड़े व्यक्ति की मुसकान में क्या अंतर है ?

उत्तर:- बच्चे और बड़े व्यक्ति की मुसकान में मुख्य रूप से निम्नलिखित अंतर पाए जाते हैं:

1. निश्छलता बनाम कृत्रिमता: बच्चे की मुसकान पूरी तरह निश्छल, स्वाभाविक और बिना किसी लाग-लपेट के होती है। वहीं, बड़े व्यक्ति की मुसकान अक्सर एक खास उद्देश्य, समय या परिस्थिति के अनुसार होती है, जिसमें कृत्रिमता या दिखावा भी हो सकता है।

2. कारण: बच्चा बिना किसी खास कारण के, सहज भाव से मुस्कुरा सकता है। उसकी मुसकान का कोई उद्देश्य नहीं होता। इसके विपरीत, बड़ा व्यक्ति प्रायः किसी खुशी, व्यवहारकुशलता, या विशेष अवसर पर ही मुस्कुराता है।

3. प्रभाव: बच्चे की मासूम मुसकान देखकर हर किसी का हृदय पिघल जाता है, वह सबको आकर्षित करती है। बड़ों की मुसकान में आमतौर पर इतना गहरा और सर्वव्यापी आकर्षण नहीं होता।


3. कवि ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य को किन-किन बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है ?

उत्तर:- कवि नागार्जुन ने बच्चे की मुसकान के अद्भुत सौंदर्य को व्यक्त करने के लिए कई सुंदर और प्रभावशाली बिंबों (काव्यात्मक चित्रों) का प्रयोग किया है:

1. प्राणदायिनी शक्ति: "मृतक में भी डाल देगा जान।" – बच्चे की यह मुसकान मृत व्यक्ति में भी प्राण फूंकने की शक्ति रखती है।

2. कमल का फूल: "छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात।" – बच्चे की मुसकान ऐसी लगती है मानो कमल के फूल तालाब को छोड़कर कवि की साधारण झोंपड़ी में खिल उठे हों।

3. पत्थर का पिघलना: "पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण।" – इस मुसकान के सामने कठोर से कठोर पत्थर का हृदय भी पिघलकर जल बन सकता है।

4. शेफालिका के फूल: "झरने लग पड़े शेफालिका के फूल।" – बच्चे के स्पर्श मात्र से बाँस-बबूल जैसे कँटीले पेड़ों से भी शेफालिका के सुंदर फूल झरने लगते हैं।

5. तिरछी नज़र और स्नेह: जब बच्चा तिरछी नज़र से देखकर मुस्कुराता है और कवि से आँखें मिलती हैं, तो कवि को लगता है कि बच्चा उस पर अपना स्नेह लुटा रहा है।


नागार्जुन - फसल

1. कवि के अनुसार फसल क्या है?

उत्तर:- कवि के अनुसार, फसल केवल अनाज का ढेर नहीं है। यह प्रकृति और मनुष्य के श्रम का एक सुंदर और जीवंत मेल है। फसल पानी, मिट्टी, धूप, हवा और सबसे बढ़कर किसान के परिश्रम का संयुक्त परिणाम है। कोई भी एक तत्व अकेले फसल नहीं उगा सकता। यह सभी के सामूहिक योगदान से साकार होती है।


2. कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई है। वे आवश्यक तत्व कौन-कौन से हैं?

उत्तर:- इस कविता के अनुसार फसल उपजाने के लिए निम्नलिखित पाँच आवश्यक तत्वों का होना अनिवार्य है:

  1. मानव का परिश्रम (किसान का श्रम)
  2. पानी
  3. मिट्टी
  4. सूरज की किरणें (धूप)
  5. हवा
ये सभी तत्व मिलकर ही फसल को जन्म देते हैं और पूर्णता प्रदान करते हैं।


3. फसल को 'हाथों के स्पर्श की गरिमा' और 'महिमा' कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?

उत्तर:- 'हाथों के स्पर्श की गरिमा और महिमा' कहकर कवि किसान के श्रम के अतुल्य महत्व को रेखांकित करना चाहता है। भले ही फसल के लिए पानी, मिट्टी, धूप और हवा जैसे प्राकृतिक संसाधन ज़रूरी हैं, लेकिन बिना किसान के हाथों के स्पर्श, उसकी मेहनत और बुद्धिमत्ता के ये सभी संसाधन बेकार पड़े रह जाते हैं। किसान का परिश्रम ही है जो इन प्राकृतिक तत्वों को सही दिशा देकर फसल के रूप में ढालता है। इसलिए फसल में किसान के श्रम की गरिमा (मान-सम्मान) और महिमा (वैभव) समाई हुई है।


4. भाव स्पष्ट कीजिए -
रूपांतर है सूरज की किरणों का
सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

उत्तर:- इन पंक्तियों का भाव यह है कि फसल प्रकृति के विभिन्न तत्वों का साकार रूप है।

  • "रूपांतर है सूरज की किरणों का" – इसका अर्थ है कि फसल में जो हरियाली, पोषण और पककर सुनहरी होने की क्षमता है, वह सूरज की किरणों का ही रूपांतरण (बदला हुआ स्वरूप) है। धूप फसल को ऊर्जा देती है और उसे पकाती है।
  • "सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का" – हवा की थिरकन (हल्की गति) से फसल के पौधे हिलते-डुलते हैं, जिससे उनकी वृद्धि अच्छी होती है और परागण जैसी प्रक्रियाएँ होती हैं। कवि कहता है कि फसल में हवा की यह सारी गतिशीलता और शक्ति सिमटकर, एकत्रित होकर समाई हुई है।
अर्थात, फसल सूरज और हवा की शक्ति का मूर्त रूप है।


« रचना और अभिव्यक्ति »

5.1 कवि ने फसल को हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म कहा है -
मिट्टी के गुण-धर्म को आप किस तरह परिभाषित करेंगे?

उत्तर:- मिट्टी का 'गुण-धर्म' उसकी वह विशेष प्रकृति और क्षमता है जो उसे दूसरी मिट्टी से अलग बनाती है। इसमें मिट्टी में मौजूद विभिन्न खनिज पदार्थ, जैविक तत्व, पोषक तत्व (जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस), जल सोखने की क्षमता, और उसकी उर्वरा शक्ति (उपजाऊपन) शामिल हैं। यही गुण-धर्म तय करता है कि किसी खास जगह की मिट्टी में गेहूँ अच्छा होगा या धान, कपास होगा या गन्ना। फसल इसी गुण-धर्म का प्रतिफल है।


5.2 कवि ने फसल को हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म कहा है -
वर्तमान जीवन शैली मिट्टी के गुण-धर्म को किस-किस तरह प्रभावित करती है?

उत्तर:- वर्तमान की भागदौड़ भरी और उपभोगवादी जीवनशैली मिट्टी के गुण-धर्म को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही है:

  • रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरा शक्ति और सूक्ष्मजीव नष्ट हो रहे हैं।
  • प्लास्टिक कचरा जमीन में दबने से मिट्टी की जलधारण क्षमता और हवा के आदान-प्रदान पर बुरा असर पड़ता है।
  • कारखानों और वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक तत्व हवा और पानी के माध्यम से मिट्टी में मिलकर उसे जहरीला बना रहे हैं।
  • इन सबका बुरा प्रभाव फसल की गुणवत्ता और पैदावार पर सीधे पड़ रहा है।


5.3 कवि ने फसल को हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म कहा है -
मिट्टी द्वारा अपना गुण-धर्म छोड़ने की स्थिति में क्या किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना की जा सकती है?

उत्तर:- नहीं, यदि मिट्टी अपना गुण-धर्म (उपजाऊपन और पोषक तत्व) खो देती है, तो पृथ्वी पर किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना करना बहुत मुश्किल है। मिट्टी हमारे खाद्य श्रृंखला की आधारशिला है। यदि मिट्टी बंजर हो जाएगी तो फसलें पैदा नहीं होंगी। फसलें नहीं होंगी तो न तो मनुष्य, न पशु-पक्षी और न ही अन्य जीव जंतु भोजन के बिना जीवित रह पाएँगे। इस प्रकार, मिट्टी का उपजाऊ होना पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए अनिवार्य शर्त है।


5.4 कवि ने फसल को हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म कहा है -
मिट्टी के गुण-धर्म को पोषित करने में हमारी क्या भूमिका हो सकती है?

उत्तर:- मिट्टी के गुण-धर्म को पोषित करने और बचाने में हम सभी की एक महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है:

  • हम प्लास्टिक के उपयोग को कम से कम कर सकते हैं और उसका सही निपटान कर सकते हैं ताकि वह मिट्टी में न जाए।
  • घर के किचन के जैविक कचरे (सब्जी के छिलके आदि) से कम्पोस्ट खाद बनाकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ा सकते हैं।
  • पानी का सदुपयोग करके और वृक्षारोपण करके मिट्टी के कटाव को रोक सकते हैं।
  • दूसरों को भी मिट्टी के संरक्षण के प्रति जागरूक बना सकते हैं।
  • जहाँ तक संभव हो, प्राकृतिक और जैविक खेती को प्रोत्साहन दे सकते हैं।


अतिरिक्त प्रश्न (यह दंतुरित मुसकान से)

4.1 भाव स्पष्ट कीजिए -
छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात।

उत्तर:- इस पंक्ति का भाव है कि बच्चे की मुसकान इतनी मनमोहक और सौंदर्यपूर्ण है कि उसे देखकर कवि को ऐसा आभास होता है मानो सुंदर कमल के फूलों (जलजात) ने अपना प्राकृतिक स्थान तालाब छोड़ दिया है और अब उसकी साधारण-सी झोंपड़ी में खिल रहे हैं। इसका आशय यह है कि बच्चे की मासूम हँसी ने कवि के साधारण और शायद उदास जीवन में अचानक अपार सुख, सौंदर्य और उल्लास भर दिया है।


4.2 भाव स्पष्ट कीजिए -
छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल बाँस था कि बबूल ?

उत्तर:- इस काव्यांश का भाव यह है कि बच्चे के स्पर्श में एक अद्भुत जादू है जो कठोर से कठोर हृदय को भी कोमल बना सकता है। बाँस और बबूल दोनों ही कँटीले और कठोर प्रकृति के पेड़ माने जाते हैं। कवि कहता है कि बच्चे के मासूम स्पर्श ने उसे (कवि को) इतना प्रभावित किया कि वह चाहे बाँस जितना सीधा-कठोर हो या बबूल जितना कँटीला, उससे भी शेफालिका के सुगंधित फूल झरने लगे। अर्थात, बच्चे के स्पर्श ने कवि के अंदर की सारी कठोरता, निराशा और रुखेपन को दूर कर दिया और उसमें प्रेम, कोमलता और आनंद के फूल खिला दिए।


« रचना और अभिव्यक्ति »

1. मुसकान और क्रोध भिन्न-भिन्न भाव हैं। इनकी उपस्थिति से बने वातावरण की भिन्नता का चित्रण कीजिए।

उत्तर:- मुसकान और क्रोध दो विपरीत भाव हैं जो वातावरण को पूरी तरह बदल देते हैं।

मुसकान से बना वातावरण:

  • मुसकान एक सकारात्मक और सुखद भाव है।
  • इससे वातावरण हल्का, प्रसन्न और आनंदमय बन जाता है।
  • यह तनाव को कम करती है और लोगों के बीच सौहार्द और निकटता पैदा करती है।
  • एक मुसकान दूसरे को भी मुस्कुराने के लिए प्रेरित कर सकती है, जिससे पूरा माहौल खुशनुमा हो उठता है।

क्रोध से बना वातावरण:

  • क्रोध एक नकारात्मक और विनाशकारी भाव है।
  • इससे वातावरण भारी, तनावपूर्ण और डरावना बन जाता है।
  • लोग चिड़चिड़े हो जाते हैं, बातचीत बंद हो सकती है और मन में डर या अशांति पैदा होती है।
  • क्रोध का माहौल विवाद और मनमुटाव को जन्म दे सकता है, जिससे रिश्तों में दरार आ सकती है।


2. दंतुरित मुसकान से बच्चे की उम्र का अनुमान लगाइए और तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर:- दंतुरित मुसकान से बच्चे की आयु लगभग 6 महीने से 1 वर्ष के बीच की अनुमानित की जा सकती है।

तर्क: 'दंतुरित' का अर्थ है पहली बार दाँत निकलना। शिशुओं के दूध के दाँत आमतौर पर 6 से 8 महीने की आयु के आसपास निकलना शुरू होते हैं। कविता में बच्चे की माँ उसे उँगलियों से 'मधुपर्क' (शहद चटा रही है) करा रही है, जो यह दर्शाता है कि बच्चा अब ठोस/अर्ध-ठोस पदार्थ चखने लायक हो गया है, जो कि दाँत निकलने के समय ही संभव हो पाता है। इसलिए, बच्चा लगभग एक साल का या उसके आसपास का प्रतीत होता है।


3. बच्चे से कवि की मुलाकात का जो शब्द - चित्र उपस्थित हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर:- कवि और बच्चे की मुलाकात का शब्द-चित्र अत्यंत मनोहर और हृदयस्पर्शी है। दोनों एक-दूसरे के लिए अपरिचित हैं। बच्चा कवि को एकटक देखता रहता है, उसकी उँगलियाँ पकड़े हुए है। बच्चे की निर्भीक और जिज्ञासु नज़रों से कवि इतना अभिभूत हो जाता है कि वह स्वयं अपनी नज़रें फेर लेता है, शायद यह सोचकर कि कहीं बच्चा निहारते-निहारते थक न जाए। जब कवि नज़र फेरता है, तो बच्चा उसे तिरछी नज़रों से देखता है और जैसे ही दोनों की आँखें फिर मिलती हैं, बच्चा अपनी दंतुरित (नन्हे दाँत दिखाती हुई) मुसकान बिखेर देता है। यह मुसकान कवि के लिए एक जादुई अनुभव बन जाती है। उसे लगता है जैसे उसकी झोंपड़ी में कमल खिल उठे हों और उसके नीरस जीवन में फिर से स्नेह और गृहस्थी के रंग भर गए हों।

Get UP Board Class 10 Hindi 6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल Solution in Hindi Medium

UP Board Class 10 Hindi 6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल Solution is available at our platform https://upboardSolution.com in hindi medium for free of cost. Content provided on our website is free of cost and in PDF format which is easily available for download. Getting the UP Board Solutions for Class 10 will help student to achieve good learning experience so that they can study effectively. UP board holds examination of more than 3 million students every year and majority of the question of exams are from their UP Board Solutions. That’s why it is important to study using the textSolution issued by UP Board.

Importance of UP Board Class 10 Hindi 6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल Text Solutions

It is essential to know the importance of UP Board Class 10 Hindi 6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल textSolution issued by UP Board because students completely rely on these Solutions for their study and syllabus offered by UP Board is so balanced that each student should be aware about the importance of it. Below is the list of Importance of UP Board Class 10 Hindi 6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल :

  • These TextSolutions are very clear and accurate which helps student to understand concept with ease.
  • It is also to mention that these text Solutions are prepared by the content experts of subject, thus these Solutions helps student in clearing their doubts and understand the core concept easily.
  • It is considered to be the best study material for competitive exam preparation.

Features of UP Board Class 10 textSolutions

There are various features of UP Board Class 10 TextSolutions, some of them are mentioned below so that you student can understand the value and usability of the contend and understand why Uttarpradesh board has prescribed these Solutions.

  • Best feature of these textSolutions is free availability of content in PDF format
  • Second feature that content generated and written is clear and easy to read.
  • There are various illustration and images are shown in the Solution so that student can easily understand the concept and should be more appealing to the student.
  • Each chapter is explained thoroughly
Uttar Pradesh Solutions are very helpful and handy. Specially subjects like UP Board Class 10 Physics Part - II Solutions are very interesting to study.

Other Chapters of Class 10 Hindi
2. गुरदयाल सिह - सपनों के-से दिन
3. राही मासूम रजा- टोपी शुक्ला
1. माता का आँचल
2. जॉर्ज पंचम की नाक
3. साना-साना हाथ जोड़ि
4. एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!
5. मैं क्यों लिखता हूँ
1. सूरदास
2. तुलसीदास - राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
3. देव
4. जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य
5. सूर्यकांत त्रिपाठी निरला - उत्साह अट नहीं रही ह
6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल
7. गिरिज़ाकुमार माथुर - छाया मत छून
8. ऋतुराज - कन्यादान
9 मंगलेश डबराल - संगतकार
10. स्वयं प्रक़ाश - नेताजी का चश्मा
11. रामवृझ बेनीपुरी - बालगोबिन भगत
12. यशपाल लखनवी - अंदाज
13. सर्वेशवऱ दयाल सक़्सेऩा - मानवीय करुणा की दिव्य चमक
14. मन्नु भंड़ारी - एक कहानी यह भी
15. महवीर प्रसाद द्विवेदी - स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन
16. यतींद्र मिश्र - नौबतखाने में इबादत
17. भदंत आनंद कौसल्यायन - संस्कृति
1. कबीरः साख़ी
2. मीराः पद्य
3. बिहारीः दोहे
4. मैथिलीशरण ग़ुप्त- मनुष्यता
5. सुमित्रानंदऩ पंतः पर्वत प्रदेश मे प्रवास
6. महादेवी वर्मा
7. वीरेन ड़ंग़वालः तोप
9. रवींद्र नाथ ठाक़ुर - आत्मत्राण
10. प्रेमचंदः बड़े भाई साहब
11. सीताराम सेकसरिया डायरी का एक पन्ना
12. लीलाधर मंडलोई
13. प्रहलाद अग्रवाल
14. अंतोन चेखव
15. निदा फ़ाज़ली
16. रवींद्र केलेवर
17. हबीब तनवीर
1. वाड्मयं तपः
2. आज्ञा गुरूणां हि अविचारणीया
3. किं किम् उपादेयम्
4. नास्ति त्यागसमम् सुखम्
5. अभ्यासवशगं मनः
6. साधुवृत्ति समाचरेत्
7. रमणीया की सृष्टि - ऐषा
8. तिरुक्कुरल्-सूक्ति -सौरभम्
9. राट्रं संरषयमेव ही
10. सुस्वागत भो ! अरुणाचलेऽस्मिन्
11. कालोऽहम्
;