UP Board Class 10 Hindi 6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल is a Hindi Medium Solution which is prescribed by Uttar Pradesh Board for their students. These Solutions is completely prepared considering the latest syllabus and it covers every single topis, so that every student get organised and conceptual learning of the concepts. Class 10 Students of UP Board who have selected hindi medium as their study medium they can use these Hindi medium textSolutions to prepare themselves for exam and learn the concept with ease.
उत्तर:- बच्चे की दंतुरित (पहली बार दाँत निकलने वाली) मुसकान कवि के मन पर एक जादुई और गहरा प्रभाव डालती है। यह मुसकान इतनी मोहक और प्राणवान है कि कवि को लगता है मानो उसके आस-पास के कठोर बाँस और बबूल के पेड़ों से भी शेफालिका के सुगंधित फूल झरने लगे हों। यह मुसकान कवि के निराश और मृत-सी पड़ी भावनाओं में नया जीवन भर देती है। इसके प्रभाव से इतना अधिक प्रसन्न होकर, कवि कहता है कि जो संन्यासी (सांसारिक मोह त्याग चुका व्यक्ति) बन चुका था, वह फिर से गृहस्थ जीवन में लौट आया है। बच्चे की यह निश्छल हँसी उसके हृदय को पिघला देती है।
उत्तर:- बच्चे और बड़े व्यक्ति की मुसकान में मुख्य रूप से निम्नलिखित अंतर पाए जाते हैं:
1. निश्छलता बनाम कृत्रिमता: बच्चे की मुसकान पूरी तरह निश्छल, स्वाभाविक और बिना किसी लाग-लपेट के होती है। वहीं, बड़े व्यक्ति की मुसकान अक्सर एक खास उद्देश्य, समय या परिस्थिति के अनुसार होती है, जिसमें कृत्रिमता या दिखावा भी हो सकता है।
2. कारण: बच्चा बिना किसी खास कारण के, सहज भाव से मुस्कुरा सकता है। उसकी मुसकान का कोई उद्देश्य नहीं होता। इसके विपरीत, बड़ा व्यक्ति प्रायः किसी खुशी, व्यवहारकुशलता, या विशेष अवसर पर ही मुस्कुराता है।
3. प्रभाव: बच्चे की मासूम मुसकान देखकर हर किसी का हृदय पिघल जाता है, वह सबको आकर्षित करती है। बड़ों की मुसकान में आमतौर पर इतना गहरा और सर्वव्यापी आकर्षण नहीं होता।
उत्तर:- कवि नागार्जुन ने बच्चे की मुसकान के अद्भुत सौंदर्य को व्यक्त करने के लिए कई सुंदर और प्रभावशाली बिंबों (काव्यात्मक चित्रों) का प्रयोग किया है:
1. प्राणदायिनी शक्ति: "मृतक में भी डाल देगा जान।" – बच्चे की यह मुसकान मृत व्यक्ति में भी प्राण फूंकने की शक्ति रखती है।
2. कमल का फूल: "छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात।" – बच्चे की मुसकान ऐसी लगती है मानो कमल के फूल तालाब को छोड़कर कवि की साधारण झोंपड़ी में खिल उठे हों।
3. पत्थर का पिघलना: "पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण।" – इस मुसकान के सामने कठोर से कठोर पत्थर का हृदय भी पिघलकर जल बन सकता है।
4. शेफालिका के फूल: "झरने लग पड़े शेफालिका के फूल।" – बच्चे के स्पर्श मात्र से बाँस-बबूल जैसे कँटीले पेड़ों से भी शेफालिका के सुंदर फूल झरने लगते हैं।
5. तिरछी नज़र और स्नेह: जब बच्चा तिरछी नज़र से देखकर मुस्कुराता है और कवि से आँखें मिलती हैं, तो कवि को लगता है कि बच्चा उस पर अपना स्नेह लुटा रहा है।
उत्तर:- कवि के अनुसार, फसल केवल अनाज का ढेर नहीं है। यह प्रकृति और मनुष्य के श्रम का एक सुंदर और जीवंत मेल है। फसल पानी, मिट्टी, धूप, हवा और सबसे बढ़कर किसान के परिश्रम का संयुक्त परिणाम है। कोई भी एक तत्व अकेले फसल नहीं उगा सकता। यह सभी के सामूहिक योगदान से साकार होती है।
उत्तर:- इस कविता के अनुसार फसल उपजाने के लिए निम्नलिखित पाँच आवश्यक तत्वों का होना अनिवार्य है:
उत्तर:- 'हाथों के स्पर्श की गरिमा और महिमा' कहकर कवि किसान के श्रम के अतुल्य महत्व को रेखांकित करना चाहता है। भले ही फसल के लिए पानी, मिट्टी, धूप और हवा जैसे प्राकृतिक संसाधन ज़रूरी हैं, लेकिन बिना किसान के हाथों के स्पर्श, उसकी मेहनत और बुद्धिमत्ता के ये सभी संसाधन बेकार पड़े रह जाते हैं। किसान का परिश्रम ही है जो इन प्राकृतिक तत्वों को सही दिशा देकर फसल के रूप में ढालता है। इसलिए फसल में किसान के श्रम की गरिमा (मान-सम्मान) और महिमा (वैभव) समाई हुई है।
उत्तर:- इन पंक्तियों का भाव यह है कि फसल प्रकृति के विभिन्न तत्वों का साकार रूप है।
उत्तर:- मिट्टी का 'गुण-धर्म' उसकी वह विशेष प्रकृति और क्षमता है जो उसे दूसरी मिट्टी से अलग बनाती है। इसमें मिट्टी में मौजूद विभिन्न खनिज पदार्थ, जैविक तत्व, पोषक तत्व (जैसे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस), जल सोखने की क्षमता, और उसकी उर्वरा शक्ति (उपजाऊपन) शामिल हैं। यही गुण-धर्म तय करता है कि किसी खास जगह की मिट्टी में गेहूँ अच्छा होगा या धान, कपास होगा या गन्ना। फसल इसी गुण-धर्म का प्रतिफल है।
उत्तर:- वर्तमान की भागदौड़ भरी और उपभोगवादी जीवनशैली मिट्टी के गुण-धर्म को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही है:
उत्तर:- नहीं, यदि मिट्टी अपना गुण-धर्म (उपजाऊपन और पोषक तत्व) खो देती है, तो पृथ्वी पर किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना करना बहुत मुश्किल है। मिट्टी हमारे खाद्य श्रृंखला की आधारशिला है। यदि मिट्टी बंजर हो जाएगी तो फसलें पैदा नहीं होंगी। फसलें नहीं होंगी तो न तो मनुष्य, न पशु-पक्षी और न ही अन्य जीव जंतु भोजन के बिना जीवित रह पाएँगे। इस प्रकार, मिट्टी का उपजाऊ होना पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए अनिवार्य शर्त है।
उत्तर:- मिट्टी के गुण-धर्म को पोषित करने और बचाने में हम सभी की एक महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है:
उत्तर:- इस पंक्ति का भाव है कि बच्चे की मुसकान इतनी मनमोहक और सौंदर्यपूर्ण है कि उसे देखकर कवि को ऐसा आभास होता है मानो सुंदर कमल के फूलों (जलजात) ने अपना प्राकृतिक स्थान तालाब छोड़ दिया है और अब उसकी साधारण-सी झोंपड़ी में खिल रहे हैं। इसका आशय यह है कि बच्चे की मासूम हँसी ने कवि के साधारण और शायद उदास जीवन में अचानक अपार सुख, सौंदर्य और उल्लास भर दिया है।
उत्तर:- इस काव्यांश का भाव यह है कि बच्चे के स्पर्श में एक अद्भुत जादू है जो कठोर से कठोर हृदय को भी कोमल बना सकता है। बाँस और बबूल दोनों ही कँटीले और कठोर प्रकृति के पेड़ माने जाते हैं। कवि कहता है कि बच्चे के मासूम स्पर्श ने उसे (कवि को) इतना प्रभावित किया कि वह चाहे बाँस जितना सीधा-कठोर हो या बबूल जितना कँटीला, उससे भी शेफालिका के सुगंधित फूल झरने लगे। अर्थात, बच्चे के स्पर्श ने कवि के अंदर की सारी कठोरता, निराशा और रुखेपन को दूर कर दिया और उसमें प्रेम, कोमलता और आनंद के फूल खिला दिए।
उत्तर:- मुसकान और क्रोध दो विपरीत भाव हैं जो वातावरण को पूरी तरह बदल देते हैं।
मुसकान से बना वातावरण:
क्रोध से बना वातावरण:
उत्तर:- दंतुरित मुसकान से बच्चे की आयु लगभग 6 महीने से 1 वर्ष के बीच की अनुमानित की जा सकती है।
तर्क: 'दंतुरित' का अर्थ है पहली बार दाँत निकलना। शिशुओं के दूध के दाँत आमतौर पर 6 से 8 महीने की आयु के आसपास निकलना शुरू होते हैं। कविता में बच्चे की माँ उसे उँगलियों से 'मधुपर्क' (शहद चटा रही है) करा रही है, जो यह दर्शाता है कि बच्चा अब ठोस/अर्ध-ठोस पदार्थ चखने लायक हो गया है, जो कि दाँत निकलने के समय ही संभव हो पाता है। इसलिए, बच्चा लगभग एक साल का या उसके आसपास का प्रतीत होता है।
उत्तर:- कवि और बच्चे की मुलाकात का शब्द-चित्र अत्यंत मनोहर और हृदयस्पर्शी है। दोनों एक-दूसरे के लिए अपरिचित हैं। बच्चा कवि को एकटक देखता रहता है, उसकी उँगलियाँ पकड़े हुए है। बच्चे की निर्भीक और जिज्ञासु नज़रों से कवि इतना अभिभूत हो जाता है कि वह स्वयं अपनी नज़रें फेर लेता है, शायद यह सोचकर कि कहीं बच्चा निहारते-निहारते थक न जाए। जब कवि नज़र फेरता है, तो बच्चा उसे तिरछी नज़रों से देखता है और जैसे ही दोनों की आँखें फिर मिलती हैं, बच्चा अपनी दंतुरित (नन्हे दाँत दिखाती हुई) मुसकान बिखेर देता है। यह मुसकान कवि के लिए एक जादुई अनुभव बन जाती है। उसे लगता है जैसे उसकी झोंपड़ी में कमल खिल उठे हों और उसके नीरस जीवन में फिर से स्नेह और गृहस्थी के रंग भर गए हों।
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